इलेक्ट्रिक वाहनों का भविष्य

हाल ही में नीति आयोग और रॉकी माउंटेन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने मिलकर इलेक्ट्रिक वाहनों का भविष्य पर एक रिपोर्ट जारी की है | Mobilizing  electric vehicle financing in India नाम से आई इस रिपोर्ट में भारत में इलेक्ट्रॉनिक वाहन को बढ़ावा देने पर खास विश्लेषण किया गया है | इस रिपोर्ट के मुताबिक इलेक्ट्रिक वाहनों चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी के लिए आगामी दशक में लगभग 19.7 लाख करोड़ के निवेश की जरूरत होगी  | रिपोर्ट के मुताबिक 2030 में इलेक्ट्रिक वाहनों की फाइनेंसिंग का मार्केट 50 बिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर जाएगा ।

भारत में इलेक्ट्रिक वाहन इको सिस्टम में मौजूद अड़चनों के बारे में भी रिपोर्ट में जानकारी दी गई है|  फाइनेंस इन तकनीकी लागत अवसंरचना के अनुपलब्धता और उपभोक्ताओं के व्यवहार को नीति आयोग ने इलेक्ट्रिक वही कॉल्स को अपनाए जाने में मुख्य बधाये माना है ।

इस तरह की चुनौतियों से निपटने के लिए रिपोर्ट में 10 समाधान ओं को की पहचान की गई है |

इस टूल किट में बैंक, गैर वित्तीय कंपनियों ,उद्योग, सरकार आदि को चुना गया है|  इलेक्ट्रिक वाहन की फेंसिंग के लिए प्रायरिटी सेक्टर लेंडिंग और ब्याज सहायता देने जैसी उपाय बताएं गई है | कुल मिलाकर यह डॉक्यूमेंट देश में इलेक्ट्रिक वहीकल को अपनाए जाने को लेकर ना कोई एक विजन सामने रखता है, बल्कि उसे पूरा करने का खाका भी पेश करता है जाहिर है आने वाले वक्त में देश के ट्रांसपोर्ट सिस्टम में इलेक्ट्रिक वही कर का दखल काफी बढ़ सकता है |

इलेक्ट्रिक व्हीकल क्या है और यह कितने प्रकार का होता है

इलेक्ट्रिक वही कल ऐसे वाहन जो अपने बैटरी या किसी बाहरी सोर्स की बिजली से चलते हैं ना कि जीवाश्म इन दोनों से |

इलेक्ट्रिक व्हीकल मुख्य रूप से 3 तरह के होते हैं

  • बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल  ( BEVs )
  • प्लग इन हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल ( PHEV )
  • हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल ( HEV )

बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल यह पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहन है जो केवल बैटरी चार्ज करने पर चलते हैं |

इसके अलावा इसमें कोई और इंजन उपयोग नहीं किया जाता है मोटरसाइकिल स्कूटर कार आदि बी बी एस इलेक्ट्रिक वाइकल के उदाहरण है

प्लग इन हाइब्रिड इलेक्ट्रिक बाइक ऑल या एक विशेष प्रकार के हाइब्रिड वाहन है जिसमें एक पेट्रोल या डीजल इंजन को एक इलेक्ट्रॉनिक मोटर और एक बड़ी बैटरी से जोड़ा जाता है

इन्हें इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन पर प्लग की मदद से चार्ज किया जाता है | इस तरह के वाहन आमतौर पर दो मोड में चल सकते हैं|

  • ऑल इलेक्ट्रिक    जिसमें बैटरी और मोहन मोटर वाहन को ऊर्जा देते हैं
  •  हाइब्रिड  मोड   जिसमें बिजली और पेट्रोल या डीजल इंजन दोनों काम करते हैं |

हालांकि इस तरह की वाहनों की कीमत काफी ज्यादा रहती है | ऐसे वाहनों के उदाहरण में बस, ट्रेन ,कार, स्कूटर और मिलिट्री व्हीकल आदि को शामिल किया जाता है |

हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल :  यह बिजली और पेट्रोल डीजल की मदद से चलते हैं इस में लगी बैटरी को किसी एक्सटर्नल सोर्स की मदद से चार्ज नहीं किया जा सकता है |

इसमें लगी बैटरी कार की ब्रेकिंग सिस्टम द्वारा रिचार्ज होती रहती है जिसे रीजेनरेटिव ब्रेकिंग तकनीक भी कहा जाता है | हाइब्रिड वाहनों के पास दो श्रोत उपलब्ध है एक बैटरी जोकि इलेक्ट्रिक मोटर को उर्जा प्रदान करती है और दूसरा है ईंधन टैंक जो एक सामान्य पेट्रोल इंजन को गति देता है | आमतौर पर एक सामान्य बैटरी कीसी इलेक्ट्रिक मोटर को केवल 7 से 70 किलोमीटर तक की गति प्रदान कर सकता है | अगर बैटरी खत्म हो जाती है तो उसके बाद हाइब्रिड कार पेट्रोल या डीजल इंजन पर स्विच हो जाती है | इसके बाद या किसी अन्य सामान इंजन कार की तरह कार्य करने लगती है |

इसे भी पढ़े :  बाल विवाह एक महामारी  एवं भारत में इसकी स्थिति

लेकिन इलेक्ट्रिक व्हीकल की बैटरी डाउन हो जाती है तो इनके इंजन का कोई बैकअप सोर्स नहीं होता है इलेक्ट्रिक वाहनों के फायदे देखते हुए इसे ट्रांसपोर्ट सिस्टम का भविष्य माना जा रहा है |

  इलेक्ट्रिक व्हीकल और फ्यूल सेल वही कल में क्या अंतर है |

इलेक्ट्रिकव्हीकल का सबसे ज्यादा फायदा पर्यावरण को होता है | क्योंकि यह वाहन किसी भी तरह का उत्सर्जन नहीं करते हैं  | इस रूप में यह इको फ्रेंडली व्हीकल कहलाते हैं क्योंकि यह व्हीकल फ्यूल पर नहीं चलते हैं इसीलिए इन वाहनों का जल्दी जल्दी मेंटेनेंस नहीं करना पड़ता है | साथ ही ऐसे व्हीकल किसी भी तरह का शोर पैदा नहीं करता है|

इलेक्ट्रिक व्हीकल को चार्ज करने के लिए उपयोग में लाई जाने वाली बिजली का कॉस्ट पेट्रोल की कीमत से कम से कम 25% तक कम हो सकती है | फिर इस व्हीकल को घर पर आसानी से चार्ज किया जा सकता है | इसके लिए चार्जिंग स्टेशन पर जाने के लिए अनिवार्यता नहीं होती है |

इलेक्ट्रि कव्हीकल और फ्यूलसेल इलेक्ट्रिक व्हीकल के बीच अंतर

फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल भी इलेक्ट्रिक मोटर से चलते हैं लेकिन बैटरी से चलने की वजह व्हीकल के अंदर ही फ्यूल सेल में इलेक्ट्रिसिटी जनरेट की जाती है | इन व्हीकल में इलेक्ट्रिक मोटर को चलाने के लिए हाइड्रोजन का इस्तेमाल किया जाता है| दरअसल फ्यूल सेल्स व्हीकल के गाड़ी में मौजूद फ्यूल सेल में स्टोर किए गए हाइड्रोजन और हवा से ऑक्सीजन लेकर विद्युत रासायनिक प्रक्रिया से इलेक्ट्रिसिटी बनती है |

