रूसी क्रांति क्या है | रूसी क्रांति के कारण और परिणाम क्या थे

रूसी क्रांति क्या है

आज के इस आर्टिकल में हम लोग पढ़ेंगे विश्व इतिहास के महत्वपूर्ण घटना रूसी क्रांति के बारे में एवं उससे संबंधित अन्य जानकारियों को भी हम पढ़ेंगे . तो आप इस आर्टिकल …

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चीनी क्रांति कब हुई थी

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शीतयुद्ध का दौर

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जर्मनी का एकीकरण कब हुआ

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जर्मनी का एकीकरण ( Unification of Germany ) :   मध्य यूरोप के स्वतंत्र राज्यों जैसे  ( प्रशा , बवेरिआ , सैक्सोनी आदि ) को आपस में मिलाकर 1871 में एक राष्ट्र …

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इटली का एकीकरण

इटली का एकीकरण

इटली का एकीकरण ( Unification of Italy )

इटली का एकीकरण : 19 वीं सदी में इटली में एक राजनैतिक और सामाजिक अभियान था । जो छोटे -छोटे देशो को मिलाकर इटली का निर्माण किया गया था | यह 1815 में इटली पर नेपोलियन बोनापार्ट के राज के अंत के बाद वियना सम्मलेन के साथ आरम्भ हुआ और 1870 में राजा वित्तोरियो इमानुएले की सेनाओं द्वारा रोम पर कब्जा होने तक चला । कुछ क्षेत्र प्रथम विश्वयुद्ध के बाद ही इटली का हिस्सा बने । प्राचीन काल में यह  रोमन साम्राज्य का केंद्र और गौरवपूर्ण इतिहास रहा |

इटली का एकीकरण में बाधाएँ ( Obstacles in Unification )

भौगोलिक कारण : इटली के मध्य में रोम में पोप का साम्राज्य था , जो इटली को उत्तर और दक्षिणी राज्यों में  दो भागों में बांटता था , और यहां पर सामाजिक – आर्थिक विषमता मौजूद थी ।

पोप का राज्य : रोम में स्थित पोप ईसाई धर्म का प्रमुख होता था , इस राज्य की सुरक्षा फ्रांस की सेना करती थी । रोम के विरुद्ध सैन्य अभियान का अर्थ यूरोप से शत्रुता थी ।

इटली के क्षेत्रों पर विदेशी प्रभुत्व : वेनेशिया एवं लोम्बार्डी पर आस्ट्रिया का प्रभुत्व था  , मध्य इटली के राज्य ( परमा , मेडोना , टस्कनी ) के शासक आस्ट्रिया के राजवंश से संबन्धित थे ,इसके अलावा नेपल्स एवं सिसली में फ्रांस के बूर्बो वंश का शासन था ।

भू-स्वामी वर्ग के विशेषाधिकार : एकीकरण से भू स्वामियों की शक्ति कम होती गई , इसी कारण वे एकीकरण के विरोधी थे ।

 

विचारधारात्मक / रणनीतिक द्वंद्व : मेजिनी गणतन्त्र का समर्थक था , कावूर राजतंत्र का समर्थक था जबकि जियोबर्टी पोप के नेतृत्व में इटली राज्यों के संघ का समर्थक था । इन तीनों की अलग-अलग विचारधाराओं के कारण इटली में एकता नहीं बन पा रही थी जो इटली की विनाश के कारण बनी |

इटली का एकीकरण में सहायक तत्व

फ्रांस की क्रांति : नेपोलियन ने साम्राज्यवाद का विस्तार किया जिसमें वह आस्ट्रिया की पराजित किया एवं इटली में एक समान शासन व्यवस्था और कानून व्यवस्था लागू किया। आर्थिक प्रशासनिक एकीकरण इससे प्राप्त हुआ। नेपोलियन के विरुद्ध राष्ट्रवाद का उदय हो गया ।

कार्बोनरी संस्था : इटली के कोयला मजदूरों द्वारा 1810 ई . में गठन एक संस्था थी जो गुप्त क्रांतिकारी संस्था , राष्ट्रवाद का प्रसार एवं विदेशियों को भगाना उद्देश्य था ।

मेजिनी एवं यंग इटली : 1831 में मेजिनी द्वारा गठित किया इसका मुख्य उद्देश्य था.

  • आस्ट्रिया को इटली से बाहर निकालना ।क्योंकि ऑस्ट्रिया के राजवंश के अधी 

    न इसके बहुत सारे क्षेत्र थे |

  •  इटली का एकीकरण किया जाना और इटलीवासियों द्वारा किया जाए । जो इटली के लोग हैं उन्हीं के द्वारा इटली का एकीकरण किया जाना चाहिए | विदेशी शक्तियों की आवश्यकता नहीं है .
  • इटली में गणतत्र की स्थापना करना |

कोयला एवं लोहा की भूमिका : यहां कोयला और लोहा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध था इसीलिए औद्योगिकीकरण एवं रेलवे का विकास हुआ और रेलवे के विकास होने के कारण लोगों में आपसी संपर्क बढा और बहुत सारे देशों में राष्ट्रवाद की भावना का प्रसार शुरू होने लगा ।

