फसलों का त्योहार ( मकर संक्रांति ,पोंगल ,बिहू, उत्तरायण ) इत्यादि

भारत एक प्राचीन धार्मिक और समृद्धशाली संस्कृतिक देश है इसका इतिहास हजारों साल पुराना है |  भारत के आत्मा में प्रकृतिक और वनस्पति एवं जीव जंतुओं के लिए अपार श्रद्धा है क्योंकि इनका सरोकार सीधा हम से ही तो हैं | इसलिए हमारे रीति-रिवाजों में तमाम ऐसी परंपराएं और त्यौहार हैं जो हमें सीधे प्रकृति और पर्यावरण से जोड़ते हैं | जिसे हम फसलों का त्योहार भी कहते है |

हमारे पूर्वजों और ऋषि-मुनियों ने हमारे पर्व और त्योहारों की रचना ऐसे की है कि यह हमारे जीवन में रंग बिरंगे तमाम रंगों के साथ हर्ष उल्लास और तमाम ऐसी चीजें और मूल्यों की संरचना करते हैं|  ऐसा ही एक पवित्र त्यौहार है मकर संक्रांति

इस त्यौहार को पूरे भारत में अलग अलग तरीके से मनाया जाता है और तमाम अलग-अलग नामों से जाना जाता है जैसे उत्तरायण ,पोंगल और खिचड़ी हरियाणा और पंजाब में इसे लोहरी के रूप में 1 दिन पहले मनाया जाता है | अलग अलग राज्य में हमको खानपान में भी तमाम भी बिभिदता देखने को मिलती है |

ज्योतिष के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है | सूर्य के एक राशि से दूसरे राशि में प्रवेश करने को संक्रांति कहा जाता है | और अच्छी फसल की कामना की जाती है यह त्यौहार ग्रह नक्षत्र और राशि समेत कई महीनों में बहुत खास है |

मकर संक्रांति का हमारे देश में विशेष महत्व है मकर संक्रांति को फसलों का त्योहार भी कहा जाता है | देश के अलग-अलग हिस्सों में इस त्यौहार को अलग-अलग नामों से मनाया जाता है  | जिसका अलग-अलग महत्व भी है देशभर में मकर संक्रांति पोंगल और बिहू का त्योहार पारंपरिक उल्लास और धूमधाम से मनाया जाता है नई फसल के स्वागत में लोग जोश उल्लास और उमंग से भरे नजर आते हैं |

मकर संक्रांति का त्यौहार देश के विभिन्न हिस्सों में मनाया जाता है. वैदिक हिंदू दर्शन के अनुसार मकर संक्रांति सूर्य का त्योहार है. जो सभी ग्रहों के राजा माने जाते हैं

.मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने के अवसर पर मनाया जाता है,. यह त्यौहार अच्छी फसल खुशहाली और स्वभाव प्रदान करने के लिए प्रकृति के प्रति आभार के तौर पर मनाया जाता है . देश के अलग-अलग हिस्सों में यह त्यौहार अलग-अलग नामों से मनाया जाता है |

इस त्यौहार को कहीं पोंगल  तो बिहु के तौर पर मनाया जाता है यह सभी भारतीय लोकजीवन के पर्व है यह बदलते मौसम का उत्सव है मकर संक्रांति के मौके पर लोग नदियों में आस्था के तौर पर डुबकी लगाते हैं. और मंदिरों में पूजा अर्चना करते हैं ,उत्तरायण के इस पर्व पर लोग भरपूर फसल के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं |

यह त्यौहार आपसी सद्भाव प्रेम और भाईचारे का संदेश देता है मकर संक्रांति के त्योहार के 1 दिन पहले देश के कई हिस्सों में लोहरी का पर्व पूरे उल्लास के साथ मनाया जाता है इस मौके पर छोटे से लेकर बड़े लोहरी जलाने के साथ नाच गाकर पर्व मनाते हैं मूंगफली और रेवरी बांटकर खुशियां मनाई जाती है |

मकर संक्रांति का त्योहार

मकर संक्रांति का त्योहार फसलों का त्योहार है देश के अलग-अलग हिस्सों में फसलों के त्योहार को अलग-अलग नामों से बनाया जाता है और अलग-अलग राज्यों में हमें अलग-अलग रंग भी दिखाई पड़ते हैं |

मकर संक्रांति का त्यौहार जनवरी महीने के मध्य में मनाया जाता है जनवरी महीने के मध्य में भारत के लगभग सभी प्रांतों में फसलों से जुड़ा कोई ना कोई त्यौहार मनाया जाता है | उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश ,छत्तीसगढ़ और बिहार में मकर संक्रांति यही संक्राति असम में बिहू ,तमिलनाडु में पोंगल पंजाब में लोहारी ,झारखंड में सरहुल और गुजरात में पतंग का पर्व सभी त्योहार खेती और फसलों से जुड़े हुए हैं |

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उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ और बिहार में मकर संक्रांति का पर्व बहुत धूमधाम से मनाया जाता है लोक नदियों में आस्था की डुबकी लगाते हैं. दान करते हैं. और तिल और गुर से बने मीठे व्यंजन खाते हैं,

बिहार में दही चुरा खाने की परंपरा है, उत्तर प्रदेश ,बिहार ,झारखंड, दिल्ली ,उत्तराखंड और हरियाणा जैसे राज्यों में के ज्यादातर घरों में इस दिन खिचड़ी बनती है, बिहार और झारखंड में इस दिन विशेष रूप से दही चुरा और तिलकुट खाने की परंपरा है |

लोहड़ी का त्योहार

लोहड़ी का पर्व उत्तर भारत में मनाया जाने वाला मुख्य पर्व है यह पर्व पंजाबी और सिख धर्म के लोग का प्रमुख त्योहार है या फसल उत्सव के रूप में मनाया जाता है |

