इटली का एकीकरण

इटली का एकीकरण ( Unification of Italy )

इटली का एकीकरण : 19 वीं सदी में इटली में एक राजनैतिक और सामाजिक अभियान था । जो छोटे -छोटे देशो को मिलाकर इटली का निर्माण किया गया था | यह 1815 में इटली पर नेपोलियन बोनापार्ट के राज के अंत के बाद वियना सम्मलेन के साथ आरम्भ हुआ और 1870 में राजा वित्तोरियो इमानुएले की सेनाओं द्वारा रोम पर कब्जा होने तक चला । कुछ क्षेत्र प्रथम विश्वयुद्ध के बाद ही इटली का हिस्सा बने । प्राचीन काल में यह  रोमन साम्राज्य का केंद्र और गौरवपूर्ण इतिहास रहा |

इटली का एकीकरण में बाधाएँ ( Obstacles in Unification )

भौगोलिक कारण : इटली के मध्य में रोम में पोप का साम्राज्य था , जो इटली को उत्तर और दक्षिणी राज्यों में  दो भागों में बांटता था , और यहां पर सामाजिक – आर्थिक विषमता मौजूद थी ।

पोप का राज्य : रोम में स्थित पोप ईसाई धर्म का प्रमुख होता था , इस राज्य की सुरक्षा फ्रांस की सेना करती थी । रोम के विरुद्ध सैन्य अभियान का अर्थ यूरोप से शत्रुता थी ।

इटली के क्षेत्रों पर विदेशी प्रभुत्व : वेनेशिया एवं लोम्बार्डी पर आस्ट्रिया का प्रभुत्व था  , मध्य इटली के राज्य ( परमा , मेडोना , टस्कनी ) के शासक आस्ट्रिया के राजवंश से संबन्धित थे ,इसके अलावा नेपल्स एवं सिसली में फ्रांस के बूर्बो वंश का शासन था ।

भू-स्वामी वर्ग के विशेषाधिकार : एकीकरण से भू स्वामियों की शक्ति कम होती गई , इसी कारण वे एकीकरण के विरोधी थे ।

 

विचारधारात्मक / रणनीतिक द्वंद्व : मेजिनी गणतन्त्र का समर्थक था , कावूर राजतंत्र का समर्थक था जबकि जियोबर्टी पोप के नेतृत्व में इटली राज्यों के संघ का समर्थक था । इन तीनों की अलग-अलग विचारधाराओं के कारण इटली में एकता नहीं बन पा रही थी जो इटली की विनाश के कारण बनी |

इटली का एकीकरण में सहायक तत्व

फ्रांस की क्रांति : नेपोलियन ने साम्राज्यवाद का विस्तार किया जिसमें वह आस्ट्रिया की पराजित किया एवं इटली में एक समान शासन व्यवस्था और कानून व्यवस्था लागू किया। आर्थिक प्रशासनिक एकीकरण इससे प्राप्त हुआ। नेपोलियन के विरुद्ध राष्ट्रवाद का उदय हो गया ।

कार्बोनरी संस्था : इटली के कोयला मजदूरों द्वारा 1810 ई . में गठन एक संस्था थी जो गुप्त क्रांतिकारी संस्था , राष्ट्रवाद का प्रसार एवं विदेशियों को भगाना उद्देश्य था ।

मेजिनी एवं यंग इटली : 1831 में मेजिनी द्वारा गठित किया इसका मुख्य उद्देश्य था.

