भारत के नृत्य

सु -सम्बद्ध लय और संगीत के साथ अकेले अथवा अन्य सहयोगियों के साथ थिरकन को ‘ भारत के नृत्य ‘ कहा जाता है । प्राचीन ग्रन्थों में नृत्य का देवता ‘ नटराज शिव ‘ का वर्णन है जिसने 108 विभिन्न तरह के नृत्य का आविष्कार किया है जिनमें ताण्डव नृत्य प्रमुख है ।

 प्राचीन काल में नृत्य की 2 शैलियां थी

( i ) ताण्डव – भगवान शिव द्वारा घोषित शक्तियुक्त मनुष्ययोचित नृत्य

( ii ) लाश्य -मृदुल – शोभायुक्त स्त्री जाति का नृत्य ।

लाश्य नृत्य पार्वती से संबंधित था । इससे ही वर्तमान के शास्त्रीय सोलो नृत्य एवं भरतनाट्यम का उद्भव हुआ है । मध्यकालीन भारत में देवदासियां नृत्य के लिए रखी जाती थीं , जिसने बाद में वेश्यावृत्ति का रूप ले लिया ।

अतः मध्यकाल में नृत्य प्रतिष्ठित परिवार के लिए अच्छा नहीं समझा जाता था , किन्तु आधुनिक काल में सरकार के प्रोत्साहन एवं जन – जागरण के कारण भारतीय नृत्य को देश – विदेश में काफी लोकप्रियता मिली है ।

भारत के नृत्य के तीन प्रकार हैं

शास्त्रीय , लोक और जनजातीय ।

चरिस – एक पांव द्वारा एक सदृश्य थिरकन ।

करनास – दोनों पांवों द्वारा एक समान सदृश्य थिरकन ।

लय- मुख्यतः तीन लय होते हैं – विलम्बित लय , मध्यलय तथा द्रुत लय ।

 

 भारत में शास्त्रीय नृत्य को मुख्यतः सात ( 7 ) भागों में बाँटा गया है :

( 1 ) भरतनाट्यम- यह तमिलनाडु का प्रमुख शास्त्रीय नृत्य है ।

( 2 ) कथकली- यह केरल का प्रमुख शास्त्रीय नृत्य है ।

( 3 ) कुचिपुड़ी – यह आंध्रप्रदेश का नाट्य – नृत्य है ।

( 4 ) ओडिसी- यह ओडिशा का प्राचीन नृत्य है ।

( 5 ) कत्थक- यह मूलतः उत्तर भारत का शास्त्रीय नृत्य है ।

( 6 ) मणिपुरी- यह मणिपुर का प्राचीन नृत्य है ।

( 7 ) मोहिनीअट्टम- यह केरल का नृत्य है ।

 

भरतनाट्यम नृत्य प्रमुखतः एक व्यक्ति प्रस्तुत करता है जिसमें शृंगार एवं भक्ति रस की अभिव्यक्ति होती है । सामान्य तौर पर इस नृत्य के कुल सात भाग माने गये हैं ( 1 ) अलारिप्पु- वंदना ( 2 ) जातिस्वरम् – स्वर सम्मिश्रण ( 3 ) शब्दम्- स्वर एवं गीत ( 4 ) वर्णम्- शुद्ध नृत्य एवं अभिनय का सामंजस्य ( 5 ) पदम्- शृंगारिक भाव ( 6 ) भरतनाट्यम . . जावलियाँ- शृंगारिक भाव ( 7 ) तिल्लाना- शुद्ध नृत्य के तीन घराने हैं : ( क ) तंजोर ( ख ) कांजीपुरम् ( ग ) पण्डनलूर ।

 

कथकली का शाब्दिक अर्थ है – कहानी पर आधारित नाटक । चरित्र के दृष्टिकोण से इसके तीन वर्ग हैं ( i ) सात्विक ( ii ) राजसिक तथा ( iii ) तामसिक । नवों रसों की मुखाभिव्यक्ति पर जितना असाधारण अधिकार एक कथकली नर्तक का होता है उतना अन्य नर्तक के लिए सम्भव नहीं हो पाता ।

