दिल्ली में वायु प्रदूषण

चर्चा में क्यों है

बीते कुछ सालों से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर में सर्दियों के मौसम में वायु प्रदूषण का अपने चरण पर पहुंचना बेहद आम हो गया है| हालांकि वायु प्रदूषण की स्थिति दिल्ली एनसीआर में सालों भर काफी खराब रहती है .लेकिन सर्दी के मौसम में हालात बेहद नाजुक हो जाते हैं .और गैस चेंबर जैसी स्थिति बन जाती है | ऐसे में लोगों के लिए सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है |

इसके लिए हर साल का भी किसानों के पराली जलाने को दोष दिया जाता है तो कभी कल कारखानों और मोटर गाड़ियों के धुआ को तो कभी सरकार के गलत रवैया को ।आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहता है. लेकिन कोई ठोस नतीजा निकलता नहीं दिखता इस साल भी दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण गंभीर श्रेणी में बना हुआ है. हालात को बेकाबू होते देख केंद्र सरकार ने हाल ही में दिल्ली एनसीआर और आसपास के शहरों में वायु प्रदूषण के प्रबंधन के लिए आनन-फानन में अध्यादेश जारी कर एक नया कमीशन बनाया गया जिसे केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से जारी किया गया ।

उम्मीद की जा रही है की इस नई व्यवस्था से कई ठोस नतीजे सामने आएंगे दरअसल कोविड-19 महामारी के दौर में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के जरूरत बेहद अहम हो जाती है क्योंकि वायु प्रदूषण के कारण सांस संबंधी बीमारियां कोविड-19 से प्रभावित लोगों की स्थिति को और खराब कर सकती है | लेकिन सवाल भी उठाए जा रहे हैं कि वायु प्रदूषण के नियंत्रण के लिए पहले से कई कठोर कानून मौजूद है तो ऐसे में नया कानून लाने की वजह, मौजूदा कानूनों के अनुपालन पर जोड़ देना चाहिए ।

  मौसमी या भौगोलिक कारकों की बात करें

आमतौर पर अक्टूबर महीने को उत्तर पश्चिम भारत में मानसून के लौटने या पीछे हटने की माह के रूप में जाना जाता है | इस दौरान हवाओं के बहने की दिशा पूर्व से बदलकर उत्तर पश्चिम हो जाती है  | उत्तर पश्चिम से  आने वाली इन हवाओं के साथ राजस्थान और यहां तक कि कभी-कभी पाकिस्तान और अफगानिस्तान की धूल मिट्टी भी दिल्ली एवं आसपास के क्षेत्रों में पहुंच जाती है |

हवाओं की दिशा बदलने के साथ-साथ तापमान में गिरावट भी दिल्ली और इसके आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण के स्तर को प्रभावित करती हैं जैसे-जैसे तापमान में गिरावट आती है तापीय वयुतकर्मन के चलते एक परत जम जाती है. जिससे प्रदूषण वायुमंडल के ऊपरी परत में नहीं फैल पाते हैं ‘और ऐसा होने पर वायु में प्रदूषकओ की सांद्रता बढ़ जाती है. इस मौसम संबंधी कारको के संयोजन से इस क्षेत्र में प्रदूषण काफी बढ़ जाता है |

जब पराली के धुएं और धूल भरी आंधी जैसे कारक शहर में पहले से व्याप्त प्रदूषण के स्तर में जुड़ जाते हैं, तो वायु की गुणवत्ता में और ज्यादा गिरावट आ जाती है | ऐसे में वायु प्रदूषण के नियंत्रण के लिए विभिन्न कारकों की निगरानी और उनसे निपटने एवं समाप्त करने के लिए एक समेकित दृष्टिकोण अपनाना और उसे लागू करना काफी अहम है  |  इसी को देखते हुए एक नया समेकित ढांचा बनाया गया है  |

सरकार द्वारा बनाए गए नए कमीशन के बारे में

हाल ही में दिल्ली एनसीआर और आसपास के शहरों में वायु प्रदूषण प्रबंधन के लिए (  द कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट इन नेशनल कैपिटल रीजन एंड ए जॉइनिंग ऐरियाज ) .नाम से एक अध्यादेश जारी किया गया है   | इसे आम भाषा में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग कहा जा रहा है |  यह कमीशन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के जरिए गठित पर्यावरण प्रदूषण रोकथाम व नियंत्रण प्राधिकरण ( ईपीसीए  ) और इस विषय पर बनाए गए अन्य समितियों की जगह पर काम करेगा |

