भूकंप कैसे आता है

अक्सर आपलोग पूछते थे की भूकंप कैसे आता है तो हम आज के इस आर्टिकल मे भुकंप के बारे मे विस्तृत जानकारी प्रदान करेंगे जिससे आप भूकंप के संबंधीत सभी जानकारीया हासील कर पाये.

 

भूकंप क्या है?

भूकंप तब होता है जब पृथ्वी के दो खंड अचानक एक दूसरे के पीछे खिसक जाते हैं। जिस सतह पर वे फिसलते हैं उसे फॉल्ट या फॉल्ट प्लेन कहा जाता है। पृथ्वी की सतह के नीचे का स्थान जहाँ से भूकंप शुरू होता है, हाइपोसेंटर कहलाता है, और पृथ्वी की सतह पर इसके ठीक ऊपर के स्थान को उपरिकेंद्र कहा जाता है।

कभी-कभी भूकंप के पूर्वाभास होते हैं। ये छोटे भूकंप होते हैं जो उसी स्थान पर आते हैं जहां बाद में बड़ा भूकंप आता है। वैज्ञानिक यह नहीं बता सकते कि भूकंप एक पूर्वाभास है जब तक कि बड़ा भूकंप न आ जाए। सबसे बड़े, मुख्य भूकंप को मेनशॉक कहा जाता है। मेनशॉक्स में हमेशा बाद के झटके आते हैं। ये छोटे भूकंप होते हैं जो बाद में उसी स्थान पर आते हैं जहां मेनशॉक होता है।

 

भूकंप के क्या कारण होते हैं और वे कहाँ आते हैं?

पृथ्वी की चार प्रमुख परतें हैं: आंतरिक कोर, बाहरी कोर, मेंटल और क्रस्ट। क्रस्ट और मेंटल का शीर्ष हमारे ग्रह की सतह पर एक पतली परत बनाते हैं। लेकिन यह परत एक टुकड़े में नहीं है | यह पृथ्वी की सतह को ढँकने वाली परत  कई टुकड़ों से बनी है। इतना ही नहीं, ये परत  के टुकड़े धीरे-धीरे इधर-उधर घूमते रहते हैं, एक दूसरे के पीछे खिसकते और एक दूसरे से टकराते रहते हैं। हम इन पहेली टुकड़ों को टेक्टोनिक प्लेट कहते हैं, और प्लेटों के किनारों को प्लेट की सीमा कहा जाता है।

प्लेट की सीमाएं कई दोषों से बनी हैं, और दुनिया भर में अधिकांश भूकंप इन्हीं दोषों के कारण आते हैं। चूँकि प्लेटों के किनारे खुरदुरे होते हैं, वे चिपक जाते हैं जबकि बाकी प्लेट चलती रहती है। अंत में, जब प्लेट काफी दूर चली जाती है, तो किनारे एक दोष पर चिपक जाते हैं और भूकंप आता है।

 

भूकंप आने पर पृथ्वी क्यों हिलती है?

जबकि दोषों के किनारे एक साथ फंस गए हैं, और शेष ब्लॉक चल रहा है, ऊर्जा जो सामान्य रूप से ब्लॉक को एक दूसरे के पीछे स्लाइड करने का कारण बनती है उसे संग्रहित किया जा रहा है। जब गतिमान ब्लॉकों का बल अंततः दोष के दांतेदार किनारों के घर्षण पर काबू पाता है और यह चिपक जाता है, तो संचित ऊर्जा मुक्त हो जाती है।

एक तालाब पर लहरों की तरह भूकंपीय तरंगों के रूप में सभी दिशाओं में दोष से ऊर्जा बाहर की ओर निकलती है। भूकंपीय तरंगें पृथ्वी को हिलाती हैं जैसे वे इसके माध्यम से चलती हैं, और जब लहरें पृथ्वी की सतह पर पहुँचती हैं, तो वे हमारे घरों और हमें जैसे जमीन और उस पर कुछ भी हिलाती हैं!

 

भूकंप कैसे दर्ज किए जाते हैं?