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 कुचिपुड़ी आंध्र प्रदेश का नाट्य नृत्य है । कुचिपुड़ी नृत्य शैली में कथा / भाव हमेशा महाभारत या रामायण से लिया जाता है । यह तमिल प्रदेश में प्रचलित ‘ भागवत मेला ‘ नाट्य शैली की प्रकृति का जान पड़ता है । नियमों की श्रृंखला में यह भरत मुनि के नाट्य शास्त्र के अनुरूप है ।  कुचिपुड़ी नृत्य के सोपान हैं ( 1 ) पूर्व रंग ( 2 ) कथानक नृत्य ( 3 ) शब्दम् ( 4 ) दशावतार ( 5 ) श्रीराम पट्टाभिषेकम् ( 6 ) तिल्लाना ( 7 ) तरंगम् ( 8 ) थाली पर नृत्य ।

 

ओडिशा की नृत्य शैली पूर्णतः आराधना की नृत्यशैली है । •इस नृत्य के माध्यम से ईश्वरीय स्तुति की . जाती है । • ओडिसी नृत्य के सोपान है ( 1 ) मंगलाचरण ( 3 ) पल्लवी ( 5 ) साभिनय बटु ( 4 ) अभिनय ( 6 ) मोक्षा नृत्त , नृत्य एवं नाट्य तीनों . कत्थक नृत्य अंगों का प्रस्तुतीकरण सन्तुलित रूप से किया जाता है ।

 

कत्थक नृत्य के विभिन्न चरण हैं  ( 1 ) वन्दना ( 2 ) आमद  परण( 4 ) तोड़ा  ( 5 ) चक्करदार तोड़ा ( 6 ) थाट ( 7 ) कवित्त ( 8 ) गत निकांस ( 10 ) पद संचालन । ( 9 ) गत भाव • कत्थक का तात्पर्य है – कथा कहने वाला । ब्रह्म पुराण , नाट्य शास्त्र और संगीत रत्नाकर में भी कत्थक शब्द का उल्लेख हुआ है । कत्थक नृत्य मूलतः प्रकृति के निकट है । इसमें अभिनय , मुद्राओं का प्रयोग बहुत ही स्वाभाविक एवं स्वतंत्र है । इनमें नव रसों की अभिव्यक्ति कथानक के आधार पर होती है । . नायक – नायिका भेद कत्थक नृत्य की विशेषता है ।

 

मणिपुरी शास्त्रीय नृत्य उत्तरी पूर्वी क्षेत्र में स्थित मणिपुर की घाटी में प्रचलित एक प्राचीन नृत्य शैली है । मणिपुरी नृत्य के प्रमुख रास है – महारास , बसन्त रास , कुञ्ज रास , नित्य रास , गोष्ठ रास तथा उत्खल रास ।

 

मोहिनी अट्टम का आशय है जिसकी मोहिनी दर्शकों पर छा जाये । ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु ने सागर तट पर केरल में सर्वप्रथम मोहिनी नृत्य किया था । कथकली नृत्य स्वर्गलोक की दिव्य नृत्यकला प्रतिरूप का है । इस नृत्य कला का उद्भव केरल में हुआ था । मोहिनीअट्टम के विविध सोपान है – चालकेटु , जातिस्वरम , वर्णनम् , पदम् , तिल्लाना , श्लोकम् ।  प्रकृति से लोकनृत्य एवं युद्ध नृत्य से प्रेरणा लेकर कलाकारों ने अपनी एक नई शैली बनाई । यही छायामय नृत्य छऊ नृत्य के नाम से प्रचलित है ।

पश्चिम बंगाल ( पुरूलिया ) , झारखण्ड ( सरईकेला ) तथा ओडिशा ( मयूरभंज ) में छऊ नृत्य प्रमुख नृत्य है । अन्य शास्त्रीय नृत्य है – ओट्टनतुल्लल ( केरल में ) , कुडियाहम , कृष्णन अट्टम , यज्ञगान आदि ।

असम के शास्त्रीय नृत्य को वर्ष 2000 में भारत के नृत्य के रूप में मान्यता प्रदान की गई । असम में वैष्णव धर्म के संस्थापक श्रीमंत शंकरदेव ने 15 वीं शताब्दी में इस नृत्य की शुरुआत की थी |

 

 

भारत के प्रमुख लोकनृत्य 

असम :  कली गोपाल , खेल गोपाल , बिहू , किलगोया , अंकियानाट , बिछुआ , राखल , लीला , बगुरुम्बा , नटपूजा , होटजानाई बोर्ड लाजू तबला , तबल चोंगली चौंगवी नागानृत्य

