भारत में खाद्य सुरक्षा

जब दुनिया कोरोनावायरस महामारी से गवाह बनी तब एक साथ कई समस्याओं जैसे रोजगार शिक्षा भोजन व्यापारिक इत्यादि सभी पर भी खाद्य सुरक्षा की संकट के बादल मंडराने लगे | मौजूदा वक्त में दुनिया के तमाम देश मौजूदा इन संकटों से जूझ रहे हैं और भारत में खाद्य  सुरक्षा का संकट इनमें अहम है |

आर्थिक तंगी से जूझने के कारण भोजन का संकट साफ तौर पर न केवल दिखता है बल्कि विश्व खाद्य कार्यक्रम इसकी पुष्टि भी कर चुका है हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की संस्था ने वैश्विक स्तर पर भूखमरी का सामना करने वाले लोगों की संख्या 27 करोड़ हो जाने की आशंका जताई है | लेकिन दूसरी बड़ी चिंता की बात है इनमें 12 करोड़ लोग करोनामहामारी के कारण भुखमरी के चपेट में आए हैं |

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी रिपोर्ट the state of food security  and nutrition in the world 2020 में इस बात पर चिंता जताई गई थी | इसमें 2030 तक भूख को जड़ से खत्म करने की मकसद में कामयाब ना होने की आशंका जाहिर की गई थी| हालांकि खाद्य सुरक्षा का मुद्दा कोई नया नहीं है लेकिन कोरोना काल में लोगों को पर्याप्त भोजन ना मिलने के चलते चिंता और बड़ी है |

भारत में तमाम सरकारी योजनाओं के बावजूद खाद्य सुरक्षा को खत्म नहीं किया जा सका है | लॉकडाउन के दौरान तमाम घटनाओं ने साबित किया कि भारत में भोजन का अधिकार अभी तक सुनिश्चित नहीं हो सका है | सरकार न केवल गरीब मजदूर तक भोजन पहुंचाने में नाकामयाब रहे बल्कि देश के स्कूलों में बच्चों को मिड डे मील तक ठीक से मुहैया नहीं हो सका |

ऐसे में एक बड़ा सवाल यही होना चाहिए की

  • क्या खाद्य सुरक्षा अधिनियम गरीबों और जरूरतमंदों के लिए कितना उपयोगी साबित हुआ है ?
  • क्या वाक्य यह कानून गरीबों की भोजन को गारंटी देता है ?
  • क्या केवल लोगों के पेट भरने पर हैं सरकार का ध्यान है ?

जिस प्रकार सरकार खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत चुनिंदा खाद्यान्नों का वितरण कर रही है और कुछ खास फसलों पर ही( MSP )न्यूनतम समर्थन मूल्य देती है. उससे लगता है कि सरकार पौष्टिकता पर कुछ खास ध्यान नहीं दे पा रही है | अगर ऐसा ही रहा तो भारत को निकट भविष्य में खाद्य संकट के साथ-साथ बेहतर स्वास्थ्य की कमी का सामना करना पड़ सकता है |

   खाद्य संकट क्या है ? khadh sankat kya hai ?

पोस्टिक और पर्याप्त भोजन तक लोगों की पहुंच सुनिश्चित ना होना ही खाद्य संकट है | जब धन अथवा अन्य संसाधनों के अभाव में लोग भुखमरी के शिकार होने लगे तो खाद्य संकट की स्थिति कही जाती है | मौजूदा कोरोना वायरस में  ही देखने को मिला है जब देश और दुनिया में लॉकडाउन का ऐलान हुआ, तब गरीब तबके के लिए भूख सबसे बड़ी समस्या बनकर सामने आई  |

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भारत में इस समस्या से करोड़ों व्यक्तियों को भुखमरी का सामना करना पड़ा | लॉकडाउन के दौरान आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ने के कारण मजदूर वर्ग के सामने आर्थिक तंगी खड़ी हुई | लिहाजा भुखमरी जैसी स्थिति से बचने के लिए वह पैदल ही शहरों से गांव की ओर चल पड़े जिसे पूरी दुनिया ने देखा  |

हालांकि खाद्य संकट कोई नई बात नहीं है लेकिन भुखमरी भी एक काला सच है जिससे शक्तिशाली देशों से भरपूर यह दुनिया अब तक पार नहीं पा सकी है . global hunger index जैसी सूची इसी कवायद का हिस्सा है ताकि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भुखमरी का जायजा लिया जा सके |

खाद्य संकट

मोटे तौर पर खाद्य संकट को दो भागों में बांटा जाता है

मध्य स्तरीय खाद्य संकट

हम अक्सर ही समाचारों में सुनते हैं कि कहीं कहीं लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल पाता है यह उनके परिवार को राशन मुहैया नहीं हो पाता है  |इसे मध्य स्तरीय खाद्य संकट कहते हैं  | इस संकट में लोगों को भोजन की मात्रा एवं गुणवत्ता के साथ भी समझौता करना पड़ता है |