  • आस्ट्रिया को इटली से बाहर निकालना ।क्योंकि ऑस्ट्रिया के राजवंश के अधी 

    न इसके बहुत सारे क्षेत्र थे |

  •  इटली का एकीकरण किया जाना और इटलीवासियों द्वारा किया जाए । जो इटली के लोग हैं उन्हीं के द्वारा इटली का एकीकरण किया जाना चाहिए | विदेशी शक्तियों की आवश्यकता नहीं है .
  • इटली में गणतत्र की स्थापना करना |

कोयला एवं लोहा की भूमिका : यहां कोयला और लोहा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध था इसीलिए औद्योगिकीकरण एवं रेलवे का विकास हुआ और रेलवे के विकास होने के कारण लोगों में आपसी संपर्क बढा और बहुत सारे देशों में राष्ट्रवाद की भावना का प्रसार शुरू होने लगा ।

बौद्धिकों की भूमिका : रासोटी , सिल्विया पेविक जैसे कवियों द्वारा राष्ट्रवाद का खूब प्रचार – प्रसार किया गया | जिससे लोगों में राष्ट्रवाद की भावना जागृत हुई ।

सांस्कृतिक एकता : एक समान भाषा बोली जाती थी जो इतवर्ली भाषा थी , धर्म भी एक समान था , रीति – रिवाज एवं प्राचीन गौरव भी एक समान थी । इससे भी लोगो में राष्ट्रवाद की भावना जागृत हुई ।

एकीकरण की प्रक्रिया

कावूर का दृष्टिकोण = यथार्थवादी राजनीतिज्ञ था और वह मानता था कि बिना विदेशी सहायता के एकीकरण संभव नहीं है और वह विदेशी सहायता के लिए अवसर की तलाश कर रहा था एवं इसी बीच क्रीमिया के युद्ध में अवसर प्राप्त प्राप्त हुआ ।

क्रीमिया का युद्ध ( 1854-56 ) =  इस युद्ध में रूस ( पराजित ) हुआ एवं तुर्की के साथ (फ्रांस + इंग्लैण्ड + पीडमॉण्ट – सार्डीनिया की सेना ) का साथ मिला जिस कारण रूस युद्ध में हार गया ।

पेरिस सम्मेलन ( 1856 ) , फ्रांस एवं आस्ट्रिया के मध्य विल्लाफेंका की संधि ( 1859 ) , 1866 में वेनेशिया ( इटली ) का एकीकरण हुआ जर्मनी के साथ संधि हुई ।

 

प्लॉबियर्स की संधि ( 1858 ) – नेपोलियन- III ( फ्रांस ) ने आस्ट्रिया के विरुद्ध युद्ध में 2 लाख सैनिक देने का वचन दिया और बदले में फ्रांस को नीस और सेवाय का क्षेत्र दिया जाना तय हुआ ।

आस्ट्रिया के साथ युद्ध = पीडमॉण्ट की सेना फ्रांस के सहयोग से विजयी हुई और  लोम्बार्डी पर नियंत्रण कर लिया और यह एकीकरण की ठोस शुरुवात हुई ।

 

परमा , मेडोना एवं टस्कनी का विलय = लोम्बार्डी के विलय से राष्ट्रवाद की भावना जागृत हुई और इसके कारण जनविद्रोह हुआ | जन विद्रोह होने के कारण इसमें जनमत संग्रह कराके इटली में विलय कर लिया गया |

नेपल्स एवं सिसली का विलय = गैरीबाल्डी ने लाल कुर्ती सेवकों की सहायता से नेपल्स एवं सिसली पर कब्जा कर लिया और कब्जा करने के बाद वहां पर जनमत संग्रह करा के इसे भी इटली का भाग बना लिया गया |

वेनेशिया एवं रोम का विलय = पीडमॉण्ट के शासक विक्टर एमैनुएल ने प्रशा के सहयोग से अधिकार कर लिया और जनमत संग्रह के पश्चात इसे भी इटली में विलय कर लिया गया |

इटली का एकीकरण पूर्ण हुआ जब रोम को इटली की राजधानी बना दी गई और इसी संदर्भ में कहा जाता है की “ क्रीमिया के कीचड़ से इटली का जन्म हुआ ‘।

 

इटली को पांच भागों में विभाजित किया गया था .