भूकंपों को सीस्मोग्राफ नामक उपकरणों द्वारा रिकॉर्ड दर्ज किया जाता है। वे जो रिकॉर्डिंग करते हैं उसे सिस्मोग्राम कहा जाता है। सीस्मोग्राफ में एक आधार होता है जो जमीन में मजबूती से जम जाता है, और एक भारी वजन जो मुक्त लटका रहता है।

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जब भूकंप के कारण जमीन हिलती है, तो सिस्मोग्राफ का आधार भी हिलता है, लेकिन लटकता हुआ वजन नहीं होता है। इसके बजाय वह वसंत या तार जिससे वह लटका हुआ है, सभी गति को अवशोषित कर लेता है। सिस्मोग्राफ के हिलने वाले हिस्से और गतिहीन हिस्से के बीच की स्थिति में अंतर दर्ज किया जाता है। भूकंप दर्ज किया जाता है |

 

भूकंप कैसे आता है

भ्रंशन क्रिया ( Faulting ) के द्वारा भूकम्प आता है । भूकम्प ( Earthquake ) भूकम्प भूपटल की ज्ञात या अज्ञात कम्पन अथवा लहर है , जो धरातल के नीचे अथवा ऊपर चट्टानों के लचीलेपन या गुरुत्वाकर्षण की समस्थिति में क्षणिक अवस्था होने पर उत्पन्न होती है |.

 

  • भूकम्प मूल ( Focus ) में भूकम्प का सर्वप्रथम आर्विभाव होता है ।
  • अधिकेन्द्र ( Epicentre ) में सर्वप्रथम भूकम्प लहरों का अनुभव होता है ।
  • भूकम्प केन्द्र के चारों ओर समान भूकम्पीय तीव्रता की खींची जाने वाली रेखाएँ समभूकम्पीय रेखा ( Isoseismal line ) कहलाती है ।
  • भूकम्पमापी ( Seismograph ) भूकम्पीय तरंगों को मापने का यंत्र है ।
  • भूकम्प विज्ञान ( Seismology ) के द्वारा लहरों का अध्ययन किया जाता है ।

* भूकम्प के निम्नलिखित कारण हैं

  1. प्लेट विवर्तनिक
  2. ज्वालामुखी क्रिया
  3. भूपटल भ्रंश
  4. आंतरिक गैसों का फैलाव
  5. भूसंतुलन में अव्यवस्था
  6. भूपटल में सिकुड़न होना
  7. मानव जनित कारक

 

भूकम्पीय लहरें ( Seismic Waves ) :

सर्वप्रथम भूकम्पीय लहरें अधिकेन्द्र पर पहुँचती है । भूकम्पीय लहरों को तीन भागों में बाँटा जा सकता है

  1. प्राथमिक लहरें ( P waves ) : इसकी औसत गति 8 से 14 किमी प्रति सेकण्ड के बीच होती है । . चूंकि इनकी गति सबसे अधिक होती है , ये सबसे पहले धरातल पर पहुँचती है । ये तरंगें ध्वनि के समान होती है तथा ये ठोस , द्रव एवं गैसीय पदार्थों में यात्रा कर सकती है । इसे अनुदैर्ध्य तरंगें भी कहते हैं ।
  2. द्वितीयक लहरें ( S waves ) : इसे अनुप्रस्थ लहर भी कहते हैं , क्योंकि ये प्राथमिक लहरों के बाद प्रकट होती है । ये तरल पदार्थों से नहीं गुजर पाती हैं इसलिए सागरों में ये लुप्त हो जाती है ।
  3. धरातलीय लहरें ( L waves ) : इसे लंबी लहरें ( L waves ) भी कहते हैं , क्योकि इनका भ्रमण समय अधिक होती है तथा ये सर्वाधिक दूरी तय करती है । यह सर्वाधिक विनाश तरंगें होती है । इसका वेग सबसे कम होता है ।
भूकंप कैसे आता है
भूकंप कैसे आता है

 

