विश्व जल दिवस कब मनाया जाता है

विश्व जल दिवस कब मनाया जाता है .

आज यानी 22 मार्च को दुनिया भर में विश्व जल दिवस मनाया जाता है | इसका आयोजन वैश्विक जल संकट और जल के महत्व को समझाने के लिए होता है | साथ ही इसका मकसद सतत विकास लक्ष्य 6 को हासिल करने के प्रयासों में मदद करना भी है | सतत विकास लक्ष्य 6 के मुताबिक 2030 तक पानी और स्वच्छता तक सभी को पहुंच सुरक्षित करनी है पानी के महत्व को समझते हुए दिसंबर 2016 में यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली United nation general assembly ने 2018 से 2028 को international decade for action water for sustainable development ( इंटरनेशनल डिकेड हॉट एक्शन वाटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट ) भी घोषित किया था |

वही इस साल के विश्व जल दिवस की थीम valuing water थीम के मुताबिक पानी का मूल्य इसकी कीमत से कहीं अधिक है .पानी हमारे घरों, भोजन, संस्कृति ,स्वास्थ्य, शिक्षा ,अर्थव्यवस्था और प्राकृतिक पर्यावरण के लिए अमूल्य है|  अगर हम इसकी अनदेखी यूं ही जारी रखेंगे तो इस अमूल्य संसाधन से हाथ धो बैठेंगे | विश्व जल दिवस के मौके पर पूरी दुनिया जल की महत्व और उसकी बचाने के उपाय पर बात करती है |

जल संसाधनों की भारत और विश्व में स्थिति

  • वैश्विक स्तर पर 96.5% पानी महासागरों में है
  • . 0.9 फ़ीसदी पानी अन्य खारे स्रोतों में है
  • वही मीठे पानी की मात्रा 2.5 फ़ीसदी है मीठे पानी की स्रोतों में ग्लेशियर और आइस कैप्स में 68.7 फ़ीसदी है |
  • भूमि के नीचे के  जल के रूप में 30.1% पानी मौजूद है|  ‘
  • सतह या अन्य जगहों पर मौजूद मीठा पानी 1.2% है |

वहीं भारत में जल संसाधनों की बात करें तो जल भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची में राज्य सूची के तहत है.  संघ सूची में अंत: राज्य नदी तंत्र से संबंधित मुद्दे शामिल है |

भारत दुनिया के क्षेत्रफल में 2.4% की हिस्सेदारी रखता है . वही मीठे पानी की जल संसाधनों की मामले में यह आंकड़ा लगभग 4% है | भारत को   वर्षा के जरिए साल भर में लगभग 4000 बिलीयन क्यूबिक मीटर पानी हासिल होता है | ‘

सतह और भौम जल से 1869 बिलियन क्यूबिक मीटर जल की मात्रा हासिल होती है. इसमें केवल 60% जल को ही उपयोग में लिया जा सकता है भारत में सतही जल स्रोतों के मुख्य स्रोत नदिया, झिले, तालाब और टैंक है ‘ |

भारत में लगभग 10360 नदियां और उनकी सहायक नदियां हैं, लेकिन स्थलाकृति एवं जलीय चुनौतियों के चलते कुल सतही जल का केवल 32 फ़ीसदी ही उपयोग में लिया जाता है|  इसके अलावा देश में ग्राउंड वाटर रिसोर्सेज की मात्रा सालाना लगभग 432 क्यूबिक किलोमीटर है ,लेकिन उत्तर पश्चिमी क्षेत्र के रिवर बेसिन और दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों में ग्राउंड वाटर का बहुत अधिक मात्रा में उपयोग किया जाता है|  पंजाब, हरियाणा राजस्थान और तमिलनाडु जैसे राज्यों में ग्राउंड वाटर का बहुत तेजी से दोहन किया जाता है जो कि चुनौतियों को बढ़ा रहा है |

भारत के पास लगभग 7516 किलोमीटर लंबी तट रेखा है. यह तट रेखा कुछ राज्यों में बहुत अधिक है |  इस वजह से इन राज्यों में कई सारे झील निर्मित हुई है. केरल ,ओडिशा ,पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में इन संसाधनों से समृद्ध है. हालांकि इनमें पानी आमतौर पर खड़ा होता है इसीलिए इनका प्रयोग मछली पालन और कुछ फसलों के लिए होता है |

आवासन एवं शहरी मंत्रालय के मुताबिक सालाना प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता

  • 2001 में 1816 क्यूबिक मीटर
  • 2011 में 1545 क्यूबिक मीटर थी
  • अब यह घटकर 2021 में 1486 क्यूबिक मीटर
  •  2031 में 1367 क्यूबिक मीटर रहने का अनुमान किया गया है

