भारतीय वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमान

भारतीय वायुसेना ने 88वीं स्थापना दिवस पर आकाश में अदम्य सौर्य और शक्ति का प्रदर्शन किया|  गाजियाबाद के हिंडन एयर बेस पर वायु सेना के आन बान और शान देखने को मिली |  एयरफोर्स के बेरे में राफेल को भी अपनाया गया है. रफेल के अलावा हवाई सेना के कई अन्य लड़ाकू विमान ने इस दौरान अपनी ताकत दिखाई ।

भारतीय वायु सेना की ताकत से पूरी दुनिया परिचित है| वायुसेना के पास लड़ाकू विमानों के बड़ा बेरा है इसके अलावा भारतीय वायुसेना के पास हेलीकॉप्टर और परिवहन विमानों का भी बारा गुनवा है. इसके साथ ही देश में निर्मित हल्के लड़ाकू विमान तेजस ने वायुसेना की ताकत में काफी इजाफा किया है|

भारत उन देशों में शामिल है जिनके पास सैन्य विमानों के लिए हवा में उड़ान के दौरान इंधन भरने की प्रणाली है साथ ही भारतीय वायुसेना के पास अब राफेल विमान भी हैं जो वायु सेना की ताकत और भी बढ़ा रही है |

ताकत की बात करें तो दुश्मनों दुश्मनों के आक्रमण को आसमान में ही ध्वस्त करने के लिए भारतीय वायुसेना के पास एक से बढ़कर एक लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर हैं|  भारत के पास सभी तरह के विमान मौजूद हैं भारतीय वायुसेना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायु सेना है बीते कुछ सालों में भारतीय वायु सेना ताकतवर सेना में तब्दील  हुई है |

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भारतीय वायुसेना के प्रमुख वायुयाने

राफेल 

इसकी की लंबाई 15.27 m है एवं  इसमें एक या दो पायलट  बैठ सकेगे  राफेल 1 मिनट में लगभग 60000 fit  की ऊंचाई तक करता है या अधिकतम 24500 किलोग्राम का भार उठाने में सक्षम है |इसकी अधिकतम रफ्तार 2200 से 2500 किलोमीटर प्रति घंटा है यह 3800 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है इसके साथ ही रफेल परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम है|

सुखोई 30 एमकेआई

रूस में निर्मित 2 सीटों और दो इंजनों वाला बहू उपयोगी लड़ाकू विमान है .यह एक्स 30 mm गन के साथ 8000 किलोग्राम हथियार ले जाने में सक्षम है या विमान एक्टिव या semi-active रडार या इंफ्रारेड होमिंग क्लोज रेंज मिसाइल के साथ अलग-अलग की मध्यम दूरी की हवा से हवा में मार करने वाले निर्देशित मिसाइल को ले जाने में सक्षम है | इसकी अधिकतम गति 25 00किलोमीटर प्रति घंटा है |

मिराज 2000

फ्रांस में बना 1 सीट वाला हवाई रक्षा और बहु उपयोगी लड़ाकू वायुयान है जो एक इंजन से संचालित होता है यह 2450 किलोमीटर की रफ्तार से उड़ान भर सकता है यह बाहरी स्टेशनों पर 230 मिली मीटर इंटीग्रल कैनन और दो मेट्रा सुपर 530डी मध्यम दूरी और दो आर 550 मैजिक क्लोज कॉम्बैट मिसाइलें ले जाने में सक्षम है |

मिग 29

रूस में बना दो इंजन और एक सीट बेहतरीन हवाई क्षमता वाला यान है । यह 2445 किलोमीटर प्रति घंटा की अधिकतम गति हासिल कर सकता है | इसकी लड़ाकू रेंज 17 किलोमीटर है | 36mm केबिन के साथ चार R 60 क्लोज कॉम्बेट और दो R 27 मधम दूरी के रडार निर्देशित मिसाइल ले जाने में सक्षम है |

