बाल विवाह एक महामारी  एवं भारत में इसकी स्थिति क्या है

कोरोना महामारी में केवल आर्थिक स्तर पर लोगों की जान को खतरा नहीं पहुंचाया है बल्कि एक सामाजिक बुराई बाल विवाह जैसी महामारी को फैलाने में योगदान भी दिया है | लड़का हो या लड़की या दोनों में से किसी की भी उम्र 18 साल से कम होने पर होने वाली औपचारिक एवं गैर औपचारिक शादी को बाल विवाह कहा जाता है |

हाल ही में कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक फैसले में इस बात को चिन्हित किया की स्कूल ना जाने की वजह से बाल विवाह और बाल श्रम जैसे मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है  | महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने मार्च से जून के बीच बाल विवाह के लगभग 5584 मामलों दर्ज किए |

वैश्विक स्तर पर हर साल 12 मिलियन लड़कियों की शादी 18 साल से कम उम्र में कर दी जाती है. जिसका मतलब यह हुआ कि हर मिनट 23 लड़कियां और हर 3 सेकेंड पर एक लड़की बाल विवाह में धकेल दी जाती है. ऐसे वक्त में जब हम समानता एवं स्वतंत्रता जैसे मूल्यों की बात करते हैं बाल विवाह जैसी अवधारणा का बने रहना और उसे अमल में लाना सभ्य समाज पर कलंक लगाता है |

सभी समाज में बाल विवाह मानव विकास के लिए एक नकारात्मक सूचक है | बाल विवाह की कुरीति ना केवल बचपन से उनका बचपन छिनती है, बल्कि आने वाले भविष्य को भी एक   अस्वास्थ्य और अशिक्षित पीढ़ी देती है. विवाह से कुछ जिम्मेदारियां अपने सपने पूरा करने के अधिकार से वंचित कर देती है |

भारत में बाल विवाह के आंकड़े

  • भारत में 27 फ़ीसदी लड़कियों के शादी उनके 18 वे जन्मदिन से पहले हो जाती है |
  • 15 साल से कम उम्र में होने वाले विवाहों की दर 7% और 18 साल से कम उम्र में होने वाले विवाह की दर 27% है|
  • जबकि 4 फ़ीसदी लड़कों की शादी उनके 18 में जन्मदिन से पहले हो जाती है |
  • बाल विवाह की समस्या का स्तर पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में अधिक है |
  • 18 साल से कम उम्र में लड़कियों की शादी की संख्या के मामले में भारत पहले स्थान पर है |
  • भारत में बाल विवाह के मामले शहरी क्षेत्र की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्र में अधिक है |
  • आमतौर पर भारत के मध्य एवं पश्चिमी विश्व में बाल विवाह की दर अधिक है राजस्थान और बिहार के राज्यों में बाल विवाह की दर 47 से 51 फ़ीसदी तक पाई जाती है |
  • चाइल्ड ब्राइड कि सबसे अधिक संख्या उत्तर प्रदेश में देखने को मिलती है | इस मामले में एक अच्छी बात यह है कि जैसे-जैसे भारत ने समृद्धि हासिल की है चाइल्ड ब्राइट की मामलों में कमी देखी गई है
  • 1970 में करीब 75 फ़ीसदी महिलाओं की शादी 18 साल की उम्र से पहले कर दी जाती थी वर्तमान में यह दर 27 फ़ीसदी है

बाल विवाह से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों के बारे में

बाल विवाह से उत्पन्न होने वाले सबसे बड़ी चुनौती यह है कि व्यक्ति की स्वयं की विकास के अधिकार से वंचित हो जाना | कम उम्र में शादी हो जाने से शिक्षा के अवसर सीमित हो जाते हैं | जिससे आर्थिक स्वतंत्रता का हनन होता है जो कि अंत में व्यक्ति के निर्णय लेने की क्षमता को बाधित करता है |

बाल विवाह के मामलों में लड़कियों की संख्या अधिक है इसलिए वैश्विक स्तर पर महिलाओं की आर्थिक भागीदारी में कमी देखी जाती है महिला के साथ यह समानता और भी बढ़ जाती है |

शिक्षा स्वास्थ्य एवं सुरक्षा जैसे मूलभूत अधिकारों के उल्लंघन में भी बाल विवाह की बड़ी भूमिका है . चाइल्ड ब्राइट ,मानसिक और शारीरिक तौर पर मां और पत्नी बनने के लिए तैयार नहीं होते हैं .इसलिए उन्हें प्रेगनेंसी और बच्चे की जन्म देने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है |

