वर्साय की संधि क्या है जर्मनी के साथ हुई  वर्साय की संधि –

वर्साय की संधि क्या है

साम्राज्यवाद की लड़ाई में कई बार इस धरती पर खून की होली खेली जा चुकी है जिसमें लाखों लोग अपनी जान दे चुके हैं | 1914 में एशिया अफ्रीका और यूरोप के बीच समुद्र धरती और आकाश में एक ऐसा ही युद्ध हुआ जिसमें करीब एक करोड़ लोगों की जान चली गई और लाखों लोग घायल हो गए |

इस युद्ध को हम सभी लोग प्रथम विश्वयुद्ध के नाम से जानते हैं | इस युद्ध ने दुनिया का नक्शा और इतिहास बदल कर रख दिया 4 साल से ज्यादा वक्त तक चले इस युद्ध का अंत नवंबर 1918 को हुआ|

इसके बाद युद्ध में जीती ताकतों ने अपने फायदे और युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई के लिए हारे हुए देशों खासकर जर्मनी के खिलाफ एक संधि की जिसे वर्साय की संधि के नाम से जाना जाता है. इस संधि के तहत जर्मनी पर आर्थिक, सामाजिक, सैनिक और सामरिक तमाम तरह के प्रतिबंध लगाए गए |

4 साल 3 महीने और 11 दिनों तक चले प्रथम विश्व युद्ध में करीब 30 देशों के 6 करोड़ पचास लाख सैनिकों ने भाग लिया और दुनिया के अधिकांश स्त्री पुरुष किसी ना किसी रूप में इसमें शामिल थे| इस युद्ध की समाप्ति और वर्साय की संधि पर समझौता होने तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई राजनीतिक घटनाएं घटी आइए जानते हैं इन घटनाओं के बारे में

28 जून 1914 को ऑस्ट्रिया के आर्क ड्युक फर्डिनेन्ड कि हत्या से ऑस्ट्रिया और सर्बिया के बीच शुरू हुआ युद्ध धीरे-धीरे विश्व युद्ध में बदल गया यह  युद्ध 4 साल 3 महीना और 11 दिन तक चला और आखिरकार 11 नवंबर 1918 को जर्मनी और मित्र राष्ट्र के बीच युद्ध विराम संधि पर हस्ताक्षर हुए और उसके बाद युद्ध समाप्त हुआ |

इस युद्ध विराम संधि के बाद बहुत से देशों ने पराजित देशों के साथ अस्थाई समझौता करने के लिए साल 1919 में पेरिस में शांति सम्मेलन का आयोजन किया | इस सम्मेलन की मुख्य शर्तों में राष्ट्रीयता के सिद्धांत के आधार पर राज्यों की सीमा निर्धारण करने विजई देशों को क्षतिपूर्ति दिलाना और स्थाई शांति स्थापित करने के उपायों पर विचार करना शामिल था |

पेरिस शांति सम्मेलन में भाग लेने के लिए 32 देशों को आमंत्रित किया गया था इसमें रूस और पराजित राष्ट्र जर्मनी ,ऑस्ट्रिया ,तुर्की, बुल्गारिया आमंत्रित नहीं थे | अलग-अलग देशों के 70 प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए |

अमेरिका के राष्ट्रपति के वोटरों विल्सन के अलावा 11 देशों के प्रधानमंत्री 12 विदेश मंत्री और कई राज्यों की राजनीतिज्ञ इसमें शामिल हुए इसके अलावा बड़ी संख्या में आम लोग सैनिक राजनेता मजदूर में भी पेरिस में पहुंचे थे |

18 जनवरी 1919 को सम्मेलन का पहला पुण्य अधिवेशन का उद्घाटन किया गया दरअसल पेरिस शांति सम्मेलन में पहुंचे राष्ट्राध्यक्षो ने अपनी अपनी राय रखी जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति वुड्रो विल्सन का 14 सूत्री सिद्धांत काफी महत्वपूर्ण रही . विल्सन ने विश्व में शांति स्थापित करने के लिए राष्ट्रीय संघ की स्थापना की बात कही और उसके बाद ही राष्ट्र संघ यानी लीग ऑफ नेशन अस्तित्व में आया |

पेरिस के शांति सम्मेलन में 5 पराजित देश थे और उनके साथ पांच अलग-अलग संधि की गई | यह सभी  संधि पेरिस की संधि कहलाए |