मिग-27

रूस में बना एक इंजन और 1 सीट वाला शामली हमलावर लड़ाकू विमान है या यह 17 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से उड़ान भर सकती है | यह एक 23mm 6 बैरल रोटरी इंटीग्रल कैनन और 4000 किलोग्राम के हथियार ले जाने में सक्षम है |

मिग -21 बायसन

रूस में बना एक इंजन और 1 सीट वाला बहु उपयोगी लड़ाकू विमान है| यह जमीन पर हमला करने वाला वायुयान है .जो भारतीय वायुसेना का मजबूत आधार स्तंभ है. इसकी अधिकतम गति 2230 किलोमीटर प्रति घंटा है यह विमान 23 मिलीमीटर दोहरे बैरल कैनन और 4 R6 0क्लोज कॉम्बैट मिसाइल ले जाने में सक्षम है.|

जगुआर

जैगुआर एंग्लो फ्रांस निर्मित दो इंजन और 1 सीट वाला स्ट्राइक वायुयान है जो अंदर तक जाकर मार करने में सक्षम है | इसकी अधिकतम गति 1350 किलोमीटर प्रति घंटा है इसमें दो 30 एमएम गन होती है और यह दो R15 मैजिक सीसीएम के साथ 4750 किलोग्राम बम इंधन ले जा सकता है |

हेलीकॉप्टर

एम आई 25 / एम आई -35

यह दो इंजनों वाला हेलीकॉप्टर है | यह 8 लोगों को ले जाने में सक्षम है या 12.7 मी मी रोटरी गन और पंद्रह सौ किलोग्राम बाहरी अस्त्र-शस्त्र ले जाने में सक्षम है इसमें एंटी टैंक मिसाइल भी शामिल है | इसकी अधिकतम क्रूज गति 310 किलोमीटर प्रति घंटा है |

एम आई 26

यह दो इंजन वाला टर्बो सैफ्ट हेलीकॉप्टर है इसकी 70 लड़ाकू सैनिकों या 20000 किलोग्राम पेलोड ले जाने में सक्षम है इसकी अधिकतम गति 295 किलोमीटर है |

mi-17 v5 हेलीकॉप्टर

यह शक्तिशाली प्लेटफार्म और ग्लास कॉकपिट उपकरण से सुसज्जित है यह हेलीकॉप्टर नौवहन उपकरण और मौसम रडार से लैस है |

चीता

यह एक इंजन वाला टर्बो सेट एफ ए सी हेलीकॉप्टर है जो 3 यात्रियों या 100 किलोग्राम एक्सटर्नल सीलिंग लोड वाहन कर सकता है |

अपाचे हेलीकॉप्टर

अपाचे 2 टर्बो सॉफ्ट इंजन और 4 ब्लड वाला अटैक हेलीकॉप्टर है | यह अपने आगे लगे सेंसर की मदद से रात में भी उड़ान भर सकता है | इस हेलीकॉप्टर में 16 एंटी टैंक और AGM 114  हेलफायर और स्ट्रिंगर मिसाइल सेलदा हुआ है

चिनूक हेलीकॉप्टर

यह एडवांस मल्टी मिशन हेलीकॉप्टर है. यह 9.6 टन का भार लेकर काफी ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है. साथ ही चिनूक भारी मशीनरी और हथियार भी ले जा सकता है | यह दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में भी कारगर तरीके से उड़ान भर सकता है और इसका इस्तेमाल सैनिकों को एक जगह से दूसरे जगह पर ले जाने के साथ-साथ आपदा राहत कार्यों में भी किया जा सकता है ।

