बेरोजगारी पर निबंध

आज के इस आर्टिकल में हमलोग बेरोजगारी पर निबंध एवं भारत में बेरोजगारी पर 1200 शब्दों में पूरी बिस्तार से जानकारिया प्रदान करेगे | जिससे की आपको बेरोजगारी से संबधित कोई भी डायुट ना रहे |

बेरोजगारी का आशय लोगों की उस स्थिति से है जिसमें वे प्रचलित मजदूरी दरों पर काम करने के इच्छुक तो होते हैं परन्तु उन्हें काम नहीं, प्राप्त होता है ।

भारत में बेरोजगारी पर निबंध ,

भारत में शहरों की तुलना में गाँवों में पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में तथा अशिक्षित लोगों की अपेक्षा शिक्षित लोगों में बेरोजगारी अधिक है । भारत में प्रमुख रूप से तीन तरह की बेरोजगारी ( मौसमी बेरोजगारी , अदृश्य बेरोजगारी और अल्परोजगार ) पाई जाती है ।

 बेरोजगारी के विभिन्न स्वरूप

  1. संरचनात्मक बेरोजगारी ( Structural Unemployment ) : औद्योगिक जगत में उद्योगों में संकुचन एवं विस्तार जैसे संरचनात्मक परिवर्तनों के परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाली बेरोजगारी को संरचनात्मक बेरोजगारी कहते हैं ।
  2. अदृश्य बेरोजगारी ( Disguised Un employment ) : इस प्रकार की बेरोजगारी उत्पादन कार्य में जरूरत से अधिक श्रमिक लगे होते हैं । फलत : उनकी सीमांत उत्पादकता शून्य होती है । • सामान्यतः कृषि में ऐसे बेरोजगारी की अधिकता पायी जाती है ।
  3. खुली बेरोजगारी ( Open Unemployment ) : बिना काम – काज के पड़े रहने वाले श्रमिकों को खुली बेरोजगारी में रखा जाता है । शिक्षित और साधारण बेरोजगार इसमें शामिल हैं ।
  4. घर्षणात्मक बेरोजगारी ( Frictional Unemployment ) : बाजार की दशाओं में परिवर्तन होने से उत्पन्न बेरोजगारी को घर्षणात्मक बेरोजगारी कहते हैं ।
  5. मौसमी बेरोजगारी ( Seasonal Unemploy ment ) : किसी विशेष मौसम या अवधि में प्रतिवर्ष उत्पन्न होने वाली बेरोजगारी को इसमें सम्मिलित किया जाता है ।
  6. स्वैच्छिक बेरोजगारी ( Voluntary Unemployment ) : इस प्रकार की बेरोजगारी तब पाई जाती है , जब कार्यकारी जनसंख्या का एक अंश या तो रोजगार में दिलचस्पी ही नहीं रखता या प्रचलित मजदूरी दरों से अधिक दर पर काम करने के लिए तैयार होता है ।
  7. अनैच्छिक बेरोजगारी ( Involuntary Unemployment ) : जब लोग मजदूरी की प्रचलित दरों पर भी काम करने को तैयार हों और उन्हें काम नहीं मिले तो उसे अनैच्छिक बेरोजगारी कहते हैं ।
  8. अल्प रोजगार ( Under employment ) : यह ऐसी स्थिति है जिसमें श्रमिकों को काम तो मिलता है , परन्तु वह उसकी आवश्यकता और क्षमता से कम होता है ।

 बेरोजगारी पर निबंध

 

भारत में बेरोजगारी के कारण :

 भारत में बेरोजगारी के निम्न प्रमुख कारण हैं– ( i ) मंद विकास गति ( ii ) उच्च जनसंख्या वृद्धि दर ( ii ) श्रम प्रधान तकनीक की तुलना में पूंजी प्रधान तकनीक को बढ़ावा ( iv ) प्राकृतिक संसाधनों का असमान वितरण ( v ) लघु एवं कुटीर उद्योगों का अपर्याप्त विकास ( vi ) व्यावसायिक शिक्षा को कम महत्व दिया जाना ।

 निर्धनता या गरीबी : निर्धनता या गरीबी को आमतौर पर न्यूनतम स्तर वाली आय में रहने वालों और कम उपभोग करने वालों के अर्थ में परिभाषित किया जाता है । व्यक्तियों या परिवारों द्वारा जो स्वास्थ्य , सक्रिय और सभ्य जीवन के लिए न्यूनतम आवश्यकताओं को वहन नहीं कर पाते , को निर्धनता या गरीब कहा जाता है ।

 निर्धनता मापन की विभिन्न समितियाँ

तत्कालीन योजना आयोग ने सितम्बर , 1989 में प्रो . डी टी लकडावाला की अध्यक्षता में एक विशेष समूह की नियुक्ति की , जिसने प्रति व्यक्ति कैलोरी उपभोग को आधार बनाते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में 2400 कैलोरी प्रति व्यक्ति तथा शहरी क्षेत्रों में 2100 कैलोरी प्रति व्यक्ति उपभोग को आधार माना ।

भारत में सर्वप्रथम गरीबी का अध्ययन श्री बी एस मिन्हास ने किया और उन्होंने 1956-57 तथा 1967-68 के बीच ग्रामों के निर्धनों के प्रतिशत में कमी होने के संकेत दिए ।

  • लॉरेज वक्र द्वारा किसी देश के लोगों के बीच आय विषमता को मापा जाता है ।
  • गिनी गुणांक को इटैलियन कोरेडो गिनी ने विकसित किया था ।

