मुगल साम्राज्य

मुगल साम्राज्य के शासक

इस लेख में जानेगे मुगल साम्राज्य के बारे में तथा उनके सभी शासको के बारे में जो इतिहास में महत्वपूर्ण कार्य एवं समाज कल्याण पर जोर दिया |

मुगल साम्राज्य

 

मुगल साम्राज्य

 

जहीरूद्दीन बाबर (  1526- 1530 )

  • मुगल साम्राज्य की स्थापना जहीरूद्दीन बाबर ने की ।
  • बाबर ने पानीपत के प्रथम युद्ध ( 21 अप्रैल , 1526 ) में इब्राहिम लोदी को पराजित कर भारत में मुगल साम्राज्य की नींव डाली ।
  • बाबर का जन्म 1483 ई . में फरगना में हुआ था ।
  • बाबर के पिता का नाम उमर शेख मिर्जा था ।
  • बाबर की माँ का नाम कुतलुग निगार खां था ।
  • बाबर पितृ पक्ष की ओर से तैमूर का पाँचवां वंशज तथा मातृ पक्ष की ओर से चंगेज खाँ का चौदहवां वंशज था ।
  • बाबर 1494 ई . में ( दादी ऐसान दौलत बेगम के सहयोग से ) फरगना का शासक बना ।
  • बाबर काबुल पर 1504 ई . में अधिकार कर लिया ।
  • बाबर ने पादशाह की उपाधि 1507 ई . में धारण की ।
  • पादशाह से पहले बाबर ने ‘ मिर्जा ‘ की पैतृक उपाधि धारण की थी ।
  • बाबर का भारत के विरुद्ध प्रथम अभियान 1519 ई . में युसुफजाई जाति के विरुद्ध था ।
  • बाबर ने 1519 ई . में बाजौर और भेरा भारतीय क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया ।
  • बाबर ने तोपखाने का प्रयोग भेरा अभियान में किया था ।
  • बाबर के ( 1526 में ) पाँचवें अभियान में उसका पुत्र हुमायूँ भी साथ था ।
  •  पानीपत का प्रथम युद्ध 21 अप्रैल , 1526 ई . को हुआ ।
  •  पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर ने तुलगुमा युद्ध नीति एवं तोपखाने के प्रयोग से युद्ध जीता तथा तोपों को सजाने में उस्मानी विधि ( रूमी विधि ) का प्रयोग किया था ।
  • बाबर के दो प्रमुख निशानेबाज उस्ताद अली एवं मुस्तफा थे । ये दोनों तोपखाने का नेतृत्व किया था ।
  • बाबर ने तुलगुमा युद्ध पद्धति उजबेकों से ग्रहण की थी ।
  • कलन्दर ‘ की उपाधि बाबर को दी गई थी ।
  • खानवा का युद्ध 1527 ई . में बाबर और राणा सांगा के बीच लड़ा गया ।
  • खानवा का युद्ध जीतने के उपरान्त बाबर ने ‘ गाजी ‘ की उपाधि ली ।
  • चंदेरी का युद्ध 1528 ई . में ( मेदनी राय पराजित ) हुआ ।
  • घाघरा का युद्ध 1529 ई . में ( बंगाल एवं बिहार की संयुक्त सेना पराजित ) हुआ ।
  • बाबर के आक्रमण के समय बंगाल का शासक नुसरत शाह था ।
  • बाबर ने अपनी आत्मकथा ‘ बाबरनामा ‘ की रचना तुर्की भाषा में की ।
  • बाबर ने बाबरनामा में केवल पाँच मुस्लिम शासकों – बंगाल , दिल्ली , मालवा , गुजरात एवं बहमनी तथा दो हिन्दू शासकों – मेवाड़ एवं विजयनगर का उल्लेख किया है ।
  • बाबरनामा का फारसी में अनुवाद अब्दुलरहीम खानखाना ने किया ।
  • बाबर को मुबईयान शैली और पद शैली का जन्मदाता माना जाता है ।
  • बाबर की मृत्यु 1530 ई . में आगरा में हुई ।
  • भूमि मापने के लिये बाबर ने गज – ए – बाबरी मापक का प्रयोग किया ।
  • बाबर के शव को काबुल में दफनाया गया ।
  • बाबर के चार पुत्र- हुमायूँ , कामरान , अस्करी एवं हिन्दाल थे ।

 

हुमायूँ ( 1530 ई . – 1556 ई . )

