भारत छोड़ो आंदोलन पर लेख (Article on Quit India movement)

भारत छोड़ो आंदोलन पर लेख

हमारे देश की स्वतंत्रता बहुत ही मुश्किलों से मिली , न जाने कितनी क्रांतियां हुई और कितने ही क्रांतिकारी शहीद हुए तब जाकर हम आजाद भारत में सांस ले रहे हैं प्रथम स्वतंत्रता संग्राम हो या भारत छोड़ो आंदोलन या अगस्त क्रांति यह दिन हमें याद दिलाते हैं कि स्वतंत्रता पाने के लिए देश के महान सपूतों ने कितनी कुर्बानियां दी अंग्रेजी सत्ता की न्यू हिला देने वाली अगस्त क्रांति के दौरान भी सैकड़ों देशभक्तों ने अपनी जान गवा दी |

हम भारत के लोग जो आज स्वतंत्र रूप से जी रहे हैं इस आजादी के लिए हमने एक बड़ी कीमत चुकाई है | हमारे देश के वीर सपूतों ने लहू से इस देश को सीचा है | एक लंबे समय से भारतवर्ष अंग्रेजों के अधीन रहा इनमें कई आंदोलन हुए हैं जिसमें सबसे बड़ा आंदोलन था | भारत छोड़ो आंदोलन भारत के इतिहास में 9 अगस्त 1942 के दिन बेहद महत्वपूर्ण है इसे कोई भारत वासी भूल नहीं सकता |

इस आंदोलन ने कई छोटी-छोटी आंदोलनों को एक सम्मिलित रूप में इकट्ठा किया और धीरे-धीरे इसकी चिंगारी पूरे देश में फैल गई और इसने एक मशाल का रूप धारण कर लिया  |यह अगस्त क्रांति के नाम से भी जाना जाता है इतने बड़े पैमाने पर देशभक्तों ने हिस्सा लिया कि अंग्रेज अपने घुटने टेकने पर मजबूर हो गए |

भारत छोड़ो आंदोलन के कारण और परिणाम

आज से लगभग 78 साल पहले भारत उबल रहा था और सदियों पुरानी दासता की बेड़ियों को तोड़ने का इंतजार कर रहा था तभी करो या मरो के साथ महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन का बिगुल बजा दिया महात्मा गांधी के ललकार पर लाखों भारतीय अपने जीवन को देश के आजादी के लिए कुर्बान करने के लिए घरों से निकल पड़े |

दरअसल भारत छोड़ो आंदोलन या अगस्त क्रांति एक ऐसा व्यापक आंदोलन था | जिसने अंग्रेजी शासन को हिला कर रख दिया था | भारत छोड़ो आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की आखरी महा लड़ाई थी | जिसने ब्रिटिश शासन की न्यूज़ को हिला कर रख दिया |

14 जुलाई 1942 को वर्धा में कांग्रेस कार्यसमिति ने अंग्रेजों भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित किया |आंदोलन की सार्वजनिक घोषणा से पहले 1 अगस्त 1942 को इलाहाबाद में तिलक दिवस मनाया गया |

8 अगस्त 1942 को अखिल भारतीय कांग्रेस की बैठक मुंबई की गोलिया टैंक में हुई बैठक में ऐतिहासिक भारत छोड़ो प्रस्ताव को कांग्रेस कार्यसमिति ने कुछ संशोधनों के बाद स्वीकार कर लिया |

करो या मरो का नारा 

देश भर की स्वतंत्रता सेनानियों की एक ही मांग थी  पूर्ण स्वराज इसी मौके पर महात्मा गांधी ने ऐतिहासिक भाषण देते हुए का मैं आपको एक मंत्र देना चाहता हूं जिसे आप अपने दिल में उतार ले और आपकी हर सांस के साथ इस मंत्र की आवाज आनी चाहिए यह मंत्र है करो या मरो |या तो हम भारत को आजाद कराआएंगे  या तो कोशिश में अपनी जान दे देंगे |भारत छोड़ो आंदोलन

