मातृभाषा हिंदी पर निबंध | 2001 से 2011 जनगणना के अनुसार मातृभाषा

हम सभी भारतवासियों को अपनी मातृभाषा पर गर्व है… पर दुर्भाग्यवष कई बार आप बोलते कोई और भाषा हैं लिखते कोई और… जिसके कारण इन भाषाओं और बोलियों को सही महत्व ना मिल पाने के कारण ये उतना प्रचलन में नहीं रह जातीं। पर ज़रूरी है | इन भाषाओं को जिंदा रहना  इनमें जान फूंकने के लिए सरकार समय समय पर कई प्रयास करती रहती है। क्योंकि इनका तार आपकी भावनाओं से आपके एहसास से आपके जीवन से जुड़ा हुआ होता है।

कोई भी भाषा आपको सामाजिक स्तर पर परंपरा, इतिहास, औऱ सांस्कृतिक तौर पर जोड़ती है… कहा जाता है कि भाषाएं संस्कृति की वाहिका हैं। भाषा ही आपको संस्कार और व्यवहार सिखाती हैं। हम भारतीय बेहद खुशनसीब हैं क्योंकि भारत में भाषाओं की इतनी विविधता है… जो सीधे हमें.. अपनी मिट्टी और विरासत से भावनात्मक रुप से जोड़ती है। इसीलिए समय समय पर भाषा को संरक्षित करने के लिए कई आंदोलन भी होते रहे हैं। इसी के चलते विश्व में भाषाई और सांस्कृतिक विविधता और बहुभाषिता को बचाने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के मौके पर उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडु ने देश की अनूठी भाषायी विरासत को बचाये रखने पर जोर दिया ।और लोगों से भाषाएं सीखने का आव्हान किया

हर साल 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाता है इस मौके पर दिल्ली के अंबेडकर इंटरनेशनल सेक्टर में मानव संसाधन मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय की ओर से खास कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है

मातृभाषा किसी राष्ट्र की सांस्कृतिक जीवन की आकार देती है और उसके प्रगति की न्यू रखती है उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने यह बात 21 फरवरी को होने वाले मातृभाषा दिवस जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान कहे की भारत यूनेस्को की तरह भाषाई और सांस्कृतिक विविधता के महत्व को समझता है | उन्होंने भाषाई विरासत को संरक्षित करने के लिए मोहित प्रयास पर जोर दिया

उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने आदिवासी भाषाओं के विलुप्त होने पर चिंता जाहिर करते हुए इनके संरक्षण पर जोर दिया

मातृभाषा किसे कहते हैं( what is mother tongue )

जन्म लेने के बाद जो मनुष्य प्रथम भाषा सीखता है उसे मातृभाषा कहते हैं मातृभाषा किसी भी व्यक्ति की सामाजिक भाषाई पहचान होती है मातृभाषा यानी जिस भाषा में मां सपने देखते हैं या विचार करती है वही भाषा उस बच्चे की मातृभाषा होती हैं भारत में सैकड़ों प्रकार की मातृ भाषा बोली जाती है जो देश के विविधता और अनूठे संस्कृति को बयां करती है

मातृभाषा से हम संस्कृति के साथ जुड़कर उसकी धरोहर को आगे बढ़ाते हैं तभी तो महान साहित्यकार भारतेंदु हरिश्चंद्र ने मातृभाषा का महत्व कुछ इस प्रकार से बताया है

निज भाषा उन्नति अहै ,सब उन्नति को मूल

बीनू निज भाषा ज्ञान के ,मीटत नाही को सूल

मातृभाषा का मकसद दुनिया में भाषाई और सांस्कृतिक विविधता और बहुभाषिकता को बढ़ावा देता है आज भारत की भूमिका और भी अधिक मायने रखती है क्योंकि यह बहुभाषी राष्ट्र होने के नाते मातृ भाषाओं के प्रति भारत का उत्तरदायित्व कहीं अधिक मायने रखता है |