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक 15 से 49 साल की महिलाओं में 53 फ़ीसदी और किशोरियों में 54 फ़ीसदी एनीमिया की समस्या पाई जाती है|

कम उम्र में विवाह होने से जनसंख्या में वृद्धि होती है जिससे जननांगकीये लाभांश का फायदा नहीं मिलता ।

देरी से विवाह होने पर फर्टिलिटी रेट कम हो जाती है जिससे बच्चे कम पैदा होते हैं. किसी भी परिवार में कम बच्चे होने पर उनके शिक्षा और स्वास्थ्य में अधिक निवेश होता है जिसका सीधा असर जननांगकीये लाभांश पर पड़ता है ।

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बाल विवाह से मातृत्व मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर में वृद्धि होती है  | कम उम्र में मां बनने पर मां और बच्चा दोनों की जान को खतरा रहता है

बाल विवाह जैसे कुरीतियों के जिम्मेदार

दरअसल  पितृसतात्मक समाज में लड़कियां एक बोझ एवं जिम्मेदारी मानी जाती है  | कम उम्र में शादी कर देने पर यह जिम्मेदारी दूसरे घर को सौंप दी जाती है|  जन्म देने वाला परिवार कन्यादान कर के खुद को इस जिम्मेदारी से मुक्त मान लेता है  |

दहेज जैसी कुप्रथा भी बाल विवाह को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभाती है|  लड़कियों को शिक्षित करने के बाद उनकी शादी में दहेज भी देना होता है| ऐसे में परिवार दहेज के लिए धन बचाना जरूरी समझता है|  कम उम्र में बिना शिक्षा पर खर्च करके शादी कर देना एक बेहद बेहतर विकल्प माना जाता है  |

भारत में दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 के जरिए दहेज पर प्रतिबंध लगाया गया है .लेकिन आज भी यह प्रथा भारतीय शादियों में देखने को मिलता है. महिलाओं के प्रति होने वाले अपराध भी बाल विवाह को बढ़ावा देते हैं|  तमाम सुरक्षा कानूनों के बावजूद महिलाएं समाज में सुरक्षित नहीं है |

परिवार को उनकी सुरक्षा की चिंता जन्म लेते ही होने लगती है. लोग कम उम्र में लड़कियों की शादी करके उन्हें यौन हिंसा जैसे अपराधों से सुरक्षित मान लेते हैं |

भारत में संतान के रूप में पुत्र की इच्छा आमतौर पर हर परिवार में पाई जाती है | पुत्र को पाने के लिए बार-बार संतान को जन्म देने से बेटियों की संख्या अधिक हो जाती है ऐसे में अगर परिवार आर्थिक तौर पर संपन्न है और शिक्षा के अवसर मुहैया कराता है तो समस्या नहीं है  | वरना गरीब परिवारों में ऐसी स्थिति में बाल विवाह को अंतिम विकल्प माना जाता है|

भारत में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के जरिए 14 साल के बच्चों के लिए निशुल्क शिक्षा का प्रावधान किया गया है लेकिन उच्च शिक्षा में ऐसे प्रावधान नहीं है | 14 साल की उम्र के बाद लड़कियों में स्कूल ड्रॉप आउटलेट भी अधिक है|  अधिकांश मामलों में उनकी शादी कर दी जाती हैं|

बेटी की शादी जल्दी कर देने से घर के कामों के लिए एक व्यक्ति मिल जाता है यह ऐसे काम होते हैं जिनके कोई आर्थिक मूल्य नहीं होता इससे देश की आर्थिक प्रगति में भी बाधा पहुंचती है | अगर कम उम्र में शादी नहीं की जाती तो शिक्षा हासिल करके आर्थिक कार्य बल में शामिल होने की संभावना रहती है |

कोरोना काल में मजदूरों का एक बड़ा वर्ग शहरों से पलायन करके गांव गया है .एक लंबे समय से स्कूल बंद है ,इसे बाल विवाह की संख्या में भी वृद्धि हो रही है |

बाल विवाह को रोकने के प्रयास

स्वतंत्रता से पहले ब्रह्म समाज और आर्य समाज ऐसे संस्थाओं ने बाल विवाह की समस्याओं को लोगों के सामने रखा. 1860 में इडियन पेनल कोड में 10 साल से कम उम्र के लड़की के साथ सेक्सुअल इंटरकोर्स को अपराध घोषित किया गया |

