जनगणना 2021 कब शुरू होगी

आप लोग पूछ रहे थे की ( जनगणना 2021 कब शुरू होगी ) इसके बारे में बताइये तो हम आज आपके लिए जनगणना 2021 के बारे में पूरी बिस्तार से बतायेगे | साथ ही जानेंगे जनगणना के इतिहास के बारे में . तो आप आर्टिकल को पूरा पढ़े |

भारत की जनगणना 2021  से जूरी महत्वपूर्ण जानकारिया

एक देश के नागरिकों के सही जनसंख्या का पता होना जरूरी है | सामाजिक आर्थिक जानकारी के सही आंकड़ों के बदौलत कमजोर से कमजोर व्यक्ति तक पहुंचा जा सकता है और हर तबके के लिए सही नीति बनाई जा सकती है  |यह प्रक्रिया हर 10 साल में एक बार की जाती है, वक्त के साथ जनगणना में तेजी के साथ बदला हुआ है|

भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश में जनगणना की इतनी विस्तृत प्रक्रिया अपने आप में एक अद्भुत संरचना है  |देश में फिर से एक बार जनगणना शुरू होने वाला है |

जनगणना 2021 की प्रक्रिया अप्रैल महीने से शुरू होने जा रही है देश की सोलहवी जनगणना प्रक्रिया में लाखों कर्मी शामिल होने जा रहे हैं और इसमें ना सिर्फ परिवारों की संख्या गीनी जानी है बल्कि इसमें मकान की स्थिति से लेकर पानी ,टीवी ,बिजली ,शौचालय और मोबाइल, इंटरनेट जैसी तमाम जानकारियों को संग्रहित किया जाना है |

2021 के लिए जनगणना का काम शुरू हो चुका है और 1 अप्रैल से यह काम घरों की सूची बनाने के साथ शुरू हो जाएगा | इस दौरान जनगणना कर्मी आपके घर आएंगे और सारी जानकारी मांगेंगे जनगणना के लिए कौन से सवाल पूछे जाएंगे इसके लिए 31 सवालों की सूची तैयार की गई है |

जनगणना 2021 कब शुरू होगी

भारत की जनगणना प्रक्रिया दुनिया की सबसे बड़ी जनसंख्या जनगणना प्रक्रिया है | देश में जनगणना का काम हर 10 साल बाद होता है जनगणना 2021 की तैयारियां शुरू हो चुकी है |

जनगणना का यह काम दो चरणों में किया जाएगा पहले चरण के तहत अप्रैल 2020  से प्रत्येक घर और उसमें रहने वाले व्यक्तियों की सूची बनाई जाएगी | असम को छोड़कर देश के अन्य हिस्सों में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर एनपीआर  ( NPR ) को अपडेट करने का काम भी  साथ किया जाएगा |

जबकि दूसरे चरण में 9 फरवरी से 28 फरवरी 2021 तक पूरी जनसंख्या गनना का काम होगा | देश की पूरी आबादी जनगणना प्रक्रिया के दायरे में आएंगे जबकि( NPR ) के अपडेट में असम को छोड़कर बाकी आबादी को शामिल किया जाएगा |

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 24 दिसंबर को भारत की जनगणना 2021 की प्रक्रिया शुरू करने और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को अपडेट करने की मंजूरी दी थी जनगणना प्रक्रिया पर 8754 करोड़ रुपए और एनपीआर अपडेट पर 3941 करोड़ रुपए खर्च होंगे |