भारतीय वायुसेना ( Indian Air Force )  द्वारा की गई मिशन 

आजादी मिलने के साथ ही एयर फोर्स की जिम्मेदारियां भी बढ़ गई थी और देश को हर मुश्किल से निकालने में एयर फोर्स ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी . देश के विभाजन का असर बाकी संस्थानों के साथ-साथ भारतीय वायु सेना पर भी पड़ा वायु सेना को कई अस्थाई वेस्ट और कई अन्य संस्थाएं भी गंवानी पड़ी |   कश्मीर हथियाने के लिए सीमा पार से जम्मू और कश्मीर में बड़ी संख्या में घुसपैठ हो रही थी |

भारतीय वायुसेना

27 अक्टूबर 1947 को एयर फोर्स की नंबर 12 स्क्वायड ने पालम से सिख हवाई योद्धाओं को ले जाकर श्रीनगर पहुंचा दिया | इसके अलावा अंबाला में मौजूद एडवांस भलाई स्कूल से स्पीड फायर वालों से श्रीनगर में हमलावरों से छिपकर गोलाबारी करने में जुट गई | आजादी के बाद भारतीय वायु सेना कई अभियानों में शामिल हुई, जिसमें अंतरराष्ट्रीय अभियान भी शामिल है | लेकिन एयरफोर्स के लिए और असली परीक्षा शुरू हुई 1962 में भारत -चीन सीमा पर युद्ध शुरू हो गया |

विश्व युद्ध में वायु सेना के परिवहन और हेलीकॉप्टर यूनिपुणे बेहद ऊंचाई पर स्थित सीमा चौकियों की मदद के लिए 24 घंटे सैनिकों को भेजने और सामान पहुंचाने के लिए उड़ान भरी |

इस संघर्ष के दौरान भारतीय वायुसेना ने काराकोरम हिमालय पर्वत श्रेणियों और समुद्र तल से 17000 फुट ऊपर वाहनों का परिचालन और हल्के टैंक को को हवाई मार्ग से लद्दाख में उतारने का काम भी किया

इसके बाद 1965 में पाकिस्तान की ओर से छम सेक्टर में बड़े हमले के बाद जब भारतीय बलों के लिए जमीन पर खतरा पैदा हो गया तो पाकिस्तानी सेना के विरुद्ध हवाई हमले के जरिए भारतीय वायुयानो  ने पाकिस्तानी बख्तरबंद सेना को लड़खड़ा दिया | इस तरह 1965 के युद्ध में भी भारतीय वायुसेना ने अपनी परचम लहराए ।

1971 के युद्ध में भी भारतीय वायुसेना ने पश्चिम में दुश्मन के संचार को बाधित किया और पूर्वी सीमा पर वायुयान और हेलीकॉप्टर से हमले किए जा रहे थे | पश्चिमी रेगिस्तान में हवाई कार्रवाई में जैसलमेर में मौजूद वायुयानो ने लोंगे वाला में एक पूरी हथियारबंद रेजीमेंट को खत्म कर दिया और इस तरह दुश्मन के हमले पर पूरी तरह से विराम लग गया  |

यही नहीं 1999 के कारगिल युद्ध में भी भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर हवाई सहायता में जुटे हुए थे तो ऑपरेशन सफेद सागर के जरिए तो पूरे कारगिल क्षेत्र में हवाई ऑपरेशन को भी अंजाम दिया गया ।

फरवरी 2019 में सेना पर हुए आतंकी हमले पर मुंह तोड़ जवाब देते हुए भारतीय वायु सेना ने एयर स्ट्राइक करके आतंकियों के कैंप तबाह कर दिए चीन के साथ बढ़ते तनाव की स्थिति में भी भारतीय वायुसेना ने अहम भूमिका निभाते हुए लगातार सीमा की चौकसी की है ।

भारतीय वायुसेना ( Indian Air Force ) का इतिहास 

भारतीय वायु सेना ( Indian Air Force ) का गठन 8 OCT 1932 ई को किया गया |  तबइसका नाम  रॉयल इंडियन एयर फोर्स था | इसकी पहली वायुयान उड़ान 1 अप्रैल 1933 को हुई | जब 1932 में एयरफोर्स की शुरुआत हुई थी | तब भारत के पास 4 एयरक्राफ्ट थे |