नगालैण्ड  : रेगमा , चोंग नोगकम चिंता कजरम् , युद्ध नृत्य , खैवा लिम , नूरालिप , कुर्सी नागा , चुमिके , दोहाई ।

मणिपुर  : चोंग , महारास , नटराज , लाई हरोबा , संखाल , वसंत रास , थाटा , पुगवालोग कीतत्वम् ।

मिजोरम :   चेरोकान पारखुपिला ।

मेघालय  :  बागला , लाहो

मध्य प्रदेश  : रीना , चौत , दिवारी , नवरानी , गोन्यो , सूआ , भगोरिया , करमो , पाली , डागला , छेरिया , हूल्को मंदिरी , सैला , बिल्धा टपाडी , गोडा

महाराष्ट्र  : मोनी , बोहदा , लेजम , लावनी , दहिकला , तमाशा , गणेश चतुर्थी , कोली , गफा , ललिता , मौरीधा ।

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बिहार  :  वैगा , जदूर , जाया , जट – जाटिन , माधी , मूका , लुझरी , विदायत , कीर्तनिया , पँवरिया , सामा चकेबा , जातरा , डाँगा , झीका , सोहराई , माघा , बखो – बखावन , विदेसिया ।

प . बंगाल : राम भेसे , गम्भीरा , जाया , बाउल , जात्रा , कीर्तन , काठी , महाल , गम्भीरा , रायवेश , ढाली , मरसिया ।

ओडिशा :  छऊ , पैका , सवारी संचार , डंडानाट , कुलनी , पुगनाट , घूमरा , जदूर मुदारी , गरुड़ वाहन , ओडिशी ।

उत्तर प्रदेश  : रास लीला , नौटंकी , थाली , पैता , जांगर , चापरी , करन , कजरी , दीवाली

उत्तराखंड :  कुमायूं झूला , झोरा ।

आंध्र प्रदेश :  मरदाला , कुम्भी , घंटा छड़ी नृत्य , बात कम्भा , वीधी , मर्दाला , मधुरी , ओट्न तुल्लू , कालीयप कुडीयट्टम , कैकोट्टीकलि . भद्रकलि , टप्पातिकाली , कुचिपुड़ी ।

कर्नाटक :  यक्षगान , कुनीता , वीरगास्से , भूतकोला , कर्गा ।

गुजरात :  गणपति भजन , रासलीला , डांडिया रास , गरबा , पणिहारी नृत्य , लास्य , टिप्पनी , अकोलिया भवई ।

गोवा :  दकनी , खोल झगोर , मांडी ।

राजस्थान : कठपुतली , धापाल , जिन्दाद , पूगर , सुइसिनी , बगरिया , ख्याल , शकरिया , गोयिका , लीला , झूलन लीला , कामड़ , चरी , चंग , फुदी , गीदड़ , गैर पणिहारी , पणिहारी गणगौर ।

जम्मू कश्मीर  : राउफ , भदजास , हिकात ।

लक्षद्वीप  : परिचाकाली ।

अरुणाचल प्रदेश : मुखौटा , युद्धनृत्या भांगड़ा , डफ , सांग , धमान

हरियाणापंजाब  : भांगड़ा , गिद्धा , कीकली ।

तमिलनाडु ; कुम्भी , कावड़ी , कड़ागम , कोलाट्टम पित्रल कोआटमा , भरत नाट्यम

हिमाचल प्रदेश : सांगला , चम्बा , डाँगी , डंडा , नाव , डफ , धमान , थाली , जद्धा , छरवा , महाथू , छपेली

झारखंड : करमा , सरहुल , छऊ , जट | जटिन ।

 

भारत के शास्त्रीय नृत्य एवं नृत्यक

भरतनाट्यम .

