जर्मनी का एकीकरण कब हुआ

जर्मनी का एकीकरण ( Unification of Germany ) :

 

मध्य यूरोप के स्वतंत्र राज्यों जैसे  ( प्रशा , बवेरिआ , सैक्सोनी आदि ) को आपस में मिलाकर 1871 में एक राष्ट्र – राज्य व जर्मन साम्राज्य का निर्माण किया गया । इसी ऐतिहासिक प्रक्रिया का नाम जर्मनी का एकीकरण है ।

इसके पहले यह भूभाग ( जर्मनी ) 39 राज्यों में बंटा हुआ था । इसमें से ऑस्ट्रियाई साम्राज्य तथा प्रशा राजतंत्र अपने आर्थिक तथा राजनीतिक महत्व के लिये प्रसिद्ध थे।

वियना कांग्रेस की विभेदकारी नीति ने  नेपोलियन के पतन के बाद आस्ट्रिया के नेतृत्व में 39 राज्यों का ढीला जर्मन संघ बना , मेटरनिख की यूरोपीय व्यवस्था लागू हुई जो राष्ट्रवाद , स्वतन्त्रता , संविधनवाद की विरोधी थी ।

चुंगी संघ का निर्माण 1819 ई  में जर्मनी को आर्थिक एकीकरण से राजनीतिक एकता प्रदान किया जो बाद में जर्मनी में एकता का कारण बनेगा l

जर्मनी का एकीकरण में बाधक तत्व

 

सामाजिक – आर्थिक विषमता : कुलीन , भू – स्वामी वर्ग  विरोध कर रहे थे क्योंकि इटली के एकीकरण से इनकी सत्ता छीनने की डर थी.

आस्ट्रिया एवं उसके प्रतिनिधि शासकों का विरोध भी एक बहुत बरा कारण था |

विदेशी प्रभुत्व : आस्ट्रिया , डेनमार्क एवं फ्रांस का प्रभुत्व था जो विरोध कर रहे थे |

 

फ्रांस की क्रान्तियों का प्रभाव 

नेपोलियन का साम्राज्यवादी विस्तार :  आस्ट्रिया को हराकर राइन संघ का निर्माण – एक समान राजनैतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था का निर्माण किया l

नेपोलियन की महाद्वीपीय व्यवस्था : ब्रिटेन से संबंध टूटा , फ्रांस मांग को पूरा करने में अक्षम था , कारखाना प्रणाली एवं नवीन पूंजीपति वर्ग का उदय हुआ |

फ्रांसीसी क्रांति के आदर्शों का संचार :  स्वतन्त्रता , समानता एवं बंधुत्व तथा राष्ट्रवाद का उदय हुआ |

इटली का एकीकरण – पीडमाण्ट के राजा विक्टर एमैनुएल एवं प्रधानमंत्री कावूर के नेतृत्व में प्रशा ( शासक विलियम प्रथम तथा चांसलर बिस्मार्क ) के नेतृत्व में एकीकरण का प्रयास , परंतु एकीकरण में कुछ समस्यायें थीं –

  1. आस्ट्रिया के प्रभुत्व से छुटकारा पाना ,
  2. जर्मन – राज्यों को प्रशा के नेतृत्व में संगठित करना ।

जोलवेरिन ( चुंगी संघ ‘ ) आर्थिक संघ : 1819 ई . में स्थापना , नेतृत्व प्रशा द्वारा , एक समान आर्थिक – व्यापारिक नीतियों का निर्माण

 

आर्थिक एकीकरण से राजनीतिक एकता का प्रयास

लोहा एवं कोयला की उपलब्धता : लोहा एवं कोयला की प्रचुर मात्र में उपलब्धता ने औद्योगिक विकास में सहयोग दिया एवं ।

रेलवे के विकास से भौगोलिक बाधाएँ दूर हुईं |

बौद्धिक विचारकों की भूमिका – हीगल , हर्डर , फिशे आदि विचारकों ने एकीकरण एवं राष्ट्रवाद को प्रेरित किया ।