  • हुमायूँ 30 दिसम्बर , 1530 ई . को गद्दी पर बैठा ।
  • हुमायूँ का पूरा नाम नासिरुद्दीन मुहम्मद हुमायूँ था ।
  • बाबर ने मरते वक्त हुमायूँ को अपने छोटे भाइयों के साथ उदारता बरतने के निर्देश दिये ।
  • हुमायूँ का कालिंजर अभियान गुजरात के शासक बहादुरशाह के विरुद्ध था ।
  • दौराह का युद्ध 1532 ई . में हुमायूँ एवं महमूद लोदी के बीच हुआ ।
  • हुमायूँ ने चुनार का घेरा अफगान नायक शेर खाँ के विरुद्ध डाला था ।
  • 1533 ई . में हुमायूँ ने दिल्ली में दीनपनाह नामक विशाल दुर्ग का निर्माण मित्र एवं शत्रु को प्रभावित करने के लिये करवाया ।
  • हुमायूँ ने बंगाल के गौड़ क्षेत्र का नाम जन्नताबाद नाम रखा ।
  • चौसा का युद्ध 26 जून , 1539 ई . को हुआ , जिसमें शेर खाँ के हाथों हुमायूँ की पराजय हुई ।
  • चौसा के युद्ध के बाद शेर खाँ ने अपने को शेरशाह की उपाधि से सुसज्जित किया ।
  • कन्नौज ( बिलग्राम ) की लड़ाई 17 मई , 1540 को हुई ।
  • कन्नौज ( बिलग्राम ) की लड़ाई में हुमायूँ का साथ अस्करी एवं हिन्दाल भाईयों ने दिया । .
  • कन्नौज ( बिलग्राम ) में पराजित होने के बाद हुमायूँ सिंध चला गया ।
  • हुमायूँ ने शिया मीर बाबा दोस्त उर्फ मीर अली की पुत्री हमीदा बानू बेगम से शादी 29 अगस्त 1541 ई . में की ।
  • हुमायूँ ने लाहौर पर 1555 ई . में कब्जा किया ।
  • मच्छीवाड़ा का युद्ध हुमायूँ एवं अफगानों के बीच ( मई , 1555 में ) हुआ ।
  • जून , 1555 ई . में सरहिन्द का युद्ध अफगान सुल्तान सिकन बैरम खान के बीच हुआ था ।
  • हुमायूँ दुबारा दिल्ली की गद्दी पर 23 जुलाई , 1555 ई . को बैठा ।
  • हुमायूँ के पुस्तकालय का नाम शेरमण्डल था ।
  • हुमायूँ ज्योतिष में विश्वास रखता था । वह सोमवार को सफेद , शनिवार को काला एवं रविवार को पीला वस्त्र धारण करता था ।
  • दिल्ली में हुमायूँ ने मदरसा – ए – बेगम विद्यालय खुलवाया ।
  • हुमायूँ की मृत्यु जनवरी 1556 में , दीनपनाह भवन के पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिरकर हुई ।
  • लेनपूल में हुमायूँ के बारे में कहा – ‘ हुमायूँ जीवन भर लड़खड़ाता रहा और लड़खड़ाते हुए अपनी जान दी । ‘
  • . हुमायूँ को अबुल फजल ने ‘ इन्सान – ए – कामिल ‘ कहा है ।

 

शेरशाह सूरी ( 1540 ई . – 1545 ई . )