बौद्धिकों की भूमिका : रासोटी , सिल्विया पेविक जैसे कवियों द्वारा राष्ट्रवाद का खूब प्रचार – प्रसार किया गया | जिससे लोगों में राष्ट्रवाद की भावना जागृत हुई ।

सांस्कृतिक एकता : एक समान भाषा बोली जाती थी जो इतवर्ली भाषा थी , धर्म भी एक समान था , रीति – रिवाज एवं प्राचीन गौरव भी एक समान थी । इससे भी लोगो में राष्ट्रवाद की भावना जागृत हुई ।

एकीकरण की प्रक्रिया

कावूर का दृष्टिकोण = यथार्थवादी राजनीतिज्ञ था और वह मानता था कि बिना विदेशी सहायता के एकीकरण संभव नहीं है और वह विदेशी सहायता के लिए अवसर की तलाश कर रहा था एवं इसी बीच क्रीमिया के युद्ध में अवसर प्राप्त प्राप्त हुआ ।

क्रीमिया का युद्ध ( 1854-56 ) =  इस युद्ध में रूस ( पराजित ) हुआ एवं तुर्की के साथ (फ्रांस + इंग्लैण्ड + पीडमॉण्ट – सार्डीनिया की सेना ) का साथ मिला जिस कारण रूस युद्ध में हार गया ।

पेरिस सम्मेलन ( 1856 ) , फ्रांस एवं आस्ट्रिया के मध्य विल्लाफेंका की संधि ( 1859 ) , 1866 में वेनेशिया ( इटली ) का एकीकरण हुआ जर्मनी के साथ संधि हुई ।

 

प्लॉबियर्स की संधि ( 1858 ) – नेपोलियन- III ( फ्रांस ) ने आस्ट्रिया के विरुद्ध युद्ध में 2 लाख सैनिक देने का वचन दिया और बदले में फ्रांस को नीस और सेवाय का क्षेत्र दिया जाना तय हुआ ।

आस्ट्रिया के साथ युद्ध = पीडमॉण्ट की सेना फ्रांस के सहयोग से विजयी हुई और  लोम्बार्डी पर नियंत्रण कर लिया और यह एकीकरण की ठोस शुरुवात हुई ।

 

परमा , मेडोना एवं टस्कनी का विलय = लोम्बार्डी के विलय से राष्ट्रवाद की भावना जागृत हुई और इसके कारण जनविद्रोह हुआ | जन विद्रोह होने के कारण इसमें जनमत संग्रह कराके इटली में विलय कर लिया गया |

नेपल्स एवं सिसली का विलय = गैरीबाल्डी ने लाल कुर्ती सेवकों की सहायता से नेपल्स एवं सिसली पर कब्जा कर लिया और कब्जा करने के बाद वहां पर जनमत संग्रह करा के इसे भी इटली का भाग बना लिया गया |

वेनेशिया एवं रोम का विलय = पीडमॉण्ट के शासक विक्टर एमैनुएल ने प्रशा के सहयोग से अधिकार कर लिया और जनमत संग्रह के पश्चात इसे भी इटली में विलय कर लिया गया |

इटली का एकीकरण पूर्ण हुआ जब रोम को इटली की राजधानी बना दी गई और इसी संदर्भ में कहा जाता है की “ क्रीमिया के कीचड़ से इटली का जन्म हुआ ‘।

 

इटली को पांच भागों में विभाजित किया गया था .

 

1. लोम्बार्डी – प्लोबियर्स की संधि ( 1858 ) एवं ज्यूरीख की संधि 1859 हुई ।

2. परमा , मेडोना , टस्कनी के शासक एवं बोलोगना एवं रोमागना से पोप के प्रतिनिधियों को हटा दिया गया और वहां के लोगों ने जन विद्रोह किया तथा जनमत संग्रह कराने के बाद उसे भी इटली में शामिल कर लिया गया ।

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3. सिसली एवं नेपल्स का विलय =1860 मे गैरीबाल्डी एवं उसके लाल कुर्ती स्वयं सेवकों की मदद से नेपल्स और सिसली पर कब्जा कर लिया और कब्जा करने के बाद वहां विक्टर एमैनुएल द्वितीय को स्वयं को वहां का अधिनायक घोषित कर दिया फिर काबूर ने फिर से इटली में विलय करा लिया ।

4. वेनेशिया में सेडोवा का युद्ध 1866 मे युद्ध हुआ और जर्मनी के एकीकरण के समय प्रशा द्वारा आस्ट्रिया को हराया गया ।

5. रोम – सेडान का युद्ध 1870 इसी क्रम में प्रशा द्वारा फ्रांस की पराजय हुई जिसके कारण रोम पीडमांड को मिल गया । इसी के वजह से इटली का नया जन्म हुआ ।

विल्लाफ्रेंका का विश्वासघात 1859 

  • प्लोबियर्स की संधि ( 1858 ) – आस्ट्रिया के विरुद्ध फ्रांस की सहायता की और  लोम्बार्डी पर नियंत्रण प्राप्त हुआ |
  • विल्लाफ्रेंका की संधि ( 1859 ) – नेपोलियन- III एवं आस्ट्रिया के मध्य , फ्रांस ने स्वयं को युद्ध से अलग कर लिया गया | नेपोलियन- III को आस्ट्रिया के पक्ष में प्रशा के सैन्य सहयोग का भय था  |
  • अभी उस देश ने विजयोल्लास का प्याला होठों से लगाया ही था कि वह गिर कर चकना – चूर हो गया ।
  • विल्लाफ्रेंका के विश्वासघात ( 1859 ) से एकीकरण कि प्रक्रिया अवरुद्ध , मात्र लोम्बार्डी से संतोष , ।