  •   जर्मनी के साथ हुई  वर्साय की संधि
  • ऑस्ट्रिया के साथ सेंट जर्मन की संधि
  • गुलरिया के साथ न्यूइली की संधि
  • हंगरी के साथ ट्रियनो कि संधि
  • तुर्की के साथ सेब्रेकि संधि की गई

दरअसल पेरिस के शांति सम्मेलन में अलग-अलग संधियों के जरिए शांति स्थापित करने का प्रयास किया गया | पेरिस शांति सम्मेलन के दौरान मित्र राष्ट्रों ने उन बाधाओं और समस्याओं का हल ढूंढने का प्रयास किया जिससे दोबारा विश्व युद्ध ना हो |

इस सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण बातों पर चर्चा हुई ऐसी व्यवस्था करना जिससे भविष्य में युद्ध की संभावना ना हो इसके साथी विश्व में शांति बनाए रखने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संगठन की स्थापना की गई | इसके साथ ही फ्रांस की सुरक्षा का सवाल भी शांति परिषद के सामने प्रमुख मुद्दा था अपनी रक्षा के लिए फ्रांस चाहता था की राइन नदी के पश्चिम के प्रदेश को जर्मनी से अलग कर ऐसे राज्य के रूप में बदल दिया जाए जो राजनीतिक रूप से फ्रांस के प्रभाव में रहे |

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इन मुद्दों के अलावा अनेक ऐसे मुद्दे थे जिसका पेरिस के शांति सम्मेलन में  हल ढूंढने के कोशिश की गई | प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी ने कई राष्ट्रों की इलाकों को जीतकर उन पर कब्जा जमा लिया | पेरिस सम्मेलन के दौरान वे राष्ट्र जर्मनी से जीती हुई इलाकों को वापस चाहते थे उनकी कोशिश थी कि उनकी राष्ट्रीयता बनी रहे |

इसके साथ ही युद्ध के दौरान अफ्रीका और एशिया में अनेक जर्मन उपनिवेश पर मित्र राष्ट्रों ने कब्जा कर लिया था उसके साथ क्या किया जाए पेरिस सम्मेलन में अभी एक महत्वपूर्ण मुद्दा था | इसके अलावा पेरिस सम्मेलन में शामिल हुए देशों के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी एक ऐसी व्यवस्था की जाए ताकि जर्मनी दोबारा से इतना प्रभावशाली ना हो कि यूरोप की शांति को खत्म कर दे |

इसके लिए वे जर्मनी की सामरिक और सैनिक शक्ति को कम करना चाहते थे इसके साथ ही मित्र राष्ट्र युद्ध की क्षतिपूर्ति भी जर्मनी से कराना चाहते थे इन सभी मुद्दों को ध्यान में रखते हुए वर्साय की संधि को अंजाम दिया गया | करीब 4 महीने तक चले इस लंबी चर्चा के बाद आखिरकार 6 मई 1919 को संधि का अंतिम मसौदा तैयार हुआ और 7 मई 1919 को इसे जर्मनी के प्रतिनिधियों को सौंप दिया गया |

वर्साय की संधि में किए गए प्रावधान

वर्साय की संधि
https://www.history.com/

पेरिस के शांति सम्मेलन में अनेक संधियों और समझौते का प्रारूप तैयार किए गए थे इन सभी संधियों में जर्मनी के साथ की गई वर्साय की संधि सबसे महत्वपूर्ण थी |

230 पन्नों में छपा हुआ यह संधि पत्र 15 भागों में विभाजित था और इनमें 439 धाराएं थे | मित्र राष्ट्रों ने सबसे पहले जर्मनी को प्रथम विश्व युद्ध के लिए जिम्मेदार और अपराधी बता कर उसके प्रतिनिधियों के गैरमौजूदगी में वर्साय संधि का मसौदा तैयार किया |

मई 2019 में संधि का मसौदा जर्मन प्रतिनिधियों को सौंप दिया गया और उन्हें धमकी दी गई कि अगर जर्मनी इस पर हस्ताक्षर नहीं करेगा तो उसे युद्ध करना पड़ेगा |

पहले विश्व युद्ध में पराजित जर्मनी ने 28 जून 1919 के दिन वर्साय की संधि पर हस्ताक्षर किए | संधि के माध्यम से उसके अधिकारों को सीमित कर दिया गया था वर्साय की संधि के तहत कई व्यवस्थाएं की गई जिनमें प्रादेशिक व्यवस्थाएं सैनिक व्यवस्थाएं और आर्थिक व्यवस्थाएं प्रमुख थी