  • शेर खाँ का प्रारम्भिक नाम फरीद खाँ था ।
  • शेर खाँ के पिता हसन खाँ ( जौनपुर के छोटे जमींदार ) थे ।
  • . फरीद खाँ बिहार के सुल्तान मुहमद शाह नुहानी के यहाँ नौकरी करता था ।
  • . फरीद को शेर खाँ की उपाधि मुहम्मद शाह नुहानी ने दी ।
  • शेर खाँ दिल्ली की गद्दी पर 1540 ई . में 67 साल की उम्र में बैठा ।
  • अपने राज्याभिषेक के समय शेर खाँ ने शेरशाह की उपाधि ग्रहण की
  • 1541 ई . में शेरशाह ने गक्खरों के विरुद्ध अभियान किया ।
  • गक्खर मुगलों की सहायता करते थे ।
  • शेरशाह ने अपनी उत्तर – पश्चिम सीमा को सुरक्षित करने के लिये रोहतासगढ़ किले का निर्माण कराया ।
  • शेरशाह ने शिकदारों को नियंत्रित करने के लिए अमीन – ए – बंगला की नियुक्ति की ।
  • रणथम्भौर के शक्तिशाली किले को अपने अधीन कर अपने पुत्र आदिल खाँ को वहाँ का गवर्नर बनाया ।
  • शेरशाह द्वारा किये गये रायसीन किले पर रात में आक्रमण को उस पर काला धब्बा की संज्ञा दी गई है ।
  • शेरशाह को अकबर का अग्रदूत भी कहा जाता है ।
  • शेरशाह प्रसासनिक सुधार के रूप में जाना जाता है ।
  • मारवाड़ विजय के बारे में शेरशाह ने कहा कि ‘ मै मुट्ठी भर बाजरे के लिये हिन्दुस्तान के साम्राज्य को लगभग खो चुका था । ‘ .
  • शेरशाह के समय कालिंजर का शासक कीरत सिंह था ।
  • मृत्यु के समय शेरशाह उक्का नामक आग्नेयास्त्र चला रहा था ।
  • शेरशाह ने अपने संपूर्ण साम्राज्य को 47 सरकारों में विभाजित किया था ।
  • शेरशाह के समय स्थानीय करों को आबवाब कहा गया ।
  • शेरशाह ने उत्पादन के आधार पर भूमि को अच्छी , मध्यम और खराब तीन श्रेणियों में बांटा था ।
  • शेरशाह की लगान व्यवस्था मुख्यरूप में रैयतवाड़ी थी जिसमें किसानों से प्रत्यक्ष सम्पर्क स्थापित किया गया था ।
  • शेरशाह ने भूमि मापने के लिए 39 अंगुल या 32 इंच वाला ‘ सिकन्दरीगज ‘ एवं ‘ सन की डंडी ‘ मापक का प्रयोग किया ।
  • शेरशाह ने 178 ग्रेन का चाँदी का रुपया एवं 380 ग्रेन का ताँबे का दाम मुद्रा जारी   किया ।
  • शेरशाह के शासनकाल में 23 टकसालें थीं ।
  • शेरशाह ने 1700 सरायें एवं चार बड़ी सड़के तथा सड़कों के किनारे वृक्ष लगवाये ।
  • शेरशाह ने अनेक सड़कों का निर्माण कराया  एवं पुरानी सड़कों की मरम्मत करायी ।जिसमे चार सड़के अत्यंत प्रसिद्ध है /

 

( 1 ) बंगाल में सोनार गांव से शुरू होकर दिल्ली , लाहौर होती हुई पंजाब में अटक तक जाती है । इसे ही गवर्नर जनरल आकलैण्ड ने जी . टी . रोड कहकर पुकारा

( 2 ) आगरा से बुरहानपुर ।

( 3 ) आगरा से जोधपुर होते हुए चित्तौड़ तक ।

( 4 ) लाहौर से मुल्तान तक । ग्राण्ड ट्रंक रोड का निर्माण शेरशाह ने करवाया । .

  • कन्नौज के स्थान पर ‘ शेरसूर ‘ नामक नगर शेरशाह ने बसाया ।
  • शेरशाह ने पाटलिपुत्र का नाम पटना रखा ।
  • .शेरशाह ने सिक्कों पर अपना नाम अरबी एवं देवनागरी लिपि में खुदवाया ।
  • शेरशाह का मकबरा बिहार के सासाराम में , झील के अन्दर है ।
  • . शेरशाह ने हुमायूँ द्वारा निर्मित दीनपनाह को तुड़वाकर उसके ध्वंशावशेषों पर पुराना किला का निर्माण करवाया ।
  • किला – ए – कुहना मस्जिद का निर्माण शेरशाह सूरी ने कराया ।
  • अब्बास खां ने शेरशाह की प्रशंसा करते हुए कहा कि – ‘ बुद्धिमता और अनुभव में वह दूसरा हैदर था ।
  • ‘ शेरशाह ने ‘ सुल्तान – उल – अदल ‘ की उपाधि धारण कर रखी थी ।
  • शेरशाह की मृत्यु 1545 ई . में कालिंजर किले की दीवार से टकराकर लौटे तोप के गोले से हुई ।

 

अकबर ( 1556 ई . – 1605 ई . )

  • अकबर का जन्म 15 अक्टूबर , 1542 ई . में अमरकोट के राणा वीरसाल के महल में हुआ था ।
  • अकबर को पहली बार नौ वर्ष की अवस्था में गजनी की सूबेदारी मिली ।
  • अकबर का संरक्षक मुनीम खाँ था ( गजनी में ) ।
  • हुमायूँ ने अकबर को युवराज सरहिन्द जीतने के बाद ( 1555 ई . में ) घोषित किया ।
  • युवराज अकबर का संरक्षक तुर्क सेनापति बैरम खान को नियुक्त किया गया ।
  • अकबर का राज्याभिषेक 14 फरवरी , 1556 को कालानौर में हुआ ।
  • इस समय इसकी उम्र 13 वर्ष थी । अकबर निरक्षर था ।