 लकड़ावाला समिति

  • इस समिति ने अपने फॉर्मूले में शहरी निर्धनता के आकलन के लिए औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक एवं ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को आधार बनाया ।

 सुरेन्द्र तेन्दुलकर समिति

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति के पूर्व अध्यक्ष सुरेश तेन्दुलकर की रिपोर्ट गरीबी का आँकड़ा 37.2 % बताती है । .देश में निर्धनता अनुपात का आकलन योजना आयोग द्वारा राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन ( NSSO ) के माध्यम से किया जाता था ।

  • इसके अनुसार 2012 में गरीबी रेखा के नीचे 22 % लोग थे ।

निर्धनों की निरपेक्ष संख्या के मामले में उत्तर प्रदेश का स्थान जहाँ सबसे ऊपर है , वहीं निर्धनता अनुपात के मामले में ( कुल जनसंख्या में निर्धन जनसंख्या का प्रतिशत ) ओडिशा ( 46.8 % ) का स्थान सर्वोच्च है ।

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भारत के राज्यों में न्यूनतम निर्धनतादर जम्मू – कश्मीर में है , जबकि सम्पूर्ण भारत में सबसे कम निर्धनता अण्डमान निकोबार ( 0.4 % ) में है ।

 रंगराजन समिति .

रंगराजन समति के अनुसार शहरों में प्रतिदिन 47 रुपए तक खर्च कर सकने वाले व्यक्ति को ही गरीब की श्रेणी में रखा जाए , जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह सीमा 32 रुपए है । • औसत माहवार खर्च के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में 972 रुपए प्रतिमाह से कम तथा शहरों में 1407 रुपए से कम प्रतिमाह कमाने वालों को गरीब माना जाएगा ।

बेरोजगारी पर निबंध
भारत में बेरोजगारी

  गरीबी रेखा ( Poverty Line ) :

निरपेक्ष गरीबी रेखा प्रायः आय के रूप में न परिभाषित किया जाता है । यह एक औसत प्रति व्यक्ति के लिए न्यूनतम ऊर्जा या कैलोरी की आवश्यकता के रूप में परिभाषित किया जाता है ।

इस परिभाषा के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में एक व्यक्ति के प्रतिदिन के भोजन में 2400 कैलोरी तथा शहरी क्षेत्र में एक व्यक्ति के प्रतिदिन भोजन में 2100 कैलोरी न प्राप्त करने वालों को गरीबी रेखा के नीचे माना जाता है ।

  • सापेक्ष निर्धनता : सापेक्ष निर्धनता से अभिप्राय विभिन्न वर्गों , प्रदेशों तथा देशों की तुलना में पाई जाने वाली निर्धनता से है ।
  •  निरपेक्ष निर्धनता निरपेक्ष निर्धनता से क अभिप्राय किसी देश की आर्थिक अवस्था को ध्यान में रखते हुए निर्धनता के माप से है ।
  • निर्धनता रेखा वह रेखा है जो उस प्रति व्यक्ति औसत मासिक व्यय को प्रकट करती है जिसके द्वारा लोग अपनी न्यूनतम आवश्यकताओं को संतुष्ट करते हैं ।

 निर्धनता के कारण :

. राष्ट्रीय उत्पाद का निम्न स्तर

• विकास की कम दर

• कीमतों में ना न वृद्धि

• जनसंख्या का दबाव .

• बेरोजगारी पूंजी की कमी

• कुशल श्रम एवं तकनीकी ज्ञान की कमी

• उचित औद्योगिकरण का अभाव सामाजिक संस्थाएँ ।

 

प्रमुख निर्धनता निवारण एवं रोजगार कार्यक्रम.

प्रधानमंत्री रोजगार योजना ( PMRY ) 2 अक्टूबर1993 : भारत में उद्योग तथा सेवा क्षेत्र में सात लाख लघु उत्तर इकाइयां स्थापित करके 10 लाख से ज्यादा व्यक्तियों को रोजगार उपलब्ध कराना ।

मिड डे मील योजना ( MDM ) 1995 : कक्षा 8 तक के बच्चों को उच्च पोषक तत्व युक्त दोपहर का भोजन उपलब्ध करा के स्कूलों में बच्चों की संख्या में वृद्धि करना

मिशन इंद्रधनुष ( 25 दिसंबर 2014 ) : सात टिका का निवारणीय बीमारियों डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटनेस, पोलियो, टीवी ,खसरा और हैपेटाइटिस बी का 2020 तक ऐसे सभी बच्चों का टीकाकरण करना है जिन्हें आंशिक रूप से टीका लगा है या इससे वंचित है

प्रधानमंत्री जनधन योजना ( 28 अगस्त 2014  ) : भारत में वित्तीय समावेशन पर राष्ट्रीय मिशन इनका उद्देश्य देशभर में सभी परिवारों को बैंकिंग सुविधाएं मुहैया कराना है |

 

बेरोजगारी पर राज्य सरकार की योजनाएं.

अम्मा सीमेंट योजना तमिलनाडु ( 5 जनवरी 2015 ) :  राज्य सरकार हर महीने निजी कंपनियों से 2 लाख टन सीमेंट खरीदेगी और ₹190 प्रति बोरी के दर से राज्य में आम लोगों को बेचेगी ।

माझी कन्या भाग्यश्री योजना महाराष्ट्र ( 8 मार्च 2015 ) राज्य सरकार गरीबी रेखा परिवार में पैदा हुई लड़की के लिए बैंक में ₹21200 की राशि जमा करेगी | etc

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