artificial intelligence ( आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस )in hindi

हाल ही में नीति आयोग ने भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों पर राष्ट्रीय रणनीति का निर्माण करने के लिए श्वेत पत्र जारी किया  | इसमें पांच ऐसे क्षेत्रों की पहचान की गई है .जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रयोग से समाज को लाभ मिल सकता है . आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग को बढ़ावा देने के लिए नीति आयोग का गूगल के साथ एक समझौता हुआ है |

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या है ?

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अंतर्गत मशीनों में मानव जैसी बौद्धिक क्षमता विकसित करने का प्रयास किया जाता है ताकि मशीनें परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय ले सके तथा बिना मानवीय आदेश में कार्य कर सकें ।जब कोई मशीन या उपकरण परिस्थितियों के अनुकूल सीख कर समस्याओं को हल करता है .तो यह एआई ( AI ) के दायरे में आता है । ( AI ) रोबोटिक्स सिस्टम के द्वारा काम करता है |आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ( AI ) की शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी |

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के स्थापना जॉन मैंकार्थी ने की थी । जापान ने सबसे पहले 1981 में फिफ्थ जनरेशन नाम की योजना की शुरुआत की थी ।इसमें सुपर कंप्यूटर के विकास के लिए 10 वर्षीय कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की गई थी . ब्रिटेन ने इसके लिए एल बी नाम का प्रोजेक्ट बनाया है । इसके बाद अन्य देशों ने भी इस ओर ध्यान दिया ।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं इसका प्रयोग

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ( AI ) का अर्थ है कृत्रिम तौर पर विकसित की गई बौद्धिक क्षमता, इसे सामान्य रूप से ( AI )  के नाम से भी जानते हैं जिसे कंप्यूटर साइंस का सबसे उन्नत रूप माना जाता है |

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को विभिन्न प्रकारों में बांटा गया है

एल्गोरिथम :    कंप्यूटर से इसमें प्रोग्राम या एल्गोरिथम के सहायता से दिए गए कामों को करते हैं इसका प्रयोग डाटा प्रोसेसिंग, कैलकुलेशन और खुद से हल होने वाले रिजनिंग के लिए किया जाता है |

मशीन लर्निंग :  जिसे डीप लर्निंग भी कहते हैं इसमें कंप्यूटर पूरी तरह प्रोग्राम नहीं किए जाते बल्कि वे उदाहरणों से सीख कर काम करते हैं |

नैरो AI  :  इसे कमजोर आर्टिफिशियल के नाम से भी जाना जाता है. नेहरू एआई के पास स्वयं का इंटेलिजेंस नहीं होता और यह अपने आप कुछ नहीं सोच सकता |

जनरल ( AI )  : इसे स्ट्रांग एआई के नाम से भी जाना जाता है | इसमें सिस्टम को संज्ञानात्मक ज्ञान की क्षमताओं को विकसित करने के लिए प्रोग्राम किया जाता है |

ब्रॉड :  यह एक सॉफ्टवेयर है जिसे खुद से होने वाले कार्यों को करने के लिए डिजाइन किया जाता है | इसकी मदद से मानव द्वारा खुद से किए जाने वाले काम जैसे कैलेंडर में किसी मीटिंग को नोट करना या डिनर के लिए टेबल बुक कराना आदि काम कराए जा सकते हैं |

हमारा जीवन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अलग-अलग रूपों में मौजूद रहती है |

इसका सबसे सामान्य उदाहरण है |

स्मार्टफोन

स्मार्ट फोन में हमारे फिंगरप्रिंट से पहचानने से लेकर के किसी आपका सुझाव या शब्दों को और अँटो कनेक्ट करने तक के सारे काम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हि करती है ‘

गूगल सर्च 

जिसके बिना जिंदगी जीने की कल्पना भी नहीं की जा सकती | इसमें भी ( AI ) का प्रयोग किया जाता है | इसके अलावा गूगल असिस्टेंट ,एलेक्सा इसके उदाहरण है  |जो वर्चुअल पर्सनल असिस्टेंट कहलाते हैं | यह हमारी आवाज को पहचान कर उसके अनुसार काम करते हैं | यह किसी बात को समझने और उसका जवाब देने के लिए एल्गोरिथम एवं साउंड रिकॉग्निशन का प्रयोग करते हैं  |