 

      अकबर के कुछ महत्वपूर्ण कार्य वर्ष कार्य

     वर्ष              कार्य
1562 ई.दास प्रथा का अंत
1562 अकबर की ‘ हरमदल ‘ से मुक्ति
1563 तीर्थयात्रा कर समाप्त
1564 जजिया कर समाप्त
1571 फतेहपुर सीकरी की स्थापना एवं | राजधानी का आगरे से फतेहपुर स्थानान्तरण
1575 इबादत खाने की स्थापना
1579 महजर की घोषणा
1580 ‘ दहसाला प्रणाली ( टोडरमल द्वारा ) लागू
    1582 ई                               दीन – ए – इलाही की घोषणा अकबर बादशाह गाजी की उपाधि के साथ राजसिंहासन पर बैठा

 

  • अकबर ने मुगल साम्राज्य बनने पर बैरम खाँ को वकील नियुक्त खान – ए- की उपाधि दी ।
  • बैरम खाँ 1556 से 1560 ई . तक अकबर का संरक्षक रहा ।
  • हेमू सूर शासक आदिलशाह का प्रधानमंत्री था ।
  • हेमू को 24 युद्धों में से 22 युद्ध जीतने का श्रेय प्राप्त है ।
  • आदिलशाह ने हेमू को विक्रमादित्य की उपाधि प्रदान की ।
  • हेमू ने दिल्ली में तरगी बेग को परास्त कर शाही छत्र धारण किया तथा अपने नाम के सिक्के चलवाये ।
  • पानीपत की द्वितीय लड़ाई 5 नवम्बर , 1556 ई . को हेमू और बैरम खाँ के बीच हुई ।
  • अकबर ने अपने गुजरात विजय की स्मृति में राजधानी फतेहपुर सीकरी में एक बुलंद दरवाजा बनाया था ।
  • गुजरात विजय को स्मिथ ने विश्व के इतिहास का सबसे द्रुतगामी ( तेज ) आक्रमण कहा है ।
  • हल्दीघाटी का युद्ध जून 1576 ई . में अकबर एवं महाराणा प्रताप के बीच हुआ था ।
  • अकबर ने काबुल की सूबेदारी बख्तुन्निसा बेगम को सौंपी ।
  • अकबर ने कश्मीर विजय के लिए भगवानदास एवं कासिम खाँ को भेजा था ।
  • अकबर ने खानदेश को 1591 ई . में जीता । जिसे दक्षिण भारत का प्रवेश द्वारा माना . जाता था ।
  • अकबर ने सम्राट की उपाधि दक्षिण विजय के बाद ग्रहण की ।
  • . अकबर की मृत्यु अतिसार रोग के कारण ( 21 अक्टूबर , 1605 को ) हुई थी ।
  • अकबर को बौद्ध प्रभाव से प्रभावित सिकन्दरा के मकबरे में दफनाया गया ।
  • . अकबर ने 1575 ई . में इबादतखाने की स्थापना फतेहपुर सीकरी में कराई ।
  • . इबादतखाना का उद्देश्य प्रत्येक रविवार को धार्मिक विषयों पर खुला वाद – विवाद था ।
  • अकबर ने महजरनामा नामक दस्तावेज 1579 ई . में जारी किया । इसका प्रारूप ‘ शेख मुबारक ‘ ने तैयार किया था ।
  • शेख मुबारक अबुल फजल और फैजी के पिता थे ।
  • महजरनामा जारी होने के बाद अकबर ने सुल्ताने आदिल की उपाधि धारण की ।
  • अकबर ने सभी धर्मों में सामंजस्य स्थापित करने के लिए तौहिद – ए – इलाही ( दैवी एकेश्वरवाद ) या दीन – ए – इलाही नामक एक नए धर्म प्रवर्तित किया ।