अब तक राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इसके आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण की निगरानी  केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड,  राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड,  पर्यावरण प्रदूषण रोकथाम एवं नियंत्रण प्राधिकरण जैसे अलग-अलग निकायों द्वारा किया जा रहा था   | इसका कारण प्रदूषण से निपटने के काम और भी चुनौतीपूर्ण एवं अव्यवस्थित हो गया था   | ऐसे में लंबे समय से एक ऐसे निकाय के गठन का विचार किया जा रहा था.  जो इस पूरी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित कर सके ।

इस नए कमीशन में एक अस्थाई चेयरमैन नियुक्त होगा जो कि केंद्रीय स्तर का सचिव या फिर राज्य स्तर का मुख्य सचिव हो सकता है जोकि कार्यरत या सेवानिवृत्ति हो सकता है और इसका  कार्यकाल 3 साल का होगा  | कार्यकाल खत्म होने के बाद इसे पुनः नियुक्त किया जा सकेगा  |

कमीशन का एक प्रतिनिधि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के सचिव होगा, जिसकी पदवी संयुक्त सचिव के नीचे से नहीं होगी   | सेवा मुक्त व्यक्ति भी यह पद ले सकता है  |  कमीशन में दिल्ली,  पंजाब , हरियाणा,  राजस्थान और उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे   |

आयोग में सचिव संयुक्त स्तर के 2 पूर्णकालिक सदस्य भी इसमें शामिल होंगे.  इसके अलावा वायु प्रदूषण के  गहरी समझ रखने वाले 3 स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों को भी कमीशन का सदस्य बनाया जाएगा |

एक तकनीकी विशेषज्ञ केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी होगा . वायु प्रदूषण का नियंत्रण पर अनुभव रखने वाले 3 सदस्य गैर सरकारी संस्थाओं से होंगे, इनमें से एक सदस्य इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन( इसरो ) का भी होगा  | इसमें एक सदस्य नेशनल इंस्टिट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया यानी नीति आयोग का भी होगा ।जिसकी पदवी संयुक्त सचिव या एडवाइजर की होगी  |

इसके अलावा केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग परिवहन मंत्रालय ,केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय, केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मामला के मंत्रालयों केंद्रीय पेट्रोलियम एवं नेचुरल गैस मंत्रालय ,केंद्रीय कृषि मंत्रालय ,केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय से एक-एक प्रतिनिधि भी कमीशन का हिस्सा होंगे |

इसके अलावा वाणिज्य एवं उद्योग से जुड़ा कोई व्यक्ति भी इस कमीशन का हिस्सा होगा. कोई सहायक सदस्य भी होगा .जिसकी अनुशंसा की जाएगी |  इसके अलावा एक चीफ कोऑर्डिनेटर ऑफिसर भी होगा जो कि अस्थाई तौर पर सचिव होगा|

इस आयोग का कार्यालय दिल्ली में ही होगा. इस आयोग में वायु प्रदूषण रोकने के उपायों के बारे में सुझाव देने के लिए तीन उपसमिति अभी होगी. निगरानी एवं पहचान उप समिति सुरक्षा एवं परिवर्तन उप समिति तथा अनुसंधान एवं विकास उप समिति इस तरह से आयोग आसानी से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर सकेगा और इन राज्यों में वायु प्रदूषण के रोकथाम नियंत्रण एवं उन्मूलन संबंधी कार्यों के क्रियान्वयन एवं निगरानी कर सकेगा |

आयोग की इस तरह की संरचना दृष्टिकोण से भी काफी अहम है कि दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण के प्रबंधन में स्ट्रबल बढ़ने के लिए कृषि मंत्रालय एवं राज्य सरकारें और औद्योगिक उत्सर्जन के लिए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय जैसे अलग-अलग हित धारक शामिल किए गए हैं |

कमीशन के शक्तियों एवं अधिकारों

आयोग के पास दिल्ली एवं इसके आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सभी जरूरी उपाय करने इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी करने एवं जरूरत पड़ने पर शिकायत दर्ज कराने की शक्ति होगी|  यह आयोग राज्य सरकार और किसी सरकारी विभाग को भी आदेश जारी कर सकता है. इस कमीशन के निर्णय एवं नए अधिकार क्षेत्र काफी व्यापक होंगे|

अध्यादेश के मुताबिक वायु गुणवत्ता और प्रदूषण से संबंधित किसी भी मामले में किसी निकाय या राज्य सरकार के साथ हितों के टक्कर की स्थिति में इस आयोग द्वारा जारी किए गएगा  | आदेश को सर्वोपरि माना जाएगा यह आयोग पंजाब ,हरियाणा ,राजस्थान ,दिल्ली ,उत्तर प्रदेश की सरकारों को समन्वय स्थापित करने का काम करेगा |

