विश्व पर्यावरण दिवस और जैव विविधता

( World Environment Day and Biodiversity)

मानव और प्रकृति का कई वर्षों से अटूट नाता रहा है मानव का प्रकृति के प्रति कर्तव्य है उसका संरक्षण करना संजोए रखना | जहां प्रकृति मानव जीवन के अलग-अलग पहलुओं को निर्धारित करती है वही मानव क्रियाकलापों से प्रकृति भी प्रभावित होती है और यही प्रभाव कुछ समय बाद मानव के जीवन पर गंभीर असर डालता है चाहे वह ओजोन परत में छेद हो या बढ़ता वायु प्रदूषण हो अनगिनत बीमारियां हो ||

जैव विविधता में कमी हो या  जलवायु परिवर्तन और बदलते मौसम चक्र को देखें यह सभी प्रकृति और उसकी बीवीघताओ से मनुष्य द्वारा किए गए छेड़छाड़ के परिणाम है प्रकृति और पर्यावरण के लिए दुनिया भर में जागरूकता फैलाने के लिए ही हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है इंसानों और प्रकृति के बीच गहरे संबंधो  को देखते हुए खास दिन प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने की लिए प्रेरित करता है |

इस साल विश्व पर्यावरण दिवस की थीम है जैव विविधता जो मानव जीवन के अस्तित्व के लिए जरूरी है और जिस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है इस मौके पर राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने भी विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर जागरूकता फैलाने की अपील की और साथ ही जैव विविधता के संरक्षण पर जोर दिया

 

विश्व पर्यावरण दिवस का महत्व  क्या है ?

पर्यावरण के प्रति लोगों की उदासीनता हमेशा ही बड़ी चुनौती रही है बीते कई वर्षों से यह कोशिश की जा रही है कि लोगों को पर्यावरण के साथ जोड़ा जाए और इसके अहमियत से लोगों को रूबरू कराया जाए इसके लिए हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है

इसका मकसद इंसानों को प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने को प्रेरित करना है हर साल पर्यावरण दिवस के लिए एक थीम  चुनी जाती है इस बार की थीम  है | जैव विविधता

हम जो खाद्य पदार्थ खाते हैं जो हवा हम सांस के जरिए लेते हैं जो पानी हम पीते हैं और जो जलवायु हमारी धरती को रहने योग्य बनाती है वह सब प्रकृति की देन है | 1 साल में हमें जिंदा रहने के लिए जितनी ऑक्सीजन की जरूरत होती है उस से आधे से अधिक हिस्से को समुद्री पौधे पैदा करते हैं|

वही एक परिपक्व पेड़ साल भर में 22 किलो कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करता है और बदले में हमें शुद्ध ऑक्सीजन देता है प्रकृति हमें जितनी सुविधा देती है वही हम प्रकृति के साथ न्याय नहीं करते हैं हमें पर्यावरण और प्रकृति को बचाने और खुद को बचाने के लिए प्रकृति के संरक्षण पर काफी जोर देने की जरूरत है |संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि अरबों डॉलर खर्च करने पर भी हम प्रकृति और इसकी जैव विविधता को हासिल नहीं कर सकते हैं

सतत विकास एजेंडा 2030 को लागू करने की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण कदम है सतत विकास के 14 और 15 में लक्ष्य को इसके बगैर हासिल करना मुमकिन नहीं होगा इसके तहत हवा पानी जमीन और इको सिस्टम को बचाए रखने का संकल्प लिया गया है इस बार जर्मनी के साथ साझेदारी में कोलंबिया को मेजबान देश बनाया  गया हैं|

 

2010 से लेकर 2020 तक में विश्व पर्यावरण दिवस की थीम क्या है 

इस बारे में विविधता को बचाने और उसके संरक्षण के लिए सालभर जागरूकता अभियान चलाने का लक्ष्य बनाया गया है असल में हर साल पर्यावरण दिवस के लिए एक थीम तय की जाती है |