हिगल – राज्य की सर्वोच्चता का सिद्धान्त |

बिस्मार्क का उदय ( Rise of Bismark) ऑटो एडवर्ड लियोपोल्ड बिस्मार्क का जन्म – 1815 ई . में ब्रेडनबर्ग के एक कुलीन परिवार में हुआ | शिक्षा – बर्लिन में , हुई थी ।

प्रतिनिधि – सभा का सदस्य – 1847 ई . ( जर्मन राज्यों की संसद में प्रशा का प्रतिनिधित्व )

1859 ई . में रूस में जर्मनी के राजदूत एवं 1862 ई . में पेरिस का राजदूत बनाकर भेजा गया ।

1862 ई . में प्रशा के शासक विलियम प्रथम ने उसे देश का चांसलर ( प्रधान मंत्री ) नियुक्त किया ।

रक्त और लोहे की नीति ‘ का समर्थक , लोकतंत्र और संसदीय पद्धति

प्रशा की सैन्य शक्ति मजबूत कर प्रशा के नेतृत्व में जर्मनी का एकीकरण करना चाहता था ।

उसने तीन प्रमुख युद्ध ( डेनमार्क , आस्ट्रिया एवं फ्रांस के विरुद्ध ) लड़े । इन सभी युद्धों में सफल होकर उसने जर्मन – राज्यों के एकीकरण के कार्य को पूरा किया

बिस्मार्क की नीति थी – “ युद्ध से पूर्व शत्रु की मित्रविहीन कर दो । ”

 

डेनमार्क से युद्ध ( 1864 ई . )

जर्मनी और डेनमार्क के बीच दो प्रदेश श्लेसविग ( आधे जर्मन और आधे डेन ) और हॉलस्टीन ( जर्मन ) विद्यमान थे । ये दोनों सदियों से डेनमार्क के अधिकार में थे , – डेनमार्क में राष्ट्रवाद – 1863 ई . में डेनमार्क के शासक क्रिश्चियन दशम् ने उक्त प्रदेशों को डेनमार्क में शामिल करने की घोषणा कर दी । जो 1852 ई . के लंदन समझौते के विरूद्ध था |

बिस्मार्क ( इन प्रदेशों पर अधिकार करना चाहता था ) + आस्ट्रिया पर प्रभुत्व बनाए रखने के लिए 1864 ई . में उन्होंने डेनमार्क पर आक्रमण कर दिया और डेनमार्क पराजित हो गया ।

गेस्टीन के समझौते से युद्ध की समाप्ती हुई , इसके तहत श्लेसविग और हॉलस्टील के साथ – साथ लायनबुर्ग के अधिकार से भी डेनमार्क वंचित हुआ ।

 

गेस्टीन का समझौता

श्लेसविग और हॉलस्टीन के प्रदेश डेनमार्क से ले लिये गए , परंतु इस लूट के माल के बंटवारे के संबंध में प्रशा और ऑस्ट्रिया में मतभेद , 14 अगस्त 1865 ई . को गेस्टीन का समझौता हुआ –

  1. श्लेसविंग प्रशिया को दिया गया ,
  2. हॉलस्टीन पर आस्ट्रिया का अधिकार मान लिया गया ,
  3. लायनवर्ग का प्रदेश प्रशा ने खरीद लिया , जिसका मूल्य ऑस्ट्रिया को दिया गया

 

आस्ट्रिया से सेडोवा का युद्ध 1866

बिस्मार्क आस्ट्रिया को हराकर जर्मन संघ से निकालना चाहता था , इसके लिए उसने अन्य यूरोपीय देशों की संभावित प्रतिक्रिया को समझ लेना आवश्यक समझा ।

  1. ग्रेटब्रिटेन – हस्तक्षेप की संभावना नहीं थी , वह एकाकीपन की नीति पर चल रहा था ।
  2. रूस – रूस बिस्मार्क का मित्र था ।
  3. फ्रांस – फ्रांस को लालच देकर युद्ध में तटस्थ रहने का आश्वासन प्राप्त कर लिया।
  4. इटली – 1866 ई . में प्रशा और इटली के बीच संधि , इटली ने युद्ध में प्रशा का साथ देने का एवं इसके बदले बिस्मार्क ने इटली को वेनेशिया देने का वचन दिया ।

सेडोवा का युद्ध 1866 ई . – ऑस्ट्रिया पराजित , प्राग की संधि जिसकी शर्ते इस प्रकार थीं