दक्षिण से क्रांति कि शुरुवात

  • नेपल्स और सिसली – राष्ट्रीयता कि भावना , जनविद्रोह , गैरीबाल्डी ने अपने हजारों ‘ लाल कुर्ती स्वयं सेवकों के साथ पहुंचकर नेतृत्व किया , और अधिकार प्राप्त किया । फिर बाद में जनमत संग्रह करा कर इटली का हिस्सा बनाया गया ।
  • अधिक उत्साह में गैरीबाल्डी ने रोम एवं वेनेशिया पर अधिकार करने कि घोषणा की ,तो रोम में पोप के साम्राज्य की रक्षा फ्रांस के सैनिक करते थे एवं वेनेशिया पर आस्ट्रिया का अधिकार था और फ्रांस एवं आस्ट्रिया के युद्ध का खतरा था. इसी कारण कावूर ने कहा ‘ हमें इस पागल गैरीबाल्डी से इटली को  बचाना है ।
  • सेडोवा का युद्ध 1866 – प्रशा द्वारा आस्ट्रिया की पराजय ( जर्मनी के एकीकरण के क्रम में ) हुई , वेनेशिया पर पीडमॉण्ट का नियंत्रण स्थापित हो गया ।
  • सेडान का युद्ध 1870 – प्रशा द्वारा फ्रांस की पराजय हुई और फ्रांस के बाद रोम पर पीडमॉण्ट का नियंत्रण हो गया ।

एकीकरण का परिणाम

  • यूरोप में एक नए देश के रूप में इटली का उदय हुआ ‘
  • मेटरनिख की यूरोपीय व्यवस्था का पतन हो गया जो राष्ट्रवाद , जनतंत्र , संविधान का विरोध करती थी ।
  • इटली में संवैधानिक शासन एवं जनता की संप्रभुता स्वीकार की गई ।

 

इटली के एकीकरण में मेजिनी काबुर और गैरीबाल्डी के योगदान

मेजनी

मैजिनी साहित्यकार गणतांत्रिक विचारों का समर्थक और योग्य सेनापति था | मेजोनी संपूर्ण इटली का एकीकरण करके उसे एक गणराज्य बनाना चाहता था | जबकि सार्डिनीया पिडमौट शासक चार्ल्स अल्बर्ट अपने नेतृत्व में सभी प्रांतों का विलय चाहता था. उधर पॉप इटली को धर्मराज बनाने का पक्षधर था इस तरह विचारों के टकराव के कारण इटली के एकीकरण का मार्ग अवरुद्ध हो गया था |कालांतर में ऑस्ट्रिया द्वारा इटली के कुछ भागों पर आक्रमण किए जाने लगे जिससे सार्डिनीया के शासक चार्ल्स अल्बर्ट की पराजय हो गई | ऑस्ट्रेलिया के हस्तक्षेप से इटली में जनवादी आंदोलन को कुचल दिया गया इस प्रकार मैजिनी की पुनः हार हुई और वह पलायन कर गए |

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1848 इसवी तक इटली के एकीकरण के लिए किए गए प्रयास असफल रहे | परंतु धीरे-धीरे इटली में इन आंदोलन के कारण जन जागरूकता बढ़ रही थी और राष्ट्रीयता की भावना तीव्र हो रही थी | इटली में सार्जिनिया पिडमौत का नया  विक्टर एमैनुएल राष्ट्रवादी विचारधारा और उसके प्रयास से इटली के एकीकरण का कार्य जारी रहा अपनी नीति के क्रियान्वयन के लिए विक्टर इमैनुएल ने काउंट कावूर को प्रधानमंत्री नियुक्त किया|

काउण्ट काबुर

काबुल एक सफल कूटनीतिक एवं राष्ट्रीय वादी था वह इटली के एकीकरण में सबसे बड़ी बाधा ऑस्ट्रिया को मानता था 1953 से 1954 ई में क्रिमीयम युद्ध में काबूर ने फ्रांस की ओर से युद्ध में सम्मिलित होने की घोषणा कर ली और फ्रांस का राजनीतिक समर्थक हासिल किया | जोकि 18 से 62 ईसवी तक दक्षिणी इटली रोम तथा वर्ण सिया को छोड़कर बाकी रियासतों का विलय रोम में हो गया और सभी ने विक्टर एमैनुएल को शासक माना |

 

गैरीबाल्डी

गैरीबाल्डी सशस्त्र क्रांति के द्वारा दक्षिणी इटली के रियासतों के एकीकरण तथा गणतंत्र की स्थापना करने का प्रयास कर रहा था गैरीबाल्डी ने अपने कर्मचारियों स्वयं सेवकों की सशस्त्र सेना बनाई उसने अपने सैनिकों को लेकर इटली के प्रांत सिसली तथा नेपल्स पर आक्रमण किए | ‘इन रियासतों की अधिकांश जनता बुर्बो राजवंश के निरंकुश शासन से तंग होकर गैरीबाल्डी की समर्थक बन गई ।