गंभीर खाद्य संकट

इन संकट में लोगों को कई दिनों तक भोजन नहीं मिलता है और उन्हें पौष्टिक एवं पर्याप्त आहार उपलब्ध नहीं हो पाता है | लंबे समय तक यही स्थिति बने रहने पर यह भुखमरी की समस्या का रूप धारण कर लेती है | हालिया वर्ष में भूख के कारण होने वाली मौत की खबरें समाचार पत्रों में सुर्खियों में रही है इस प्रकार की मौत एक गंभीर खाद्य संकट के कारण ही होती है |

 

ऐसे में सवाल है कि खाद्य सुरक्षा बढ़ने के क्या कारण है ?

खाद्य सुरक्षा बढ़ने की कई कारण है लेकिन भारत में खाद्य सुरक्षा की सबसे बड़ी वजह गरीबी है | गरीबी के कारण लोगों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पाता है ना ही उनके लिए पोषक युक्त भोजन सुनिश्चित हो पाता है | मौजूदा कोरोनावायरस करोड़ों लोगों को पर्याप्त भोजन ना मिलने के पीछे गरीबी ही वजह माना गया है |

लोगों को लॉकडाउन के चलते उनके आमदनी पर रोक लग गया जिसके कारण लोगों तक खाद्यान्न का पहुंचना सुनिश्चित नहीं हो सका | मौजूदा वक्त में लगभग भारत की एक चौथाई जनता गरीबी से जूझ रही है यह ऐसे में यह आर्थिक कमी के कारण पोषण युक्त भोजन हासिल नहीं कर पाते हैं और कुपोषण के शिकार हो जाते हैं |

यही कारण है कि भारत वैश्विक भुखमरी सूचकांक में लगातार पिछ्रता चला जा रहा है | 2019 के सूचकांक में भारत दुनिया भर के 117 देशों में 102 वे स्थान पर था |

एक आंकड़े के मुताबिक भारत की करीब 19 करोड़ आबादी रोजाना भूखे पेट सोती है | खाद्य सुरक्षा बढ़ने के पीछे यह भी है कि भारत में पारंपरिक रूप से गुणवत्तापूर्ण भोजन के स्थान पर अधिक भोजन खाने को महत्व दिया जाता है |

लोग संतुलित आहार के स्थान पर भरपेट अनाज ग्रहण करने के पर ज्यादा ध्यान देते हैं | इससे लोगों में प्रोटीन और अन्य पोषक पदार्थों की कमी हो जाती है

एक समस्या योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रति सरकारों में प्रतिबद्धता की कमी की भी है | गरीबों की उचित पहचान ना हो पाने की वजह से कई सरकारी योजनाओं के लाभ नहीं उठा पाते और खाद्य सुरक्षा के शिकार हो जाते हैं | गोदामों में पड़े हजारों टन अनाज सड़ जाते हैं, लेकिन जरूरतमंदों तक उसकी पहुंच सुनिश्चित नहीं हो पाती है |

एक तरफ देश में भुखमरी के चलते लोगों की मौत हो जाती है और दूसरी तरफ गोदामों में रखे अनाजों को सड़ने से बचाने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है | फिर सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसे कार्यक्रमों में व्याप्त भ्रष्टाचार भी खाद्य सुरक्षा को बढ़ा रहा है | गौर करने वाली बात यह भी है कि हमारी सरकार की न्यूनतम समर्थन मूल्य की नीति भी अनाजों के पक्ष में है |

सभी खाद्यान्नों पर यह समर्थन ना होकर कुछ ही फसलों पर है, इससे कृषक के लिए अनाज के स्थान पर केवल खाद्यान्न की खेती को अधिक महत्व देते हैं जिससे हमारी खाद्य सुरक्षा प्रभावित होती है |

सरकार द्वारा खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित  करने के लिए प्रयास

दरअसल खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सरकार कई तरह से प्रयास कर रही है इनमें 2013 में बना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम सबसे अहम है |  यह कानून गरीबों को भोजन का अधिकार देने वाला कानून है इसके जरिए जनता को खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है |

इस नियम  के तहत सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए गरीबों को 2 रुपए प्रति किलो गेहूं और ₹3 प्रति किलो चावल देने की व्यवस्था की गई है | लाभार्थियों को उनके लिए निर्धारित खाद्यान्न को सुनिश्चित करने के लिए खाद्यान्नों की आपूर्ति ना होने के स्थिति में खाद्य सुरक्षा भत्ते की भुगतान के नियम को 2015 में लागू किया गया |