बाद में महिला अधिकारों से संबंधित समूह द्वारा ब्रिटिश सरकार पर दबाव बनाया गया और एज ऑफ कांस्टेंट बिल 1927 के जरिए 12 साल से कम उम्र की लड़की के साथ शादी को गैर विधि बनाया गया |

बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 1929 के जरिए लड़कियों के लिए शादी की उम्र 14 और लड़कों के लिए 18 साल तय की गई थी|  यह अधिनियम 1930 में लॉर्ड इर्विन द्वारा लागू किया गया  | इसे हरविलास शारदा के नाम पर शारदा एक्ट के नाम से भी जाना जाता है  |यह अधिनियम जोशी समिति की सिफारिश पर लाया गया था  |

1978 में संशोधन करके लड़कों के लिए 21 साल और लड़कियों के लिए 18 साल शादी की न्यूनतम उम्र तय की गई थी. स्वतंत्रता के बाद बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 लागू किया गया .

इस अधिनियम के जरिए बाल विवाह संघीय और गैर जमानती है | अपराध घोषित किया गया था यहां बाल विवाह से मतलब शादी के लिए निर्धारित न्यूनतम आयु से है इसमें कोई भी ऐसा व्यक्ति जो बाल विवाह करता है या करवाता है या करने की निर्देश देता है उसके लिए सजा का प्रावधान है |

सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर लोगों को बताया है कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 को पर्सनल लॉक के मुकाबले ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी | भारत सतत विकास लक्ष्य संख्या 5.3 के तहत 2030 तक बाल विवाह के उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध है |

भारत ने कन्वेंशन ऑन द एलिमिनेशन ऑफ ऑल फॉर्म्स ऑफ डिस्क्रिमिनेशन अगेंस्ट वूमेन को 1993 में सर्टिफाइड किया था. यह कन्वेंशन देशों को स्वतंत्र एवं इच्छा से विवाह को लागू करने की दिशा में कार्यरत है |

भारत South Asian initiative to End violence against children का सदस्य है | 2014 में सार्क देशों ने Kathmandu call to the action to end child marriage in Asia पर प्रतिबद्धता जताई थी |

बीते दिनों जिस सरकार ने इस मसले पर जया जेटली टास्क फोर्स का गठन किया है . राजस्थान बिहार झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में राज्य स्तर पर बाल विवाह को रोकने के लिए स्टेट एक्शन प्लान तैयार किए हैं |

आगे की राह क्या हो 

समस्या का समाधान तभी निकाला जा सकता है| जब उसे समस्या माना जाए समाज के स्तर पर इस कुरीति से निपटने के लिए इस बात को स्वीकार्यता दिलाने की जरूरत है कि बाल विवाह एक समस्या है |

  • समाज में आज भी कभी धार्मिक रीति रिवाज के नाम पर कभी किसी प्रथा को आधार बनाकर इसे सही ठहराया जाता है. सरकार के स्तर पर भी उच्च शिक्षा में लड़कियों को बढ़ावा देने के लिए कुछ प्रावधानों की जरूरत है  |
  • 18 साल तक शिक्षा को अनिवार्य बनाया जा सकता है |
  • शादी के वक्त ही मैरिज रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य किया जाए जिससे चोरी छिपे होने वाली बाल विवाह को रोका जा सकता है |
  • जिस तरह यौन हिंसा की शिकायत के लिए शिवबॉक्स लाया गया वैसे ही बाल विवाह की जानकारी देने के लिए पंचायत स्तर पर कोई बॉक्स लगाया जा सकता है | जिससे उस संबंध में जानकारी देना आसान हो सकता है |
  • महिला शिक्षा के साथ-साथ रोजगार परक शिक्षा के लिए भी प्रयास की जरूरत है |
  • आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने पर अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय में भी वे स्वयं भागीदार बन सकेंगे |
  • महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति कम उम्र में ही जागरूक करने की आवश्यकता है जिससे जरूरत के वक्त वे उनका इस्तेमाल कर सके |
  • इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर भी एक मजबूत कानून को लागू करने की आवश्यकता है | जिससे बाल विवाह को अंजाम देने वाले लोग किसी भी कानूनी दांवपेच का इस्तेमाल करके बच ना सके ।
  • अशिक्षा और गरीबी प्रमुख तौर पर बाल विवाह के लिए जिम्मेदार हैं इन से निपट कर ही बाल विवाह की महामारी से मुक्ति मिल पाएगी

 

 

 

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