गैरीबाल्डी ने यहां गणतंत्र की स्थापना की. तथा विक्टर एमैनुएल की प्रतिनिधि के रूप में वहां की सत्ता संभाली दक्षिणी इटली के जीते हुए क्षेत्र को बिना किसी संधि के गैरीबाल्डी ने विक्टर एमैनुएल को सौंप दिया |  उसने अपनी सारी संपत्ति राष्ट्र को समर्पित कर दी .जोकि 1829 ईसवी में इटली का एकीकरण में मेजिनी काबूर गैरीबाल्डी जैसे राष्ट्रवादी नेताओं के योगदान के कारण पूर्ण हुआ |

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 नेपोलियन

नेपोलियन

 नेपोलियन : परिचय ( Introduction )

 नेपोलियन बोनापार्ट ( 15 अगस्त 1769 – 5 मई 1821 ) फ्रान्स की क्रान्ति में सेनापति बना, 11 नवम्बर 1799 से 18 मई 1804 तक प्रथम कांसल के रूप में शासक और 18 मई 1804 से 6 अप्रैल 1814 तक नेपोलियन I के नाम से सम्राट रहा । वह पुनः 20 मार्च से 22 जून 1815 में सम्राट बना ।

इतिहास में नेपोलियन विश्व के सबसे महान सेनापतियों में गिना जाता है । उसने एक फ्रांस में एक नयी विधि संहिता लागू की जिसे नेपोलियन की संहिता कहा जाता है ।

वह इतिहास के सबसे महान शासको में से एक था । उसके सामने कोई टिक नहीं पा रहा था । जब तक कि उसने 1812 में रूस पर आक्रमण नहीं किया था , जहां सर्दी और वातावरण से उसकी सेना को बहुत क्षति पहुँची । 18 जून 1815 वॉटरलू के युद्ध में पराजय के पश्चात अंग्रजों ने उसे अन्ध महासागर के दूर द्वीप सेंट हेलेना में बन्दी बना दिया । छः वर्षों के अन्त में वहाँ उसकी मृत्यु हो गई । इतिहासकारों के अनुसार अंग्रेजों ने उसे संखिया ( आसीनिक ) का विष देकर मार डाला ।

  उदय की परिस्थियाँ ( Circumstances for Rise )

फ्रांस की राज्य क्रांति 1789 : –

समानता , स्वतन्त्रता एवं बंधुता , राजतंत्र का अंत , विशेषाधिकारों की समाप्ति

योग्यता पर बल = नेपोलियन जैसे सामान्य व्यक्ति के लिए भी आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त हुआ

 डायरेक्टरी का शासन एवं क्रांति के दौरान फैली अव्यवस्था :

मूल्य वृद्धि , बेरोजगारी , भ्रष्टाचार आदि बढ़े , जनता असंतुष्ट , कुशल प्रशासक एवं नेतृत्व की तलाश 6. ]

पूर्व सैन्य अभियानों में नेपोलियन की सफलता , क्रांति के शिशु के रूप में जनता द्वारा स्वीकृति

मध्यवर्ग के हित :

मध्यवर्ग को स्थायित्व , धनी पूंजीपति वर्ग से कमजोर वर्ग को सुरक्षा एवं सहायता , फ्रांस से भागे । पादरी एवं कुलीन को सहसम्मान वापसी की आकांक्षा थी , उन्होने नेपोलियन के तानाशाही को भी सहर्ष स्वीकार किया |

   नेपोलियन के कार्य / सुधार ( Reforms by Napoleon )

“ मुझे मेरे 40 युद्धों के लिए नहीं  लेकिन  विधि सुधारों के लिए याद रखा जाएगा । ” – नेपोलियन

संवैधानिक सुधार : –

1799 में सत्ता पर अधिकार के बाद क्रांतिकाल का चौथा संविधान बनाकर लागू किया –

फ्रांस में गणतन्त्र एवं कौंसल शासन पद्धति लागू , नेपोलियन प्रथम कौंसल , समस्त शक्ति कौंसल में

आर्थिक सुधार :

• महाद्वीपीय व्यवस्था – शत्रु देशों की आर्थिक घेराबंदी

• कर सुधार – सरल एवं एकरूप कर प्रणाली , कर वसूली सख्त

प्रशासनिक खर्चों में मितव्ययिता , सेना व्यय विजित राष्ट्रों पर थोपा

राष्ट्रीय बैंक – बैंक ऑफ फ्रांस की स्थापना , घूसखोरी , सट्टेबाजी पर नियंत्रण

उद्योग एवं व्यापार – व्यावसायिक शिक्षा , सड़कें आदि

कृषि विकास – बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने का प्रयास

कानूनी सुधार :

पुरातन व्यवस्था – असियां रेजिम , जिसमें एकरूपता का अभाव था ,

– नेपोलियन की पाँच संहिताएँ ( नेपोलियन कोड ) – दीवानी संहिता , दीवानी दंड प्रक्रिया , आपराधिक दंड प्रक्रिया , दंड विधान तथा व्यापारिक संहिता । विधि की श्रेष्ठता एवं विधि का समक्ष समता