गांधी जी के शब्दों ने जनता पर जादू सा असर डाला और वे नई जोश नए संकल्प नए साहस नई आस्था दृढ़ निश्चय और आत्मविश्वास के साथ स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े |आंदोलन की घोषणा के 24 घंटे के भीतर हि गिरफ्तार कर लिए गए गांधीजी को पूना के आगा खाँ पैलेस और कांग्रेस कार्यकारिणी के अन्य सदस्यों को अहमदनगर के दुर्ग में रखा गया |

कांग्रेस को गैर संवैधानिक संस्था घोषित कर दिया गया अंग्रेजों की तमाम कोशिशों के बावजूद कई राष्ट्रीय नेता गिरफ्तार नहीं हो पाए इनमें क्रांतिकारी अरुणा आसफ अली भी थी | जिन्होंने 9 अगस्त 1942 को मुंबई के कॉलीया टैंक मैदान में तिरंगा फहरा कर भारत छोड़ो आंदोलन का बिगुल बजा दिया | तभी से मुंबई के इस मैदान को अगस्त क्रांति मैदान भी कहा जाता है |

इसके अलावा आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए जनता के बीच से ही नेताओं ऊभरकर सामने आए जयप्रकाश नारायण ,राम मनोहर लोहिया, सुचेता कृपलानी जैसे नेताओं ने भूमिगत रहकर आंदोलन को नेतृत्व प्रदान किया |

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मुंबई में उषा मेहता और उनके कुछ साथियों ने कई महीनों तक कांग्रेस रेडियो का प्रसारण किया लोग ब्रिटिश शासक के प्रतीकों को खिलाफ प्रदर्शन करने सड़कों पर निकल पड़े और सरकारी इमारतों पर तिरंगा फहराना शुरू कर दिया |

 

पटना के नौजवान विद्यार्थियों का बलिदान

पटना के नौजवान विद्यार्थियों ने तो बलिदान का स्वर्णिम इतिहास ही रच डाला 11 अगस्त 1942 को सचिवालय पर तिरंगा फहराने के दौरान फिरंगी हुकूमत की गोलियों से 7 छात्र शहीद हो गए |

सरकार ने जब आंदोलन को दबाने के लिए लाठी और बंदूक का सहारा लिया तो आंदोलन का रुख बदल कर हिंसात्मक हो गया | अनेक जगह पर रेल की पटरीया ऊखारी गई और आग लगा दी गई मुंबई अहमदाबाद और जमशेदपुर में मजदूरों ने संयुक्त रूप से विशाल हड़ताल की संयुक्त प्रांत में बलिया और बस्ती, मुंबई में सतारा ,बंगाल में मिदनापुर और बिहार के कुछ भागों में स्थाई सरकारों की स्थापना की गई |

सतारा में विद्रोह का नेतृत्व भाई जी चौहान और नाना पाटील ने किया था पहली समानांतर सरकार बलिया में चित्तू पांडे के नेतृत्व में बने |

भारत छोड़ो आंदोलन इस मायने में भी अनोखा था कि इनमें महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था  |उन्होंने आंदोलन में ना सिर्फ हिस्सा लिया था  |बल्कि पुरुषों की बराबरी करते हुए इसका नेतृत्व भी किया भारत छोड़ो आंदोलन इस मायने में भी क्रांतिकारी था क्योंकि भारत की भावी राजनीति की आधारशिला रखी |

ग्वालियर टैंक मैदान से अपने ऐतिहासिक भाषण में गांधी जी ने कहा जब भी सत्ता मिलेगी| भारत के लोगों को ही मिलेगी और वही इस बात का फैसला करेंगे कि इससे किसे सौंपा जाना है भारत छोड़ो आंदोलन की वार्षिकी पर उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने देशवासियों के साथ देश के महान नेताओं क्रांतिकारियों आंदोलनकारियों और उनके बलिदान को सादर नमन किया है

