भारत  में कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए ( मिशन पोषण 2 ) को सुरु किया गया |

भारत में कुपोषण के दरों में तेजी से सुधार किया है बावजूद इसके हमारे देश में अभी भी कुपोषण की समस्या गंभीर है |  खासकर 5 साल से कम उम्र के बच्चों में स्थिति और भी चिंताजनक है |  कुपोषण से बच्चों का स्वास्थ्य एवं उनका शारीरिक और मानसिक विकास पर बुरा असर पड़ता है|  साथ ही कुपोषण के कारण महिलाओं एवं व्यासको की उत्पादकता भी प्रभावित होती है |

देश में कुपोषण के चुनौती से पार पाने के मकसद से केंद्र सरकार ने साल 2018 में राष्ट्रीय पोषण मिशन की शुरुआत की थी   | यह मिशन बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए पोषण संबंधी परिणामों में सुधार करने के लिए सरकार का प्रमुख कार्यक्रम है |

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2021 में पेश आम बजट में पूरक पोषण कार्यक्रम और पोषण अभियान का विलय करते हुए मिशन पोषण 2.0 का शुरुआत किया |

 

मानव पूंजी और मानव विकास के लिए एक बेहतर स्वास्थ्य का होना बेहद जरूरी है और बेहतर स्वास्थ्य के लिए बेहतर पोषण जरूरी है. देश में कुपोषण की चुनौती से निपटने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2021- 22 के आम बजट में मिशन पोषण 2 कि शुरुआत करने की घोषणा की इसके तहत पोषण गद्य मात्रा डिलीवरी आउटरीच और परिणाम को मजबूत बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया |

भारत में पोषण संबंधी समस्याओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती कुपोषण और सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी की समस्या को दूर करने के साथ ही अधिक पोषण के वजह से पैदा हो रही लाइलाज बीमारी की तेजी से बढ़ती समस्या है |

इन समस्याओं को दूर करने और देश में कुपोषण की चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने पोषण को एक महत्वकांक्षी मिशन के रूप में लिया है |  इसके तहत केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को साल 2021- 22 का बजट पेश करते हुए मिशन पोषण 2 की शुरुआत की  |

मिशन पोषण 2 का मकसद पोषण गत मात्रा डिलीवरी आउटरीच परिणाम को मजबूत बनाना है | इसके लिए संपूरक पोषण कार्यक्रम और पोषण अभियान का विलय किया जाएगा पोषण गत परिणामों में व्यापक सुधार लाने के लिए एक मजबूत कार्य नीति अपनाने पर भी जोर दिया गया है |

इसके तहत देश के कुल 112 एस्पिरेशनल डिस्टिक में पोषण संबंधी परिणामों को और बेहतर करने के लिए एक गहन रणनीति अपनाई जाएगी आम बजट में महिला और बाल विकास मंत्रालय को आवंटित 24435 करोड रुपए में से सक्षम आंगनबाड़ी और मिशन पोषण 2 को 20105 करोर रुपए की राशि आवंटित की गई है |

एस्पिरेशनल डिस्टिक यानी आकांक्षी जिलों का मतलब वैसे जिले से है जो अन्य जिलों के मुकाबले सामाजिक और आर्थिक तौर पर कम विकसित है

देश में कुपोषण को दूर करने के लिए सरकार लाइफ साइकिल अप्रोच अपनाकर पहले से ही राष्ट्रीय पोषण मिशन चला रही है  | जिसकी शुरुआत साल 2018 में हुई थ|  राष्ट्रीय पोषण मिशन नीति आयोग की ओर से तैयार की गई नीति के तहत साल 2022 तक भारत को कुपोषण से मुक्त कराना है |

इस योजना की मदद से अल्प पोषण, एनीमिया से पीड़ित बच्चे गर्भवती महिलाएं या किशोर बच्चे को पोषण संबंधित समस्याओं में सुधार लाना है