रोबोट भी( AI ) के कुछ ऐसे उदाहरण है | जिनका प्रयोग हमारे दैनिक जीवन में नहीं होता रोबोटिक्स भी एक उभरता हुआ क्षेत्र है | जिसमें रोबोट को कमांड करने के लिए एआई का प्रयोग किया जाता है  | कुछ समय पहले सोफिया नामक रोबोट किसी देश की नागरिकता हासिल करने वाली दुनिया की पहली रोबोट बनी थी | सोफिया अपने इंटेलिजेंस के आधार पर किसी से बातचीत करने के अलावा मनुष्य की तरह सभी काम कर सकती हैं और अपने खुद के विचार रख सकती है |

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास की संभावनाएं

आजकल विभिन्न क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रयोग की संभावना तलाशी जाने जाने लगी है | एयर ट्रेफिक कंट्रोल किसी कॉम्प्लिकेटेड सिस्टम को चलाने और फार्मास्यूटिकल्स से लेकर ( स्पेस )अंतरिक्ष तक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रयोग किया जा रहा है |

.एआई का इस्तेमाल ऐसे आयोजनों या समारोह की सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी किया जा सकता है जहां बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं |

AI  की मदद से कुंभ मेला ,हज यात्रा या फुटबॉल मैचों में कोई भी गतिविधियों या अप्रत्याशित भीड़ का 85 फ़ीसदी तक सटीक अंदाजा लगाया जा सकता है | 2016 के उज्जैन कुंभ मेले में आई से मिले डाटा का विश्लेषण कर श्रद्धालुओं के भीर को मैनेज किया गया था |

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
artificial robot

( AI ) या मशीन लर्निंग, बैंकिंग इंडस्ट्री के विभिन्न कार्यों को करने के लिए बैंकों को सक्षम बनाते हैं | इससे भी दो कदम आगे बढ़कर इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी की मदद से देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लीडरशिप को विकसित किया जा रहा है | इसे उस स्तर तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है जिससे भारत दुनिया की 40 फ़ीसदी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सर्विस प्रोवाइडर बन सके | ऐसे देश में बिजनेस करने का तरीका और माहौल पूरी तरह से बदल जाएगा |

भारत में ( AI ) के विकास में सरकारी पहल

सरकार द्वारा ( AI ) डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग बिग डाटा इंटेलिजेंस रियल टाइम डाटा और क्वांटम कम्युनिकेशन के क्षेत्र में शोध प्रशिक्षण एवं कौशल विकास की योजना बनाई गई है |

नीति आयोग एवं गूगल के बीच समझौते के तहत इंडियन स्टार्टअप के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किया गया है | इस समझौते के तहत नीति आयोग ने ( AI ) जैसी फ्यूचर टेक्नोलॉजी में डिस्चार्ज और डेवलपमेंट को लेकर पूरे देश में एक राष्ट्रीय रणनीति का प्रारूप तैयार किया है | ( AI ) रिसर्च इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए भारतीय रिसर्च और यूनिवर्सिटी को वित्तीय मदद भी दी जाएगी |

भारत ने ( AI ) की रिसर्च संबंधी जरूरतों को पूरा करने और इसके व्यवसाई महत्व को देखते हुए नीति आयोग ने एक द्वस्तरीय संरचना का प्रस्ताव भी दिया है

  •  ( Core )    सेंटर ऑफ़ रिसर्च एक्सीलेंसी
  • ( ICT AI )  इंटरनेशनल सेंटर ऑफ ट्रांसफॉर्मशनल A l

एआई रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए मुंबई में देश के पहले आई रिसर्च बधवानी Al की स्थापना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई है

भारत में artificial intelligence ( AI ) को अपनाने से संबंधित चुनौतियां

  • देश में डाटा सिस्टम का पर्याप्त विकास ना होना
  • ( AI ) को लेकर रिसर्च का अभाव |
  •   भारत में मौलिक प्रौद्योगिकियों की कोर रिसर्च की रफ्तार बहुत धीमी है |
  • भारत में ( AI ) संबंधित विशेषज्ञता ,श्रम शक्ति और कौशल संबंधी अवसरों की कमी है |
  • विभिन्न व्यवसायिक प्रक्रियाओं में( AI ) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाने संबंधित जागरूकता में भी कमी देखी जाती है |
  •   सुरक्षा या रेगुलेशन भी ( AI ) को अपनाने में बाधक बन रहे हैं |
  • भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्रों के विभिन्न हित धारकों के बीच सहयोग की कमी एवं डाटा की गोपनीयता और सुरक्षा की स्थिति बेहतर नहीं कही जा सकती |

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की स्थिति

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र में अकादमिक निवेश के मामले में भारत यूएसए एवं चीन से काफी पीछे है | विश्व भर में ( AI )के महत्व को देखते हुए केंद्र सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ,मशीन लर्निंग ,इंटरनेट ऑफ थिंग्स ,3D प्रिंटिंग और ब्लॉकचेन जैसे 5वी पीडी प्रौद्योगिकियों के विकास को बढ़ावा दे रही है |