भारत छोड़ो आंदोलन का इतिहास गुमनाम योद्धाओं के बलिदानों से भरा पड़ा है उस दौर के किसानों फैक्ट्री मजदूरों पत्रकारों कलाकारों छात्रों शिक्षा शास्त्रियों और धार्मिक संतो की कई गुमनाम गाथाएं हैं अगस्त क्रांति एक ऐतिहासिक क्षण था यह केवल विदेशी दासता के खिलाफ महेश एक आंदोलन भर नहीं था बल्कि भारतीय जनता में एक नई चेतना का संचार था |

इस नई चेतना में भारत की आजादी कि एक मजबूत जमीन तैयार की जिसने 1947 में अंग्रेजों को भारत को आजाद करने पर मजबूर कर दिया |

 

भारत छोड़ो आंदोलन पर विश्व युद्ध का असर

भारत छोड़ो आंदोलन के  नीव ऐसे तो 1942 से पहले चली आ रही आजादी के लडाई के रूप में रखी जा चुकी थी लेकिन इसके तत्कालिक कारणों की शुरुआत होती है द्वितीय विश्व युद्ध से बने माहौल से द्वितीय विश्व युद्ध 1943 से शुरू हुआ |

द्वितीय विश्व युद्ध छिरने के बाद विश्व दो ध्रुवो में बट गया था

।  मीत्र राष्ट्र

२  घुरी राष्ट्र

मीत्र राष्ट्र

सितंबर 1943 युद्ध के शुरुआत में फ्रांस, पोलैंड और इंग्लैंड मित्र राष्ट्र में शामिल थे | जल्द ही ब्रिटेन के अधीन कुछ देश ऑस्ट्रेलिया, कनाडा ,न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका भी इस गुट में शामिल हो गए 1941 के बाद मित्र राष्ट्र में अमेरिका सोवियत संघ भी शामिल हो गए |

धुरी राष्ट्र

धुरी राष्ट्र उन देशों का गुट था जिन्होंने दूसरे विश्व युद्ध में जर्मनी और जापान का साथ दिया और मित्र राष्ट्र के खिलाफ लड़े धुरी राष्ट्र में जर्मनी, इटली और जापान प्रमुख शक्तियां थी |

ब्रिटिश फौजों की दक्षिण पूर्व एशिया में हार होने लगी थी वही यह आशंका भी प्रबल होती जा रही थी कि कहीं जापान भारत पर हमला न कर दे | भारत में भी ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आजादी की लड़ाई जारी थी ऐसे हालात में ब्रिटेन को भारत से समर्थन की कोई उम्मीद नहीं दिख रही थी |

मित्र देश अमेरिका, रूस और चीन, ब्रिटेन पर लगातार दबाव डाल रहे थे | कि संकट की घड़ी में वह भारतीय के समर्थन हासिल करने के लिए पहल करें  |इधर राष्ट्रवादी नेताओं ने भी भारत को पूरी तरह से आजाद करने के लिए ब्रिटेन की तत्कालीन प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल पर दबाव डाल रहे थे |

भारतीय गवर्नर जनरल लॉर्ड लिनिलिथगो ने 3 सितंबर 1939 को देश की विधायिका कांग्रेस से बिना बातचीत किए भारत को भी जर्मनी के खिलाफ युद्ध में शामिल होने की घोषणा कर दी | हालांकि कांग्रेस में ब्रिटेन के साथ देने के मुद्दे पर मतभेद था ब्रिटेन हर हालत में भारत का साथ चाहता था | दूसरे विश्व युद्ध के बाद से लगातार ब्रिटेन की हालत खराब होती जा रही थी जर्मनी लगातार ब्रिटेन पर अकर्मक होते जा रहा था |

 

 क्या थी क्रिप्स मिशन

भारत का समर्थन हासिल करने के मकसद से ब्रिटेन ने एक क्रिप्स मिशन का दाव खेला | स्टेफोर्ड क्रिप्स को मार्च 1942 में भारत भेजा गया |