आयोग के पास वायु गुणवत्ता प्रदूषण कारी तत्वों के बहाव के लिए मानक तय करने कानून का उल्लंघन करने वाले परिसरों का निरीक्षण करने, नियमों का पालन नहीं करने वाले उद्योगों के साथ-साथ संयंत्रों को बंद करने का आदेश देने का भी अधिकार है |

आयोग को किसी भी मामले पर स्वत संज्ञान लेने या शिकायत के आधार पर मामले की जांच का अधिकार है |

आयोग के किसी भी प्रधान या नियमों अथवा आदेश यह निर्देश का पालन नहीं करना दंडनीय अपराध होगा,|  जिसके लिए 5 साल से जेल की सजा या ₹10000000 जुर्माना अथवा एक साथ दोनों सजा हो सकती है |  इस निकाय के बढ़ने से वायु प्रदूषण पर काफी हद तक नियंत्रण किया जा सकेगा हालांकि वायु प्रदूषण का मुद्दा अब केवल दिल्ली एनसीआर तक ही सीमित नहीं है बल्कि देश के कई इलाकों में यह समस्या देखी जा रही है और व्यापक तौर पर इसके प्रभाव नजर आ रहे हैं |

देश में वायु प्रदूषण के प्रभाव

वायु प्रदूषण से मनुष्य को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इससे अस्थमा ,सांस लेने में दिक्कत होना ,दम घुटना, सर्दी ,अंधापन ,स्वसन शक्ति कमजोर होना, त्वचा रोग आदि बीमारियां उत्पन्न होती है |

आंकड़ों के मुताबिक वायु प्रदूषण की भैयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया भर में हर साल तकरीबन 90 लाख लोग वायु प्रदूषण के चलते मृत्यु हो जाती है, जबकि बचने वालों के जीवन को भी औसतन प्रति व्यक्ति 3 साल कम कर रहा है

इसे भी पढ़े :    गुप्त वंश के प्रमुख शासक

हाल ही में प्रकाशित  ( स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2020 ) रिपोर्ट के मुताबिक वायु प्रदूषण के चलते भारत में 2019 में एक लाख से भी ज्यादा नवजात की मौत हुई. वैश्विक आंकड़ों की बात करें तो वायु प्रदूषण के चलते 2019 में तकरीबन 50000 नवजात की मृत्यु हुई |  रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर 2019 में वायु प्रदूषण के चलते करीब 6700000 लोगों की जानें गई |

गर्भ में पल रहे शिशु को भी वायु प्रदूषण काफी नुकसान पहुंचा सकता है .यह बच्चों में कम वजन और समय से पहले जन्म का होना जैसे समस्याओं को पैदा कर सकता है

बीते कुछ सालों से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर में सर्दियों के मौसम में वायु प्रदूषण का अपने चरण पर पहुंचना बेहद आम हो गया है| हालांकि वायु प्रदूषण की स्थिति दिल्ली एनसीआर में सालों भर काफी खराब रहती है .लेकिन सर्दी के मौसम में हालात बेहद नाजुक हो जाते हैं .और गैस चेंबर जैसी स्थिति बन जाती है | ऐसे में लोगों के लिए सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है |

इसके लिए हर साल का भी किसानों के पराली जलाने को दोष दिया जाता है तो कभी कल कारखानों और मोटर गाड़ियों के धुआ को तो कभी सरकार के गलत रवैया को ।आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहता है. लेकिन कोई ठोस नतीजा निकलता नहीं दिखता इस साल भी दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण गंभीर श्रेणी में बना हुआ है. हालात को बेकाबू होते देख केंद्र सरकार ने हाल ही में दिल्ली एनसीआर और आसपास के शहरों में वायु प्रदूषण के प्रबंधन के लिए आनन-फानन में अध्यादेश जारी कर एक नया कमीशन बनाया गया जिसे केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से जारी किया गया ।

उम्मीद की जा रही है की इस नई व्यवस्था से कई ठोस नतीजे सामने आएंगे दरअसल कोविड-19 महामारी के दौर में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के जरूरत बेहद अहम हो जाती है क्योंकि वायु प्रदूषण के कारण सांस संबंधी बीमारियां कोविड-19 से प्रभावित लोगों की स्थिति को और खराब कर सकती है | लेकिन सवाल भी उठाए जा रहे हैं कि वायु प्रदूषण के नियंत्रण के लिए पहले से कई कठोर कानून मौजूद है तो ऐसे में नया कानून लाने की वजह, मौजूदा कानूनों के अनुपालन पर जोड़ देना चाहिए ।

