शिवाजी महाराज gani

आज के इस आर्टिकल में जानेगे शिवाजी महाराज gani के बारे में बिस्तार से जानेगे साथ ही जानेगे मराठा साम्राज्य के बारे में . तो आप लेख को पूरा पढ़े |

छत्रपति शिवाजी महाराज एक ऐसा नाम जो शौर्य का प्रतीक है भारत में ऐसे कई वीर हुए हैं जिन्होंने अपनी असाधारण वीरता त्याग और बलिदान से भारत भूमि को धन्य किया है | उनमें शिवाजी का नाम सर्वोपरि है |

हिंदू पंचांग के मुताबिक हर 1 साल 12 मार्च को शिवाजी जयंती बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है | दरअसल सक संवत के मुताबिक शिवाजी का जन्म फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष के तृतीय को हुआ था इस साल यह तारीख 12 मार्च को होने की वजह से छत्रपति शिवाजी की जयंती देशभर में धूमधाम से मनाई गई |

छत्रपति शिवाजी महाराज भारत के महान योद्धा और रणनीतिकार थे. उन्होंने मराठा साम्राज्य की नींव रखी मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने अनुशासित सेना असंगठित प्रशासनिक इकाइयों की मदद से एक योग और प्रगतिशील प्रशासन तैयार किया उन्होंने युद्ध विद्या में अनेक नए प्रयोग किए और छापामार युद्ध की नई शैली को विकसित किया |

उन्होंने प्राचीन हिंदू राजनीतिक प्रथाओं एवं शिष्टाचार को पुनर्जीवित किया फारसी की जगह मराठी और संस्कृत को राजकाज की भाषा बनाया |

 

छत्रपति शिवाजी महाराज की जीवनी

मराठा साम्राज्य की नींव रखने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म पुणे के पास स्थित सीनरी दुर्ग में हुआ था | उनका पूरा नाम शिवाजी भोसले था | उनके पिता का नाम शाहजी भोंसले और माता का नाम जीजाबाई था | देवी शिवाय के नाम पर उनका नाम शिवाजी रखा गया था |

उनका बचपन मां जीजाबाई के मार्गदर्शन में बीता और उन्होंने बचपन में ही राजनीति युद्ध विद्या की शिक्षा ली थी बालक शिवाजी का लालन-पालन उनके अस्थाई संरक्षण दादाजी कोण देव जीजाबाई और समर्थ गुरु रामदास के देखरेख में हुआ |

स्थानीय लोगों के साथ आसपास के क्षेत्रों में भ्रमण करने से उनको स्थानीय दुर्ग और दर्रो की जानकारी हासिल हुई उन्होंने कुछ लोगों का दल बनाकर 19 वर्ष की आयु में पुनः के करीब 2 रन के दुर्ग पर अधिकार करके अपना संघर्ष शुरू किया  |

उनके मन मस्तिष्क पर हमेशा स्वाधीनता की लहार होती थी उन्होंने कुछ कर मत साथियों को संगठित किया धीरे-धीरे उनका विदेशी शासकों की बेरिया तोड़ने का संकल्प प्रबल होता गया |

छत्रपति शिवाजी महाराज का विवाह साईं बाई निंबालकर के साथ सन 1661 में बेंगलुरु में हुआ था उनके गुरु और संरक्षण दादाजी गोण देव की 1647 में मृत्यु हो गई थी जिसके बाद शिवाजी ने स्वतंत्र रहने का घोषणा किया |

शिवाजी बचपन से ही उत्साहित योद्धा थे अपने साथियों के साथ शिवाजी खुद को मजबूत करने और अपनी मातृभूमि के ज्ञान के लिए सहयात्री पर्वतमाला की पहाड़ियों और जंगलों में घूमते रहते थे |  जिससे वे युद्ध विद्या में कुशलता हासिल कर सके |