आजकल लोहड़ी का पर्व पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जाता है लेकिन पंजाब और हरियाणा में इस पर्व की खासी धूमधाम देखने को मिलती है किसान इस दिन अपनी नई फसल को अग्नि देवता को समर्पित कर लोहरी का पवित्र पर्व मनाते हैं |

पोंगल का त्योहार

पोंगल मकर संक्रांति का दूसरा नाम है जो दक्षिण भारत में धूमधाम से मनाया जाता है | इस दिन सूर्य देव की पूजा करना काफी महत्व माना गया है इसमें लोग प्रकृति के प्रति अपना आभार जताते हैं | और प्रकृति को फसल पैदा करने के लिए धन्यवाद देते हैं |

तमिलनाडु में पोंगल का त्यौहार देखते ही बनता है तमिल में पोंगल शब्द का मतलब होता है, तेजी से उबालना इसीलिए यहां इस दिन उबलते दूध में चावल और गुड़ डालकर पकवान बनाया जाता है | सब के दरवाजों पर रंगोली बनी होती है लोग इस दिन बारिश ,सूर्य ,जानवरों और खेत की पूजा करते हैं

बिहू का त्योहार

बिहू का त्योहार असम में मनाया जाने वाला मुख्य त्योहार है | हर साल जनवरी में यहां के लोग इस त्यौहार को पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाते हैं  |यह किसानों के लिए भी प्रमुख पर्व है |क्योंकि इस पर्व के दौरान किसान अपनी फसलों की कटाई कर भगवान का शुक्रिया अदा करते हैं | बिहू के पर्व के दौरान महिलाएं में अनाज के स्वादिष्ट पकवान बनाती है  |

इस मौके पर कई तरह के पारंपरिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाता है ,पश्चिमी भारत में मकर संक्रांति को उत्तरायण के नाम से मनाते हैं

गुजरात में पतंग का पर्व

यहां इस त्योहार  पर पतंग उड़ाने का चलन है पूरे गुजरात और राजस्थान की कुछ हिस्से में आसमान इस दिन रंग बिरंगी पतंगों से ढका हुआ नजर आता है |

सामाजिक रुप से पतंग उड़ाने के दौरान लोगों को एक दूसरे से जुड़ने का भी मौका मिलता है | दरअसल इस समय देश के कई हिस्सों में फसलों की कटाई हो जाती है  | लोगों के घरों में नई फसल से तैयार अनाज पहुंच जाता है लोग इस मौके पर प्रकृति का आभार जताने के लिए त्यौहार मनाते हैं |

मकर संक्रांति क्यों मनाया जाता है ?

मकर संक्रांति एक खगोलीय घटना है एक ऐसी घटना जिसमें सौरमंडल का सीधा असर हमारी जिंदगी पर पड़ता है | कहते हैं मनुष्य का जीवन उसका भोग और उसका मोक्ष, मूलांक जीवन, भौतिक और आध्यात्मिक जीवन सूर्य पर ही निर्भर करता है |इस दिन सूर्य मकर रेखा संक्रांत करता है धनु से मकर राशि में जाता है |

भारत में सूरज संक्रांति के साथ उसमें धर्मा होता है यानी सूर्य की किरणें सीधी पड़ने लगती है |  इसका असर यह होता है कि धीरे-धीरे उस्मान बढ़ने लगती है और दिन बड़ा होने लगता है |

सूर्य के उत्तरायण होने से दिन के घंटे बढ़ने लगते हैं और कृषि का वातावरण बढ़ने लगता है जो किसान के लिए एक नई उम्मीद लेकर आता है आता है |

सूर्य सभी 12 राशियों पर संक्रांत करता है,लेकिन धनु से मकर राशि पर संक्रांत का इतना महत्व क्यों है ?

दरअसल मकर संक्रांति भारत को संपूर्ण ब्रह्मांड के भूगोल से जोड़ता है | सूर्य के दो अहम संक्रांति मकर और कर्क अयन से यानी गति से जुड़ी हुई है संक्रांति सूर्य के उत्तर और दक्षिणायन से जुड़ी हुई है |

उत्तर और दक्षिणायन को है हम उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव कहते हैं .मकर यह कर्क संक्रांति सूर्य के उत्तरायण और दक्षिणायन होने की प्रक्रिया से जुड़ी हुई है | एक से प्रकाश औरउष्मा बढ़ती है तो दूसरी से घटती है |

इसी प्रकार दो और संक्रांति या मेष और तुला में होती है जब दिन और रात बराबर होते हैं धनु राशि से मकर राशि में सूर्य के प्रवेश के बाद सूर्य उत्तरायण होने लगता है |

15 साल पहले मकर राशि में प्रवेश करतेही  सूर्य उत्तरायण होता था लेकिन 15 साल बाद गति के खिसकने से सूर्य उत्तरायण पहले हो जाता है और मकर संक्रांति बाद में होती है |

पहले यह 14 से 15 जनवरी को होती थी वही 70 साल पहले 13 से 14 जनवरी को होती थी 100 साल पहले 12 से 13 जनवरी को संक्रांति मनाई जाती थी |

स्वामी विवेकानंद का जन्म मकर संक्रांति के दिन ही हुआ था . तब संक्रांति 12 तारीख को होती थी. अब 14 की रात को सूर्य उत्तरायण होते हैं|  इसलिए संक्रांति 15 जनवरी को होती है|  ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सूर्य का आयन खिसकने लगता है |

सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही ग्रह नक्षत्र में भी अहम बदलाव होने लगता है | संक्रांति के बाद ज्योतिष शास्त्र राशि ग्रह और नक्षत्र की चाल में बदलाव बताता है   |

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