राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर ( NPR )और ( NRC ) क्या है ?

हाल फिलहाल में नेशनल रजिस्टर पापुलेशन ( एनपीआर ) काफी सुर्खियों में है इसे राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर कहा जाता है | दरअसल यह देश के स्वाभाविक निवासियों की समग्र पहचान का एक डेटाबेस है| यानी एनपीआर देश के सभी स्थानीय निवासियों का बेवड़ा है |

 

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर यानी एनपीआर सामान्य रूप से भारत में रहने वालों का एक रजिस्टर बेवड़ा है| यानी भारत में रहने वाले स्वाभाविक निवासियों का एक रजिस्टर, इसे ग्राम पंचायत, तहसील, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है |

अगर कोई बाहरी व्यक्ति देश के किसी  देश में 6 महीने से ज्यादा समय से रह रहा है तो उसका बेवड़ा भी एनपीआर में दर्ज होगा | भारत में रहने वालों के लिए एनपीआर के तहत रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है |

नागरिकता कानून 1955 और सिटीजनशिप रुलस नागरिकता पंजीयन और राष्ट्रीय पहचान पत्र आवंटन नियम 2003 के प्रावधानों के तहत राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर तैयार होता है |

नागरिकता कानून 1955 को 2004 में संशोधित किया गया था | जिसके तहत एनपीआर के प्रावधान जोड़े गए थे सिटीजनशिप एक्ट 1955 के 14A  में यह प्रावधान तय किए गए कि केंद्र सरकार देश के हर नागरिक का अनिवार्य पंजीकरण कर राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी कर सकती है |

केंद्र सरकार देश में हर नागरिक का रजिस्टर तैयार कर सकती है इसके लिए नेशनल रजिस्टर अथॉरिटी भी गठित की जा सकती है | नागरिकता कानून 1955 और नागरिकता नियम 2003 के तहत राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर पहली बार 2010 में तैयार किया गया था तब 2011 में जनगणना के पहले इस पर काम शुरू हुआ था आधार से जोड़े जाने के बाद 2015 में इसे अपडेट किया गया था |

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का मकसद देश की स्वाभाविक निवासियों की समग्र पहचान का डेटाबेस तैयार करना है इसमें भौगोलिक और बायोमेट्रिक जानकारी दोनों हो सकती है |

एनपीआर तैयार करने में हर स्थानीय को ये पूछे जायेगे |

  • माता पिता का नाम
  • लिंग
  • वैवाहिक स्थिति
  • पति पत्नी का नाम
  • घर के मुखिया से संबंध
  • जन्म स्थान
  • राष्ट्रीयता वर्तमान पता
  • निवासी की अवधि
  • शैक्षणिक योग्यता
  • और व्यवसाय की जानकारी मांगी जाती है |

इससे नोट करके उसकी रसीद भी दी जाती है सरकार के मुताबिक इस बार एनपीआर करने का काम अप्रैल और सितंबर 2020 के बीच असम को छोड़कर अन्य सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किया जाएगा. राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर जनगणना कार्य के साथ अपडेट किया जाएगा |

सवाल उठता है की एनपीआर के मुताबिक स्थानीय निवासी कौन है

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर में शामिल करने के लिए स्थानीय निवासी का अर्थ किसी स्थान पर 6 महीनों या उससे ज्यादा समय से रहा व्यक्ति है |

उस स्थान पर अगले छह महीनों या उससे ज्यादा वक्त तक उसी स्थान पर रहने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को भी स्थानीय निवासी माना जाएगा इसमें लोगों द्वारा दी गई सूचना को ही दर्ज किया जाएगा |

एनपीआर लाने का उद्देश्य क्या है

देश के हर स्थानीय निवासी का पहचान का संपूर्ण डेटाबेस तैयार करना है | सरल शब्दों में कहे तो  देश हर नागरिक के जनकारी को एक जगह इकट्ठा करने का काम है |