इस प्रक्रिया में बायो प्रोडक्ट यानी उत्पाद के रूप में पानी निकलता है यद्यपि ACEVS  को इलेक्ट्रिक वाहन ही माना जाता है | लेकिन उनमें ईंधन भरने की प्रक्रिया और उनकी दूरी तय करने की क्षमता पारंपरिक कारों और ट्रकों के समान ही है | परंपरिक दहन आधारित तकनीक के विपरीत यह बेहद कम मात्रा में ग्रीन हाउस का उत्सर्जन करते हैं | और इनके द्वारा उत्सर्जित वायु से स्वास्थ्य को भी कोई नुकसान नहीं होता है अन्य बैटरी द्वारा संचालित वाहनों के विपरीत ACEVS को किसी चार्जिंग पॉइंट की जरूरत नहीं होती है |

इंधन के तौर पर हाइड्रोजन भरी होती है और एक बार पूरा टैंक भरने पर यह 300 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती है|  हालांकि  ACEVS किसी ऐसे गैस का उत्सर्जन नहीं करती है | जिससे ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा मिले लेकिन हाइड्रोजन के निर्माण में जीवाश्म ईंधन का उपयोग किया जाता है | जो कि परोक्ष रूप से ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को बढ़ावा देगा | फिर सुरक्षा के लिहाज से भी हाइड्रोजन को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं क्योंकि हाइड्रोजन पेट्रोल से भी ज्यादा ज्वलनशील होता है  |इसी कारण विस्फोट होने की संभावना जताई जाती है फिर भी यह पारंपरिक वाहनों के मुकाबले कई मायनों में बेहतर है |

इलेक्ट्रिक वाहनों का भविष्य
                     इलेक्ट्रिक वाहन

भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल की जरूरत क्यों है ?

इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए पहली जरूरत पर्यावरण से जुड़ी हुई है | भारत में लगातार प्रदूषण में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है | प्रदूषण का स्तर बढ़ना अब केवल शहरी क्षेत्रों के समस्या नहीं है | बल्कि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्र भी बढ़ते प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं |

2019 में( ICCT ) इंटरनेशनल काउंसिल फॉर क्लीन ट्रांसपोर्टेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में वाहनों का धुएं से होने वाले प्रदूषण की वजह से 2015 में लगभग 74000 लोगों की असामयिक मौत हुई थी | दुनिया की सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों की सूची में भारत के कई शहरों के नाम शामिल हैं |

ऐसे में इलेक्ट्रिक व्हीकल को प्रदूषण नियंत्रण के एक  उपाय के रूप में देखा जा रहा है | क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहन पारंपरिक वाहनों की तरह प्रदूषण नहीं करते हैं| इसी तरह इलेक्ट्रिक व्हीकल को जलवायु परिवर्तन से निपटने के एक माध्यम के तौर पर देखा जा रहा है|

दिसंबर 2019 में पर्यावरण थिंकटैंक जर्मन वॉच द्वारा जारी ग्लोबल क्लाइमेट सिक्स इंडेक्स 2020 के मुताबिक भारत में जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है | देश में जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव के कारण होने वाले जानमाल के नुकसान को देखते हुए जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल को प्राथमिकता देने की काफी जरूरत है |

इसके अलावा भारत में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी इलेक्ट्रिक वाहनों का भविष्य के लिए एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है | दरअसल ट्रांसपोर्ट के लिए इलेक्ट्रिक वाइकल को प्राथमिकता देकर ऊर्जा की कमी की चुनौती से निपटा जा सकता है| इससे भारत की अन्य देशों से तेल आयात  किए जाने की निर्भरता भी कम होगी | साथी ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों की ओर बढ़ने में मदद मिलेगी | इलेक्ट्रिक व्हीकलकी इसी महत्वता को देखते हुए भारत सरकार लगातार इन्हें बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है  |

 

इलेक्ट्रिक व्हीकल को भविष्य में बढ़ावा देने के लिए सरकार के प्रयास

भारत सरकार इलेक्ट्रिक वाहन विकास को बढ़ावा देने के लिए फेम (FAME) इंडिया योजना faster adoption and manufacturing of hybrid end EVS India hai को बढ़ावा दे रही है |

