भारत अमेरिका संबंध ( डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी )

भारत अमेरिका संबंध दुनिया के 2 सबसे बड़े लोकतंत्र हैं ,भारत जहां दुनिया के सबसे बड़ा लोकतंत्र है वहां अमेरिका दुनिया का सबसे पुराना आधुनिक लोकतंत्र है दोनों देशों के बीच तकरीबन 70 वर्षों के राजनीतिक इतिहास है |

भारत और अमेरिका ऐसे दो राष्ट्र है जिन्होंने अपने संबंधों में काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं | शीत युद्ध के दौरान जब दुनिया अमेरिका और सोवियत संघ के रूप में दो गुटों में बट गई थी | तब भारत का झुकाव अपनी समाजवादी विचारधारा के चलते सोवियत संघ की तरफ दिखाई दिया |

वही 90 के दशक में जब भारत एक उभरता हुआ अर्थव्यवस्था के रूप में तेजी से विकसित हो रहा था , तब अमेरिका को शायद यह उतना रास नहीं आ रहा था ।

इसलिए भारत ने जब अपना परमाणु परीक्षण किया तब अमेरिका इसके विरोध में नजर आया पर भारत एक जबरदस्त उभरते हुए अर्थव्यवस्था है दुनिया के अग्रिम देशों में शुमार है, और एक बड़ी शक्ति है |

यह बात दुनिया से छिपी नहीं है इसलिए वक्त के साथ तेजी से हालात बदले हैं और भारत और अमेरिका के संबंधों में भी वक्त के साथ एक कमाल की मजबूती देखने को मिली है |

दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष के बार बार औपचारिक और अनौपचारिक मुलाकात इस बात का संकेत देता है कि भारत और अमेरिका के रिश्ते ना सिर्फ व्यापारिक बल्कि सांस्कृतिक और वैचारिक रूप से भी करीब नजर आते हैं |

डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका के राष्ट्रपति बनने पर भारत अमेरिका संबंध के मजबूत होते रिश्ते को एक नई ऊंचाई मिली | ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर उन्हें बधाई दी और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए आगे आने वाले दिनों में घनीष्टाता पूर्वक काम करने पर सहमति जताई ।

सन 2017 में राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप ने कहा अमेरिका भारत को एक सच्चा मित्र और दुनिया भर के चुनौतियों को सामना करने में एक साथ साझेदार के रूप में देखता है |

भारत अमेरिका संबंध
  Donald Trump and Narendra Modi

इसके साथ ही दोनों नेताओं की समय-समय पर बातचीत ने रिपब्लिकन प्रशासन के राज्य में भारत अमेरिका संबंधों के भविष्य का माहौल तैयार किया ।

भारत अमेरिका संबंध  मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगातार मुलाकात ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है ।

भारत और अमेरिका के संबंध की सुरुआत

भारत और अमेरिका के संबंध 18 वीं शताब्दी में ही शुरू हो गए थे .खासकर सैनिकों और नाविकों के माध्यम से 1792 में तो अमेरिका ने कोलकाता में एक अपना काउंसिल भी खोल रखा था  | लेकिन उस समय अमेरिका को भारत के राजनीतिक महत्व को पता नहीं था | क्योंकि भारत उस समय अंग्रेजों की गुलामी के अंदर था, लेकिन बाद में अमेरिका ने धीरे-धीरे भारत को आजादी देने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया  |

अमेरिका के जेहन में भारत काफी पहले से था ऐसे तो भारत अमेरिका संबंध के बीच अंतरराष्ट्रीय संबंधों की शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति हैंड रिक्रूमेंट के समय 1949 में हुई थी | लेकिन भारत की आजादी की लड़ाई के दौरान ही अमेरिका ने ब्रिटेन पर उपनिवेशवाद खत्म करने पर दबाव बनाया था |

लेकिन आजादी के बाद लंबे वक्त तक भारत और अमेरिका के संबंधों में वैसे गर्मजोशी नहीं दिखी | दोनों देशों के अपने-अपने रणनीतिक नक्शे थे उस समय नेहरू अमेरिका के वैश्विक दृष्टिकोण में काफी फर्क था  |