1645 में शिवाजी ने पहली बार हिंदी स्वराज्य की अवधारणा दादाजी नर्स प्रभु के सामने पेश की शिवाजी की पैतृक जायदाद बीजापुर के सुल्तानपुर से शासित ढक्कन मे थी उन्होंने मुगल शासन के दमन और धर्म के उत्पीड़न के खिलाफ लड़ने का संकल्प लिया |

शिवाजी ने अपने दल अनुयायियों को संगठित कर उन्होंने 1655 में बीजापुर की कमजोर सीमा चौकियों पर कब्जा करना शुरू किया |

जब 1659 में बीजापुर के सुल्तान ने उनके खिलाफ अफजल खान के नेतृत्व में 10000 लोगों की सेना भेजें तब शिवाजी ने नाटकीय तरीके से विरोधी सेना को कठिन पहाड़ी क्षेत्र में बुला लिया और आत्मसमर्पण करने के बहाने एक मुलाकात में अफजल खान की हत्या कर दी |

इसके बाद रातों-रात शिवाजी एक अजय योद्धा बन गए जिनके पास बीजापुर की सेना की बंदूक के घोड़े और गोला बारूद का भंडार था शिवाजी की बढ़ती हुई शक्ति से मुगल बादशाह औरंगजेब ने दक्षिण में नियुक्त अपने सूबेदार को उन पर चढ़ाई करने का आदेश दिया  |

उससे पहले ही शिवाजी ने आधी रात को सूबेदार के शिविर पर हमला कर दिया जिसमें सूबेदार की एक हाथ की उंगलियां कट गई और उसका बेटा मारा गया सूबेदार को पीछे हटना पड़ा |

छत्रपति शिवाजी महाराज ने तटिय नगर सूरत पर हमला कर दिया और भारी संपत्ति की लूट ली | इस चुनौती के बाद औरंगजेब ने अपने सबसे प्रभावशाली सेनापति मिर्जा राजा जयसिंह के नेतृत्व में लगभग एक लाख सैनिकों की फौज भेजी |

पुरंदर की किले को बचा पाने के मकसद से शिवाजी ने महाराजा जयसिंह से संधि की पेशकश की दोनों नेता संधि की शर्तों पर सहमत हो गए और 22 जून 1665 ईस्वी को पुरंदर की संधि हुई |

पुरंदर की संधि के दौरान अपनी सुरक्षा का आश्वासन पाकर शिवाजी आगरा के दरबार में मुगल बादशाह औरंगजेब से मिलने के लिए तैयार हो गए | वह 9 मई 1666 को अपने पुत्र संभाजी के साथ मुगल दरबार में उपस्थित हुए | हालांकि औरंगजेब ने उनको कैद कर लिया |

वहां से शिवाजी 13 अगस्त 1666 को फलों की टोकरी में छुप कर फरार हो गए और 22 सितंबर 1666 ईस्वी को रायगढ़ पहुंचे बाद में 9 मार्च 1668 को औरंगजेब के साथ शिवाजी की संधि हुई |

औरंगजेब ने शिवाजी को बरार की जागीर दी 1667 से 1669 ईस्वी की बीच की 3 वर्षों में शिवाजी ने जीते हुए प्रदेशों को मजबूत किया और प्रशासनिक कार्यों पर ध्यान दिया  |

1674 तक शिवाजी ने उन सारे प्रदेशों पर अधिकार कर लिया था जो पुरंदर की संधि के मुताबिक उन्हें मुगलों को देनी पड़ी थी|  1674 में उनका राज्य और उन्हें छत्रपति की उपाधि दी गई उनके राज्य विशेक समारोह में हिंदू स्वराज का उद्घोष किया गया |

जीवन के अंतिम वर्ष उनकी जेष्ठ पुत्र की धर्म बी मुक्ता के कारण परेशानियों में बीते कुछ समय बीमार रहने के बाद राजधानी पहाड़ी दुर्ग रायगढ़ में 3 अप्रैल 1680 को शिवाजी की मृत्यु हो गई |