 

1. लोम्बार्डी – प्लोबियर्स की संधि ( 1858 ) एवं ज्यूरीख की संधि 1859 हुई ।

2. परमा , मेडोना , टस्कनी के शासक एवं बोलोगना एवं रोमागना से पोप के प्रतिनिधियों को हटा दिया गया और वहां के लोगों ने जन विद्रोह किया तथा जनमत संग्रह कराने के बाद उसे भी इटली में शामिल कर लिया गया ।

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3. सिसली एवं नेपल्स का विलय =1860 मे गैरीबाल्डी एवं उसके लाल कुर्ती स्वयं सेवकों की मदद से नेपल्स और सिसली पर कब्जा कर लिया और कब्जा करने के बाद वहां विक्टर एमैनुएल द्वितीय को स्वयं को वहां का अधिनायक घोषित कर दिया फिर काबूर ने फिर से इटली में विलय करा लिया ।

4. वेनेशिया में सेडोवा का युद्ध 1866 मे युद्ध हुआ और जर्मनी के एकीकरण के समय प्रशा द्वारा आस्ट्रिया को हराया गया ।

5. रोम – सेडान का युद्ध 1870 इसी क्रम में प्रशा द्वारा फ्रांस की पराजय हुई जिसके कारण रोम पीडमांड को मिल गया । इसी के वजह से इटली का नया जन्म हुआ ।

विल्लाफ्रेंका का विश्वासघात 1859 

  • प्लोबियर्स की संधि ( 1858 ) – आस्ट्रिया के विरुद्ध फ्रांस की सहायता की और  लोम्बार्डी पर नियंत्रण प्राप्त हुआ |
  • विल्लाफ्रेंका की संधि ( 1859 ) – नेपोलियन- III एवं आस्ट्रिया के मध्य , फ्रांस ने स्वयं को युद्ध से अलग कर लिया गया | नेपोलियन- III को आस्ट्रिया के पक्ष में प्रशा के सैन्य सहयोग का भय था  |
  • अभी उस देश ने विजयोल्लास का प्याला होठों से लगाया ही था कि वह गिर कर चकना – चूर हो गया ।
  • विल्लाफ्रेंका के विश्वासघात ( 1859 ) से एकीकरण कि प्रक्रिया अवरुद्ध , मात्र लोम्बार्डी से संतोष , ।

दक्षिण से क्रांति कि शुरुवात

  • नेपल्स और सिसली – राष्ट्रीयता कि भावना , जनविद्रोह , गैरीबाल्डी ने अपने हजारों ‘ लाल कुर्ती स्वयं सेवकों के साथ पहुंचकर नेतृत्व किया , और अधिकार प्राप्त किया । फिर बाद में जनमत संग्रह करा कर इटली का हिस्सा बनाया गया ।
  • अधिक उत्साह में गैरीबाल्डी ने रोम एवं वेनेशिया पर अधिकार करने कि घोषणा की ,तो रोम में पोप के साम्राज्य की रक्षा फ्रांस के सैनिक करते थे एवं वेनेशिया पर आस्ट्रिया का अधिकार था और फ्रांस एवं आस्ट्रिया के युद्ध का खतरा था. इसी कारण कावूर ने कहा ‘ हमें इस पागल गैरीबाल्डी से इटली को  बचाना है ।
  • सेडोवा का युद्ध 1866 – प्रशा द्वारा आस्ट्रिया की पराजय ( जर्मनी के एकीकरण के क्रम में ) हुई , वेनेशिया पर पीडमॉण्ट का नियंत्रण स्थापित हो गया ।
  • सेडान का युद्ध 1870 – प्रशा द्वारा फ्रांस की पराजय हुई और फ्रांस के बाद रोम पर पीडमॉण्ट का नियंत्रण हो गया ।

एकीकरण का परिणाम

  • यूरोप में एक नए देश के रूप में इटली का उदय हुआ ‘
  • मेटरनिख की यूरोपीय व्यवस्था का पतन हो गया जो राष्ट्रवाद , जनतंत्र , संविधान का विरोध करती थी ।
  • इटली में संवैधानिक शासन एवं जनता की संप्रभुता स्वीकार की गई ।