• पारिवारिक अनुशासन – पुरुष परिवार का मुखिया एवं संपत्ति किसी भी व्यक्ति को देने को स्वतंत्र , स्त्री को पुरुष तथा संतानों को पिता के अधीन माना , सिविल विवाह को मान्यता , तलाक के नियम कठोर

शिक्षा में सुधार :

प्राथमिक , माध्यमिक एवं उच्च तीन वर्गों में शिक्षा का विभाजन , यूनिवर्सटे नामक संस्था द्वारा समन्वय

सत्रह की निश्चितता , पाठ्यक्रम का निर्धारण , शिक्षक प्रशिक्षण हेतु नॉर्मल की स्थापना एवं राष्ट्रियता के प्रसार हेतु लाइसिज की स्थापना

इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रांस – उच्चतर अनुसंधान हेतु गठित संस्था

सीमा – स्त्री शिक्षा पर विशेष ध्यान नहीं , धर्म संस्थाओं को जिम्मेदारी दी

धार्मिक सुधार :

कोंकोर्दा समझौता 1801

क्रांतिकाल में राज्य विरोधी बने पोप व चर्च को राज्य के अंग के रूप में पुनः समाहित किया

पोप ने क्रांति के दौरान जब्त संपत्ति पर दावा छोड़ दिया , बदले में कैथोलिक धर्म को राज्य के बहुसंख्यक जनता का धर्म स्वीकार किया गया

पादरी वर्ग की नियुक्ति एवं वेतन राज्य द्वारा , परंतु उन्हें दीक्षा पोप द्वारा दिया जाना तय हुआ , ग्रीगेरियन कैलेंडर को फिर से लागू किया गया

प्रशासनिक सुधार  :

• अति केंद्रीयकृत प्रशासनिक व्यवस्था का निर्माण , स्थानीय शासन को अस्वीकार किया –

फ्रांस की क्रांति के प्रशासनिक विकेन्द्रीकरण का विरोधी – क्रांति विरोधी स्वरूप कृत्रिम कुलीन वर्ग : – समर्थकों का कृत्रिम कुलीन वर्ग , राष्ट्रीय सम्मान के रूप में उपाधि , क्रांति विरोधी स्वरूप

महाद्वीपीय व्यवस्था ( The Continental System )

महाद्वीपीय व्यवस्था ( Continental System ) या महाद्वीपीय नाकाबन्दी ( Continental Blockade ) युद्धों के समय ब्रिटेन के विरुद्ध संघर्ष में नेपोलियन की आर्थिक नाकेबंदी ( इंग्लैण्ड से व्यापार = नेपोलियन से युद्ध ) थी ।

– नेपालियन के साम्राज्यवादी विस्तार में सबसे बड़ी बाधा ब्रिटेन था और यूरोप में ब्रिटेन ही ऐसी शक्ति था जिसे नेपोलियन नहीं हरा सका था क्योंकि ब्रिटेन की नौसैनिक शक्ति फ्रांस के मुकाबले श्रेष्ठ थी । अतः नेपोलियन ने इंग्लैण्ड को परास्त करने के लिए उसे आर्थिक दृष्टि से पंगु बना देने की नीति अपनाई । वस्तुतः उसने इंग्लैण्ड के विरूद्ध आर्थिक युद्ध का सहारा लिया और इसी क्रम में उसने महाद्वीपीय व्यवस्था को अपनाया ।

ब्रिटेन की सरकार ने 16 मई 1806 को फ्रेंच कोस्ट की नाकेबन्दी की थी । उसी के जवाब में नेपोलियन ने 21 नवम्बर 1806 को ‘ बर्लिन डिक्री ‘ का ऐलान किया जिसके द्वारा ब्रिटेन के विरुद्ध बड़े पैमाने पर व्यापार – प्रतिबन्ध ( Embargo ) लगा दिये गये । इसका अन्त 11 अप्रैल 1814 को हुआ जब नेपोलियन ने पहली बार पदत्याग किया । –

इस प्रतिबन्ध से ब्रिटेन को कोई खास आर्थिक क्षति नहीं हुई । जब नेपोलियन को पता चला कि अधिकांश व्यापार स्पेन और रूस के रास्ते हो रहा है , तो उसने उन दोनों देशों पर आक्रमण कर दिया ।

महाद्वीपीय व्यवस्था के परिणाम : –

प्राप्ति में असफल , स्वयं नेपोलियन व यूरोप के लिए आत्मघाती साबित हुआ ,

अनावश्यक युद्ध – ब्रिटेन का माल पुर्तगाली समुद्र तटों से ही यूरोप में चोरी छिपे पहुँचाए जाते थे । पुर्तगाल पर नियंत्रण के लिए स्पेन के साथ एवं रूस के साथ युद्ध में उलझना |

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महाद्वीपीय व्यवस्था की असफलता के कारण : –

सक्षम नौसेना का अभाव – तस्करी एवं चोरी छिपे व्यापार को रोकने में असफल

यूरोप में वस्तुओं का संकट – फ्रांस के अल्पविकसित कारखाने , मांग की तुलना में काम आपूर्ति –