जनगणना के लिए कुल 31 सवाल आपसे पूछे जाएंगे

  • बिल्डिंग नंबर
  • सेंसंस हाउस नंबर
  • मकान की छत  दीवार और सीलिंग में मुख्य रूप से इस्तेमाल हुआ मैट्रियल
  • मकान का इस्तेमाल किस मकसद से हो रहा है
  • मकान का स्थिति मकान का नंबर
  • घरों में रहने वाले लोगों की संख्या
  • घर के मुखिया का नाम
  • मुखिया की लिंग की भी जानकारी देनी होगी
  • क्या घर के मुखिया एससी एसटी या अन्य समुदाय से ताल्लुक रखते हैं
  • मकान का ओनरशिप स्टेटस
  • मकान में मौजूद कमरे
  • घर में कितने शादीशुदा जोड़े जाते हैं
  • पीने का पानी का मुख्य स्रोत
  • घर में पानी के स्रोत की उपलब्धता
  • बिजली का मुख्य स्रोत
  • शौचालय है या नहीं
  • किस प्रकार के शौचालय हैं
  • ड्रेनेज सिस्टम या वॉशरूम है या नहीं
  • रसोई घर है या नहीं
  • इसमें एलपीजी/ पीएनजी कनेक्शन है या नहीं
  • रसोई के लिए इस्तेमाल होने वाला इंधन की भी जानकारी देनी होगी
  • रेडियो ट्रांजिस्टर टेलीविजन इंटरनेट की सुविधा है या नहीं
  • लैपटॉप, कंप्यूटर  ,टेलीफोन ,मोबाइल फोन या स्मार्टफोन है या नहीं
  • साइकिल ,स्कूटर, मोटरसाइकिल ,कार, जीप, वैन की भी जानकारी देनी होगी
  • घर में किस अनाज का मुख्य रूप से उपभोग होता है इसके बारे में भी बताना होगा
  • जनगणना संबंधित संपर्क करने के लिए मोबाइल नंबर भी देना होगा
  • आपको बता दें कि जनगणना के दौरान आपके बैंक खातों की जानकारी नहीं मांगी जाएगी

इस बार जनगणना का काम पेपर और पेन के बजाय मोबाइल फोन पर एप्लीकेशन के द्वारा किया जाएगा|  राष्ट्रीय महत्व के इस बड़े काम को पूरा करने के लिए 3000000 कर्मियों को देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा जाएगा  | जनगणना 2011 के दौरान ऐसी कर्मियों की संख्या 28 लाख थी |

 

  जनगणना 2021 की खासियत

जनगणना किसी भी देश के भविष्य के विकास के योजना बनाने का आधार होती है | 2021 की जनगणना देश की सोलवीं और आजाद भारत की आठवीं जनगणना होगी | 1872 में शुरू हुई जनगणना प्रक्रिया समय के साथ कई बदलाव हुए और नई पद्धति का इस्तेमाल हुआ  |

जनगणना 2021 कब शुरू होगी
                                                            जनगणना 2021 कब शुरू होगी

आज जनगणना प्रक्रिया पेन और कागज से निकलकर डिजिटल स्तर तक पहुंच गई है  | 2021 की जनगणना कागज रहित होगी और आबादी का आंकड़ों का संग्रह वर्गीकरण की पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी | इस प्रक्रिया में मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा इस ऐप के जरिए 16 भाषाओं में जानकारी दी जा सकती है जिसका सत्यापन किया जाएगा |

 

जनगणना 2021की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कई  नई पहल की गई है

  •   पहली बार आंकड़ों के संकलन के लिए मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा
  • जनगणना निगरानी और प्रबंधन पोर्टल की व्यवस्था की गई है
  • ताकि जनसंख्या गणना की गुणवत्ता और प्रक्रिया जल्द सुनिश्चित हो सके
  • आम लोगों को जनसंख्या के आंकड़े उपलब्ध कराने के लिए ऑनलाइन सुविधा दी जाएगी
  • कोड डायरेक्टरी की व्यवस्था की जाएगी
  • जनगणना के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मियों को गुणवत्ता परक प्रशिक्षण दिया जाएगा
  • आंकड़ों को गांव और वार्ड के साथ भी साझा किया जाएगा

 

जनगणना का इतिहास और इसके महत्व

जनगणना जनसंख्या की खासियत से जुड़ी सांख्यिकी जानकारी का एकमात्र जरिया है | भारत में पहली बार जनगणना 1872 में लॉर्ड मेयो के कार्यकाल में हुई थी |

युद्ध महामारियो ,प्राकृतिक आपदाओं और राजनीतिक उथल-पुथल जैसे प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद भी जनगणना कराने की परंपरा को जारी रखा गया, जो अपने आप में एक उपलब्धि है | दुनिया में बहुत कम देश ऐसे हैं जो ऐसी शानदार परंपरा पर गौरवान्वित महसूस कर सकते हैं |