साल

थीम

2020 ‘जैव-विविधता
2019हवा को स्वच्छ और वायु प्रदूषण को कम करने के लिए
2018प्लास्टिक प्रदूषण को से बचने की
2017लोगों को पर्यावरण से जोड़ने की
2016वन्यजीवों की तस्करी को रोकना
2015संयुक्त राष्ट्र ने धरती  पर 7 अरब  लोगों के भोज और प्रकृति के और प्रकृति के इस्तेमाल में सावधानी बरतना
2014छोटे द्वीप और जलवायु परिवर्तन पर जोर दिया गया
2013कार्बन फुटप्रिंट को कम करना
2012हरित अर्थव्यवस्था के प्रति लोगों को जागरूक करने का लक्ष्य बनाया गया
2011जंगल बचाने और पेड़ लगाने पर संयुक्त राष्ट्र का जोर था

इससे पहले भी पर्यावरण से जुड़े कई मुद्दों को टीम बनाकर संयुक्त राष्ट्र ने इसके प्रति जागरूक ता फैलाने का काम किया और हर साल टीम के इर्द-गिर्द अभियान चलाए गए

 

विश्व पर्यावरण दिवस का इतिहास

असल में 5 से 16 जून 1972 को पहली भारत संयुक्त राष्ट्र ने स्वीडन में विश्व पर्यावरण दिवस के विषय पर कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया था स्टॉकहोम सम्मेलन के दौरान पहली बार एक ही पृथ्वी का नारा दिया गया इसके बाद 15 दिसंबर 1972 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक संकल्प पारित कर हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का ऐलान किया कहा गया कि इस दिन दुनिया भर में पर्यावरण की वर्तमान चुनौतियों और उसके समाधान पर चर्चा हो

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इस तरह 1974 मैं पहली बार विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया पर्यावरण दिवस मनाते करीब 5 दशक हो गए हैं लेकिन पर्यावरण पर चिंताएं जस की तस बरकरार है इस समय पर्यावरण ऐसे समय आया है जब की पूरी मानव जाति एक बड़े स्वास्थ्य संकट कोरोनावायरस महामारी से जूझ रही है और दुनिया ग्लोबल वार्मिंग जैसे चुनौतियों से जूझ रही है हालांकि लॉक डाउन की वजह से दुनिया भर में पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है लेकिन यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने प्रकृति का बेहतर ख्याल रखें |

 

जैव विविधता और इसके प्रकार

धरती और इस पर मौजूद अनेक पेड़ पौधे और अनेक जीव जंतु इन सभी की कई प्रजातियां भी हैं जिनके अपने रूप और गुण है और यही जैव विविधता के रूप में धरती पर मौजूद हैं यही जैव विविधता  धरती के अस्तित्व को बनाए रखने में योगदान देती है |    जैव विविधता शब्द का प्रयोग सबसे पहले वाल्टर जी राशन ने सबसे पहले 1985 में किया था |

जैव विविधता को तीन प्रकार में बाटकर समझा जा सकता है

  1.   अनुवांशिक विविधता

  2.    प्रजाति विविधता

  3.   परितंत्र विविधता

अनुवांशिक विविधता  :   प्रजातियों में पाई जाने वाली अनुवांशिक विविधता को अनुवांशिक विविधता के नाम से जाना जाता है जो जिओ के विभिन्न आवासों में विभिन्न प्रकार के अनुकूलन की वजह से आती है

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प्रजाति विविधता :  प्रजातियों में पाई जाने वाली विभिन्न विभिन्नता  को प्रजातीय विभिन्नता के नाम से जाना जाता है किसी भी इको सिस्टम के उचित कार्यक्रम के लिए प्रजाति विविधता का होना अनिवार्य है

परितंत्र विविधता : इको सिस्टम यानी पारी तंत्र विविधता पृथ्वी पर पाए जाने वाली पारितंत्र में उस विविधता को कहते हैं जिसमें प्रजातियों का निवास होता है परितंत्र विविधता भौगोलिक मरुस्थल, झील, सागर, पहाड़ आदि में देखी जाती है दुनिया में लाखों प्रकार की प्रजातियां हैं जिसकी खोज होती रहती है

एक अनुमान के अनुसार इनकी संख्या 3 करोड़ से 10 करोड़ के बीच है| विश्व में 14035662 प्रजाति की पहचान की गई है |अभी भी बहुत सी प्रजातियों का पहचान होना बाकी है |