  • अकबर ने दीन – ए – इलाही या ‘ तौहिद ए – इलाही ‘ की घोषणा 1582 ई . में की ।
  • दीन – ए – इलाही का पुरोहित अबुल फजल था ।
  • हिन्दू राजाओं में बीरबल ने दीन – ए – इलाही को स्वीकार किया ।
  • अकबर ने आगरा एवं लाहौर में ईसाइयों को गिरजाघर बनवाने की अनुमति प्रदान की ।
  • अकबर ने हरिविजय सूरि को जगतगुरु की उपाधि दिया ।
  • अकबर के नवरत्न » बीरबल > तानसेन > मुल्ला दो प्याजा > राजा मानसिंह >हकीम हुकाम> राजा टोडरमल > अब्दुर रहीम खान – ए – खाना- >फैजी > अबुल फजल अकबर पर सर्वाधिक प्रभाव हिन्दू धर्म का पड़ा ।
  • अकबर ने इलाही संवत 1583 ई . में जारी किया ।
  • अकबर ने बीरबल को कविराज एवं राजा की उपाधि प्रदान की थी ।
  • बीरबल की मृत्यु युसुफजाइयों का विद्रोह दबाते समय हुई ।
  • अकबरनामा ‘ एवं ‘ आइन – ए – अकबरी ‘ की रचना अबुल फजल ने की थी ।
  • अकबर की सेवा में आने से पहले टोडरमल शेरशाह के दरबार में था ।
  • अकबर के भूमि सम्बन्धी सुधारों का श्रेय जाता है |
  •  अकबर ने भगवानदास आमेर के राजा भारमल के पुत्र को अमीर – उल – उमरा की उपाधि दी थी ।
  • तानसेन का जन्म ग्वालियर में हुआ था ।
  • तानसेन का मूल नाम रामतनु पाण्डेय था ।
  • .ध्रुपद गायन शैली का विकास तानसेन के समय में हुआ |
  •  अकबर ने तानसेन को कण्ठाभरण वाणीविलास की उपाधि दी थी ।
  • तानसेन की प्रमुख कृतियाँ मियाँ की मल्हार ‘ , ‘ मियाँ की टोड़ी ‘ , ‘ मियाँ सारंग ‘ और ‘ दरबारी कान्हडा ‘ थी ।
  • बैरम खाँ के पुत्र अब्दुर्रहीम खानखाना विद्वान तथा कवि थे ।
  • जहाँगीर सबसे ज्यादा अब्दुर्रहीम खानखाना से प्रभावित था ।
  • हकीम हुकाम अकबर के रसोईघर का प्रधान था ।
  • अकबर का दरबारी राजकवि फैजी था ।
  • अकबर ने अपनी राजधानी आगरा से फतेहपुर सिकरी 1571 ई . में स्थानान्तरित की ।
  • राजपूत राजा महाराणा प्रताप ने अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की ।
  • मुगल साम्राज्य चित्रशाला की प्रथम कृति का नाम दास्ताने – अमीर – हम्जा ( इसमें 1200 चित्र हैं ) था ।
  • दसवंत द्वारा बनाये गये चित्र हम्जनामा , खानदाने तैमूरिया एवं तूतीनामा में मिलते हैं ।
  • अकबर के समय का सर्वोत्कृष्ट चित्रकार बसावन को माना जाता है ।
  • पहली बार भिति चित्रकारी अकबर के समय शुरू हुई ।
  • अकबर ने जैनाचार्य हरिविजय सूरी को गुजरात में आमंत्रित किया था जिसे जगत गुरु की उपाधी प्रदान की ।
  • तुलसीदास मुगल शासक अकबर एवं मेवाड़ के शासक राणा प्रताप के समकालीन थे ।