साल 2019 -20 के  राष्ट्रीय परिवार सर्वेक्षण के पहले चरण

इस दौरान किए गए सर्वेक्षण में 22 राज्यों में से 16 राज्यों में 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों के कम वजन और उम्र के अनुसार कम लंबाई और कम शारीरिक विकास दर्ज की गई |

इस सर्वेक्षण में 17 राज्यों में बाल कुपोषण की स्थिति को स्पष्ट किया गया है इसके मुताबिक कई राज्य बाल कुपोषण के कई मानकों में नीचे चले गए हैं जैसे :

  • चाइल्ड स्टैंटीग
  • चाइल्ड वेस्टिंग
  • चिल्ड्रन अंडर वेट और चाइल्ड मोर्टालिटी रेट

चाइल्ड वेस्टिंग :   सर्वेक्षण के मुताबिक 5 साल से कम उम्र के बच्चों में चाइल्ड वेस्टिंग यानी बच्चों में दुबलापन कम होने के बजाय बढ़ रही है कई राज्यों जैसे तेलंगाना, केरल, बिहार ,असम और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में चाइल्ड वेस्टिंग की दर में इजाफा हुआ है जबकि महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल इस मानव पर स्थिर बने हुए हैं |

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चाइल्ड स्टैंटीग :   चाइल्ड स्टंटिंग बच्चों में नाटापन या कम लंबाई मानक में उम्र के अनुपात में बच्चों में वृद्धि मापी जाती है सर्वेक्षण के आंकड़ों के मुताबिक तेलंगाना, गुजरात, केरल, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में चाइल्ड स्टंटिंग का अनुपात बड़ा है सर्वेक्षण के आंकड़ों के मुताबिक साल 2015 19 के दौरान शिशु मृत्यु दर में थोड़ा सुधार हुआ है|

चिल्ड्रन अंडर वेट और चाइल्ड मोर्टालिटी रेट  :   चाइल्ड मोर्टालिटी रेट यानी शिशु मृत्यु दर का मतलब 1 से 5 वर्ष के 1000 जीवित बच्चों के जन्म पर होने वाली मौत की संख्या है | इस सर्वेक्षण में कई बड़े राज्य जैसे गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना ,असम और केरल में चिल्ड्रन अंडर वेट यानी बच्चों की लंबाई की तुलना में कम वजन में बढ़ोतरी दर्ज हुई है |

मिशन पोषण 2 : देश में बच्चों और गर्भवती महिलाओं के पोषण, आहार में ना कोई सुधार करेगा बल्कि बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने में भी काफी मददगार साबित होगा|  इसके साथ ही यह स्वास्थ्य एवं संपन्न भारत के निर्माण की राह को और भी आसान बनाएगा |

भारत में कुपोषण मुक्त करने के लिए चलाये गए मिशन 

भारत में खासकर महिलाओं और बच्चों को कुपोषण मुक्त करने और उनमें एनीमिया यानी खून की कमी की समस्या दूर करने के मकसद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 मार्च 2018 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर राजस्थान के झुंझुनू में मिशन पोषण 2 की शुरुआत की थी |

इस योजना का मकसद देश में 10 करोड़ से अधिक लोगों खासकर छोटे बच्चों महिलाओं और उनके छोटे बच्चों में कुपोषण और एनीमिया को कम करने का लक्ष्य है |

दरअसल राष्ट्रीय पोषण मिशन नीति आयोग की ओर से तैयार की गई राष्ट्रीय पोषण नीति का हिस्सा है इस नीति का मकसद साल 2022 तक भारत को कुपोषण से मुक्त कराना है |

राष्ट्रीय पोषण मिशन का मकसद दूरदर्शिता और तकनीक के जरिए बच्चों में बौनापन, कुपोषण ,खून की कमी और कम वजन के बच्चे के जन्म को रोकना है |

इसके अलावा किशोरावस्था के लड़कियों, गर्भवती महिलाओं , स्तनपान कराने वाली महिलाओं पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है इस तरह कुल मिलाकर राष्ट्रीय पोषण मिशन के जरिए समग्र रूप से कुपोषण रोकने का प्रयास किए जा रहे हैं |

  कुपोषण क्या है ?

