अकबर के नवरत्न कौन थे ?

अगर आप इतिहास के बारे में कुछ जानते होंगे तो अकबर का नाम तो जरूर पढ़ें या सुने होंगे और आप यह भी पढ़ें होंगे की अकबर के पास नवरत्न थे अगर आप अकबर के पास सभी नवरत्नों का नाम नहीं जानते हैं तो आज हम आपको अकबर के नौ रत्नों के नाम क्या थे उनके काम के बारे में पूरी विस्तार से बताने वाला हूं ।

अकबर के नवरत्न का नाम क्या था ?

  • बीरबल
  • अबुल फजल
  • तानसेन
  • राजा टोडरमल
  • अब्दुल रहीम खानखाना
  • मानसेन 
  • मुल्लाह दो प्याजा
  •   फैजी
  • फकीर अजहरूद्दीन

अकबर के नवरत्न को याद करने का ट्रिक

Akabar 9ratn के  के बारे में पढ़ने से पहले इसे याद करने के ट्रिक के बारे में समझते हैं जिससे आपको अकबर के नवरत्नों के नाम आसानी से याद हो सके ‘

अकबर के नवरत्न का नाम याद करने का ट्रिक : BAT BAT पर MDH मसाला खाते हैं ।

  • B = भगवान दास
  • A = अब्दुल रहीम खाने खाना
  • T = टोडरमल
  • B = बीरबल
  • A = अबुल फजल
  • T = तानसेन
  • M = मानसिंह
  • D = मुल्ला दो प्याजा
  • H = हकीम हुक्काम

अकबर के नवरत्न के नाम 

बीरबल

नवरत्न  में सर्वाधिक प्रसिद्ध बीरबल का जन्म कालपी में 1528 ईसवी में ब्राह्मण वंश में हुआ था. बीरबल का बचपन का नाम महेश दास था यह अकबर के बहुत ही नजदीक था और यह अकबर का विदेश मंत्री था ।उसकी छवि अकबर के दरबार में एक कुशल वक्ता ,कहानीकार एवं कवि की थी अकबर ने उसकी योग्यता से प्रभावित होकर उसे ( बीरबल ) कविराज एवं राजा की उपाधि प्रदान की साथ ही 2000 का मनसब भी प्रदान किया|

बीरबल पहला एवं अंतिम हिंदू राजा था जिसने दीन ए इलाही धर्म को स्वीकार किया था |1583 ईसवी में बीरबल को न्याय विभाग का सर्वोच्च अधिकारी बनाया गया | 1586 ईसवी में यूसुफजाइयों के विद्रोह को दबाने के लिए गये बीरबल की हत्या कर दी गई |

अबुल फजल

सूफी शेख मुबारक के पुत्र अबुल फजल का जन्म 1550 ईसवी में हुआ था | इसका पूरा नाम अबुल फजल इब्न मुबारक था | उसने मुगल कालीन शिक्षा एवं साहित्य में अपना बहुमूल्य योगदान दिया है | वह अकबर का मुख्य सलाहकार व सचिव था . उसे इतिहास दर्शन एवं साहित्य पर पर्याप्त जानकारी थी|

अकबर के दिन ए इलाही धर्म का वह भी मुख्य पुरोहित था. उसने अकबरनामा एवं आईने अकबरी जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की थी | 1602 ईस्वी में ( सलीम ) जहांगीर के निर्देश पर दक्षिण से आगरा की ओर आ रहे अबुल फजल कि रास्ते में बुंदेला सरदार ने हत्या कर दी |यह अकबर के नवरत्न में इनका स्थान सबसे ऊपर है |

तानसेन

संगीत सम्राट तानसेन का जन्म ग्वालियर में हुआ था| उसके संगीत का प्रशंसक होने के नाते अकबर ने उसे अपने नौ रत्नों में शामिल किया था उन्होंने कई रागों का निर्माण किया था | उनके समय में ध्रुपद गायन शैली का विकास हुआ | अकबर ने तानसेन को कण्ठाभरणवाणीविलास की उपाधि से सम्मानित किया था |

तानसेन की प्रमुख कृतियां थी. मियां की टोडी , मियां कि मल्हार, मियां की सारंग, दरबारी कान्हाड़ा आदि की रचना की थी | ऐसा कहा जाता है कि तान सिंह बाद में इस्लाम धर्म को स्वीकार कर लिया था |

