संसद भवन

नया संसद भवन

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र इस लोकतंत्र का मंदिर है | सांसद भवन जहां होती है जन-जन की आकांक्षाओं पर चर्चा और देश की भविष्य की दिशा तय होती है | मौजूदा संसद भवन को बनाया गया था ,100 साल पहले इन 100 सालों में आवश्यकताओं के अनुरूप इसे कई बार रिपेयर मरम्मत किया गया जा चुका है. |

अब पुरानी संरचना में बैठने की क्षमता बढ़ाना मुमकिन नहीं और ना ही मुमकिन है इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी में सुधार करना. इसीलिए आज पार्लियामेंट एक विकल्प नहीं बल्कि 21वीं सदी के नए और आत्मनिर्भर भारत के लिए जरूरत बन गया है | एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को संजोए नया संसद भवन फैला होगा 54500 वर्ग मीटर विशाल एरिया में जिसका निर्माण 21 महीनों में संपन्न कर लिया जाएगा |

इसे खास बनाएगा हमारे सांस्कृतिक विविधता से प्रेरित इसका त्रिभुजाकार डिजाइन जिसे बेहतर स्पेस मैनेजमेंट के लिए भूकंप रोधी सिस्टम के मुताबिक जेड ,जेड प्लस लेवल की सुरक्षा सुनिश्चित करने इको फ्रेंडली ग्रीन कंस्ट्रक्शन से बिजली खपत को 30% तक कम करने और अगले 150 से ज्यादा सालों की जरूरतों पर खरा उतरने के लिए बनाया जाएगा |

नए संसद भवन की कुल सीटें क्षमता पहले के मुकाबले 150% से भी अधिक होगी मतलब अब लोक सभा कक्ष में 888 राज्य सभा कक्ष में 384 जबकि संयुक्त संसद अधिवेशन में 1272 सांसदों की बैठने की क्षमता होगी ‘साथी हैं डिजिटल इंटरफेस और आधुनिक सुरक्षा और संयुक्त होंगे सांसद कार्यालय और हर एक  डेक्स इलेक्ट्रॉनिक गैजेट से लैस होगा ।

पार्लियामेंट

भारत, विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र… और इस लोकतंत्र की सबसे खूबसूरत तस्वीर हमारा पार्लियामेंट यानि संसद भवन, जहां पर जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि हमारे देश और राज्य का नेतृत्व करते है। हालांकि समय,जरूरत, आवश्यकता और भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए चीजों को बदलना लाजमी हो जाता है.. और यही वजह है कि मौजूदा संसद भवन की जगह एक नए संसद भवन का निर्माण किया जा रहा है।

संसद के इस नए भवन की जरूरत समय के साथ प्रासंगिक भी है क्योंकि 2026 में जब नए सिरे से परिसीमन होगा और आबादी के साथ संसदीय कार्यक्षेत्रों की संख्या बढ़ेगी| तब सुरक्षा, तकनीक और सहूलियत के लिहाज से भी नया संसद भवन जरूरी होगा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मौजूदा संसद भवन का महत्व कम होगा… बल्कि यह और बढ़ेगा।

ब्रिटिश काल में बना मौजूदा पार्लियामेंट अपनी गौरवशाली इतिहास और भारतीय लोकतंत्र की साल दर साल मजबूत होते सफर का गवाह है। इतिहास की अनगिनत घटनाओं और कहानियों को अपने में समेटे वर्तमान संसद भवन देश की कला और वास्तुशिल्प का एक बेजोड़ नमूना है जो दुनिया की बेहतरीन इमारतों में से एक है।

संसद भवन का इतिहास

1911 में आयोजित दिल्ली दरबार के दौरान जब किंग जॉर्ज पंचम ने देश की राजधानी को कलकत्ता से हटाकर दिल्ली लाने की घोषणा की तभी से सांसद भवन बनने की कल्पना आकार लेने लगी | किंग की घोषणा के बाद अप्रैल 1912 में ब्रिटिश वास्तुशिल्पी एडविन लुटियंस ने अपनी टीम के साथ नया शहर बनाने के लिए दिल्ली आए और फरवरी 1913 में नई राजधानी बनाने की जिम्मेदारी संभालने के लिए एक कमेटी की गठन किया गया इस कमेटी का प्रमुख एडविन एंड लुटियंस थे ।