खाद्य सुरक्षा के स्तर को बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय कृषक नीति को भी लागू किया गया है | इसका मकसद न्यूनतम समर्थन मूल्य कार्यप्रणाली को प्रभावी रूप से लागू करना कृषि उत्पादों को लाभकारी मूल्य प्रदान करना और किसानों को उचित ब्याज दर पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है |

सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी की सहायता से ग्राम स्तर पर चौपाल किसानों के साथ उत्पादन की साधन उपलब्ध कराना और अच्छी गुणवत्ता के बीज का प्रयोग बढ़ाना भी शामिल है |

खाद्य संकट से बचने के लिए सरकार समय-समय पर खाद्य सब्सिडी भी जारी कर रही है | इसके अलावा खाद्य सुरक्षा की कल्पना को साकार करने के लिए राष्ट्रीय वर्षा पोसी क्षेत्र प्राधिकरण की स्थापना की गई. इसका मकसद खाद्य सुरक्षा के स्थिति बरकरार रखने के लिए वर्षा पोसी समस्या पर पूरा ध्यान देना एवं भूमिहीन और छोटे किसानों से संबंधित समस्याओं पर भी ध्यान देना है जिससे खाद्यान्न उत्पादन में कमी ना हो |

भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आगे की राह क्या हो

जहां तक महामारी में खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने का सवाल है तो इसमें नुकसान को कम करने और उपलब्ध उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए अपनी दक्षता में सुधार करना एक उपाय हो सकता है | इसमें उत्पादकों के समीप संग्रह केंद्रों की पहचान करनी चाहिए ताकि नुकसान को कम किया जा सके |
खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में सबसे अहम कोशिश गरीबी को कम करने की होनी चाहिए| इसके लिए जरूरी है कि सरकार रोजगार सृजन के उपायों पर जोर दें  |

परिवारिक आर्थिक तंगी को दूर करना सरकार की प्राथमिकता हो ताकि लोग पौष्टिक आहार ले सके | रोजगार के अलावा एक तात्कालिक उपाय या भी हो सकता है कि इस महामारी में सरकार गरीबों को पर्याप्त धनराशि दे जिससे लोग पर्याप्त भोजन कर सके |

हालांकि सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत गरीबों के खाते में कुछ पैसे जमा कराएं लेकिन बढ़ती महंगाई को देखते हुए उनमें और वृद्धि की जरूरत है |

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कुछ खाद्य उत्पादों का वितरण किया जाता है. इनमें अमूमन चावल गेहूं और मोटे अनाज बांटे जाते हैं पेट भरने के लिए तो यह अनाज पर्याप्त है | लेकिन पौष्टिकता की नजरिए से यह बहुत कम है खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत निर्धारित अनाज के अलावा बाजरा दालचीनी व तेल जैसे अन्य खाद्य उत्पादों को भी शामिल करना चाहिए ताकि लोगों को भोजन में पौष्टिकता सुनिश्चित हो सके |

कहने को तो सरकार 22 फसलों पर  ( एमएसपी ) न्यूनतम समर्थन मूल्य देती है लेकिन यह केवल धान और गेहूं के लिए ही प्रभावी है बाकी अन्य फसलों के लिए यह केवल संकेत है  |लिहाजा किसान चंद्र फसलों को ही उगाने के लिए बाध्य है अगर सरकार पोषण देने वाली दूसरी फसलों पर भी न्यूनतम समर्थन मूल्य को भी प्रभावी बनाए तो खाद्य सुरक्षा में कमी लाई जा सकती है |

एक अहम समस्या यह भी है कि खाद्यान्न उपलब्ध होने के बाद भी जरूरतमंदों तक या पहुंच सुनिश्चित नहीं हो पाती है और अनाज गोदामों में सड़ जाते हैं यानी नियमों के क्रियान्वयन में बड़ी समस्या है  |जिसे दूर करने की जरूरत है.

यही कारण है कि इस लॉकडाउन के समय भी गरीबों को पर्याप्त अनाज मुहैया नहीं कराया जा सका  |

समझना होगा कि खाली पेट और मानसिक तनाव के साथ समाज और राष्ट्र का विकास नहीं हो सकता खाद्य सुरक्षा किसी भी देश की मौलिक जरूरत है और इसके बिना विकसित राष्ट्र बनने का सपना तो कभी भी पूरा नहीं हो सकता है|

गरीबी बेरोजगारी खाद्य सुरक्षा जैसी मूल आवश्यकताओं पर गंभीर पहल किए बिना हम मजबूत युवा वर्ग तैयार नहीं कर सकते हैं क्योंकि यह समस्या बहुत पुरानी है इसीलिए जल्दी ही इसकी समस्या का समाधान निकालना किसी भी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए | दरअसल खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सरकार को गंभीर प्रयास करने होंगे नहीं तो आने वाले भविष्य मैं भी हम ऊपर नहीं उठ पाएंगे |

 

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