भारत के संविधान ने 22 आधिकारिक भाषाओं को मान्यता दी है लेकिन बहुभाषावाद भारत में जीवन का मार्ग का है क्योंकि देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग अपने जन्म के बाद मातृभाषा के अलावा एक से अधिक भाषाएं बोलते हैं और अपने जीवन काल के दौरान अन्य भाषाओं को भी सीखते रहते हैं |

मातृभाषा  का इतिहास ( History of mother tongue )

औपनिवेशिक काल के दौरान पहली बार जॉर्ज ए ग्रियर्सन ने 1894 से 1928 के दौरान भाषाई सर्वेक्षण कराया गया था | जिसमें 179 भाषाओं और 544 बोलियों की पहचान की गई थी ।प्रशिक्षित भाषाविदो कर्मियों की कमी के वजह से इस सर्वेक्षण में कई खामियां भी थी वहीं 1991 के भारत की जनगणना में अलग व्याकरण के संरचना के साथ 1576 सूचीबद्ध मातृभाषा  1796 भाषिक विविधता को अन्य मातृ भाषाओं के रूप में वर्गीकृत किया गया था |

2011 की जनगणना के आधार पर देश देश में 121 भाषाएं और 1369 मातृभाषा है इनमें से 270 वैसी मातृ भाषाओं को बोलने वाले की संख्या 10,000 से ज्यादा है 2011 की जनगणना के मुताबिक हिंदी को मातृभाषा की बताने वाली लोगों की 2001 की जनगणना के मुकाबले 2011 में बढ़ोतरी हुई है |

2001 से 2011 जनगणना के अनुसार मातृभाषा

2001 में 43.03 फ़ीसदी लोगों ने हिंदी को मातृभाषा बताया था ,जबकि 2011 में इनकी संख्या बढ़कर 43.6 फ़ीसदी हो गई बांग्ला भाषा दूसरे नंबर पर बरकरार रही वही तेलुगु को पीछे छोड़ कर मराठी बोले जाने वाली मातृभाषा बन गई उर्दू 2001 में छठे स्थान पर थी लेकिन 2011 के आंकड़े के मुताबिक सातवें स्थान पर पहुंच गए मातृ भाषा बोलने के मामले में गुजराती छठे स्थान पर है

22 सूचीबद्ध भाषाओं में संस्कृत सबसे कम बोली जाने वाली भाषा है केवल 24821 लोगों ने संस्कृत को अपनी मातृभाषा बताया

2011 की जनगणना के अनुसार गैर सूचीबद्ध भाषाओं में अंग्रेजी को करीब 2.6 लाख लोगों ने मातृभाषा बताया अंग्रेजी को पहली मातृभाषा बताने वाले लोगों में से ज्यादा 1.60 लाख लोग महाराष्ट्र से उसके बाद तमिलनाडु से थे ।

सूचीबद्ध भाषाओं में राजस्थान में बोली जाने वाली भील्ली या भीलोड़ी भाषा 1.04 करोड़ की संख्या के साथ पहले नंबर पर है इसके बाद गोंडी दूसरे नंबर पर आती है इसके बोलने वालों की संख्या 29 लाख है ।

आज दुनिया भर में बोली जाने वाली भाषाओं में हिंदी तीसरे नंबर पर सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है |

विश्व में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में भारतीय भाषाओ का महत्व

विश्व में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में 6 भारतीय भाषाएं शामिल है |

  • दुनिया भर में 61.5 करोड लोग हिंदी भाषा का इस्तेमाल करते हैं
  • हिंदी भाषा के बाद बंगाली भाषा का स्थान है जो 26.5 करोड लोग के साथ सातवें स्थान पर है|
  • 17 करोड़ लोगों के साथ 11वें नंबर पर उर्दू का स्थान आता है |
  • 9.5 करोड लोगों के साथ 15वें स्थान पर मराठी है |
  • 9.3 करोड़ के साथ 16वें नंबर पर तेलुगू |
  • 8.1 करोड लोगों के साथ 19वें स्थान पर तमिल भाषा है |