राजा टोडरमल

उत्तर प्रदेश के एक क्षत्रिय कुल में पैदा होने वाले टोडरमल ने अपने जीवन की शुरुआत शेरशाह सूरी के यहां नौकरी करके की थी | 1562 ईसवी में अकबर की सेवा में आने के बाद 1572 ईसवी में उसे गुजरात का दीवान बनाया गया और यह अकबर का वित्त मंत्री था तथा बाद में 15 से 82 ईसवी में वह प्रधानमंत्री बना|

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इन्होंने भूमि पैमाइश के लिए विश्व की प्रथम मापन प्रणाली तैयार की थी | दीवान ए अशरफ के पद पर कार्य करते हुए टोडरमल की भूमि के संबंध में जो सुधार किए वह निसंदेह प्रशंसनीय है . टोडरमल ने एक सैनिक एवं सेनानायक के रूप में भी कार्य किया 1589 ईसवी में टोडरमल की मृत्यु हो गई |

मानसिंह

मानसिंह राजा भगवानदास के पुत्र थे| हल्दीघाटी का युद्ध मुगल बादशाह अकबर और महाराणा प्रताप के बीच 18 जून को लड़ा गया था उसमें मान सिंह एवं आसफ खां के नेतृत्व में मुगल सेना का नेतृत्व हुआ ।यह मुगल सेना का सर्वोच्च सेनापति था मानसेन से संबंध होने के बाद अकबर ने हिंदुओं के साथ उदारता का व्यवहार करते हुए जजिया कर को समाप्त कर दिया|

अब्दुल रहीम खानखाना

बैरम खान का पुत्र अब्दुल रहीम कोटि का विद्वान एवं कवि था| उसने तुर्की में लिखे बाबरनामा का फारसी भाषा में अनुवाद किया था | जहांगीर अब्दुल रहीम के व्यक्तित्व से सर्वाधिक प्रभावित था. जो उसका गुरु भी था|  रहीम को अकबर ने खानखाना की उपाधि से सम्मानित किया था और यह अकबर का डिफेंस मिनिस्टर था |

मुल्लाह दो प्याजा

अरब का रहने वाला प्याजा हुमायूं के समय में भारत आया था | अकबर के नौ रत्नों में उसका भी स्थान था | भोजन में उसे दो प्याज अधिक पसंद था | इसलिए अकबर ने उसे दो प्याजा की उपाधि प्रदान की थी | इसका नाम अब्दुल मोनिन था ।यह अकबर का गृह मंत्री था |

फकीर अजीजुद्दीन

यह एक सूफी फकीर थे और यह अकबर के प्रमुख सलाहकार में से एक थे | यह अकबर के निजी चिकित्सक के रूप में काम करता था |

फैजी

अबुल फजल का बड़ा भाई फैजी अकबर के दरबार में राज्य कवि के पद पर आसीन था और इसे अकबर के बेटे को पढ़ाने के लिए नियुक्त किया गया था | यह दीन ए इलाही धर्म का कट्टर समर्थक था | 1595 ईसवी में उसकी मृत्यु हो गई |

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अकबर के नवरत्न से सम्बंधित FAQ

1. अकबर की कितनी पत्नियां थीं?

अकबर की कुल 7 पत्नियाँ थी यह सातों रानियाँ अपने आप मे खास थी

2. अकबर को किसने मारा था?

अकबर को राजपूत शासक महाराणा प्रताप ने मारा था

3. अकबर के कितने बेटे थे ?

अकबर के कुल 5 बेटे थे जिनमे से तीन सबसे महत्वपूर्ण थे

4. अकबर के दरबारी कवि कौन था ?

अकबर का दरबारी कवि का नाम अब्दुल रहीम खान था |

दोस्तों उम्मीद करता हूं कि आप इस आर्टिकल के माध्यम से अकबर के नवरत्नों के बारे में पूरी विस्तार से जानें होंगे साथ ही अकबर के नवरत्न को याद करने के ट्रिक के बारे में भी जाने होंगे तो अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो आप हमें कमेंट जरूर करें ।

3 thoughts on “अकबर के नवरत्न कौन थे ?”

  1. अकबर के नवरत्न का नाम क्या था ?
    बीरबल
    अबुल फजल
    तानसेन
    राजा टोडरमल
    अब्दुल रहीम खानखाना
    मानसेन
    मुल्लाह दो प्याजा
    फैजी
    फकीर अजहरूद्दीन

    ऊपर दिए गए नवरत्नों में “भगवान दास” का नाम क्यों नही है।

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