सरकार अपनी योजनाओं को तैयार करने धोखाधड़ी को रोकने और हर परिवार तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए एनपीआर का इस्तेमाल कर सकती हैं | यानी एनपीआर से मिली जानकारी का इस्तेमाल सरकार सरकारी योजनाओं के लाभ देने में किया जा सकता है |

जिससे यह व्यवस्था पारदर्शी बनी रहे और सही लाभार्थी तक योजनाओं का लाभ पहुंच सके इन सेवाओं में बैंकिंग और बीमा से जुड़ी सेवाएं है|

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर
                resourse. organiser.org

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर ( एन पी आर ) से लोगो को क्या फायदा होगा 

  • खेती से जुड़ी योजनाओं में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है
  • बीज उर्वरक कीटनाशक और खेती के लिए ऋण से जुड़ी योजनाओं में भी काम आ सकता है
  • जमीन संपत्ति और शेयर के रजिस्ट्रेशन में इसका इस्तेमाल हो सकता है
  • एनपीआर का इस्तेमाल स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवाओं में भी किया जा सकता है
  • रोजगार के लिए भी इसका इस्तेमाल संभव है
  • वही आपदा प्रबंधन के नजरिए से भी एनपीआर बहुत कारगर है
  • दिव्यांगता वृद्धावस्था पेंशन और फ्रीडम फाइटर से जुड़े मसलों में भी इसका इस्तेमाल बहुत ही महत्वपूर्ण है

 आयुष्मान भारत, जन धन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना ,उज्जवला योजना और सौभाग्य जैसी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए एनपीआर की सूचनाओं का उपयोग किया गया था | राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर यानी एन पी आर में लोगों की ओर से दी गई सूचना को ही सही माना जाता है यह नागरिकता का प्रमाण नहीं होता

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत की जनगणना 2021 की प्रक्रिया शुरू करने के साथ ही राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर यानी एनपीआर को भी शुरू करने की मंजूरी दे दी है |

क्या राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर ( NPR ) से आम लोगो को खतरा है ?

कैबिनेट के निर्णय की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि एनपीआर के लिए किसी तरह की कागजात यह सबूत की जरूरत नहीं होगी उन्होंने कहा कि कोई दस्तावेज नहीं मांगे जा रहे हैं बायोमेट्रिक भी नहीं मांगा जा रहा है |

वही अमित शाह ने स्थिति स्पष्ट की उन्होंने कहा कि एनपीआर में आम आदमी जो सूचना देंगे उसके आधार पर जानकारियां एकत्रित की जाएगी इसके लिए किसी से कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा उन्होंने कहा इन डेटाबेस के जरिए ही जनता के हित से योजनाएं बनती है एनपीआर से सरकार आगे की योजना तैयार करती है |

अमित शाह ने कहा कि पिछली सरकार में भी ऐसी ही व्यवस्था की गई थी एनपीआरसी किसी व्यक्ति को नागरिकता का कोई खतरा नहीं है इसके नाम पर लोगों को भड़काया जा रहा है |

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने जानकारी दी की जनगणना की इस पूरी प्रक्रिया को लागू करने पर 8754 करोड़ का खर्च आएगा वही एनपीआर की प्रक्रिया को लागू करने पर 3941 करोड़ का खर्च आएगा|

जनगणना की प्रक्रिया के दायरे में देश की पूरी आबादी आएगी, जबकि एनपीआर को बनाने के लिए असम को छोड़कर देश की बाकी आबादी को शामिल किया जाएगा |

भारत की जनसंख्या की गणना प्रक्रिया

भारत की जनसंख्या गणना प्रक्रिया दुनिया की सबसे बड़ी जनसंख्या गणना प्रक्रिया है देश में जनसंख्या का काम हर 10 साल बाद होता है ऐसे में अगली जनसंख्या गणना 2021 में होगी |जनसंख्या गणना का यह काम दो चरणों में किया जाएगा |