 

जहाँगीर ( 1605-1627 ई . )

  • जहाँगीर का वास्तविक नाम सलीम था ।
  • जहाँगीर की माँ का नाम मरियम उज्जमानी था ।
  • अकबर सलीम को शेखो बाबा नाम से पुकारता था ।
  • जहाँगीर के गुरु अब्दुर्रहीम खानखाना थे ।
  • जहाँगीर का विवाह राजा भगवान दास की पुत्री मानबाई से तथा मोटा राजा उदय सिंह की पुत्री जगत गोसाई से हुआ था ।
  • ‘ मानबाई ‘ को सलीम ने ‘ शाह बेगम ‘ की उपाधि दी थी
  • किन्तु बाद में उसने सलीम की आदतों से दुखी होकर आत्महत्या कर ली थी ।
  • जहाँगीर 21 अक्टूबर , 1605 ई . को गद्दी पर बैठा |
  • जहाँगीर का राज्याभिषेक नूरुद्दीन मुहम्मद जहाँगीर बादशाह गाजी के नाम से आगरा में हुआ ।
  • स जहाँगीर ने न्याय की जंजीर आगरा किले के शाहबुर्ज पर एवं यमुना तट पर लगवाई थी ।
  • न्याय की जंजीर में 60 घंटियां थीं ।
  • लोक कल्याण के उद्देश्य से सम्बन्धित 12 आदेशों की घोषणा जहाँगीर ने करवाई ।
  •  जहाँगीर का प्रथम आदेश तमगा नामक कर वसूली पर प्रतिबन्ध था ।
  • जहाँगीर का पाँचवाँ आदेश शराब एवं अन्य मादक पदार्थों की बिक्री एवं निर्माण पर प्रतिबन्ध था
  • सप्ताह में गुरुवार एवं रविवार के दिन पशु हत्या पर प्रतिबन्ध था ।
  • जमानबेग को महावत खाँ की उपाधि दी गई ।
  • . जहाँगीर का सबसे बड़ा पुत्र खुसरो था ।
  • खुसरो ने 1606 ई . में जहाँगीर के विरुद्ध विद्रोह कर दिया ।
  • खुसरो की हत्या शाहजहाँ ने करवाई ।
  • सम्राट जहाँगीर एवं राणा अमर सिंह के बीच 1615 ई . में संधि हुई ।
  • जहाँगीर के समय अहमदनगर का वजीर मलिक अम्बर था ।
  • गुरिल्ला युद्ध पद्धति की शुरुआत मलिक अम्बर ने की ।
  • मलिक अम्बर ने जंजीरा द्वीप पर नौसेना गठित की थी ।
  • 1616 ई . में शहजादा खुर्रम को दक्षिण अभियान के लिये भेजा गया ।
  • शहजादा खुर्रम को शाह सुल्तान की उपाधि दी गई थी ।
  • जहाँगीर ने खुर्रम की दक्षिण विजय से खुश होकर उसे शाहजहाँ की उपाधि दी ।
  • शाहजहाँ ने दक्षिण का सूबेदार अब्दुर्रहीम खानखाना को बनाया ।
  • नूरजहाँ ईरानी मिर्जा ग्यासबेग की पुत्री थी ।
  • नूरजहाँ का वास्तविक नाम मेहरुन्निसा था । .
  • मेहरुन्निसा ‘ अली कुली खां ‘ ( शेर अफगान ) की विधवा थी ।
  • जहागीर में मेहरुनिसा को सर्वप्रथम नौरोज त्योहार के अवसर पर देखा था ।
  • जहाँगीर की शादी मेहरुन्निसा से 1611 में हुई |
  • आपक जहांगीर में शादी के बाद मेहरुन्निसा को नूरमहल एवं नूरजहाँ की उपाधि प्रदान की ।
  • नूरजहाँ को बादशाह की बेगम 1613 ई . में बनाया गया ।
  • जहाँगीर ने नूरजहाँ के पिता ग्यासवेग को एत्मादुद्दौला की उपाधि प्रदान की ।
  • . नूरजहाँ की माँ का नाम अस्मत् बेगम था ।
  • सर्वप्रथम इत्र बनाने की कला अस्मत् बेगम ने विकसित की ।
  • जहाँगीर एवं नूरजहाँ को महावत खाँ ने बन्दी बनाया था ।
  • जहाँगीर के दरबार में विलियम हॉकिन्स , विलियम फिन्च , सर टॉमस रो एवं एडवर्ड टैरी , यूरोपीय यात्री आये थे ।
  •  जहाँगीर के पाँच पुत्र थे ।
  • लाडली बेगम नूरजहाँ की पुत्री थी ।
  • लाडली बेगम की शादी शहरयार के साथ हुई ।
  •  मुगल चित्र कला अपने चरमोत्कर्ष पर जहाँगीर के काल में पहुँची ।
  • जहाँगीर के दरबार में प्रमुख चित्रकार मंसूर , विशनदास , मनोहर , अकारिजा एवं अबुल हसन थे । .
  • कश्मीर का शालीमार बाग जहाँगीर ने लगवाया ।
  • इकबालनामा – ए – जहाँगीरी ‘ मौतमिद खाँ ने लिखा ।
  • जहाँगीर एवं एत्मादुद्दौला का मकबरा नूरजहाँ ने बनवाया ।
  • जहाँगीर की मृत्यु नवम्बर , 1627 में भीमवार नामक स्थान पर हुई ।
  • जहाँगीर को रावी नदी के किनारे शाहादरा में दफनाया गया ।
  • शाहजहाँ नूरजहाँ को दो लाख रुपया वार्षिक पेंशन देता था ।

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शाहजहाँ ( 1628 ई . –1658 ई . )