प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता देश की जनसंख्या पर निर्भर करती है|  लगातार बढ़ती जनसंख्या के चलते प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता में भी कमी आ रही है | गौरतलब है कि जल जीवन मिशन के तहत शहरी क्षेत्र में 135 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन और ग्रामीण क्षेत्र में 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन को बेंच मार्क बनाने की सलाह दी गई है |

इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए ना केवल उपलब्ध संसाधनों का सूझबूझ के साथ प्रयोग जरूरी है बल्कि लोगों तक जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की राह में आने वाली अड़चनों को दूर करना भी जरूरी है |

भारत में जल संकट की स्थिति

वैश्विक स्तर पर जारी कुछ रिपोर्ट पर गौर करें तो विश्व आर्थिक मंच द्वारा जारी ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट 2019 के मुताबिक ग्लोबल रिक्स इंपैक्ट में जल संकट को चौथे स्थान पर रखा गया है |

विश्व जल दिवस कब मनाया जाता है
                     SAVE WATER

भारत का वॉटर फुटप्रिंट 983 क्यूबिक मीटर प्रति व्यक्ति है  | यह वैश्विक 1243 क्यूबिक मीटर से काफी कम है|  वॉटर फुटप्रिंट में किसी वस्तु का उत्पादन और सेवाओं में लगने वाले पानी का मापन किया जाता है |

जैसे   : चावल उगाने में लगा पानी या 1 जोड़ी जूतों को बनाने में लगा पानी |

राष्ट्रीय स्तर के कुछ आंकड़ों को देखें तो भारत के सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड के मुताबिक 256 जिले ऐसे हैं . जिन्हें ग्राउंड वाटर लेवल के मामले में क्रिटिकल या ओवर एक्स्ट्राप्लांटेड के श्रेणी में रखा गया है |

राष्ट्रीय महिला आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्र में एक महिला जल स्रोत तक पहुंचने के लिए 2.5 किलोमीटर कि अधिक की यात्रा करती है और भारत की 12 फ़ीसदी जनसंख्या डे जीरो कि संकट के साथ जी रही है |

डे जीरो का मतलब  :   किसी शहर के सभी नलों से पानी आना बंद हो जाए और लोगों को एक बूंद पानी की किल्लत का सामना करना पड़े.साल 2019 में भारत के चेन्नई शहर को प्रशासन ने डे जीरो घोषित कर दिया था  | यह आंकड़े बताते हैं कि पानी का संकट भारत में गंभीर स्थिति में है

जल संकट के मुख्य बड़ी चुनौती

पहला चुनौती :

प्रदूषित पानी की भारत में 80 फीसद पानी की जरूरत प्रदूषित ग्राउंड वाटर से पूरी होती है|  भारत के 3 प्रमुख नदी तंत्र सिंधु गंगा और ब्रह्मपुत्र हद से ज्यादा प्रदूषण का सामना कर रहे हैं | दुनिया की सर्वाधिक प्रदूषित क्षेत्र इन्हीं नदी तंत्रों में स्थित है ।

भारत में ठोस कचरे का केवल 21.5% हि संसाधित हो पाता है .ठोस कचरा नदियों के प्रदूषण के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है |

दूसरी चुनौती

भारत में लगभग 76 मिलियन लोग ऐसे हैं. जिनके पास साफ पीने की पानी की पहुंच नहीं है |  इस वजह से ग्रामीण भारत की लगभग 54 फ़ीसदी महिलाओं को रोज 200 मीटर से 5 किलोमीटर तक पैदल चलकर पानी लाना होता है|  इस चुनौती के मद्देनजर ही सरकार ही जल जीवन मिशन लॉन्च किया था | इसके तहत 2024 तक ग्रामीण क्षेत्र के सभी परिवारों को नल कनेक्शन मुहैया कराना है |

तीसरी चुनौती :

भारत की अधिकांश ग्रामीण आबादी कृषि पर निर्भर है .कृषि आमतौर पर मानसून पर निर्भर करती है | जलवायु परिवर्तन के चलते मानसून के पैटर्न पर प्रभाव पर है | सूखे जैसे आपदा के लिए देश प्रमुख है जिसका सीधा प्रभाव कृषि उत्पादन पर पड़ा है |

भारत के पास 4 फ़ीसदी मीठे पानी के स्रोत हैं. जिसमें से 80 फ़ीसदी का प्रयोग कृषि कार्यों के लिए हो जाता है या यह पीने की पानी में कमी के इजाफा कर रहा है | साथ ही भारत में सालाना 1183 मिली मीटर बारिश होती है|  जिसमें से 75% मानसून के 4 महीनों की अवधि में ही होती है ,इससे पानी ज्यादा बढ़ने के कारण बर्बाद हो जाती है और साल भर अन्य कार्य के लिए पानी की किल्लत रहती है |