उनकी चारित्रिक श्रेष्टा दान सिलता के अनेक उदाहरण गौरव गाथा के रूप में मिलते हैं वह महाराष्ट्र के ही नहीं समुचित मातृभूमि के सेवक थे |

 

 संछिप्त बिवरण शिवाजी ( 1627-1680 ई . ) के बारे में 

शिवाजी का जन्म 1627 ई में पूना के समीप शिवनेर के दुर्ग में हुआ था । उनके माता का नाम जीजाबाई और पिता और शाहजी भोंसले था । शिवाजी ने 1643 ई में अपने पिता की जागीर के प्रशासक के रूप में पुणे में सुरू किया था । छत्रपति शिवाजी महाराज ने शासन कार्य 1647 ई में सम्भाला ।

शिवाजी पर सर्वाधिक प्रभाव गुरु दादाजी कोंणदेव का था जो शिवाजी के संरक्षक भी थे । गुरु समर्थ रामदास थे । समर्थ रामदास ने ‘ दासबोध ‘ एवं ‘ आनन्दवन भवन ‘ नामक पुस्तक लिखी । समर्थ रामदास ने मराठा धर्म का प्रतिपादन किया । अपने जीवनकाल में शिवाजी ने 240 किलों का निर्माण कराया था ।

उन्होंने सर्वप्रथम 1646 ई में सबसे पहला अधिकार तोरण किले पर किया। तत्पश्चात् 1646 ई . में तोरण पर अधिकार किया ।

1656 ई में शिवाजी ने रायगढ़ में अपनी राजधानी को बनाया । उनके पिता शाहजी को 1647 ई में कैद कर लिया गया । शिवाजी ने पहली बार मुगलों से 1657 ई . में युद्ध किया । शिवाजी ने 1659 ई में सलहार के युद्ध में मुगलों को हराया था ।

शिवाजी ने 1659 ई . में बीजापुर के महत्त्वपूर्ण सरदार अफजल खाँ को बघनखे से मार डाला ।  शिवाजी ने सूरत को सबसे पहली  बार 1664 ई में लूटा । औरंगजेब ने शिवाजी को राजा की पद्वी दी । औरंगजेब ने 1665 में आमेर के राजा  जयसिंह को शिवाजी के विरूद्ध भेजा ।

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जयसिंह ने पुरन्दर को जीत लिया तथा शिवाजी से पुरन्दर की संधि की । 1666 ई . औरंगजेब ने शिवाजी को कैद कर जयपुर भवन ( आगरा ) में रखा ।  शिवाजी का साम्राज्य स्वराज्य एवं मुल्द – ए कादिम नामक दो भागों में विभक्त था । मराठी शब्दकोश की रचना रघुनाथ पंडित हनुमंत ने की ।

 

शिवाजी के मंत्रिमंडल को अष्टप्रधान कहा जाता था ।

( 1 ) पेशवा यह प्रधानमंत्री होता था ।

( 2 ) अमात्य – वित्त मंत्री होता था ।

( 3 ) वाकिया नवीस कानून व्यवस्था एवं गुप्तचरी का प्रधान ।

( 4 ) सचिव राजकीय संवाद की देखरेख करता था ।

( 5 )  विदेशी मामले तथा समारोहों की देखभाल ।

( 6 ) पंडितराव दान एवं धार्मिक मामले देखता था ।

( 7 ) सर – ए – नौवत सेनापति था ।

( 8 ) न्यायाधीश मुख्य न्यायकर्ता होता था ।

( 9 ) सुमन्त

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शिवाजी ने राज्याभिषेक रायगढ़ में 1674 ई में काशी के प्रसिद्ध विद्वान गंगाभट्ट से करवाया था तथा ‘ छत्रपति ‘ की उपाधि धारण की ।  शिवाजी ने सूरत पर दूसरा आक्रमण 1670 ई . में किया । शिवाजी ने मराठी को राजभाषा बनाया ।