भूकम्प की तीव्रता

  • रिक्टर पैमाना : रिक्टर स्केल पर भूकम्प की तीव्रता मापी जाती है । इस पैमाने पर भूकम्प के वेग में एक अंक की वृद्धि 10 गुना अधिक तीव्रता को प्रदर्शित करती है । . इस पैमाने का विकास 1945 ई . में अमेरिकी भूवैज्ञानिक चार्ल्स फ्रांसिस रिकटर द्वारा किया गया है ।
  • मरकेली पैमाना : इसमें भूकम्प का मापन भूकम्प द्वारा होने वाली क्षति के आधार पर किया जाता है । . इसका उपयोग अब नहीं किया जाता है ।

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  भूकम्प का वितरण

  1. प्रशांत महासागर तटीय पेटी : विश्व में 68 प्रतिशत भूकम्प इसी पेटी में आते हैं इसलिए इसे अग्नि वलय ( Ring of Fire ) कहते हैं । . यह पेटी पश्चिम में अलास्का से क्यूराइल , जापान , मेरियाना और फिलीपाइन खाई तक है तथा चिली , कैलिफोर्निया और न्यूजीलैण्ड के समुद्रतटीय भाग सम्मिलित है ।

 

  1. मध्य महाद्वीपीय पेटी : विश्व के 21 प्रतिशत भूकम्प इस पेटी में आते हैं । पिरेनीज , आल्पस , कॉकेशस और हिमालय , म्यांमार की पहाड़ियाँ , पूर्वी द्वीप समूह की श्रेणियाँ इन्हीं मेखला में आती हैं । भारत के भूकम्प क्षेत्र इसी पेटी में आते हैं । यह पेटी मैक्सिको से शुरू होकर अटलांटिक महासागर , भूमध्य सागर तथा कॉकेशस से होती हुई हिमालय पर्वत तथा सीमावर्ती क्षेत्रों तक फैली हुई है ।

 

  1. मध्य अटलांटिक पेटी : इस पेटी में भूकम्प आने का मुख्य कारण सागरतल प्रसरण है । यह पेटी स्पिट वर्जन तथा आइसलैण्ड से . प्रारंभ होकर बोवेट द्वीप के साथ विस्तृत है ।

 

भूकंप कैसे आता है
भूकंप कैसे आता है

 

सुनामी ( Tsunami )

सुनामी जापानी शब्द है जिसका अर्थ होता है- “ वे समुद्री लहरें जो समुद्र पर आती हैं । ”  इस प्रकार अन्तः सागरीय भूकम्पों द्वारा उत्पन्न लहरों को सुनामी कहते हैं ।  यह लहरें सागरीय तटों पर भारी विनाश करती हैं । इनकी गति 100-150 किमी . प्रति घंटा गहरे सागरों में सुनामी लहर की लंबाई सर्वाधिक होती है , परंतु सागर तट की ओर होती है । जाने पर और कम होती जाती है ।

26 दिसम्बर , 2004 को हिन्द महासागर में आई सुनामी महान विनाशकारी  थी ।  सुनामी लहरों की दृष्टि से प्रशान्त महासागर सबसे खतरनाक स्थिति में है

( i ) भूकम्प तीव्रता के मामले में सबसे विनाशकारी भूकम्प  -22 मई , 1960 का वालडिविया भूकम्प , चिली सबसे खतरनाक स्थिति में था  । ( तीव्रता 9.5 )

( ii ) मृत्यु के मामले में सबसे विनाशकारी भूकम्प का उदाहरण है -23 जनवरी , 1956 का शांझी , चीन , भूकम्प ( लगभग  8,30,000 लोग मारे गए ) जिसकी भूकंप की  तीव्रता ( 8.0 ) थी

( ii ) सम्पत्ति नुकसान ( क्षति ) के मामले में सबसे विनाशकारी भूकम्प का उदाहरण है- वर्ष 2011 का तोहोकु ( जापान ) भूकम्प , तीव्रता- ( 9.0 ) 235 बिलियन डॉलर का नुकसान ।

 

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