भारत में ( AI ). मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स को बढ़ावा देने के लिए इस वर्ष के बजट में 480 million-dollar आवंटित किए गए हैं |

artificial intelligence ( AI ) संबंधित नैतिकता एवं विनियमन

वर्तमान में भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र को नियंत्रित करने वाला कोई डिफरेंस रेगुलेशन कानून नहीं है | हालांकि भारत इस क्षेत्र में तेजी से विकास कर रहा है लेकिन वैज्ञानिकों को इस तकनीक की पूरी क्षमता और उपयोग को खोजना बाकी है  |कुछ स्वतंत्र निकाय रिसर्च के उद्देश्य से एवं इंटेलिजेंस बिहेवियर की सोच को मौलिकता प्रदान करने वाली मशीन निर्माण पर कार्य कर रहे हैं |

2009 में स्थापित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एसोसिएशन ऑफ इंडिया ( AIE )ऐसा ही एक संगठन है | यह एक गैर-लाभकारी वैज्ञानिक सोसाइटी है. सेंटरफॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स ने एक नेटवर्क ट्रेफिक एनालिसिस सॉफ्टवेयर विकसित किया है | इस सॉफ्टवेयर की खासियत यह है यह विशेष फिल्टर्स के जरिए इंटरनेट ट्रैफिक को रोक कर उसका विश्लेषण कर सकता है |

सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स डीआरडीओ की एक शाखा है | यह सिस्टम ह्यूमन एअर के कारण खराब हो सकते हैं जैसा कि ड्राइवरलेस कार टेस्ला के साथ हुआ था |

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में प्रयोग की जाने वाली तकनीकी शब्द

डाटा इकोसिस्टम  : यह बुनियादी ढांचे, डाटा एनालिसिस एवं एप्लीकेशन का संग्रह होता है जिनका प्रयोग डाटा को कैप्चर कर उनका विश्लेषण करने के लिए किया जाता है |

एल्गोरिथम : मैथमेटिक्स एवं कंप्यूटर साइंस समस्याओं को एक वर्ग को हल करने के लिए दिए जाने वाले दिशा निर्देश है|

नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग : एनएलपी  यह ( AI ) का ही एक भाग है जो कंप्यूटर को ह्यूमन लैंग्वेज समझाने एवं विश्लेषण करने में सक्षम बनाता है |

इंटरनेट ऑफ थिंग्स  : यह सामान्य रूप से इंटरनेट का नेटवर्क है जो उन वस्तुओं को आपस में जोड़ता है जो डाटा को कलेक्ट या एक्सचेंज करने में सक्षम होते हैं इसके 2 मुख्य भाग होते हैं

  •   इंटरनेट  :जो कि कनेक्टिविटी का आधार है
  •   थिंग्स : जिसके तहत वस्तुएं या डिवाइस आती है |

पूरी प्रणाली कंप्यूटर मेकेनिकल और डिजिटल मशीन और वस्तुओं से मिलकर बनी होती है | इसमें इंटरनेट ऑफ थिंग्स उपकरणों को यूनीक आईडेंटिफायर प्रदान किया जाता है | उदाहरण के तौर पर AC और मोबाइल को इंटरनेट से जोड़कर एसी को मोबाइल के द्वारा घर से बाहर आकर भी नियंत्रित कर सकते हैं यही है इंटरनेट ऑफ थिंग्स कहते हैं |

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से फायदे

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता से हम गरीबी और बीमारी को खत्म करने का लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं |
  • मशीनों द्वारा किए जाने वाले कार्यों की गुणवत्ता एवं दक्षता में और सुधार किया जा सकता है ।
  • समुद्र तल की गहराई में खनिज पेट्रोल और इंधन की खोज का काम गहरी खानों में खुदाई का काम इत्यादि आसानी से कर पाएंगे ।
  • कृत्रिम बुद्धिमता का इस्तेमाल चिकित्सा क्षेत्र में दवाओं के साइड इफेक्ट ऑपरेशन एक्सरे बीमारी का पता लगाने जांच रेडियो सर्जरी जैसे कामों में किया जा सकता है |
  • जीपीएस तकनीक का इस्तेमाल करके हम किसी भी स्थान पर आसानी से पहुंच सकते हैं इस तकनीक में कृत्रिम बुद्धिमता का इस्तेमाल किया जाता है |
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कैंसर के इलाज जलवायु परिवर्तन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में भी किया जा सकता है