  •   पहला फेस 1 अप्रैल 2015 को लागू किया गया था |
  •  दूसरा फेस 1 अप्रैल 2019 से 3 साल के लिए लागू किया गया है |

इस स्कीम का मकसद इलेक्ट्रिक व्हीकल का विनिर्माण और उसके अधिकतम इस्तेमाल को बढ़ावा देना है | सरकार ने फेम इंडिया योजना के माध्यम से 2030 तक परिवहन क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों की भागीदारी को बढ़ाकर 30 फ़ीसदी करने का लक्ष्य रखा है  | केंद्र सरकार देश में एक अस्थाई इलेक्ट्रिक इको सिस्टम बनाने के लिए NEMMP National electronic mobility mission plan 2020 का संचालन कर रही है|

यह मिशन इलेक्ट्रिक वाहनों एवं उनके निर्माणों को अपनाने के लिए रोडमैप पेश करती है | इससे राष्ट्रीय सुरक्षा बढ़ाने और सस्ता और पर्यावरण अनुकूल अनुकूल परिवहन माध्यम उपलब्ध कराने वैश्विक विनिर्माण नेतृत्व प्राप्त करने और भारतीय मोटर वाहन उद्योग को सक्षम बनाने के लिए लाया गया है |

यूनियन पावर मिनिस्ट्री ने चार्जिंग प्वाइंट को बढ़ावा देने के लिए इन्हें सर्विस की कैटेगरी में शामिल कर दिया है | इन्हें स्थापित करने के लिए अब लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी | इसके अलावा चार्जिंग स्टेशन के लिए नियमों को भी सार्वजनिक कर दिया है |  जिससे कि इसमें एकरूपता आ सके|

इसके अलावा सरकार और कई तरह से आर्थिक प्रोत्साहन दे रही है बजट 2019 20 में इलेक्ट्रिक वाहनों के खरीदने के लिए 1.5 लाख रुपए तक की अतिरिक्त आयकर छूट देने की घोषणा की गई है | जिससे कि इसकी खरीद में बढ़ोतरी हो सके साथी इलेक्ट्रिक वाहनों पर लगने वाले जीएसटी की दरें घटाई गई है  |

इसके अलावा सरकार इसमें जन सहयोग भी मांग रही है | जिससे कि सभी महत्वपूर्ण आउटलेट पोर्टल मॉल ,थिएटर या अन्य ऐसी जगह पर चार्जिंग प्वाइंट बनाई जा सके |

इसके अलावा अगस्त 2020 में दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन अधिसूचना जारी की नीति में इलेक्ट्रिक वाहनों के द्वारा निजी चार पहिया वाहनों के बजाय दो पहिया वाहनों सार्वजनिक परिवहन एवं मालवाहक को को रिप्लेस करने पर जोर दिया गया है | इसमें इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सड़क कार्य में छूट सब्सिडी देने और कर्ज को बढ़ावा देने के उपाय बताए गए हैं  |

इस तरह अन्य राज भी अपने यहां इलेक्ट्रिक व्हीकलको बढ़ावा देने के लिए नीति ला सकते हैं लेकिन इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को अपनाने की राह में कई चुनौतियां भी नजर आती है |