  1. ऑस्ट्रिया के नेतृत्व में बना जर्मन – संघ समाप्त , दक्षिणी राज्यों की स्वतंत्रता को माना गया ।
  2. श्लेसविग और हॉलस्टीन प्रशा को दे दिये गये । वेनेशिया का प्रदेश इटली को दे दिया गया ।
  3. ऑस्ट्रिया को युद्ध का हरजाना देना पड़ा ।

 

जर्मन राजसंघ की स्थापना

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युद्ध से प्रशा को अनेक लाभ हुए – हैनोवर , हेसकेसल , नासो और फ्रेंकफर्ट प्रशा के राज्य में शामिल कर लिये गये ।

दक्षिण – राज्यों के विरोध के कारण चार दक्षिण जर्मन राज्यों को छोड़कर ( बवेरिया , बुटर्मवर्ग , बादेन और हेस ) शेष जर्मन  राज्यों का संगठन प्रशा के नेतृत्व में बना ।

इसमें 21 जर्मन राज्य शामिल थे । इस नवीन संघ का अध्यक्ष प्रशा को बनाया गया । बिस्मार्क इस संघ का प्रथम चाँसलर नियुक्त हुआ ।

अब केवल फ्रांस ही चार दक्षिण जर्मन राज्यों को छोड़कर ( बवेरिया , बुटर्मवर्ग , बादेन और हेस ) और जर्मन संघ के बीच बाधक था ।

 

फ्रांस से सिडान का युद्ध 1870

1863 ई . में स्पेन की जनता ने विद्रोह करके रानी ईसाबेला द्वितीय को देश से निकाल दिया और उसके स्थान पर प्रशा के सम्राट के रिश्तेदार लियोपोर्ल्ड को नया शासक बनाने का विचार किया । नेपोलियन ( फ्रांस ) इसके तैयार न था ।

रूस को क्रीमिया युद्ध में पराजय की याद दिलाई , एवं कालासागर क्षेत्रों के नियंत्रण के लिए प्रोत्साहित किया , इटली को रोम प्राप्ति के मुद्दे पर , एवं आस्ट्रिया को प्राग की उदरवादी संधि के रूप में तटस्थ किया ।

सिडान का युद्ध 1870 – 15 जुलाई 1870 ई . को फ्रांस ने प्रशा के विरूद्ध युद्ध की घोषणा की । नेपोलियन- III पराजित हुआ , 20 जनवरी 1871 ई . को पेरिस के पतन के पश्चात युद्ध समाप्त ।

. फेंकफर्ट की संधि- 1871 ‘ – इसकी शर्ते इस प्रकार थीं

  1. फ्रांस को अल्सास और लॉरेन के प्रदेश प्रशा को सौंपने होंगे ।
  2. फ्रांस को युद्ध का हरजाना 20 करोड़ पाउंड देना होंगे ।
  3. हरजाने की अदायगी तक जर्मन सेना फ्रांस में बनी रहेगी ।

 

जर्मन साम्राज्य का गठन

सीडान के युद्ध 1870 के बाद दक्षिण जर्मनी के चार राज्यों – बवेरिया , बादेन , बुटर्मवर्ग और हेंस को जर्मन संघ में शामिल कर उसे जर्मनी ( जर्मन साम्राज्य ) एक नया नाम दिया गया । प्रशा का राजा जर्मनी का भी शासक घोषित किया गया ।

इस प्रकार जर्मनी का एकीकरण पूर्ण हुआ । 18 जनवरी 1871 ई . में वर्साय के शीशमहल में विलियम प्रथम का राज्याभिषेक जर्मनी के सम्राट के रूप में हुआ । इस असंभव से लगने वाले कार्य  को पूर्ण करने का श्रेय बिस्मार्क को है ।

नेपोलियन- III के हार के साथ ही फ्रांस में भी राजतंत्र की समाप्ती हुई और गणतन्त्र की स्थापना की गई । रोम प्राप्ति के बाद इटली का एकीकरण भी पूर्ण हुआ ।

रूस ने कालासागर क्षेत्र में नियंत्रण करने के लिए तुर्की पर हमला कर उसे पराजित किया गया |

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