सर्दियों में दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ने के कारण

दिल्ली में वायु प्रदूषण
             चिमनियों से निकलने वाले धुवा

दिल्ली एनसीआर और सिंधु गंगा के मैदानों में वायु प्रदूषण काफी जटिल घटना है जोकि कई कारणों पर निर्भर करती है इनमें पहला और सबसे उपयोगी कारण प्रदूषकओ के उपस्थिति है इसके बाद मौसम एवं स्थानीय परिस्थितियां आती है |

प्रदूषण की बात करें तो इसमें कार्बन मोनोऑक्साइड ,कार्बन डाइऑक्साइड ,क्लोरोफ्लोरोकार्बन ,सीसा, ओजोन, सल्फर डाइऑक्साइड ,पीएम 2.5 एवं pm10 शामिल है जो कि औद्योगिक इकाइयों घरेलू उपयोग के उपकरणों एवं वाहनों से उत्सर्जन होकर वायु में मिल जाते हैं | दिल्ली में हवा के निम्न गुणवत्ता के लिए धूल एवं वाहनों का प्रदूषण.

अक्टूबर एवं जून में वर्षा की अनुपस्थिति के चलते शुष्क मौसम होता है. जिससे पूरे क्षेत्र में धूल का प्रकोप होता है,. आईआईटी IIT कानपुर के एक अध्ययन में कहा गया है की धूल PM10 में 56 फ़ीसदी और पीएम 2.5 में 38 फ़ीसदी बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार है. जबकि सर्दियों में पीएम 2.5 का 20 फ़ीसदी हिस्सा वाहन प्रदूषण से आता है |

भारत में 2 .5  पार्टिकुलेट्स का बढ़ता स्तर वायु प्रदूषण के लिहाज से सबसे गंभीर समस्या है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO ) के मुताबिक पीएम 2.5 की सुरक्षित सीमा 40 माइक्रोग्राम प्रति मीटर की  क्युब निर्धारित  की गई है. जबकि देश की राजधानी दिल्ली में यह स्तर अक्सर ही 200 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूब के आसपास बना रहता है, आपको बता दें कि पार्टिकुलेट मैटर को अभी कनिय पदार्थ के नाम से जाना जाता है .यह हमारे वायुमंडल में उपस्थित बहुत छोटे कन होते हैं,  जिनकी मौजूदगी ठोस या तरल अवस्था में हो सकती है|

यह वायुमंडल में निष्क्रिय अवस्था में होती है जोकि आतिसूक्ष्म होने के कारण सांसों के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और कई जानलेवा बीमारियों का का कारण बनते हैं. वायु प्रदूषण के अन्य कारणों में पराली जलाना, कुड़ा जलाना शामिल है.  शहरी विनिर्माण, वनोन्मूलन, कारखाने परिवहन ताप, विद्युत गृह खनन आदि शामिल है  |

   आगे की राह

अब केवल वायु प्रदूषण दिल्ली एनसीआर और देश के महानगरों तक ही सीमित नहीं रहा है बल्कि देश के छोटे और बड़े शहर भी वायु प्रदूषण की समस्याओं से जूझ रही है . ऐसे में वायु प्रदूषण की समस्याओं के लिए सभी को साथ आकर गंभीरता से रोकने की प्रयास करने की जरूरत है.

  • इसके लिए सरकारों को वायु प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कानूनों एवं नियमों के अनुपालन पर ध्यान देने की जरूरत है|
  • कारखानों को शहरी क्षेत्र से दूर स्थापित करने के साथ-साथ एवं चिमनी यों की अधिक ऊंचाई व इनमें फिल्टर ओं की अनिवार्यता सुनिश्चित किया जाना जरूरी है
  •   परिवहन की व्यवस्था में भी कई सुधार किए जाने की जरूरत है जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों और सार्वजनिक परिवहन को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा दिया जाना चाहिए
  •  बायोफ्यूल ग्रीन फ्यूल सीएनजी जैसे स्वच्छ इंधन के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है
  •   सौर ऊर्जा की तकनीक को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए
  • वायु प्रदूषण को बढ़ाने में जनसंख्या वृद्धि एक बड़ा कारण है इसीलिए जनसंख्या वृद्धि को स्थिर करने की भी जरूरत है जिससे खाद्य एवं आवास के लिए  वनों को ना कटना पड़े|
  • इसके साथ-साथ ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने पर भी ध्यान देना होगा
  • इन सबके अलावा आम जनता को वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव को के प्रति जागरूक करना भी जरूरी है
  •  प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को अपनाकर उसे नियंत्रित करने में योगदान दे सके इसके लिए सभी प्रचार माध्यमों को इस्तेमाल करना चाहिए |

comment here