बजट क्या है

What is the budget .

आज की इस आर्टिकल में हमलोग जानेगे. बजट क्या है , इसके प्रकार , बजट को पहली बार कब पेश किया गया तथा इससे जूरी सभी महत्वपूर्ण जानकारिया जो आपको जानना चाहिए |

बजट शब्द फ्रेंच भाषा के बोगेट ( bougett ) से लिया गया है । फ्रेंच में बोगेट शब्द का अर्थ होता है ‘ चमड़े का थैला ‘ । वर्तमान अर्थ में सर्वप्रथम इस शब्द का प्रयोग ” The budget opened ” नामक व्यंग रचना में सर राबर्ट वालपोल के संदर्भ में किया गया ।

सन् 1773 में ब्रिटिश वित्त मंत्री सर राबर्ट वालपोल ने संसद के समक्ष पेश करने के लिए अपने वित्तीय प्रस्ताव चमड़े के थैले में से निकाले थे । उसी समय से बजट शब्द का प्रयोग सरकार के वार्षिक आय व्यय के विवरण के लिए किया जाने लगा ।

सामान्य शब्दों में बजट :  भविष्य के लिये की गई वह योजना है जो पूरे वर्ष की राजस्व एवं अन्य आय तथा खर्चों का अनुमान लगा कर बनाई जाती है । जिसमें वित्तीय मंत्री के द्वारा सरकार के समक्ष अपनी व्यय का अनुमान लगा कर , आने वाले वर्ष के लिये कई योजनायें बना कर , जनता के सामने हर वित्तीय वर्ष के दौरान प्रस्तुत करती है ।

एक आदर्श बजट वह होता है जिसमें , किसी का स्वार्थ ना हो । सरकार द्वारा उस बजट में लोग , व्यापार , सरकार , देश , बहुराष्ट्रीय संगठन के लिये , एक व्यक्ति , परिवार , समूह के लिये अच्छी से अच्छी योजनायें बनाई गई हो तथा खर्चे एवं निवेश किये गये हो ।

भारत के पहले बजट को प्रस्तुत करने का श्रेय जेम्स विल्सन को जाता है , जिन्होंने 18 फरवरी 1860 को वायसराय की परिषद में पहली बार बजट पेश किया । विल्सन को पहली बार एक वित्त विशेषज्ञ जेम्स विल्सन को वायसराय की कार्यकारिणी का वित्त सदस्य नियुक्त किया गया ।जेम्स विल्सन को भारतीय बजट का संस्थापक भी कहा जाता है ।

1860 के बाद से ही प्रतिवर्ष देश की वित्तीय स्थिति का विवरण प्रस्तुत करने वाला बजट वायसराय की परिषद में पेश किया जाने लगा , लेकिन उस समय भारत गुलाम था , इसलिए इस बजट पर भारतीय प्रतिनिधियों को बहस करने का अधिकार नहीं था ।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 में भारत के केंद्रीय बजट को वार्षिक वित्तीय विवरण के रूप में निर्दिष्ट किया गया है ।  जिसे राष्ट्रपति प्रत्येक वित्तीय वर्ष के दौरान , संसद के दोनों सदनों के समक्ष वार्षिक वित्तीय विवरण फरवरी के अंतिम कार्य – दिवस को रखवाते है , जिसमें सरकार के गत वर्ष के आय / प्राप्तियाँ एवं व्ययों का ब्योरा होता है ।

भारतीय वित्त वर्ष की शुरुआत 1 अप्रैल से होती है ।  बजट को लागू करने से पूर्व संसद द्वारा पास करना आवश्यक होता है ।

 

भारत में बजट की प्रक्रिया

भारत में बजट निम्न क्रमानुसार संसदीय कार्यक्रमों से होकर गुजरता है |

बजट क्या है

 

 बजट का उद्देश्य

प्रत्येक वर्ष के लिये सरकार पूर्व में ही योजना बना लेती है । जिसमें सरकार की आय के स्रोत जैसे भिन्न – भिन्न करों की वसूली या टैक्स , राजस्व . से आय , सरकारी फीस – जुर्माना , लाभांश , दिये गये ऋण पर ब्याज आदि सभी आय और इन आय को वापस जनता के लिये लगाना बजट का मुख्य उद्देश्य होता है ।

आर्थिक विकास की दर से वृद्धि करना । गरीबी एवं बेरोजगारी को दूर करना । असमानताओं को दूर कर आय का सही योजनाओं में उपयोग करना । बाजार में मूल्य एवं आर्थिक स्थिरता बनाये रखना । अन्य सभी क्षेत्रों रेल , बिजली , वित्त , अनाज , खाद्य पदार्थ , बैंकों के लिये भी फण्ड रखना बजट का उद्देश्य है ।

 