अमेरिका तेल की अर्थव्यवस्था और मध्य पूर्व एशिया में पकड़ बनाने के लिए पाकिस्तान के करीब जाना चाह रहा था  |

वही नए राष्ट्र के रूप में भारत उपनिवेशवाद से बाहर निकले देशों के साथ मिलकर गुटनिरपेक्ष नीति पर चलकर आत्मनिर्भर विकास की बुनियाद बनाने का पक्षधर था |

शीत युद्ध के कारण 1946 से लेकर 1989 तक पूरी दुनिया दो गुटों में बढ़ती रहे | हालांकि भारत गुटनिरपेक्ष की नीति पर चल कर आगे बढ़ता रहा |

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1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध के दौरान अमेरिका गलतफहमी के शिकार अमेरिका की ओर से भारत पर दबाव बनाने की भी कोशिश की गई लेकिन भारत पर इनका कोई असर नहीं हुआ |

भारत ने 1974 में पहली बार परमाणु परीक्षण कर दुनिया को चौंका दिया हालांकि भारत ने इसे शांतिपूर्ण परीक्षण का नाम दिया | लेकिन अमेरिका ने इस परीक्षण के बाद भारत को परमाणु सामग्री और ईंधन आपूर्ति पर रोक लगा दी साथ ही भारत पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए | इससे भारत और अमेरिका के संबंध में कड़वाहट आ गई  |

1998 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई ने पोखरण में एक बार फिर परमाणु परीक्षण कर भारत की ताकत से पूरी दुनिया का परिचय कराया इस परीक्षण के बाद भी अमेरिका ने भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए इसके बाद कुछ समय दोनों देशों के बीच तनातनी रही |

सोवियत संघ के विघटन के बाद भारत अमेरिका के रिश्तो को नए तरीके से पुनर्स्थापित करने के लिए प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के कार्यकाल में जसवंत पटेल बोर्ड वार्तालाप हुई थी | जिसमें भारत अमेरिका संबंध से जुड़े सभी आयामों पर विस्तार से चर्चा हुई और यही वार्ता भविष्य में द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने का आधार बना |

मार्च सन 2000 में बिल क्लिंटन 22 वर्ष के अंतराल के बाद भारत आने वाले पहले अमेरिकी डेमोक्रेट राष्ट्रपति थे , और उन्होंने एक ऐसी प्रक्रिया शुरू की जिसे बाद में अटल बिहारी बाजपेई ने स्वभाविक साझेदारी करार दिया था |

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सन 2000 में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने अमेरिकी संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित कर भारत और अमेरिका के बीच नए संबंधों की नींव रखी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के समय भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में काफी सुधार आया |

सन 2008 में भारत और अमेरिका के बीच सिविल न्यूक्लियर डील ने भारत अमेरिका संबंध के बीच  एक नई उछाल दी . दोनों देशों के बीच बेहतर होते संबंधों का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है , कि अमेरिका ने भारत को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह का हिसाब बनने के लिए वकालत की थी |

11 सितंबर 2001 में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आतंकी हमले के बाद से ही दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त रणनीति के साथ लड़ाई आगे बढ़ाने के पक्षधर रहे हैं | जब जब भारत ने पाकिस्तान के आतंकियों को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव रखा तो अमेरिका ने इसका पूरा समर्थन किया |

भारत में हुए आतंकी हमले खासतौर से कुंज और पुलवामा में हुए आतंकी हमले को लेकर अमेरिका ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया था  |

यहां तक कि बालाकोट एयर स्ट्राइक और सर्जिकल स्ट्राइक का अमेरिका ने भरपूर समर्थन किया था | यही नहीं पाकिस्तान के आतंकवादी मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र में वैश्विक आतंकी घोषित करने में भी अमेरिका ने भारत का साथ दिया |

भारत अमेरिका की आर्थिक नीतियों में एक दूसरे की प्राथमिकता दी जा रही है वहीं मजबूत होते सैन्य संबंध एक दूसरे पर विश्वास को और मजबूत दिखाई दे रहे हैं  |

संयुक्त राज्य अमेरिका  भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बना हुआ है | वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक सन् 2019 20 में अमेरिका और भारत के बीच 88 . 75 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ इससे पिछले वर्ष सन 2019  में यह 87. 96 अरब डॉलर रहा था |

 

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