पहचानी गई प्रजातियां

  • 751003 प्रजातियां जीवो की

  • 248002  पौधों की

  • 280000 जंतुओं की

  • 68000  कवको की

  • 26,000 सैवालो की

  • जीवाणुओं की 4600 प्रजातियां

  • विषाणु की 1000 प्रजातियां

 

जैव विविधता पर संयुक्त राष्ट्र की  एक रिपोर्ट

इसी साल जैव विविधता पर संयुक्त राष्ट्र ने एक रिपोर्ट जारी की जिसके मुताबिक जैव विविधता का संरक्षण तभी संभव है जब इकोसिस्टम के साथ मानव का व्यवहार सही हो और जंगलों का बचाव किया जाए रिपोर्ट ने कुछ ऐसे तत्व साझा किए हैं जो किसी खतरे की घंटी से कम नहीं संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक साल 1990 से अभी तक दुनिया के 420 अरब हेक्टेयर जंगलों  को मानव ने अपने इस्तेमाल के लिए नष्ट कर दिया है

जैव विविधता को बचाने और बनाने रखने के लिए जंगलों की कटाई पर रोक लगाना बेहद जरूरी है रिपोर्ट के अनुसार जंगलों में 7000 विविध पेरों की प्रजातियां 80 फ़ीसदी जल स्थल ,  75 फ़ीसदी पक्षी प्रजातियां और 68 फ़ीसदी स्तनपाई प्रजातियां मौजूद है |

दुनिया भर के साझा प्रयासों से जंगलों में कटाई की काफी कमी देखने को मिल रही है लेकिन हर साल लगभग 10 अरब हेक्टेयर जंगल खेती और अन्य गतिविधियों के लिए काटे जा रहे हैं अगर यही हाल रहा तो बहुत जल्द ही करीब एक अरब जिओ जंतुओं और पेरों की प्रजातियां धरती से लुप्त हो जाएगी|

 

किन देशो में  विश्व पर्यावरण दिवस कब-कब आयोजित किया गया

सालथीम  (बिषय ) आयोजित देश
1974केवल एक दुनियासंयुक्त राज्य अमेरिका
1975मानव निपटानढाका बांग्लादेश
1976पानी: जीवन हेतु महत्वपूर्ण संसाधन कनाडा
1977ओजोन परत पर्यावरण संबंधी चिंता; भूमि हानि और मृदा क्षरणबांग्लादेश
1978बिना विनाश के विकासबांग्लादेश
1979हमारे बच्चों के लिए एक ही भविष्य है – बिना विनाश के विकासबांग्लादेश
1980नई सदी की नई चुनौती: बिना विनाश के विकासबांग्लादेश
1981भूजल; मानव खाद्य श्रृंखला में जहरीले रसायनबांग्लादेश
1982दस साल बाद स्टॉकहोम (पर्यावरण संबंधी चिंता का नवीकरण)बांग्लादेश
1983खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन और निपटान: अम्लीय वर्षा और ऊर्जाबांग्लादेश
1984बंजरताबांग्लादेश
1985युवा: जनसंख्या और पर्यावरणपाकिस्तान
1986शांति के लिए एक पेड़कनाडा
1987पर्यावरण और शरण: एक छत से ज्यादाकेन्या

मनुष्य का पर्यावरण से फायदा और भारत में इसकी स्थिति के बारे में

जैव विविधता के कारण मानव इस धरती पर जीने की कल्पना भी नहीं कर सकता क्योंकि हम इकोसिस्टम कि एक विविधता है भोजन कपड़ा लकड़ी और इंधन की आवश्यकताओं के लिए जैव विविधता पर ही निर्भर है जैव विविधता कृषि पैदावार बढ़ाता है |

वनस्पति के जैव विविधता औषधीय आवश्यकताओं की पूर्ति करता है एक अनुमान के मुताबिक लगभग 30 फ़ीसदी उपलब्ध औषधि को उष्णकटिबंधीय वनस्पतियों से ही पाया जाता है जैव विविधता पर्यावरण प्रदूषण के निस्तारण में सहायक होती है |