इसे भी पढ़े :   नेपोलियन

कमेटी के अन्य सदस्यों में हार्वर्डबेकर भी थे इस कमेटी को आम बोलचाल की भाषा में दिल्ली एक्सपर्ट के नाम से बुलाया गया ।कमेटी ने काफी छानबीन के साथ तय किया कि नया शहर यानी नई दिल्ली बनाने के लिए सबसे सही जगह मालचा गांव के पास है इसके साथ ही वायसराय भवन और सचिववालयों के लिए उन्होंने रायसीना की पहाड़ी को चुना ।

शुरू में नई दिल्ली के नक्शे में संसद भवन शामिल नहीं था संसद भवन को शहर की योजना में बाद में शामिल किया गया | दरअसल 1921 में मोंटेग्यू चेम्सफोर्ड सुधार लागू किए जाने के बाद जब वायसराय की काउंसिल के सदस्यों की संख्या बढ़ने और भारत में 2 सदनों वाली प्रणाली लोकसभा राज्यसभा लागू करने का फैसला हुआ | तब काउंसिल हाउस के रूप में वर्तमान संसद भवन की रूपरेखा तैयार की गई ।

नया शहर बनाने का प्रस्ताव पारित होने के बाद एडविन लुटियंस ने शहर की सामान्य रूप रेखा के अलावा वायसराय भवन और वॉर मेमोरियल आर्ज जिसे आप इंडिया गेट के नाम से जानते हैं इसका नक्शा बनाया वही जब सांसद भवन बनाने की बात हो गई. तब हरबर्ट बेकर ने सचिवालय और संसद भवन को डिजाइन किया | हालांकि पार्लियामेंट के डिजाइन को लेकर लुटियंस और बेकर के बीच जबरदस्त मतभेद था | लेकिन तत्कालीन वायसराय हार्टिंग के नेतृत्व में समिति ने बेकर के हक में फैसला सुनाया और आखिरकार एक गोलाकार प्ररूप को बढ़ाने की स्वीकृति दे दी गई |

सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद 12 फरवरी 1921 को ड्यूक ऑफ कनाट प्रिंस आर्थर ने संसद भवन ( पार्लियामेंट ) की नींव रखी और 6 साल की कड़ी मेहनत के बाद यह भव्य इमारत अपने वजूद में आई | 18 जनवरी 1927 को एक शानदार समारोह में लॉर्ड इरविन ने हरवर्ड बेकर द्वारा दी गई सोने की चाबी से संसद भवन का उद्घाटन किया ।

इस इमारत को बनाने में उस समय कुल 83 लाख  रुपए खर्च हुए और हजारों मजदूरों कलाकारों ने इसे बनाने में अपना बहुमूल्य योगदान दिया अपनी भव्यता और कलात्मक बनावट के साथ ही बेहतरीन वास्तुकला के उत्कृष्ट नमूनों को अपने में समेटे संसद भवन दुनिया के संदार भवनों में से एक है |

गोलाकार रूप में बना संसद भवन 6 एकड़ में फैला हुआ है जिसका व्यास 560 फुट और परिधि 536 मीटर है इस भवन के चारों तरफ 10 मीटर ऊंची जालीदार बलुआ पत्थर की बाउंड्री है संसद भवन में कुल 12 द्वार है जिनमें पांच द्वारों के ऊपर मंडप बने हुए हैं | इस  भवन के चारों तरफ 27 फीट ऊंचे 144 खंभे हैं जो इसकी सुंदरता में चार चांद लगा देते हैं । जिसे देखने के लिए दुनिया भर से लोग आते हैं |

 

 

comment here