क्रिप्स मिशन ने एक की योजना तैयार की इसके जरिए ब्रिटेन सरकार भारत को पूर्ण स्वतंत्रता देना नहीं चाहती थी | ब्रिटेन सिर्फ भारत को डोमिनियन स्टेट का दर्जा देना चाहती थी | और इसके लिए भी कोई समय सीमा तय नहीं थी वह भारत की सुरक्षा अपने हाथों में ही रखना चाहते थे | और साथ ही गवर्नर जनरल के वीटो के अधिकारों को पहले जैसा रखने के पक्ष में थी |

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कांग्रेस समेत तमाम भारतीय दलों ने क्रिप्स मिशन के सारे प्रस्ताव को खारिज कर दिया महात्मा गांधी ने क्रिप्स मिशन के प्रस्तावों पर टिप्पणी करते हुए कहा की यह आगे का तारीख का चेक था जिसका बैंक नष्ट होने वाला था क्रिप्स मिशन से भारतीयों को निराशा मिली और भारतीय नेताओं को छले जाने का एहसास हुआ वहीं विश्व युद्ध के कारण परिस्थितियां गंभीर होती जा रही थी |

 

जापान का बढ़ता प्रकोप

जापान सफलतापूर्वक सिंगापुर ,मलाया और वर्मा पर कब्जा कर भारत की ओर बढ़ने लगा था जापान के बढ़ते प्रकोप को देखकर 5 जुलाई 1942 को गांधी जी ने हरिजन पत्रिका में लिखा | अंग्रेजों भारत को जापान के लिए मत छोड़ो बल्कि भारत को भारतीयों के लिए व्यवस्थित रूप से छोड़ जाओ अंग्रेज सरकार के रवैया से नाराज भारतीयों ने यह मानना शुरू कर दिया कि साम्राज्यवाद पर अंतिम प्रहार करना आवश्यक हो गया है |

जैसे-जैसे दूसरा विश्व युद्ध आगे बढ़ता जा रहा था वैसे वैसे भारत की स्थिति खराब होती जा रही थी जिसके लिए अंग्रेज सरकार को जिम्मेदार माना गया |

पूर्वी बंगाल में बहुत से लोगों को बीना मुआवजा दिए उनके जमीनों से वंचित किया गया सेना के लिए किसानों का घर जबरदस्ती खाली करवाए गए इन सब वजहों से अंग्रेजो के खिलाफ भारतीय जनमानस में असंतोष चरम पर पहुंच गया था पूरा माहौल अंग्रेजो के खिलाफ हो गया था इसी असंतोष जनक स्थिति में महात्मा गांधी को भारत छोड़ो आंदोलन चलाने के लिए बाध्य किया

 

भारत छोड़ो आंदोलन से जुड़े तथ्य

  • इस दस्तावेज में कहा गया है कि भारत छोड़ो आंदोलन शुरू होने के बाद मुंबई सिटी में गांधी और वर्किंग कमेटी के सदस्य को गिरफ्तार कर लिया गया
  • मुंबई  मैं लोगों पर आंसू गैस के गोले भी दागे गए 15 जगहों पर पुलिस फायरिंग में 8 लोगों की मौत और 44 लोगों की घायल होने की जानकारी भी दी गई है
  • इसके अलावा अहमदाबाद में हड़ताल और पुलिस फायरिंग में एक की मौत जानकारी है इसमें कहा गया है कि पुणे में छात्रों की भीड़ पर फायरिंग की गई जहां एक की मौत हो गई
  • सूरत शहर के लिए सैनिकों को रवाना किया गया
  • इस दस्तावेज के मुताबिक उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के कई नेताओं को गिरफ्तार किया गया
  • लखनऊ इलाहाबाद और कानपुर में हड़ताल की कोशिश हुई
  • पंजाब के अमृतसर और लाहौर में लोगों ने बड़ी सभाएं की
  • रिपोर्ट में इस बात की भी चर्चा की गई है की बिहार में राजेंद्र प्रसाद और दूसरे नेताओं की गिरफ्तारी हो गई है

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