शिवाजी की सेना का मुख्य भाग घुड़सवार और पैदल सेना थी । घुड़सवार दो प्रकार के थे ये शाही घुड़सवार थे , जिन्हें राज्य की ओर से शस्त्र मिलते थे ।  सिलेदार इन्हें घोड़े एवं शस्त्र स्वयं खरीदने पड़ते थे । शिवाजी की राजस्व व्यवस्था अहमदनगर राज्य में मलिक अम्बर द्वारा अपनाई गयी रैयतवाड़ी प्रथा पर आधारित है ।

 

मराठा काराधान प्रणाली में दो सर्वाधिक कर चौथ और सरदेशमुखी थे ।

( 1 ) चौथ – विजित राज्यों के क्षेत्रों से उपज के एक चाथाई ( 4 ) के रूप में वसूल किया जाता था ।

( 2 ) सरदेशमुखी – यह आय का 10 प्रतिशत या 1/10 अंश के रूप में होता था । जो एक अतिरिक्त कर था ।

राजाराम ने नौवें मंत्री को शामिल कर प्रतिनिधि नाम दिया ।  बरगीरपेशवा का पद बालाजी विश्वनाथ के बाद वंशानुगत हो गया ।  पेशवा के सचिवालय को हुजूरदफ्तर ( पूना में ) कहा गया ।  सबसे महत्त्वपूर्ण दफ्तर अल – बरीज दफ्तर था ।

गाँव के मुख्य अधिकारी को पटेल अथवा पाटिल कहा जाता था ।  शिवाजी ने भूमि मापने के लिए काठी नामक मापक का प्रयोग किया ।  शिवाजी हैन्दवधर्मोद्धारक की पद्वी के साथ छत्रपति के आसन पर बैठे ।  शिवाजी के राजपुरोहित गंगाभट्ट थे ।

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गंगाभट्ट ने शिवाजी को मेवाड़ के सिसोदिया वंश का क्षत्रिय घोषित किया । . कर्नाटक अभियान शिवाजी का अन्तिम विजय अभियान था ।  शिवाजी की मृत्यु 1680 ई . में हुई । शिवाजी का उत्तराधिकारी शम्भाजी हुए । शम्भाजी ने औरंगजेब के विद्रोही पुत्र अकबर को शरण दी ।

1689 ई . में शम्भाजी को औरंगजेब द्वारा बहादुरगढ़ में मार डाला गया ।  शम्भाजी की पत्नी येसुबाई तथा पुत्र शाहू को रायगढ़ के किले में ( मुगलों द्वारा ) कैद किया गया ।

शम्भा जी की मृत्यू के बाद उसके सौतेले भाई राजाराम को मराठा मंत्रिपरिषद् ने राजा घोषित किया । 1700 में राजाराम की मृत्यू के बाद उसकी विधवा ताराबाई ने अपने चार वर्षीय पुत्र को शिवाजी द्वितीय के नाम से गद्दी पर बैठाया और मुगलों से स्वतंत्रता संघर्श जारी रखा ।

शाहू को 1707 ई . में राजकुमार आजम ने रिहा किया ।  शाहु के कोई पुत्र नहीं था अतः 1749 में अपनी मृत्यु से पूर्व ताराबाई के पौत्र राजाराम द्वितीय को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया । छत्रपिति शाहु व राजाराम की विधवा पत्नी ताराबाई के मध्य चल रहे गृह युद्ध ने पेशावाओं की शक्ति को बढ़ाया ।

1713 ई . में शाहू ने बालाजी विश्वनाथ को पेशवा बनाया ।  बाजीराव प्रथम शिवाजी के बाद ‘ गुरिल्ला युद्ध ‘ का सबसे बड़ा प्रतिपादक था ।  शाहू ने बाजीराव प्रथम को ‘ योग्य पिता का योग्य पुत्र ‘ कहा है । बाजीराव प्रथम ने ‘ हिन्दू पादशाही ‘ का आदर्श रखा । बालाजी बाजीराव को नाना साहब के नाम से भी जाना जाता था ।

 

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