जब किसी व्यक्ति को उसके जरूरत से कम पोषक तत्व मिलता है या जरूरत से ज्यादा पोषक तत्व मिलता है तो वह कुपोषण कहलाता है|

        कुपोषण से पिरित बच्चा

कुपोषण में अल्प पोषण और अत्यधिक पोषण दोनों शामिल है वही कुपोषण की ऐसी स्थिति जिस में पोषक तत्व गुण और मात्रा में शरीर के लिए काफी नहीं होते, यानी एक या एक से अधिक पोषक तत्व की कमी पाई जाती है. तब वह  कुपोषण कहलाती है ।

राष्ट्रीय पोषण मिशन का उद्देश्य

मसलन आयरन की कमी से एनीमिया होना राष्ट्रीय पोषण मिशन का उद्देश्य 6 वर्ष  तक के बच्चों में बौनापन कम करना है | इसके लिए 3वर्ष में 2 फ़ीसदी प्रतिवर्ष की दर से 6 फ़ीसदी कम करने का लक्ष्य रखा गया है  |

इसी तरह इसका एक मकसद 6वर्ष तक के बच्चों में कुपोषण की वजह से वजन की कमी समस्या को कम करना है इसके लिए भी 3 साल में 2 फ़ीसदी प्रति वर्ष के दर से 6 फ़ीसदी कम करने का लक्ष्य रखा गया है

इस योजना के तहत 5 से 59 महीने तक के छोटे बच्चों में खून की कमी के समस्या में कमी लाना है इसके लिए प्रतिवर्ष 3 फ़ीसदी की दर से 3 सालों में 9 फ़ीसदी कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है |

इस योजना का मकसद 15 से 49 महीनों के आयु वर्ग के किशोरियों और महिलाओं में भी मौजूद खून की कमी एनीमिया की समस्या को भी कम करना है. इसके लिए प्रतिवर्ष 3 फ़ीसदी की दर से 3 साल में 9 फ़ीसदी कमी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है |

इसके साथ ही इस योजना के तहत नवजात शिशु के जन्म के समय वजन में कमी की समस्या को भी कम करना है इसके लिए 3 साल में 2 फ़ीसदी प्रतिवर्ष की दर से 6 फ़ीसदी कम करने का लक्ष्य रखा गया है|

इस मिशन के तहत सन 2022 तक राष्ट्रीय स्तर पर बावनेपन 38.4 फ़ीसदी से घटाकर 25 फ़ीसदी तक लाना है इस कार्यक्रम के जरिए 10 करोड़ से ज्यादा लोगों को फायदा पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है |

आंगनबाड़ी केंद्रों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के जरिए राष्ट्रीय पोषण मिशन को जमीनी स्तर पर तेजी से लागू  करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर गठित तीन पोषण समितियों राष्ट्रीय पोषण परिषद ,राष्ट्रीय पोषण मिशन की कार्यान्वयन समिति और नेशनल टेक्निकल बोर्ड ऑन न्यूट्रिशन भी काम करती है  |

यह समितियां भारत में पोषण के संदर्भ में नीतिगत निर्देश प्रदान करने अलग-अलग योजनाओं के कार्य नियम के निगरानी करने के साथ ही राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के पोषण के स्थिति की समीक्षा करने के लिए जिम्मेदार हैं |

देश में कुपोषण की समस्या को कम करने के लिए सरकार कई स्तरों पर लगातार प्रयास कर रही है इसके लिए नासिर राष्ट्रीय पोषण मिशन की शुरुआत की गई बल्कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना भी शुरू की गई |

