घड़ी का आविष्कार किसने, कब, और किस देश में किया था |

क्या आपको मालूम है कि घड़ी का आविष्कार किसने किया अगर नहीं तो आज आपको हम बताएंगे की घड़ी क्या है ,घड़ी का आविष्कार किसने किया था, और घड़ी के इतिहास के बारे में बिस्तार से जानेंगे आपको इस आर्टिकल को पूरा पढ़ना है :

यह हम भली भांति जानते हैं पर क्या कभी हमने घड़ियों के इतिहास के बारे में जानने की कोशिश की है | अगर नहीं तो चलिए आज हम घर के इतिहास के बारे में जानते हैं :

आज की दुनिया में हम हम सब लोग घड़ी की सुइयों के नोक पर दौड़ते हैं अर्थात सभी लोग समय के हिसाब से जागते हैं | सोते हैं और लंच करते हैं | ऐसे में सवाल उठता है कि उस समय के लोग अपने दिनचर्या के को कैसे चलाते होंगे, घड़ी नहीं हुआ करती थी जब घड़ी का आविष्कार नहीं हुआ था |

तब लोग सूर्य की दिशा को ही देखकर समय का अंदाजा लगा लेते थे जब आकाश में बादल होने की स्थिति में समय का पता नहीं लगा ले लगा पाते थे तब लोगों ने जल घड़ी का आविष्कार किया जिसका श्रेय चीन को जाता है |

घड़ी क्या है ? ( ghadi kya hai )

घड़ी एक ऐसा यंत्र है जो संपूर्ण स्वचालित द्वारा किसी न किसी रूप में वर्तमान समय को प्रदर्शित करता है | घड़ियों के कई सिद्धांतों को जोड़कर बनाया जाता है | जैसे : धूप घड़ी ,इलेक्ट्रॉनिक घड़ी ,यांत्रिक घड़ी

 घड़ी का आविष्कार किसने किया ( ghadi ka avishkar kisne kiya )

वर्तमान समय में इस्तेमाल की जाने वाली घड़ी का आविष्कार एक बार में नहीं हुआ है, किसी ने पहले घंटे वाली घड़ी का सुई बनाई तो किसी ने मिनट वाली सुई बनाई | इसी प्रकार विश्व में घड़ी का विकास कई चरणों में हुआ है | जब घड़ी का आविष्कार नहीं हुआ था तब लोग सूरज की रोशनी और पानी के उतार-चढ़ाव के आधार पर ही समय का पता लगा लेते थे ,

घड़ी का आविष्कार किसने, कब, और किस देश में किया था |
सिल्वेस्टर द्वितिय

सबसे पहले महान पॉप्स सिल्वेस्टर द्वितिय  ने पहली घड़ी 996 ईसवी में बनाई थी | तब घड़ी उतनी प्रसिद्ध नहीं हुई थी | वास्तव में घड़ी का जन्म 13वीं शताब्दी में हुआ ,क्योंकि यूरोप में 13वीं शताब्दी में घड़ी शुरू हो गई थी |

सन 1300 ई में  हेनरी द विक ने पहिया और चक्र वाली पहले घड़ी बनाई थी उसके बाद छोटे-मोटे अविष्कार होते गए और सन 17 सौ अभी तक मिनट और सेकंड की सुईया तथा घंटा लगा दिए गए थ |

हालांकि घड़ी का आविष्कारक क्रिश्चयान हुुजेंस ( Christiaan Huygens ) है जिसे बताया जाता है की उन्होंने 1656 ईस्वी में पेंडुलम वाली घड़ी का आविष्कार किया था | हालांकि महान वैज्ञानिक गैलीलियो ने उनसे पहले ही 17 वी शताब्दी में ही हिलने वाली घड़ी का आविष्कार कर दिया था | पर दुनिया Christiaan Huygens को हि अविष्कारक मानती है ।