भारत में  मातृभाषा ( Mother tongue in India )

भारत दुनिया के उन अनूठे देशों में से एक है जहां भाषाओं में विविधता की विरासत है इनमें बोली भाषा मातृभाषा सभी शामिल है | यह सभी मिलकर भारत की ऐतिहासिक संस्कृतिक विरासत के साथ हैं खूबसूरत सामाजिक संरचना को दर्शाती है |

दुनिया के अलग-अलग देशों में सैकड़ों मातृभाषाएं बोली जाती है इन भाषाओं में से लगभग 43 फ़ीसदी भाषाएं लुप्त होने की कगार पर है ।यूनेस्को इन मातृ भाषाओं के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रयास कर रहा है. भारत में उच्च सदन में सभापति ने सांसदों से मातृभाषा को तरजीह देने के लिए आवाहन किया है जबकि 2019 के मानसून सत्र में पहली बार किसी सांसद ने संथाली भाषा में अपना भाषण देकर एक नई शुरुआत की,

क्योंकि भाषा के विकास से बहुमुखी विकास होता है भाषा का एक रणनीतिक महत्व है क्योंकि पहचान संचार सामाजिक एकीकरण शिक्षा और विकास के लिए भाषा ही एक माध्यम है जो आसानी से लोगों को जोड़ती है भाषाओं को लुप्त होने से परंपराएं स्मृति सोच और अभिव्यक्ति के अनूठे तरीके और मूल्यवान संसाधन भी खो जाते हैं

वैश्विक स्तर पर मातृभाषा के संरक्षण

लेकिन वैश्वीकरण में आई तेजी की वजह से कई भाषाएं खतरे में है या लुप्त हो रही है दुनिया में बोली जाने वाली अनुमानित 6000 भाषाओं मैं से कम से कम 43 फिसदि लुप्त होने की कगार पर है दुनिया के 40 फ़ीसदी आबादी के पास ऐसी भाषा में शिक्षा नहीं है जिसे वह बोलते या समझते हैं| मातृ भाषाओं को शिक्षा प्रणालियों और सार्वजनिक डोमेन में बेहद कम जगह दी गई है और डिजिटल दुनिया में तो 100 से कम भाषाओं का ही उपयोग किया जाता है |

 भारत में मातृभाषा के इतिहास

वैश्विक स्तर पर मातृभाषा के संरक्षण के लिए भाषा यूनिवर्स को कई स्तरों पर काम कर रहा है यूनेस्को ने 17 नवंबर 1999 को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा मनाए जाने की घोषणा की थी दरअसल इस घुसने के बीच एक ऐतिहासिक घटना है जो मातृभाषा के प्रति जो लोगों के समर्पण के एक मिसाल बनी 21 फरवरी 1952 को ढाका यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तत्कालीन पाकिस्तान सरकार की भाषाई नीति का कड़ा विरोध जताते हुए अपनी मातृभाषा के अस्तित्व बनाए रखने के लिए विरोध प्रदर्शन किया |

पाकिस्तान के पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां बरसानी शुरू कर दी लेकिन लगातार विरोध के बाद सरकार को बांग्ला भाषा को आधिकारिक दर्जा देना पड़ा भाषाई आंदोलन मे शहीद हुए युवाओं की स्मृति में और भाषाई और सांस्कृतिक विविधता और बहुभाषावाद को बढ़ावा देने के लिए फरवरी 2000 से हर साल अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाता है|

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यूनेस्को मातृभाषा के संरक्षण और संवर्धन को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताती रही है 2019 में यूनेस्को की महानिदेशक आँड्रे अजोले ने कहा कि हर मातृभाषा को सार्वजनिक जीवन में सभी क्षेत्रों में जाना पहचाना दिया जाना चाहिए मात्री भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा आधिकारिक भाषा का दर्जा या निर्देश की भाषा के रूप में दर्जा नहीं है. मौजूदा स्थिति मातृभाषा के मूल्य को काम करती है और लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं होने से अपने वास्तविक रूप को खो सकती है

2020 में मातृभाषा दिवस के थीम क्या है ?