 बजट के प्रकार

मद क्रम बजट

इसको परम्परागत बजट भी कहा जाता है । बजट के इस प्रणाली का विकास 18 वीं शताब्दी में हुआ । इस बजट में वस्तुओं या मद का महत्त्व अधिक होता है । उन मदों या वस्तुओं पर खर्चे से क्या उद्देश्य हासिल होगा इस पर नहीं । इस प्रकार के बजट का उद्देश्य विधायिका द्वारा कार्यपालिका को स्वीकृत धन की बर्बादी आय व्यय तथा दुरूप्रयोग को रोकना है ।

निष्पादन बजट

इस बजट प्रणाली का जन्म अमेरिका में हुआ । इसे पहले क्रियाशील या कार्यकलाप बजट कहा जाता था । सर्वप्रथम हूवर आयोग ने इसे निष्पादन बजट कहा । मद के बजाय खर्चे के उद्देश्य को ध्यान में रखा जाता है । यह प्रत्येक कार्यक्रम और गतिविधि के वास्तविक निष्पादन और वित्तीय निवेश पक्षों के बीच सम्बन्ध स्थापित करती हैं ।

कार्यक्रम बजट 

यह बजट प्रक्रिया अन्य सुधारात्मक बजट प्रक्रियाओं में भी सुधार है जहाँ निष्पादन बजट कार्यकुशलता पर बल देता है और शून्य आधारित बजट व्यय कटौती पर वही कार्यक्रम बजट प्रभावकारिता पर बल देता है । एक कार्य के सभी विकल्पों की संख्या आधारित तुलना इस बजट की महत्त्वपूर्ण विशेषता हैं ।

 शून्य आधारित बजट

इसका जन्म और विकास अमेरिका में हुआ इसका निर्माण पिटर ए पियर ने 1969 में किया जबकि इसका विकास ब्रिटिश अर्थशास्त्री हिल्तंग यंग ने किया । शून्य आधारित बजट की ए तर्क संगत पद्धति हैं इसके अन्तर्गत बजट में सम्मिलित किये जाने से पहले प्रत्येक कार्यक्रम की आलोचनात्मक समीक्षा की जानी चाहिए और शून्य से प्रारम्भ कर सम्पूर्णतया दोबारा सही सिद्ध करना चाहिए

सामान्यतः वार्षिक बजट वित्त मंत्रालयों में उनके बाटे गये विभाग द्वारा बनाये जाते है । जिसकी अंतिम मंजूरी राष्ट्रपति द्वारा दी जाती है जोकि केन्द्र एवं राज्य सरकार दोनों के सम्बन्ध में होती है । रेल बजट , रेल मंत्रालय द्वारा अलग से तैयार किया जाता है

। • इस प्रकार बजट के मुख्य रूप से तो दो ही प्रकार होते हैं ।

  1. केन्द्रीय बजट
  2. रेल बजट

 

 केन्द्रीय बजट •

संसद की दोनों सभाओं के समक्ष रखा जाने वाला वार्षिक वित्तीय विवरण केंद्र सरकार का बजट कहलाता है इस विवरण में एक वित्तीय वर्ष की अवधि शामिल होती है भारत में वित्तीय वर्ष हर वर्ष 1 अप्रैल को आरंभ होता है विवरण में वित्तीय वर्ष हेतु भारत सरकार की अनुमानित प्राप्तियो तथा व्यय का ब्यौरा होता है ‘

केन्द्र सरकार द्वारा प्रस्तुत किया गया सबसे बड़ा बजट जो हर वर्ग के व्यक्ति को ध्यान में रख कर बनाया जाता है । जिसे आम बजट भी कहा जाता है इसमें सभी तरह के प्रावधान होते है जोकि , बिल के रूप में पारित होते है । प्रत्येक वर्ष नये बजट के साथ नये नियम एवं कानून के साथ पारित होते है । केन्द्रीय बजट के कई छोटे – छोटे प्रावधान है, जिनके लिये बजट बनाया जाता है , जैसे : कर प्रावधान, राजस्व एवं व्यय , निवेश , कृषि , शिक्षा , रक्षा ,अन्य प्रावधान

 

रेल बजट ( Rail Budget )

रेल बजट पेश करने की परम्परा की शुरुआत 1924 से हो गया था जबकि वर्ष 2016 में इसे समाप्त कर दिया गया । उससे पहले रेल विभाग के लिए अलग से बजट का प्रावधान नहीं था इस समय रेल के लिए धन की व्यवस्था आम बजट में से किसी अन्य मंत्रालय की तरह से ही की जाती थी ।

सन 1921 में ईस्ट इंडियन रेलवे समिति ने इसे अलग करने की सिफारिश की जिसके परिणामस्वरूप 1924 में रेलवे वित्त मंत्रालय से अलग कर दिया गया तभी से इसके लिए अलग से बजट का प्रावधान कर दिया है ।