 

इटली के एकीकरण में मेजिनी काबुर और गैरीबाल्डी के योगदान

मेजनी

मैजिनी साहित्यकार गणतांत्रिक विचारों का समर्थक और योग्य सेनापति था | मेजोनी संपूर्ण इटली का एकीकरण करके उसे एक गणराज्य बनाना चाहता था | जबकि सार्डिनीया पिडमौट शासक चार्ल्स अल्बर्ट अपने नेतृत्व में सभी प्रांतों का विलय चाहता था. उधर पॉप इटली को धर्मराज बनाने का पक्षधर था इस तरह विचारों के टकराव के कारण इटली के एकीकरण का मार्ग अवरुद्ध हो गया था |कालांतर में ऑस्ट्रिया द्वारा इटली के कुछ भागों पर आक्रमण किए जाने लगे जिससे सार्डिनीया के शासक चार्ल्स अल्बर्ट की पराजय हो गई | ऑस्ट्रेलिया के हस्तक्षेप से इटली में जनवादी आंदोलन को कुचल दिया गया इस प्रकार मैजिनी की पुनः हार हुई और वह पलायन कर गए |

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1848 इसवी तक इटली के एकीकरण के लिए किए गए प्रयास असफल रहे | परंतु धीरे-धीरे इटली में इन आंदोलन के कारण जन जागरूकता बढ़ रही थी और राष्ट्रीयता की भावना तीव्र हो रही थी | इटली में सार्जिनिया पिडमौत का नया  विक्टर एमैनुएल राष्ट्रवादी विचारधारा और उसके प्रयास से इटली के एकीकरण का कार्य जारी रहा अपनी नीति के क्रियान्वयन के लिए विक्टर इमैनुएल ने काउंट कावूर को प्रधानमंत्री नियुक्त किया|

काउण्ट काबुर

काबुल एक सफल कूटनीतिक एवं राष्ट्रीय वादी था वह इटली के एकीकरण में सबसे बड़ी बाधा ऑस्ट्रिया को मानता था 1953 से 1954 ई में क्रिमीयम युद्ध में काबूर ने फ्रांस की ओर से युद्ध में सम्मिलित होने की घोषणा कर ली और फ्रांस का राजनीतिक समर्थक हासिल किया | जोकि 18 से 62 ईसवी तक दक्षिणी इटली रोम तथा वर्ण सिया को छोड़कर बाकी रियासतों का विलय रोम में हो गया और सभी ने विक्टर एमैनुएल को शासक माना |

 

गैरीबाल्डी

गैरीबाल्डी सशस्त्र क्रांति के द्वारा दक्षिणी इटली के रियासतों के एकीकरण तथा गणतंत्र की स्थापना करने का प्रयास कर रहा था गैरीबाल्डी ने अपने कर्मचारियों स्वयं सेवकों की सशस्त्र सेना बनाई उसने अपने सैनिकों को लेकर इटली के प्रांत सिसली तथा नेपल्स पर आक्रमण किए | ‘इन रियासतों की अधिकांश जनता बुर्बो राजवंश के निरंकुश शासन से तंग होकर गैरीबाल्डी की समर्थक बन गई ।

गैरीबाल्डी ने यहां गणतंत्र की स्थापना की. तथा विक्टर एमैनुएल की प्रतिनिधि के रूप में वहां की सत्ता संभाली दक्षिणी इटली के जीते हुए क्षेत्र को बिना किसी संधि के गैरीबाल्डी ने विक्टर एमैनुएल को सौंप दिया |  उसने अपनी सारी संपत्ति राष्ट्र को समर्पित कर दी .जोकि 1829 ईसवी में इटली का एकीकरण में मेजिनी काबूर गैरीबाल्डी जैसे राष्ट्रवादी नेताओं के योगदान के कारण पूर्ण हुआ |

 

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