  • शाहजहाँ फरवरी 1628 ई . में राजगद्दी पर बैठा ।
  • शाहजहाँ का वास्तविक नाम शाहजादा खुर्रम था ।
  • शाहजहाँ का विवाह अर्जुमन्द बानो बेगम से हुआ था । वई उप
  • अर्जु मन्द बानो बेगम को शाहजहाँ ने मलिका – ए – जमानी की उपाधि प्रदान की ।
  • अर्जुमन्द बानो बेगम को मुमताज महल के नाम से जाना जाता है ।
  • हुमायूँ के मकबरा को ताजमहल का पूर्ववर्ती माना जाता है ।
  • शाहजहाँ ने मुमताज की याद में ताजमहल के नाम से स्मारक बनवाया ।
  • मुमताज महल आसफ खाँ की पुत्री थी ।
  • शाहजहाँ अबुल मुजफ्फर शहाबुद्दीन मुहम्मद साहिब किरन ए सानी ‘ उपाधि के साथ गद्दी पर बैठा ।
  • शाहजहाँ ने महावत खाँ को खानखाना की उपाधि प्रदान की ।
  • 1632 ई . में पुर्तगालियों के प्रभाव को समाप्त करने के लिए शाहजहाँ ने उनके हुगली व्यापारिक केन्द्र पर अधिकार कर लिया ।
  • सिखों के छठे गुरु गुरु हरगोविन्द का शाहजहाँ से संघर्ष हुआ ।
  • शाहजहाँ ने दक्षिण का सूबेदार औरंगजेब को नियुक्त किया । .
  • औरंगजेब ने दक्षिण की राजधानी औरंगाबाद को बनाई ।
  • खानदेश की राजधानी बुरहानपुर थी ।
  • औरंगजेब ने दक्षिण भारत को चार सूबों में बाँटा ।
  • बरार की राजधानी इलिचपुर थी ।
  • तेलंगाना की राजधानी नान्देड़ थी । .
  • औरंगजेब ने दक्षिण में भू – राजस्व व्यवस्था का दायित्व मुर्शिद कुली खाँ को सौंपा ।
  • मीर जुमला का वास्तविक नाम मीर मोहम्मद सैय्यद था ।
  • मीर जुमला ने शाहजहाँ को ‘ कोहिनूर ‘ हीरा भेंट किया था ।
  • शाहजहाँ ने मीर जुमला को दक्षिणी सूबों का प्रधानमंत्री पद दिया था ।
  • मुगल आधिपत्य के समय गोलकुण्डा विश्व के सबसे बड़े हीरा विक्रेता बाजार के रूप में प्रसिद्ध था ।
  • शाहजहाँ ने मध्य एशिया विजित करने के लिये शहजादा मुराद एवं औरंगजेब को भेजा । .
  • औरंगजेब पहली बार 1636 से 1644 ई . तक , फिर 1652 से 1657 ई . तक दक्षिण का सूबेदार रहा ।
  • शाहजहाँ की सात ( चार लड़के एवं तीन लड़कियाँ ) सन्तानें थी ।
  • शाहजहाँ के चारों पुत्रों में सर्वाधिक उदार दारा शिकोह था । .
  • शाहजहाँ ने दारा शिकोह को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था ।
  • शाहजहाँ ने मयूर सिंहासन का निर्माण बेबादल खाँ से करवाया ।
  •  मुगल शासक शाहजहाँ को निर्माताओं का राजकुमार कहा जाता है ।
  • वास्तुकला की दृष्टि से शाहजहाँ का काल स्वर्णयुग कहलाता है ।
  • विश्व का सबसे महंगा कोहिनूर हीरा शाहजहाँ के तख्तेताउस ( मयूर सिंहासन ) में लगा था ।
  • दिल्ली की जामा मस्जिद शाहजहाँ ने बनवाई ।
  • शाहजहाँ ने दाम और आधा के मध्य ” आना ” का नये सिक्के का प्रचलन करवाया ।
  • लगान वसूली की ठेकेदारी प्रथा का आरम्भ शाहजहाँ ने किया ।
  • शाहजहाँ ने 1636-37 में ‘ सिजदा ‘ एवं ‘ पाबोस ‘ प्रथा समाप्त कर दी ।
  • शाहजहाँ ने ‘ इलाही संवत ‘ के स्थान पर ‘ हिजरी संवत ‘ चलाया । .
  •  गंगा लहरी ‘ तथा ‘ रस गंगाधर ‘ के लेखक पंडित जगन्नाथ ( महाकविराय ) शाहजहाँ के राजकवि थे ।
  • चिन्तामणि , कबीन्द्राचार्य और सुन्दरदास भी शाहजहाँ के दरबार में हिन्दू लेखक थे ।
  • दक्षिण का . टोडरमल ‘ मुर्शिद कुली खाँ को कहा जाता है । .
  • शाहजहाँ के शासन के 20 वर्षों का इतिहास अब्दुल हमीद लाहौरी ने पादशाहनामा ‘ में लिखा ।
  • महाभारत का फारसी अनुवाद ‘ रज्मनामा ‘ के नाम से किया गया ।
  • मुगल काल में संगमरमर जोधपुर के मकराना से लाया जाता था ।
  • शाहजहाँ के दरबार के प्रमुख चित्रकार मुहम्मद फकीर एवं मीर हासिम थे ।
  • शाहजहाँ ने ताजमहल का निर्माण उस्ताद इसा खाँ की देख – रेख में कराया ।
  • ताजमहल का नक्शा ( खाका ) उस्ताद अहमद लाहौरी ने तैयार किया था ।
  • .शाहजहाँ ने लाहौरी को नादिर – उल – अस्र की उपाधि दी थी ।
  • शाहजहाँ के बीमार पड़ने पर प्रथम उत्तराधिकार युद्ध फरवरी 1658 ई . में बहादुरपुर
  • उत्तराधिकार की अन्तिम लड़ाई अप्रैल 1659 ई . में दारा एवं औरंगजेब के बीच हुई ।
  • दारा शिकोह अपना जीवन अलवर ( राजस्थान ) के कंकबाड़ी किला में बिताया जिसे जयसिंह द्वितीय ने बनावाय था ।
  • औरंगजेब ने शाहजहाँ को कैद कर आगरा के किले में रखा था ।
  • शाहजहाँ की मृत्यु जनवरी 1666 में हुई |
  • शाहजहाँ की अर्थी को साधारण नौकरों, हिजड़ों ने कंधा दिया ।