  • प्रादेशिक व्यवस्थाओं की बात करें तो जर्मनी को अल्सास लोरेन के प्रांत फ्रांस को देने पड़े
  • नवनिर्मित राष्ट्र बेल्जियम पोलैंड और चेकोस्लोवाकिया की स्वतंत्रता और प्रभु सत्ता को जर्मनी ने मान्यता दी
  • जर्मनी को अपने उपनिवेश ऊपर सारे अधिकार मित्र राष्ट्रों को सौंपने के लिए मजबूर किया गया
  • उपनिवेश ओं को मित्र राष्ट्रों में बांट दिया गया
  • चीन के शांतुंग क्षेत्र में जर्मनी द्वारा सभी अधिकार जापान को सौंप दिया गया
  • राइन नदी के बाएं तट पर और 50 किलोमीटर बाय तट पर पूरी तरह निरस्त्रीकरण कर दिया गया ताकि इस क्षेत्र में जर्मनी किसी प्रकार की किलाबंदी ना करें
  • पोलैंड से समुद्र तट से संबंध स्थापित करने के लिए जर्मनी को डेजिंग बंदरगाह राष्ट्र संघ के संरक्षण में छोड़ना पड़ा
  • जर्मनी का मेमल बंदरगाह लिथुआनिया को दे दिया गया
  • राइनलैंड प्रदेश में अगले 15 साल तक मित्र राष्ट्रों की सेनाए रखने का फैसला किया गया
  • जर्मनी के सारे प्रदेश पर राजनीतिक सत्ता को जर्मनी की ही मानी गई लेकिन उसकी शासन व्यवस्था राष्ट्र संघ के एक आयोग को सौंपी गई
  • सर घाटी दोहन के लिए फ्रांस को दे दी गई
  • उत्तरी श्लेसर्विंग डेनमार्क को दे दिया गया
  • जर्मनी ने रूस से एक बड़ा भाग छीन कर अपने में मिला लिया था लेकिन वर्साय की संधि से इस बड़े हिस्से पर लातविया स्टोबिया और लिथुआनिया की स्थापना की गई
  • सैनिक व्यवस्था के तहत जर्मनी में अनिवार्य सैनिक सेवा समाप्त कर दी गई यह व्यवस्था की गई कि 12 साल तक जर्मनी के थल सेना एक लाख से अधिक नहीं होगी
  • जर्मनी की ओर से युद्ध सामग्री के निर्माण और आयात पर प्रतिबंध लगा दिया गया
  • जर्मन नौसेना मैं अधिकतम 15000 सैनिक रखना निश्चित किया
  • कील नहर को अंतरराष्ट्रीय घोषित किया गया जर्मन वायुसेना को भंग कर दिया गया राइन क्षेत्र का असैन्यकरण कर दिया गया ‘
  • आर्थिक व्यवस्था के तहत पहले विश्वयुद्ध का उत्तरदायित्व जर्मनी पर थोप दिया गया जर्मनी पर क्षतिपूर्ति के लिए 5 अरब डॉलर मित्र राष्ट्रों को देने का बोझ डाला गया
  • उपनिवेश ओ में लगी जर्मनी की सारी पूंजी जप्त कर ली गई
  • जर्मनी को एक निश्चित मात्रा में फ्रांस इटली और बेल्जियम को कोयले की आपूर्ति करने को कहा गया
  • जर्मनी के 16 साल या इससे अधिक टन भार क्षमता वाले सभी व्यापारिक जहाज मित्र राष्ट्रों को सौंपे गए

इसके अलावा जर्मनी के सम्राट विलियम दितीय को युद्ध के लिए दोषी ठहराया गया और उस पर मुकदमा चलाने का फैसला किया गया | हालांकि ऐसा हो नहीं पाया जर्मनी की प्रमुख नदियों को अंतरराष्ट्रीय घोषित कर दिया गया | वर्साय की संधि के जरिए जर्मनी को राजनीतिक आर्थिक और सैन्य दृष्टि से वंचित कर दिया गया |

इस संधि से जर्मनी का कुल क्षेत्रफल का आठवां हिस्सा कम हो गया और 7000000 जनसंख्या भी कम हो गई. उसके सारे उपनिवेश 15% कृषि भूमि 15% मवेशी और 10% कारखाने छीन लिए गए |

वर्साय की संधि को जर्मनी पर जबरदस्ती थोपा गया था इस कारण बाद में हिटलर और अन्य जर्मन लोग इसे अपमानजनक माना यही कारण था कि यह संधि द्वितीय विश्व युद्ध के कारणों में से एक बन गई |

 

 

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