इलेक्ट्रिक वाहनों का भविष्य में  चुनौतियों

  • शहरों में अभी भी इलेक्ट्रिक कार को चार्ज करने की सुविधाएं बहुत कम है |
  • इलेक्ट्रिक वाहनों में सबसे बड़ी समस्या बैटरी कि सीमित रेंज होना है यानी एक बार चार्ज करने पर अधिकतम दूरी तय करने की क्षमता सीमित होती है |
  •   पर्याप्त संख्या में चार्जिंग प्वाइंट्स का ना होना भी एक बड़ी समस्या है और देश में इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन बहुत कम है |जबकि इसके विपरीत पारंपरिक डीजल या पेट्रोल पंप बिलकुल आसानी से ही मिल जाते हैं |
  •   वाहनों की चार्जिंग में भी काफी वक्त लगता है |इन कमियों के चलते लोग इलेक्ट्रिक व्हीकल को अपनाने से जिजकते  हैं |
  •   इलेक्ट्रिक वाहनों की ऊंची लागत है यानी इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत ज्यादा है |
  • क्योंकि यह गाड़ियां पारंपरिक वाहनों के मुकाबले काफी ज्यादा महगी  होती है इसकी मुख्य वजह इलेक्ट्रिकल में लिथियम आयन बैटरी का इस्तेमाल किया जाता है |
  •   लिथियम का भंडार कुछ ही देशों में है, दुनिया में कुल ज्ञात लिथियम भंडार का अधिकतम हिस्सा बोलीविया अर्जेंटीना और चिली में है |
  •  कोबाल्ट भंडार का अधिकतम हिस्सा कांगो ऑस्ट्रेलिया और क्यूबा में है लेकिन इन धातुओं की कीमत ज्यादा और सप्लाई कम होने से इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में काफी इजाफा हुआ है |
  •   हम सड़कों पर चल रही गाड़ियों को इलेक्ट्रिक वाहन में तब्दील करना चाहे तो ऐसा करने के लिए दुनिया में पर्याप्त लिथियम और कोबाल्ट भंडार मौजूद नहीं है एक चुनौती जिन पर निर्भरता होने के लिए भी है |
  • यह ध्यान देने वाली बात है कि भारतीय कारों में 15 से 20% चीन से आयात किए गए कलपुर्जे का यूज किया जाता है जबकि भारत द्वारा इलेक्ट्रिक स्कूटर के लगभग 90% ऊर्जा का आयात चीन से किया जाता है ऐसे में इलेक्ट्रिक कारों और अन्य वाहनों के कारण चीन और भारत की निर्भरता 70% या इससे भी ज्यादा बढ़ सकती है |
  • स्थानीय बैटरी विनिर्माण इकाइयों की स्थापना में भी कई चुनौतियां हैं जैसे कि स्थानीय विनिर्माण इकाइयों के माध्यम से सब्सिडी प्राप्त आयातित बैटरी की कीमत से बराबरी कर पाना आसान नहीं होगा

आगे की राह

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का भविष्य काफी उम्मीदों भरा माना जा रहा है | इलेक्ट्रिक वाहनों का भविष्य में  पेट्रोल या डीजल पर हमारी निर्भरता को कम करने में मददगार हो सकता है | इससे बड़े पैमाने पर प्रदूषण को नियंत्रित करने के साथ जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी मदद कर सकती है | इलेक्ट्रिक व्हीकल परिवहन क्षेत्र का भविष्य बन सकता है | अगर इसके लिए किफायती और अगली पीढ़ी की बैटरी टेक्नोलॉजी डिवेलप करने पर ध्यान दिया जाए |

इलेक्ट्रिक वाहनों को ज्यादा से ज्यादा लोग अपनाएं तो हमें चार्जिंग और संरचना को बढ़ाने पर ध्यान देना होगा जिस तरह पारंपरिक वाहनों के लिए हर कुछ दूरी पर इंधन भरवाने के लिए सुविधा है |

उसी तरह से किफायती कीमतों पर इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग सुविधा मुहैया कराई जाए | इससे लोगों में इलेक्ट्रिक व्हीकल के प्रति आकर्षण बढ़ेगा इसके अलावा चार्जिंग  की समस्या से निपटने के लिए ऐसा ऐसा कोई सिस्टम डिवेलप किया जा सकता है जिससे बैटरी ट्रांसफर करना या एक्स्ट्रा बैटरी कैरी करना और स्विचिंग स्टेशन की स्थापना की जा सकती है |

कम समय में तेजी से चार्ज होने वाली बैटरीओ पर शोध और विकास करना जरूरी है |

 

 

comment here