इंग्लैण्ड से व्यापार -इंग्लैण्ड में अन्न का अभाव था परन्तु नेपोलियन उसके धन को कम करने के लिए बराबर भारी मूल्य पर अन्न भेजता रहा । अन्य देशों ने इसे छल समझा ।

इंग्लैण्ड के विश्व भर में फैले उपनिवेश

नेपोलियन का पतन ( Fall of Napoleon ) ।

  • महाद्वीपीय व्यवस्था की असफलता –
  • स्पेन एवं पुर्तगाल के साथ संघर्ष – 1808 में पुर्तगाल को हराया , साथ ही स्पेन को हराकर वहाँ के शासक फर्डिनेण्ड को नजरबंद कर अपने भाई जोसेफ को राजा बनाया , स्पेन में राष्ट्रवाद की भावना का प्रसार , जनता द्वारा गुरिल्ला युद्ध , बेलन के युद्ध में पराजय , अन्य राष्ट्र भी विद्रोह को तैयार हो गए –
  • रूस पर आक्रमण – महाद्वीपीय व्यवस्था के उल्लंघन पर रूस पर आक्रमण , जार ने चतुराई पूर्वक अपनी सेना और रसद लेकर साइबेरिया में शरण ली , नेपोलियन मास्को में आत्मसमर्पण का इंतेजर करता रहा , इसी दौरान ठण्ड , महामारी और भूख से उसके 6 लाख में से 5 लाख सैनिकों की मृत्यु
  • यूरोपीय राष्ट्रों का संयुक्त मोर्चा – 1813 में लिप्जिग के युद्ध में प्रशा , आस्ट्रिया , इंग्लैण्ड , रूस और स्वीडन का नेपोलियन के विरुद्ध गठबंधन
  • निरंतर युद्ध – निरंतर युद्धों की श्रृंखला से यूरोप में उसने अपने शत्रुओं की सेना तैयार कर ली -|
  • राष्ट्रवाद का उत्थान – हालैण्ड , स्पेन और इटली को हराकर रिश्तेदारों को सत्ता , राष्ट्रवाद का उदय |
  • कमजोर नौसेना – इंग्लैण्ड को प्रत्यक्ष युद्ध में हराने या महाद्वीपीय व्यवस्था लागू करने में असफल |
  • क्तिगत दुर्बलताएं – मध्यवर्गीय कुंठा , मित्र बनाने में असफल , भय के कारण सही सलाह का अभाव .|
  • तुलना : क्रांति पूर्व फ्रांस vs क्रांतिकालीन फ्रांस vs नेपोलियन कालीन फ्रांस |
क्र. क्रांति से पूर्व ( प्राचीन फ्रांस ) क्रांतिकालीन फ्रांस ( नवीन फ्रांस         नेपोलियन कालीन फ्रांस
1निरंकुश शासन ( बूढे वंश ) – शक्ति का केन्द्रीकरण , राजा के दैवीय अधिकारवैधानिक शासन – शक्ति का पृथककरण , राष्ट्रवादनेपोलियन संहिता एकसमान कानून
 2सामाजिक असमानता – पादरी , कुलीन सामंत विशेषाधिकारयुक्त , चर्च का प्रभुत्वविशेषाधिकार का अंत , चर्च की संपत्ति का नियंत्रण , चर्च की सत्ता समाप्त  धर्मनिरपेक्ष राज्य की स्थापनापोप से सम्झौता – पादरियों, की नियुक्ति एवं वेतन राज्य एवं उन्हे दीक्षा पोप द्वारा
 3दोषयुक्त कर प्रणाली – केवल सामान्य वर्गकर सुधार , प्रत्यक्ष कर पर बलअप्रत्यक्ष करों पर बल
4   आर्थिक गतिविधियों पर राज्य का , नियंत्रण , अकुशल वित्तीय संस्थाएंमुक्त अर्थव्यवस्था की अवधारणा पर बलराष्ट्रीय बैंक का गठन महाद्वीपीय व्यवस्था , सैन्य व्यय विजित देशों पर

 

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औद्योगिक क्रांति

औद्योगिक क्रांति

औद्योगिक क्रांति ( Industrial Revolution )

अट्ठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध तथा उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में कुछ पश्चिमी देशों के तकनीकी , सामाजिक , आर्थिक एवं सांस्कृतिक स्थिति में काफी बड़ा बदलाव आया । इसे ही औद्योगिक क्रांति ( Industrial Revolution ) के नाम से जाना जाता है । यह सिलसिला ब्रिटेन से आरम्भ होकर पूरे विश्व में फैल गया ।

” औद्योगिक क्रांति ” शब्द का इस संदर्भ में उपयोग सबसे पहले आरनोल्ड टायनबी ने अपनी पुस्तक ” लेक्चर्स ऑन दि इंस्ट्रियल रिवोल्यूशन इन इंग्लैंड ” में सन् 1844 में किया ।

शक्तिचालित मशीनों द्वारा उत्पादन : विशेषकर वस्त्र उद्योग में और उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई |

कारखाना प्रणाली का विकास : श्रम विभाजन , विशेषीकरण बढ़ा

लोहा बनाने की तकनीकों का विकास : धातु के औजार , दूसरे उद्योगों के लिए मशीनों का निर्माण भी सुरु होने लगा |