इसके साथ मिड डे मील राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के जरिए भी पोषण मिशन को सफल बनाने की पूरी कोशिश जारी है देश में कुपोषण की समस्या को कम करने की गति को और ज्यादा तेज करने के मकसद से है |

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर सन 2020 में तीसरे राष्ट्रीय पोषण माह की शुरुआत की राष्ट्रीय पोषण माह 2020 के दौरान दो कार्यों पर प्रमुखता से ध्यान दिया गया |

गंभीर कुपोषण से पीड़ित बच्चों की पहचान और ट्रैकिंग बुनियादी स्तर पर किचन गार्डन को बढ़ावा देने के लिए वृक्षारोपण अभियान. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को कुपोषण से निजात पाने के लिए सभी से योगदान करने की अपील की |

सितंबर 2020 में पोषण अभियान के तहत कुपोषण को रोकने के लिए आयुष मंत्रालय एवं महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के बीच एक समझौता भी किया गया | इसके तहत देश में मताओ और बच्चों में कुपोषण की समस्या रोकने के लिए वैज्ञानिक रूप से सिद्ध आयुष आधारित समस्याओं पर भी काम किया जाएगा |

दरअसल भारत में ज्यादातर आबादी अच्छा और पौष्टिक भोजन ना मिलने की वजह से कम वजन का अक्सर शिकार रहती है यही वजह है कि गर्भवती महिलाएं भी स्वस्थ नहीं रह पाती और बच्चा स्वस्थ पैदा नहीं होता है इन्हीं सब समस्याओं से निपटने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय न्यूट्रिशन मिशन , राष्ट्रीय पोषण मिशन की शुरुआत की

पिछले दो दशक में कुपोषण से मौत के मामले ने हमारे देश में काफी सुधार किया है | लेकिन कई राज्यों में अभी भी स्थिति चिंताजनक है देश के सालाना करीब 1400000 बच्चों की मौत हो रही है | जिसमें सात लाख से ज्यादा मौतें कुपोषण से हो रही है इसमें  बिहार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की स्थिति ज्यादा ही गंभीर है |

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के मुताबिक भारत की 38 फ़ीसदी बच्चों की लंबाई कम है वही 21 फ़ीसदी बच्चों का वजन उनकी लंबाई के अनुपात में काफी कम है जबकि 35 फ़ीसदी से ज्यादा बच्चों का वजन कम है | इंडियन काउंसिल ऑफ रिसर्च मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में 5 वर्ष तक की आयु के ज्यादातर बच्चे कुपोषण से ग्रस्त है |

5 से कम आयु में मरने वाले बच्चे कुपोषण से मरने वाले बच्चों का प्रतिशत सबसे अधिक बिहार, राजस्थान ,छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में है जबकि सबसे कम केरल, मेघालय, तमिलनाडु और मिजोरम तथा गोवा में है |

जबकि 40 फ़ीसदी बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास कम है इनमें से सबसे ज्यादा 49 फ़ीसदी उत्तर प्रदेश से है उत्तर प्रदेश में प्रति एक लाख में से 60000 बच्चों का जीवन गंभीर चुनौतियों से घिरा हुआ है वैज्ञानिकों ने इस गंभीर श्रेणी में राजस्थान, बिहार और असम को भी रखा है

देश में 33 फ़ीसदी बच्चे कम वजन से पीड़ित है झारखंड में 42 फ़ीसदी बच्चे कम वजन के मिल रहे हैं देश में एनीमिया से पीड़ित बच्चे करीब 60 फ़ीसदी हैं वहीं 54% महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं |

दिल्ली की महिलाओं में सबसे ज्यादा एनीमिया की समस्या पाई जाती है लगभग सभी राज्यों में कुपोषण एक बड़ी समस्या बनी हुई है |