 

औरंगजेब ( 1658 ई . – 1707 ई . )

  • औरंगजेब सर्वप्रथम जुलाई 1658 ई . को गरी न एवं डॉ ।
  • औरंगजेब का दूसरी बार राज्याभिषेक जून 1659 ई . में हुआ ।
  • औरंगजेब मुमताज महल का पुत्र था ।
  • औरंगजेब ने प्रथम युद्ध ओरछा के जुझार सिंह के विरुद्ध लड़ा था ।
  • औरंगजेब ने 1668 ई . में हिन्दू – त्यौहारों और उत्सवों को मनाये जाने पर रोक लगा दी ।
  • पुरन्दर की सन्धि 1665 ई . में शिवाजी एवं जयसिंह के बीच हुई ।
  • मदन्ना और अकन्ना गोलकुण्डा के शासक अबुल हसन के मन्त्री थे ।
  • . शिवाजी को कैद कर जयपुर भवन में रखा गया था । यहीं से शिवाजी गुप्त रूप से फरार हो गए ।
  • औरंगजेब के विरुद्ध मथुरा का जाट विद्रोह जाट नेता गोकुल के नेतृत्व में ( 1669 ई . में 1 न । में ) हुआ ।
  • सिकन्दरा स्थित अकबर के मकबरे को राजाराम ने लूटा ।
  • भरतपुर राजवंश की नींव चूडामल ने डाली । .
  • गुरु तेगबहादुर की हत्या औरंगजेब ने कराई ।
  • . औरंगजेब को ‘ जिंदापीर ‘ कहा जाता है ।
  • औरंगजेब ने असम जीतने का कार्य मीर जुमला को सौंपा ।
  • औरंगजेब के समय हिन्दू मनसबदारों की संख्या लगभग 33 प्रतिशत थी ।
  • . औरंगजेब ने अपने शासन का आधार कुरान को बनाया ।
  • औरंगजेब ने जजिया कर 1679 ई . में लगाया ।
  • . जयसिंह ने राजपूतों पर से जजिया कर हटाने के बदले औरंगजेब को आदलपुर एवं बेदनोर दो क्षेत्र दिये ।
  •  बनारस के विश्वनाथ मन्दिर और मथुरा के केशवराय मन्दिर औरंगजेब ने ( 1669 में ) तुड़वाये ।
  • औरंगजेब ने सिक्के पर कलमा खुदवाना , नौरोज का त्योहार मनाना , भांग की खेती करना , नाच – गाना , झरोखा दर्शन एवं तुलादान पर प्रतिबंध लगा दिया ।
  • औरंगजेब ने शरियत के विरुद्ध लिये जाने वाले लगभग 80 करों को समाप्त कर दिया ।
  • औरंगजेब का मुख्य लक्ष्य दारुल हर्ब को दारुल इस्लाम में परिवर्तित करना था ।
  • औरंगजेब ने बीजापुर को 1686 ई . तथा गोलकुंडा को 1687 ई . में मुगल सम्राज्य में मिलाया ।
  • औरंगजेब की मृत्यु अहमदाबाद में मार्च 1707 ई . में हुई ।
  • औरंगजेब को दौलताबाद स्थित फकीर बुरहानुद्दीन की कब्र के अहाते में दफनाया गया ।

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