ऊर्जा के नए स्त्रोत : शोधित कोयले , पेट्रोलियम , गैस का अधिकाधिक उपयोग ब्यापक तौर पर इस्तमाल होने लगे  |

राजनैतिक – सामाजिक – सांस्कृतिक सम्बन्धों में परिवर्तन : रहन – सहन , आचार – विचार , मनोरंजन के साधन , साहित्यों की विषयवस्तु आदि में व्यापक परिवर्तन तजी से हुआ |

 

औद्योगिक क्रांति के कारण ( Causes of IR ) –

 

पुनर्जागरण एवं प्रबोधन : लौकिक जीवन एवं मानवतावाद को महत्व दिया गया , धर्म / चर्च का विरोध , तर्क का आविर्भाव , वैज्ञानिक दृष्टिकोण , आविष्कार हुए |

व्यावसायिक क्रांति / उपनिवेशवाद : पुनर्जागरण , भौगोलिक खोजों को महत्व , अमेरिका एवं एशिया के अनेक देशों में उपनिवेश , भारी मात्रा में पूंजी संग्रहण , औद्योगीकरण में उपयोग सुरु हो गए |

जनसंख्या वृद्धि : यूरोप की जनसंख्या में तेजी से वृद्धि हुई  तो मांग में भी वृद्धि हुई और औद्योगीकरण की आवश्यकता हुई |

राष्ट्रवाद : वैज्ञानिक तकनीकी विकास एवं औद्योगिक विकास को राष्ट्र का गौरव माना जाने लगा |

मध्यवर्ग एवं लोकतन्त्र का उदय : फ्रांसीसी क्रांति , मध्यवर्ग का उदय , आर्थिक विकास पर बल मिला |

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 कारखाना प्रणाली का विकास : औद्योगीकरण पूर्व श्रमिकों के घरों में निर्माण , परिवहन लागत अधिक , एक ही स्थान पर रखकर उत्पादन प्रारम्भ एवं  कारखाना प्रणाली सुरुआत हुई |

 

औद्योगिक क्रांति सर्वप्रथम इंग्लैण्ड में ही क्यों हुई ? ( Why only in Ingland ? )

 

अनुकूल भौगोलिक सामरिक स्थिति : चारों ओर से समुद्र से घिरा होने के कारण  , सशक्त नौसेना का विकास हुआ, अनेक वैश्विक उपनिवेश की प्राप्ति हुई |

अनुकूल जलवायु : समुद्र तटीय, नम जलवायु , धागे कम टूटते थे , वस्त्र उद्योग के लिए अनुकूल मौसम थी |

स्थलीय सीमा का अभाव : अन्य यूरोपीय देशों से स्थलीय सीमा से सीधे नहीं जुड़ा , अनावश्यक सीमा विवाद से मुक्त रहा |

कोयला एवं लौह अयस्क की खदानें : प्रचुर मात्रा में कोयला एवं लौह अयस्क , लोहा गलाने की प्रक्रिया का विकास , मशीनीकरण , रेल आदि का निर्माण एवं औद्योगीकरण का प्रसार हुआ |

अनुकूल राजनैतिक दशा : सम्पूर्ण यूरोप में दैवीय अधिकारों वाले राजतंत्रीय शासन प्रणाली अस्तित्व में थी परंतु इंग्लैण्ड में गौरवपूर्ण क्रांति 1688 के पश्चात संसदीय शासन प्रणाली स्थापित की गई थी , उदार एवं लोकतंत्रात्मक शासन प्रणाली , पादरी / कुलीन / सामंत से मध्यवर्ग की सुरक्षा , मध्यवर्ग का विकास , औद्योगीकरण की सुरुआत हुई |

कृषि क्रांति 17 वीं सदी : बड़े – बड़े कृषि फॉर्म , वैज्ञानिक पद्धति , फसल चक्रण , रासायनिक खादों का अनुप्रयोग , कृषि उत्पाद में वृद्धि , सशक्त भू – स्वामी वर्ग का उदय , अतिरिक्त पूजी का उद्योगों में निवेश हुए |

 

औद्योगिक क्रांति में हुए अविष्कार

 

वस्त्र उद्योग – सूत कातने की मशीन – स्पिनिंग जेनि ( जेम्स हारग्रीब्ज़ ) , कपड़ा बुनने की मशीन – फ्लाइंग शटल ( John Kay 1733 ) , जल ऊर्जा चालित सूट कातने की मशीन – वाटरफ्रेम ( रिचर्ड आर्कराइट ) , स्पिनिंग म्यूल ( सेम्युनल क्रांपटन ) , पावरलूम ( एडवर्ड आर्कराइट ) , रंगाई हेतु रासायनिक रंगों की खोज , क्लोरीन ( शीले ) की खोज होने से लोगो के जीवन में बदलाव हुआ |

, अन्य – टेलीग्राफ ( सैमुएल मोर्स ) , आधुनिक भाप के इंजन ( जेम्स वाट ) , कंक्रीट की सड़क निर्माण की पद्धति ( मैकेडम ) , सेफ्टी लैम्प ( हंफी डेवी ) से कोयले के उत्पादन में वृद्धि , वाष्प इंजन ( वाष्प शक्ति ) आदि का आविष्कार हुआ |