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भारत में जनगणना के लिए पहली बार 1881 में एक अलग विभाग बनाया गया और सेंसस कमिश्नर को जिम्मेदारी सौंपी गई  भारत में सेंसस कमिश्नर का पद 1941 तक रहा  | इसके बाद 1949 में इसका नाम बदलकर रजिस्ट्रार जनरल एंड सेंसस कमिश्नर कर दिया गया |

मई 1949 में भारत सरकार ने इसे गृह मंत्रालय के अधीन कर दिया तब से या विभाग हर 10 साल पर जनगणना कराता है|  1872 में हुई जनगणना को शामिल करते हुए अब तक भारत में 15 जनगणना हो चुकी है

सामाजिक आर्थिक और दूसरी सामाजिक परिपेक्ष के जनगणना में नए आयाम जुड़ जाते हैं | आजादी के बाद 2011 में सातवीं जनगणना हुई जिसमें पहली बार जाति के आधार पर गिनती हुई |

 

जनगणना 2011 का रिपोर्ट

आजादी के पहले से गिने तो 2011 की जनगणना 15 ह्वी थी | 15वीं जनगणना का काम 1 मई 2010 को शुरू हुआ | इसे दो चरणों में पूरा किया गया इसमें 27 लाख से ज्यादा अधिकारियों द्वारा 700000 नगरों कस्बों और छह लाख से ज्यादा गांव मैं घर -घर जाकर पूरा किया गया | इसके तहत लिंग, धर्म, शिक्षा स्तर व्यवसाय आदि के आंकड़ों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया |

2011 की जनगणना में तीन तरह की प्रश्नावली थी मकान सूचीकरण ,राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर और परिवार इकाइयां जैसे तीन हिस्से थे 30 अप्रैल 2013 को अंतिम आंकड़े जारी किए गए |

1872 के बाद से हर जनगणना में धर्म और भाषा के सवाल पूछे गए लेकिन आजादी मिलने के बाद से जाति का सवाल पूछना बंद हो गया था  |

इसकी वजह यह बताई गई की आजादी के बाद बनी सरकार की कल्पना यह थी कि भारत एक आधुनिक लोकतंत्र बन चुका है और जाति जैसी आदिम पहचान के आधार पर लोगों की गिनती करना उचित नहीं है | सरकार का यह भी मानना था जाति की गिनती नहीं होने से जाति और जातिवाद खत्म हो जाएगा  |

1941 में जाति गिनी गई लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के कारण आकड़े संकलित नहीं हो पाए आजादी के बाद 1951 से लेकर 2011 तक की जनगणना में जाति नहीं कि नहीं गई |

भारत की जनसंख्या में सर्वाधिक वृद्धि 1961 से लेकर 1971 के बीच 24. 80 फीसदी हुई थी

जबकि 2011 की जनसंख्या आंकड़ों के मुताबिक भारत की कुल जनसंख्या एक अरब 21 करोड़ थी |

भारत की जनसंख्या में 2001 से लेकर 2011 के दौरान 18.18 करोड़ की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि विश्व की पांचवी सबसे बड़ी  जनसंख्या वाले देश ब्राजील की जनसंख्या से थोड़ी ही कम है |

जनगणना के अनुसार सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश है जबकि सबसे कम जनसंख्या वाला राज्य सिक्किम है |

भारत की जनसंख्या अगर सबसे बड़ी चुनौती है तो सबसे बड़ी ताकत भी ऐसे में अगर इस जनसंख्या की सामाजिक आर्थिक राजनीतिक और सांस्कृतिक स्थिति से जुड़ी सटीक जानकारी मिल जाए तो यह नीति बनाने में काफी मददगार साबित होंगे |

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दोस्तों उम्मीद करता हु की आप जनगणना 2021 कब शुरू होगी के बारे में बिस्तार से जाने होंगे अगर यह आर्टिकल पसंद आया हो तो आप हमें कमेंट जरुर करे : धन्यवाद

 

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