आधुनिक घड़ी का आविष्कार किसने किया

घड़ी की मिनट वाली सुई का आविष्कार स्विट्जरलैंड के जाँस वर्गी ने 1577 ईस्वी में एक खगोल शास्त्री मित्र के लिए किया था ।

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आज की तरह इस्तेमाल होने वाली घड़ी का आविष्कार जर्मनी के खगोल शास्त्री पीटर हेलमन ने ऐसे घड़ी बना ली थी | जो शायद काफी छोटी थी और इसे कही भी आसानी से अपने पास रखकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता था ।

जिस तरह हम घड़ी पहनते हैं वैसे घड़ी पहनने वाले प्रथम व्यक्ति जाने-माने फ्रांसीसी गणितज्ञ और दार्शनिक ब्लेज पास्कल थे | यह वही पास्कल हैं, जिन्हें कैलकुलेटर का आविष्कारक भी माना जाता है |

पेंडुलम घड़ी के आविष्कारक कौन थे

घड़ी का आविष्कार किसने, कब, और किस देश में किया था |
पेंडुलम घड़ी के चित्र

पेंडुलम घड़ी का आविष्कारक क्रिश्चियन हाइजेंस ने 1656 ईस्वी में किया था |

इलेक्ट्रॉनिक घड़ी का आविष्कार किसने किया ?

इलेक्ट्रॉनिक घड़ी को सबसे पहले एलेकजेंडर  बेन ( Alexander Bain ) ने स्कूटी क्लॉक के नाम से बनाए थे |

सबसे पहले घड़ी का समय कैसे मिलाया गया |

दुनिया की पहली घड़ी बनी थी तब उन्होंने टाइम कैसे मिलाया होगा इस दुनिया की पहली घड़ी क्रिश्चयान हुुजेंस ने बनाई थी पर घड़ी बनाने से पहले ही लोगों को समय का कांसेप्ट पता था और लोग टाइम का पता लगा सकते थे |

पुराने ज़माने में लोग समय का पता कैसे लगते थे |

जब घड़ी नहीं थी तो पुराने लोग धूप के छांव से समय का पता लगाते थे क्योंकि सुबह और शाम की धूप से शैडो लंबी बनती है और दोपहर में ज्यादा लंबी नहीं बनती है और दीवार पर परी धूप की छांव से समय का पता लगाया जाता था क्योंकि परछाइयों में होने वाले बदलाव से अंदाजा लगा लेते थे | कि अब टाइम कितना हुआ है |

फिर कुछ समय बाद चाइना में पानी की घड़ी बनाई गई इसमें दो बर्तनों को उपयोग में लेते थे | एक में पानी भर देते थे फिर उसके नीचे छेद करके दूसरा बर्तन उसके नीचे रखते थे और जिस बर्तन से पानी गिरता था | उस पर गिनती लिख देते थे तब जितने गिनती तक पानी खत्म होता वही समय होता था फिर रेत वाली घड़ी बनाई गई |

भारत में समय देखने के लिए किए गए प्रयास

भारत में समय देखने के लिए 5 जगहों पर जंतर मंतर का निर्माण कराया गया था ताकि इनके मदद से सूरज की दिशा और उस से बनी परछाइयों की मदद से समय का पता लगाया जा सके |

18 वीं शताब्दी के शुरुआत में जयपुर के महाराजा जयसिंह ने जयपुर नई दिल्ली उज्जैन मथुरा और वाराणसी में कुल 5 जंतर मंतर का निर्माण कराया था | जिससे लोग समय का पता आसानी से लगा लेते थे |

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 निष्कर्ष

ऊपर लिखे सभी बातों से यह स्पष्ट हो जाता है कि घड़ी का आविष्कार मानव इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना है | जिसने पूरी मानव जाति के जीवन को ही बदल दिया और अब हम इस घड़ी पर इतनी निर्भर हो गए की अगर एक दिन आपको समय का पता ना चले तो जीना मुश्किल हो जाएगा | इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद समय पर आपकी क्या राय है आप हमें कॉमेंट बॉक्स में जरूर बताएं : धन्यवाद |

 

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