बाकी राज्य के मुकाबले मध्यप्रदेश में मोटापा बढ़ने की दर सबसे ज्यादा है नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक कुपोषण का सबसे ज्यादा मामले बिहार में पाए गए | बिहार में 5 साल से कम उम्र के करीब 48 दशमलव शारीरिक रूप से बिहार के सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश झारखंड मेघालय और मध्य प्रदेश में पाए गए |

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक बिहार में 48.3 फ़ीसदी उत्तर प्रदेश में 46.3 फ़ीसदी झारखंड में 45.3 फ़ीसदी मेघालय में 43.8 फ़ीसदी और मध्य प्रदेश में 42 फ़ीसदी कुपोषित बच्चे हैं | जबकि पूरे देश का आंकड़ा करीब 35.7 फ़ीसदी है बच्चों की सेहत को लेकर एक और समस्या सामने आ रही है  |प्री डायबिटिक मिल रहे हैं

10 से 19 वर्ष की आयु के बीच क़रीब 9 फ़ीसदी बच्चे प्री डायबिटिक है 1990 में भारत में कुपोषण की वजह से होने वाली मौत की दर प्रति एक लाख पर 2336 थी ,यह 2017 में घटकर 801 पर पहुंच गई है |

पोषण की कमी और बीमारियां कुपोषण के सबसे प्रमुख कारण है इसकी वजह बड़ी बच्चों की उचित पोषण आहार नहीं मिलना है देश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति और राष्ट्रीय पोषण आहार मिशन  सितंबर महीने को पोषण महीने से रूप में मनाया जाता है |

इन सब के बावजूद कुपोषण की समस्या से निजात पाने के लिए केंद्र के साथ मिलकर राज्यों को व्यापक कदम उठाने की जरूरत है आजादी के 74 वर्ष बाद भी भारत कुपोषण जैसी समस्याओं को समाप्त नहीं कर पाया है  | आजादी के बाद से भारत में खाद्यान्न के उत्पादन में 5 गुना वृद्धि हुई है लेकिन कुपोषण का मामला चुनौती बना हुआ है

कुपोषण की समस्या खाद्यान्न की उपलब्धता न होने के कारण नहीं है बल्कि आहार खरीदने की शक्ति कम होने के कारण है. गरीबी के कारण क्रय शक्ति और पौष्टिक आहार के कारण कुपोषण जैसी समस्याएं पड़ने लगती है |

एनीमिया  और बच्चों की हड्डियों की कमजोर होने की समस्या से शिशु मृत्यु की दर बढ़ जाती है

सरकार की ओर से पिछले दो दशकों में अल्प पोशक और कुपोषण पर काबू पाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं

  • मिड डे मील
  • राष्ट्रीय पोषण मिशन
  • पोषण व्यवस्था अभियान
  • समेकित बाल विकास सेवाएं
  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली
  • मनरेगा जैसे कदम शामिल है

हालांकि इन सभी योजनाओं के उचित क्रियान्वयन के अभाव में अभी भी कुपोषण से लड़ाई चुनौतीपूर्ण बनी हुई है | कुपोषण आर्थिक विकास के असमानता विकास के असंतुलन का परिणाम है |  एक साथ बदलाव लाकर ही कुपोषण की समस्या से निपटा जा सकता है. पोषण की स्थिति में सुधार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों में संरचनात्मक बदलाव किए जाने की आवश्यकता है |

सरकार इस दिशा में तेजी से कदम उठा रही है ऐसा करके ही 2022 तक कुपोषण मुक्त भारत, सन 2030 तक गरीबी को समाप्त करने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है|

इसके लिए कुपोषित परिवारों की पहचान कर उन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए इसके लिए भारत में मिशन पोषण 2 के कार्यक्रमों को एक जन आंदोलन में बदलना होगा | जिसमें सबकी भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए | इसके लिए स्थानीय निकायों सामाजिक संगठनों सर्वजनिक और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों की व्यापक स्तर पर भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए |

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