वहीं प्रदूषकओं का विघटन और उनका अवशोषण कुछ पौधों की विशेषता होती है वही सूक्ष्मजीवों की विभिन्न प्रजातियां जहरीले बेकार पदार्थों के साफ-सफाई में भी सहायक होते हैं|

जैव विविधता में संपन्न वन पारितंत्र कार्बन डाइऑक्साइड के प्रमुख और शोषक होते हैं कार्बन डाइऑक्साइड हरित गृह गैस है जो ग्लोबल वार्मिंग के लिए उत्तरदाई है |

जैव विविधता की मृदा के निर्माण के साथ-साथ उसके संरक्षण में भी सहायक होती है जैव विविधता संरचना को सुधार दी है जल धारण क्षमता एवं पोषक तत्वों की मात्रा को बढ़ाती है और जैव विविधता जल संरक्षण में भी सहायक होती है |

संयुक्त राष्ट्र की जैव विविधता पर आई इसी रिपोर्ट में कोविड-19 को लेकर साफ कहा गया है कि इस तरह की महामारी भी जैव विविधता को पहुंचाए जा रहे नुकसान का नतीजा है क्योंकि मानव का स्वास्थ्य भी दुरुस्त रहेगा जब हमारा इकोसिस्टम स्वस्थ रहेगा |

 

 भारत में विश्व पर्यावरण दिवस के स्थिति के बारे में

पर्यावरण असंतुलन और इससे जुड़ी तमाम चुनौतियां पूरी दुनिया के सामने चिंता बनकर उभरी है |भारत दुनिया के सबसे बड़े देशों में से एक है लिहाजा भारत में पर्यावरण दिवस मनाने का दायरा और अहम हो जाता है |

दूसरे मुल्कों की तुलना में पर्यावरण को लेकर हमेशा खास ही संजीदगी रही है विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री देश की जनता से पर्यावरण की सुरक्षा और जैव विविधता की संरक्षण की अपील की |

साल 2020 को इतिहास में कोरोनावायरस महामारी के लिए याद रखा जाएगा वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर साझा होती जीव और प्रकृति की तस्वीरें भी 2020 को हमारे मस्तिष्क से कभी उतरने ना देगी जैव विविधता के संदर्भ में साल 2020 काफी खास है |

जैव विविधता का अर्थ पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के जीव जंतुओं से है विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर देश और दुनिया में प्रकृति को बचाने के साथ ही जैव विविधता के संरक्षण की अपील की गई

कोरोना की वजह से लागू लॉक डाउन में दुनिया  के रफ्तार क्या थमी प्रकृति सांस लेती साफ नजर आने लगी है | चिड़ियों की चहचहाहट नीला आसमान और हरा पौधा और हवा में ताजगी प्रदूषण से बदरंग हुए शहरों में भी अब महसूस हो रही है |

प्रकृति ने इंसान को साफ इशारा कर दिया की विकास की गति तेज होगी तो पर्यावरण को  नुकसान पहुंचना लाजमी है क्लाइमेंट चेंज की वजह से पूरा दुनिया आज सोच रहा है लेकिन अब वक्त आ गया है मानव पर्यावरण के संरक्षण पर विकास से ज्यादा जोड़ दिया जाए|

बढ़ते कारखानों और गाड़ियों की तादाद ने लोगों को सुविधाएं तो पहुंचाई है लेकिन इससे स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी फैल रही है कूड़े के ढेर शहरों के पहचान बन गए हैं शहरों के कचरे पर उसके नदियों में बहाए जा रहे हैं |जो चंदसुबिधा  के अभाव के चलते उत्तर भारत में गंगा और यमुना की हालत बदतर हो गई है दिल्ली में यमुना और गंदे नालों के बीच फर्क करना भी मुश्किल हो गई है |

आलम यह है कि यमुना का दिल्ली से गुजरने वाली इस नदी को एक पूरी नदी मान ले तो यह दुनिया की सबसे प्रदूषित नदी कहलाएगी |

महानगरों के साथ गंदगी का यह रिश्ता विकास और पर्यावरण पर नए सिरे से सोचना पर मजबूर करता है बिजली की खपत और गाड़ियों की दुआएं पॉलिथीन के इस्तेमाल से लेकर ठोस और द्रव कचरे के निपटान के चलते पर्यावरण को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है |

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