औपनिवेशिक साम्राज्य की उपलब्धता : सम्पूर्ण विश्व में उपनिवेश , कच्चे माल के आपूर्तिकर्ता एवं निर्मित माल के लिए बाजार बने

 

औद्योगिक क्रांति के परिणाम ( Effect of IR )

 

आर्थिक परिणाम :

– उत्पादन में असाधारण वृद्धि ,कुटीर उद्योगों का विनाश होने लगा था |

शहरीकरण : कुटीर उद्योगों का पतन – बेरोजगारी बढ़ी – शहरों की ओर पलायन

आर्थिक असंतुलन : विकसित और पिछड़े देशों के मध्य आर्थिक असमानता की खाई खरी हुई |

शेयर बाजार , बैकिंग एवं मुद्रा प्रणाली का विकास : पूंजी निवेश का एकत्रीकरण , कागजी मुद्रा प्रचलन बढ़ा |

मुक्त व्यापार : अहस्तक्षेप की नीति ( एडम स्मिथ – द वेल्थ ऑफ नेशंस ) द्वारा अपनाई गई |

यातायात एवं परिवहन : रेल , हवाई जहाज आदि का विकास तेजी से सुरु होने लगा |

नकारात्मक प्रभाव : कुटीर उद्योगों का पतन , सामाजिक – आर्थिक विषमता , औद्योगिक अपराध , एक देश की अर्थव्यवस्था के प्रतिकूल प्रभावों का अन्य देशों तक संचार होने लगा |

राजनैतिक परिणाम : –

संविधानवाद एवं लोकतन्त्र : आर्थिक मध्यवर्ग का उदय , उदार , संवैधानिक एवं लोकतात्रिक सरकारों को महत्व दिया गया

श्रमिक आंदोलन / राजनीति : श्रमिक संगठनों का गठन , लेबर पार्टी आदि का गठन हुआ | राजनीतिक पार्टिया का उदय होने लगी |

कल्याणकारी राज्य की अवधारणा : तीव्र शहरीकरण – यातायात , पेयजल , सड़कें , कानून व्यवस्था , शिक्षा , श्रम सुधार कानून , महिलाओं / बच्चों / वृद्धों के अधिकारों की रक्षा आदि दायित्व बनाया गया |

प्रतिस्पर्धावादी उपनिवेशवाद : कच्चे माल के आपूर्ति एवं निर्मित माल के बाजार हेतु नए उपनिवेश पर नियंत्रण हेतु संघर्ष हुए , विश्वयुद्ध का आधार बना |

शीतयुद्ध : पूंजीवाद एवं समाजवाद जैसे दो प्रमुख आर्थिक विचारधारात्मक गुटों का निर्माण हुआ |

सामाजिक सांस्कृतिक परिणाम : –

तीव्र जनसंख्या वृद्धि : अधिक उत्पादन , जीवन रक्षक दवाओं का आविष्कार , मृत्युदर में गिरावट आई |

महिलाओं की गतिशीलता : प्रतिस्पर्धा एवं श्रमिकों की आवश्यकता , महिलाओं को प्रवेश , कार्यक्षेत्र में परिवर्तन , जागरूकता बढ़ी , महिला अधिकारों के मुद्दे , मताधिकार आदि मुद्दे बढ़ने लगे |

शिक्षा के क्षेत्र में  : नए विषयों जैसे प्रबंधन , समाजशास्त्र आदि का विकास हुआ |

 मनोरंजन के नवीन साधन : सिनेमा आदि का विकास तेजी से सुरु होने लगा |

सामाजिक – सांस्कृतिक आदान प्रदान ( राष्ट्रवाद का उदय ) : रेलवे आदि के विकास से लोगों की आवाजाही बढ़ी , नवीन सामाजिक सांस्कृतिक मूल्यों से परिचय , राष्ट्रवाद का प्रसार होने लगा |

साहित्य की विषयवस्तु में परिवर्तन : राजवंशीय लेखन का अंत , मानव जीवन पर केन्द्रित साबित होने लगा |

पारिवारिक संरचना : एकल परिवार का प्रचालन बढ़ा , संयुक्त परिवार टूटे , संपत्ति का विभाजन होने लगा |

नकारात्मक परिणाम : बाल श्रम , मलीन बस्ती , नशाखोरी , अपराध , महिलाओं के विरुद्ध हिंसा , नैतिक मूल्यों का पतन , प्रदूषण की समस्या आदि उत्पन होने लगी |

वैचारिक परिणाम :

मुक्त व्यापार , अहस्तक्षेप की नीति ( एडम स्मिथ ) गलत साबित हुआ |

पूंजीवाद एवं समाजवाद की अवधारणा : निजी संपत्ति की अवधारणा , पूंजीपति ( शोषक ) श्रमिक ( शोषित ) दो नए वर्ग , वर्ग संघर्ष ( कार्ल मार्क्स )

नारीवादी विचारधारा एवं आंदोलनों का विकास ,पर्यावरण संरक्षण संबन्धित विचारधारा / आंदोलन प्रव्हुत्व बढ़ा |

 

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