  1. पहले चरण में अप्रैल 2020 तक प्रत्येक घर और उसमें रहने वाले व्यक्ति की सूची बनाई जाएगी
  2.  दूसरे चरण में 9 फरवरी से 28 फरवरी 2021 तक पूरी जनसंख्या गणना का काम होगा राष्ट्रीय महत्व के इस काम को एनपीआर को पूरा करने के लिए 3000000 कर्मियों को देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा जाएगा |

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एनपीआर यानि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर देश के स्वाभाविक जनसंख्या का एक रजिस्टर है | एनपीआर का मकसद देश के निवासियों की समग्र पहचान का डेटाबेस तैयार करना है |

एनपीआर समय-समय पर अपडेट होता रहता है | 2021 में होने वाले जनगणना से पहले एनपीआर का काम 2020 तक पूरा किया जाएगा जैसे एनपीआर का काम 2011 की जनगणना से पहले 2010 में पूरा कर लिया गया था | 2015 में भी एनपीआर को अपडेट किया था जबकि जनगणना हर 10 साल में एक ही बार होती है |

पिछले करीब 130 साल के इतिहास में हर 10 साल में पुख्ता आंकड़े जारी करने का काम जनगणना के जरिए होता है  |इसकी शुरुआत 1872 में हुई जब भारत के अलग-अलग हिस्सों में पहली जनगणना की गई थी  |

इसके बाद साल 1949 में सरकार ने जनसंख्या के बढ़ने और घटने के आधार पर इकट्ठा किए गए आंकड़ों पर एक व्यवस्थित जनगणना करने का फैसला किया जनसंख्या से जुड़े आंकड़ों को गांव जैसी प्रशासनिक स्तर की इकाइयों के साथ साझा किया जाता है |

जनसंख्या से जुड़े ब्लॉक स्तर के आंकड़े परिसीमन आयोग को भी मुहैया कराई जाती है ताकि लोकसभा बि धान सभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन में इसका इस्तेमाल हो सके सर्वेक्षणों प्रशासनिक कार्यों से संबंधित आंकड़ों को यदि जनसंख्या के आंकड़ों को साथ लिया जाए तो नीतियों के निर्धारण में अहम भूमिका है इन आंकड़ों की मदद से रोजगार का सृजन भी सरकार करती है |

एनपीआर (NPR ) और एनआरसी  ( NRC )में अंतर

एनपीआर को जहां नेशनल पापुलेशन रजिस्टर कहा जाता है वही एनआरसी नेशनल रजिस्टर आफ सिटीजंस कहलाता है | दोनों में एक दूसरे से कोई संबंध नहीं है, फिलहाल पूरे देश में एनआरसी जैसी कोई व्यवस्था नहीं है | यह केवल सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर असम के लिए किया गया था |

वही एनपीआर पूरे देश में लागू होता है एनआरसी का संबंध नागरिकता से है और एनपीआर का संबंध देश में रहने वाले लोगों की पहचान से है एनपीआर में किसी दस्तावेज की जरूरत नहीं होती जबकि एनआरसी में दस्तावेजों का परीक्षण किया जाता है |

एनआरसी में वेद नागरिकों की एक सूची जारी की जाती है सूची में शामिल लोगों को ही देश का नागरिक माना जाता है एनपीआर और एनआरसी एक दूसरे से कोई लेना देना नहीं है इसके बारे में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी बताया लोगों में भ्रांतियां इस बात को लेकर भी है कि एनपीआर के जरिए नागरिकता संशोधन कानून को लागू किया जाएगा और एनपीआर में दस्तावेज की मांग की जाएगी |

नागरिकता संशोधन कानून पाकिस्तान ,बांग्लादेश, अफगानिस्तान से आए धार्मिक प्रताड़ना के कारण आए हिंदू ,ईसाई पारसी ,जैन और बौद्ध धर्म के लोगों को नागरिकता देने वाला कानून है  | जबकि एनपीआर नागरिकता देने वाला कानून नहीं यह नागरिकों के पहचान का डेटाबेस तैयार करने वाली एक व्यवस्था है |

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