2020 में यूनेस्को ने थीम रखा है  ( लैंग्वेज विदाउट बॉर्डर्स ) यानी सीमाओं से परे भाषा

यूनेस्को मातृभाषा दिवस 2020 के थीम के जरिए यह संदेश देना चाहती है | कि स्थानीय और सीमा पार की भाषाएं शांतिपूर्ण बातचीत को बढ़ावा दे सकती है और स्वदेशी विरासत को संरक्षित करने में मदद कर सकती हैं जिस तरह दक्षिण अमेरिका में सह सहारा अफ्रीका और केजुआ के लोग स्वाहिली भाषा में बोलते हैं और पड़ोसी देशों में समुदायों के साथ एक ही संस्कृति को साझा करते हैं |

मातृभाषा  के संरक्षण

मातृभाषा को संरक्षण नहीं मिलने की वजह से भारत में लगभग 50 मात्र भाषाएं पिछले 5 दशकों में विलुप्त हो चुकी है संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त 22 भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया है इनमें से 3 भाषा संस्कृत, तमिल और कन्नड़ को भारत सरकार ने विशेष दर्जा और श्रेष्ठ प्राचीन भाषा के रूप में मान्यता दी है |

इन श्रेष्ठ प्राचीन भाषाओं का 1000 वर्ष से अधिक लिखित और मौखिक इतिहास है इन अधिसूचित और प्राचीन भाषाओं की अलावा भारत के संविधान में अल्पसंख्यक भाषाओं के संरक्षण के लिए मौलिक अधिकार के रूप में शामिल किया गया है जिसके तहत भारत के किसी भी क्षेत्र और किसी भी भाग में रहने वाले नागरिकों के किसी भी विशिष्ट वर्ग के भाषा लिपि या अपनी स्वयं की संस्कृति को संरक्षित करने का अधिकार दिया गया है |

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भारत की मातृभाषा और उसके विविध संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग है. हर राज्य की मातृभाषा लोगों की अपनी मिट्टी अपनी विरासत से भावनात्मक रूप से जोड़ती है |

अपनी मातृभाषा में अभिव्यक्ति सच्ची और आस्था जुड़ी होती है .इसीलिए भारत सरकार अलग-अलग मातृ भाषाओं के लिए व्यापक स्तर पर काम कर रही है देश की संसद में 2018 में सांसद संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 22 भाषाओं में से किसी में भी सदन में बोल सकते हैं|

2019 के मानसून सत्र में पहली बार संथाली भाषा में सांसद सरोजनी हेंब्रम ने भाषण दिया जिसकी सभापति एम वेंकैया नायडू ने सराहना की राज्यसभा ने सभी 22 भाषाओं की व्याख्या सेवा के लिए कई लोगों को शामिल किया है|

दुनिया में सबसे लोकप्रिय भाषाओं में भारत की मातृभाषा भी शामिल है भारत समेत दुनिया के कई भाषाएं विलुप्त होने की कगार पर है आज जरूरत है हमें अपनी अपनी मातृभाषा को अपनाने की और आने वाली पीढ़ी को सिखाने की ताकि भाषा के जरिए हमारी संस्कृति हमेशा फलती फूलती रहे |

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दोस्तों आज के इस आर्टिकल में जाने होंगे मातृभाषा किसे कहते हैं , मातृभाषा  का इतिहास के बारे में ,अगर किसी अन्य बिषय के बारे में जानकारी चाहिए तो आप हमें कमेंट कर सकते है |

 

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