भारतीय संविधान में कहीं भी रेल बजट जैसे शब्द का वर्णन नहीं था परंतु पहले अनुच्छेद 112 तथा 204 के अंतर्गत रेल बजट पेश होता था । 1924 में रेल बजट भारत के आम बजट का 70 प्रतिशत था जो वर्ष 2016 तक लगभग 14-15 तक रह गया था । परंतु अब केन्द्र सरकार ने रेल बजट को अलग से पेश करने की व्यवस्था को समाप्त करते हुए 21 सितंबर , 2016 को इसे आम बजट में मिलाने का फैसला किया है । वर्ष 2016 रेल और आम बजट के अलग होने का आखिरी साल है ।

वित्त वर्ष 2017-18 के लिए केन्द्र सरकार एक ही बजट लाएगी । हालांकि इसके बावजूद रेलवे स्वतंत्र इकाई के तौर पर काम करता रहेगा ।

 

बजट दस्तावेज

वार्षिक वित्तीय विवरण के साथ-साथ सरकार निम्नलिखित दस्तावेज प्रस्तुत करती है |

चालू वर्ष और अगले वर्ष के दौरान प्राप्तियो और व्यय की प्रकृति स्पष्ट करने वाला एंव 2 वर्षों के अनुमानों में भिन्नता के कारणों को दर्शाने वाला एक संक्षिप्त व्याख्यात्मक ज्ञापन मंत्रालयवार प्रधानों को दर्शाने वाली मांगों की सूची तथा मंत्रालय के प्रत्येक विभाग तथा सेवा के लिए पृथक मांग तैयार होता है ‘

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वित्त विधेयक जो कि सरकार द्वारा प्रस्तावित कराधान उपयोग  से संबंधित है जो बजट पेश किए जाने के तुरंत बाद पुनः स्थापित किया जाता है इसके साथ एक ज्ञापन प्रस्तुत किया जाता है जिसमें विधेयक के उपबंधो और देश के वित्त पर इनके प्रभाव को स्पष्ट किया जाता है

 

 भारतीय बजट : एक नजर में

आजादी से पहले अंतरिम सरकार का बजट लियाकत अली खां ने पेश किया था । यह बजट 9 अक्टूबर , 1946 से लेकर 14 अगस्त , 1947 तक का था ।  इसके बाद आजाद भारत का पहला बजट तत्कालीन वित्त मंत्री आर . के . षणमुखम चेट्टी ने 26 नवंबर , 1947 में पेश किया था ।

सबसे अधिक आम बजट पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय मोरारजी देसाई ने 10 बार पेश किए हैं । पी चिदंबरम ने 8 बार आम बजट पेश किया है । इसके अलावा प्रणब मुखर्जी मौजूदा राष्ट्रपति , यशवंत सिन्हा , वाई बी चव्हाण और सी डी देशमुख ने 7-7 बजट पेश किए हैं । प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वित्त मंत्री के रूप में 6 बजट पेश किए हैं । वहीं देश के चौथे वित्त मंत्री टी टी कृष्णमाचारी ने भी 6 बजट पेश किए ।

अन्य लोगों में आर वेंकटरमन और एच एम पटेल ने तीन – तीन , जसवंत सिंह , वी पी सिंह , सी सुब्रमण्यम , जॉन मथाई और आर के षणमुखम चेट्टी ने दो – दो बजट पेश किए हैं । इनके अलावा जवाहर लाल नेहरू , इंदिरा गाँधी , राजीव गाँधी , चरण सिंह , एनडी तिवारी , मधु दंडवते , एस बी चव्हाण और सचिंद्र चौधरी ने एक – एक बजट पेश किया है ।

नेहरू , इंदिरा और राजीव गाँधी ने प्रधानमंत्री के साथ वित्त मंत्री भी रहते हुए बजट पेश किए थे । चरण सिंह ने एक बार और मोरारजी देसाई ने चार मौकों पर उपप्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के रूप में बजट पेश किए ।

पहला मिनी बजट टी टी कृष्णमाचारी ने 30 नवंबर , 1956 को वित्त विधेयक के जरिये ताजा कराधान प्रस्ताव के रूप में पेश किया था । उस समय की घरेलू और आर्थिक परिस्थितियों की वजह से इसे पेश किया गया था ।

दूसरा इसी प्रकार का बजट कराधान प्रस्ताव भी कृष्णमाचारी ने अगस्त , 1965 में पेश किया ।

तीसरा मिनी बजट वाई बी चव्हाण ने दिसंबर , 1971 में पेश किया । इसमें रक्षा जरूरतों के लिए संसाधन जुटाने के अतिरिक्त उपायों का प्रस्ताव किया गया । आखिरी मिनी बजट प्रस्ताव भी चव्हाण ने जुलाई , 1974 में पेश किया ।

 

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