भारतीय वायुसेना
भारतीय वायुसेना

उस समय भारत के पास एयरफोर्स का एक ही तबका था जिसमें आरएफके 6 ट्रेंड ऑफिसर और 19 हवाई सिपाही शामिल थे . गठन के 4 साल बाद भारतीय वायुसेना का विकास शुरू हुआ |

4 साल बाद यह फ्लाइट ने बागी भीटटानी जनजाति लड़ाकू के खिलाफ भारतीय सेना का ऑपरेशन में सहायता करने के लिए उत्तरी वजीरिस्तान में मीरानशाह से पहली बार किसी लड़ाई में भाग लिया |

इसी दौरान अप्रैल 1936 में पुराने विपत्ति वायुयान उसे बी फ्लाइट गठित की गई और जून 1938 में सी फ्लाइट का गठन किया गया  |

दूसरे विश्व युद्ध के शुरू होने तक 16 ऑफिसर और 662 वायु सैनिक तक हो गई थी . 1940 में चौटफील्ड समिति ने रक्षा समस्याओं का मूल्यांकन किया ।इस समिति ने भारत के रॉयल एयर फोर्स स्क्वाड्रनो में और अधिक उपकरण शामिल करने की सुझाव दीया |

1939 में यह तय किया गया की प्रमुख  बंदरगाहों की  रक्षा के लिए 5 हवाई दस्तों की सुबिधा की जाए

  •  पहला हवाई दस्ता मद्रास में
  • दूसरा मुंबई में
  • कोलकाता में
  • तीसरा कोलकाता में
  •  चौथा कराची में
  •  पांचवा  कोचिंग में
  •   बाद में विशाखापट्टनम में छठा हवाई दस्ता बनाया गया

15 अगस्त 1947 को भारत की आजादी के समय रॉयल इंडियन एयर फोर्स की संपत्ति को भारत और पाकिस्तान के बीच विभाजित किया गया था| 10 स्क्वायर दोनों में से दो रॉयल पाकिस्तान एयर फोर्स को दिए गए| जनवरी 1950 में भारत के गणतंत्र बनने पर रोल की उपाधि हटा दी गई|

भारतीय वायुसेना की फिलहाल 7 कमाने हैं. जिनमें से 5 ऑपरेशन एक मेंटेनेंस और एक ट्रेनिंग कमांड है

ऑपरेशन कमानो में पश्चिमी कमान जिसका मुख्यालय दिल्ली में है |  प्रयागराज में केंद्रीय कमान शिलांग में . पूर्वी कमान गांधीनगर में. दक्षिण पश्चिमी कमान यह पांचों कमाने अपनी प्रशासनिक विभागों की सहायता से लगभग 20 हेलीकॉप्टर इकाइयों 45 अस्थाई विंग्स कोडन और कई भूमि से हवा में मार करने वाली मिसाइल एस्कॉर्ट पर नियंत्रण रखती है  |

1700 बयानों की देखभाल के लिए करीब 120000 कर्मचारी लगे हुए हैं| भारत के आजादी के समय रॉयल इंडियन एयर फोर्स के प्रमुख को commander-in-chief कहा जाता था और उसका दर्जा एयर मार्शल का होता था | एयर मार्शल सर टॉमस डब्लू अलमस्त रॉयल इंडियन एयर फोर्स के पहले commander-in-chief थे  |

1 अप्रैल 1954 को एयर मार्शल सुब्रतो मुखर्जी के वायु सेना के पहले भारतीय प्रमुख बनने के साथ ही यह पद खत्म हो गया | 1 अगस्त 1964 से भारतीय वायुसेना के प्रमुख के पास एयर चीफ मार्शल का पद भी है ( Indian Air Force ) का आदर्श वाक्य है .. नमःस्पृशं दीप्तम् 

यह कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए उपदेश का एक अंश है |

 

 

 

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