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एक अनुमान के मुताबिक 2050 तक भारत की जनसंख्या 1.6 बिलियन का आंकड़ा छूने वाला है | इससे पानी की मांग में और वृद्धि होने वाली है ऐसे में अवसंरचना विकास और संसाधनों के समुचित उपयोग से ही इस बढ़ती मांग को ही पूरा किया जा सकता है|

हम जानते हैं कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक फैले हुए भारत में स्थल आकृतियों से लेकर मौसम और संस्कृति तक में अंतर पाया जाता है पानी की समस्या भी इससे कुछ अलग नहीं है

पानी की समस्या में भी क्षेत्रीय स्तर पर समस्या पाया जाता है |

हिमालय क्षेत्र – इस क्षेत्र में पानी के लिए मुख्य स्रोत ताजे पानी के झरने थे जलवायु परिवर्तन के चलते हिमनदो  के पिघलने से पानी के उपलब्धता में परिवर्तन आया है | इसके अलावा इन क्षेत्रों में बढ़ते शहरीकरण पर्यटन ने प्रदूषण में वृद्धि की है | साथ ही पारंपरिक तरीकों से जल संरक्षण में कमी आई है जो कि जल संसाधनों से भरपूर इस क्षेत्र को जल संकट क्षेत्र में तब्दील कर रही है |

 

उत्तरी मैदान – यह उपजाऊ और समतल भूमि के चलते जनसंख्या दबाव अधिक है कृषि और उद्योगों ने नदियों के पानी को प्रदूषित भी किया है|

दक्षिण भारत – अनियमित वर्षा विकास के गतिविधियों के चलते बढ़ता नदी प्रदूषण और भोम जल की अधिक प्रयोग जैसी समस्याएं से ग्रसित है. इसके अलावा दक्षिण भारतीय नदियां उत्तर भारतीय नदियों के तरह सदानीरा नहीं है क्योंकि यह हिमनदो की बजाए बरसात पर निर्भर करती है |

उत्तर पूर्वी क्षेत्र – यहां पर्वतीय और मानसूनी दोनों तरह की बारिश होती है इस क्षेत्र में जल संकट मानवीय कारणों से है मसलन खनन गतिविधियां प्रदूषण और जल संरक्षण का अभाव है |

पश्चिमी भारत – इस  क्षेत्र में गुजरात और राजस्थान शुष्क और अर्ध शुष्क जलवायु की परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं जिससे जल संकट पैदा होता है |

विश्व जल दिवस की थीम

  1. 2015 में विश्व जल दिवस की थीम थी ( “जल और दीर्घकालिक विकास )
  2. 2016 में ( जल और नौकरियाँ)
  3. 2017 में “अपशिष्ट जल”
  4. 2018 में  विश्व जल दिवस का थीम था ( जल के लिए प्रकृति के आधार पर समाधान )
  5. 2019 में “किसी को पीछे नहीं छोड़ना”
  6. 2020 में जल और जलवायु परिवर्तन
  7. 2021 में विश्व जल दिवस का थीम होगी ” पानी का महत्व “

 

आगे की राह

  • भारत में पानी की मांग बढ़ने के साथ 2030 तक वर्तमान आपूर्ति की दोगुना होने वाली है, लेकिन इन चुनौतियों के चलते भारत इन सब से कैसे उबर सकेगा |
  • भारत में पानी की मांग बढ़ने के साथ ताजे पानी की कमी हो रही है ऐसे में भारत को आपूर्ति बढ़ाने के लिए वॉटर शेड मैनेजमेंट ,रेन वाटर हार्वेस्टिंग वॉटर रीसाइकलिंग जैसे उपायों को अपनाने होंगे |
  • केंद्र सरकार द्वारा हरियाली नामक वाटर शेड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है | इसे ग्राम पंचायतों द्वारा लोगों के सहयोग से लागू किया जाता है |
  • जल प्रदूषण के चलते उपलब्ध जल संसाधनों के गुणवत्ता में तेजी से गिरावट आ रही है ।
  • इसके लिए जरूरत है आम जनता में जल की महत्वता प्रदूषण के संबंध में जागरूकता फैलाने की तभी कृषि, घरेलू उपयोग और उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषको को जल निकायों में जाने से रोका जा सकता है |
  • जो जरूरी संसाधन सीमित मात्रा में हो उन्हें जरूरी खर्च करने में कमी भले ही ना की जा सके लेकिन एक सीमा तक बचाया जा सकता है |
  • वाटर रीसाइक्लिंग पानी के बचाने का सबसे बेहतर तरीका है नहाने और बर्तन धोने वाली पानी का प्रयोग बागवानी के लिए किया जा सकता है |
  • गाड़ियों की धुलाई के बजाय पोछकर काम चलाया जा सकता है  |

 

 

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