दक्षिण भारत की मुख्य शास्त्रीय नृत्य शैली , जिसमें कविता , संगीत , नृत्य एवं नाटक का अद्भुत समावेश होता है । प्रमुख केन्द्र मद्रास एवं तंजौर हैं । इसके मुख्य क्रम निम्न प्रकार से हैं जाति – स्वरम , शब्दम , वरणम एवं तिल्लाना ।

प्रमुख नृत्यक हैं : पद्य सुब्रमण्यम , यामिनी कृष्णमूर्ति , अरूण्डेल रुक्मिणीदेवी , मालविका , साररुकई , एस.के. सरोज , लीलाजैक्सन , रामगोपाल , बैजयन्ती माला , कोमला वरदन आदि ।

कत्थक

यह उत्तर भारत का कृष्ण द्वारा किया गया प्रमुख नटवरी नृत्य है , जिसे कथवरी नटवरी त्य भी कहा जाता है । इसके दो अंग होते हैं ( 1 ) ताण्डव ( 2 ) कत्थक लास्या

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प्रमुख नृत्यक हैं : लच्छू महाराज , अच्छन महाराज , शम्भू महाराज , दमयन्ती जोशी , सितारा देवी , चन्द्रलेखा , शोभना नारायण , गोपीकृष्ण , बिरजू महाराज , सुखदेव महाराज , मालविका सरकार , सुखदेव महाराज आदि ।

मोहिनीअट्टम

यह केरल की नृत्य शैली है जो भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप में केरल में सागर के तट पर किया था ।

प्रमुख नृत्यक हैंहेमामालिनी , तारा निडुगाड़ी , भारतीशिवाजी , श्रीदेवी , कलादेवी , रागिनी देवी , गीतागायक , के . कल्याणिअम्मा तंकमणि , कनकरेली ।

ओडिसी

ओडिशा में प्रचलित यह नृत्य शैली प्राचीनतम है तथा भगवान जगन्नाथ को समर्पित है ।  इसके मुख्य अंग हैं – नेत्र संचालन , ग्रीवा संचालन , हस्तक , मुद्राओं में पद संचालन ।

प्रमुख नृत्यक हैं – कालीचरण पटनायक , इन्द्राणि रहमान , कालीचंद , सोनल मानसिंह , माधवी .तापरणाम मुद्गल , सुजाता मिश्र , प्रियंवदा मोहंती , मिनाती दास , संयुक्ता पाणिग्रही , मायाधर राउत , रंजना डेनियल्स आदि ।

कथकली

यह कर्नाटक और मालाबार क्षेत्र की नृत्य शैली है ।  पुरुष प्रधान रस नृत्य में संगीत और अभिनय की संयुक्त कला को कथकली की संज्ञा मिली है ।  इसमें दो प्रकार के पात्र होते हैं ( i ) पाचा ( नायक ) ( ii ) केटी ( राक्षस ) ।

प्रमुख नृत्यक हैं मृणालिनी साराभाई , उदयशंकर , कृष्णन कुट्टी , आनन्द शिवरामन , शान्ताराव , रामगोपाल , बल्लोल नारायण मेनन , रुक्मिणी देवी ।

मणिपुरी –

पूर्वी बंगाल एवं पूर्वोतर प्रान्तों की नृत्यशैली जिसे ‘ लाइहरोबा ‘ तथा रासनृत्य के नाम से भी जाना जाता है । •इस मणिपुरी रास के निम्नलिखित प्रकार हैं ( 1 ) बसंत रास ( 2 ) महारास ( 3 ) कुंजरास ( 4 ) गोष्ठरास ( 5 ) नित्यरास ( 6 ) उखलरास ।

इसके प्रमुख नृत्यक हैं– झावेरी बहनें , गाम्बिता देवी , सिंहजीतसिंह , थाम्बल यामा , रीतादेवी , सविता मेहता , कलावती देवी , निर्मला मेहता ।

कुचिपुड़ी

आन्ध्रप्रदेश का प्रसिद्ध नृत्य वैदिक एवं उपनिषदों में वर्णित धर्म का प्रसार करने वाला यह नृत्य भागवत एवं पुराण पर आधारित है । ‘ दशावतार शब्दम ‘ , ‘ मण्डूक शब्दम ‘ , ‘ प्रहलाद शब्दम ‘ , ‘ श्रीराम पट्टाभिषेकम ‘ , ‘ शिवाजी शब्दम ‘ आदि इसके प्रमुख नृत्य नाटक हैं ।

प्रमुख नृत्यक हैं– स्वप्नसुन्दरी , चिन्ताकृष्णमूर्ति , राजारेड्डी , वेम्प्रति सत्य – नारायणन , यामिनी कृष्णमूर्ति , लक्ष्मीनारायन आदि ।

 

 

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