कृत्रिम बुद्धिमत्ता ( AI )से नुकसान

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बड़े पैमाने पर बेरोजगारी फैल सकती है |
  • फैक्ट्री कारखानों बैंकों में इसका व्यापक इस्तेमाल करने से हजारों लोगों की नौकरी छीन सकती है |
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता संयुक्त मशीन लगाना बहुत महंगा साबित होता है खराब हो जाने पर इसको ठीक करना भी आसान नहीं होता है इसका रखरखाव भी बहुत खर्चीला होता है |
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर अत्यधिक निर्भरता मनुष्य की रचनात्मक शक्ति को समाप्त कर सकती है |
  • साथ ही मनुष्य में आलस्य की प्रवृत्ति को बढ़ा भी सकती है जिससे स्वास्थ्य एवं मनोविकार संबंधी चिंताएं पैदा हो सकती है |
  • इस बात की बहुत संभावना है कि मानव की मदद से मशीनें स्वचालित हथियार बना डाले जो खुद ही समूची मानव जाति के नाश कर दे |
  • ऐसा होने पर कुछ लोग संपूर्ण मानव आबादी पर शासन कर सकते हैं शोषण कर सकते हैं |
  • इस तकनीक से युक्त मशीनें अपने फील्ड प्रोग्राम के अनुसार ही काम करती है मशीनों के अंदर कोई भावना या नैतिक मूल्य नहीं होता वह सही या गलत काम में फर्क नहीं कर पाती है |
  • वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि भविष्य में ऐसे रोबोट भी विकसित कर लिए जाएंगे जो सही गलत उचित अनुचित का निर्णय लेने में सक्षम होने के साथ मानवीय संवेदना से भी युक्त होंगे |
  • 2017 में फेसबुक कंपनी ने दो रोबोट को आपसी वार्ता के लिए एक कमरे में बैठाया किंतु कुछ ही समय बाद दोनों स्वयं की एक ऐसी मौलिक भाषा विकसित कर ली जिसे समझने में वैज्ञानिक सक्षम नहीं थे |
  • जिस तरह मनुष्य नए कामों को करने पर नए अनुभव प्राप्त करता है और अगली बार उसी काम को बेहतर तरीके से करता है लेकिन AI ) तकनीक ऐसा नहीं कर पाती है वह अपने सॉफ्टवेयर के अनुसार ही काम करती है |

निष्कर्ष

हाल के वर्षों में ( AI )प्रौद्योगिकी के विकास में तेजी आई है. इसका कारण है तकनीकी प्लेटफार्म एवं उपकरणों तक आसान पहुंच | बड़े डटा सेट की उपलब्धता एवं वृत्त परिवहन तथा स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्रों में मौजूद आकर्षक व्यवसाय अवसर लेकिन गरीबी में कमी लाने और खराब स्वास्थ्य देखभाल जैसे सामाजिक समस्याओं पर पर्याप्त रूप से ध्यान नहीं दिया गया है | ऐसे में AI ) रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए भारतीय AI ) इंडस्ट्री यूनिवर्सिटी एवं एकेडमी या तथा सरकार के बीच सहयोग जरूरी महसूस होता है |

  • अभी तक यह तकनीक अपने विकास के प्रारंभिक दौर से है जिसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों परिणाम हो सकते हैं वैज्ञानिकों को या दृष्टिकोण ध्यान में रखना चाहिए कि मशीन मनुष्य के लिए है ना कि मनुष्य मशीन के लिए |
  • मशीन का कितना भी उन्नत स्वरूप विकसित कर लिया जाए किंतु मानवीय संवेदना ओं भावनाओं अच्छे बुरी का भेदभाव इत्यादि गुणों का स्थान कभी नहीं ले सकती है |
  • AI ) आधारित प्रयोगों पर अंकुश नहीं लगाना चाहिए लेकिन AI ) के विकास और उपयोग के विभिन्न स्तरों की निगरानी और विनियमन की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए |
  • आज AI ) को पिछली तकनीकी क्रांतियों की तरह देखे जाने की जरूरत है जिन्होंने अपने समय में उच्च स्तर की नौकरियां पैदा की थी |
  • भारत में AI ) की क्षमता को समझने के साथ इसे रक्षा खेल बुनियादी ढांचे इत्यादि क्षेत्रों में विवेकपूर्ण तरीके से लागू करने की जरूरत है |
  • यही के क्षेत्र में मार्गदर्शक की भूमिका निभाने के लिए भारत को चाहिए कि राष्ट्रीय रणनीति पर आधारित कार्यक्रम की शुरुआत करें ।

 

 

 

 

 

 

 

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