Information of technology in Hindi | नैनो टेक्नोलॉजी

Information of technology in Hindi: बीते दिनों SRM इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने छठी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस और नैनोसाइंस एंड नैनो टेक्नोलॉजी आयोजित की थी | इससे कई विदेशी यूनिवर्सिटी सहित भारत के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च इंडियन, फिजिक्स रिसर्च एसोसिएशन और इंडियन कार्बन सोसायटी के सहयोग से आयोजित किया गया था|

इसका मकसद अकैडमी उद्योग और वैज्ञानिकों को इस क्षेत्र पर अध्ययन के लिए एक कॉमन प्लेटफॉर्म मुहैया कराना था | नैनो टेक्नोलॉजी कृषि से लेकर स्वास्थ्य ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे हर क्षेत्र में उपयोगी है |इसे 21वी सदी की मुख्य प्रौद्योगिकी कहा जा रहा है |

नैनो टेक्नोलॉजी क्या हैं

नैनो फिजिक्स को ग्रीक भाषा में ड्वर्फ या बेहद छोटे के अर्थ मे प्रयोग किया जाता हैं । इसी फिजिक्स का प्रयोग करके नैनो टेक्नोलॉजी ,नैनो साइंस और नैनो इंजीनियरिंग जैसे शब्द बने हैं|

सरल शब्दों में कहें तो नैनो टेक्नोलॉजी एक ऐसी तकनीक है, जिसमें पदार्थों में अनु और परमाणु के अस्तर पर बदलाव किया जाता है | इससे इनके मूलभूत गुणों में अंतर आता है|

अणु और परमाणुओ के डायमेंशन नैनोमीटर में होती है|  इसीलिए इसे नैनो तकनीक और इससे बनने वाले उत्पादों को नैनो मैटेरियल्स यानी नैनो उत्पाद का जाता है |

 नैनो साइंस, नैनो टेक्नोलॉजी, नैनो इंजीनियरिंग के अंतर

  • नैनो साइंस में 1 से 100 नैनोमीटर की स्केल पर संरचनाओं और मॉलिक्यूल का अध्ययन किया जाता है|
  • नैनो इंजीनियरिंग में इन गुणों के प्रभावी उपयोग पर फोकस किया जाता है|
  • नैनो टेक्नोलॉजी की बात करें तो साल 1959 में अमेरिकी भौतिक विज्ञानी  रिचार्ज फिनमैन ने इसकी अवधारणा पेश की,

तकरीबन 15 साल बाद जब जापान के वैज्ञानिक नौडियो तानी गुची ने नैनो टेक्नोलॉजी शब्द का पहली बार प्रयोग किया और इसे परिभाषित किया तानी कूची के मुताबिक एक नैनो टेक्नोलॉजी में मॉलिक्यूल या एक एटम से बने पदार्थ का अलग होना या उनका एक साथ आना और इन में बिखराव की प्रक्रिया शामिल होती है |

भारत में टेक्नोलॉजी के पिता प्रोफेसर सीएनआर राव को माना जाता है |Information of technology in Hindi

इसमें नैनोस्केल के 1 से 100 नैनोमीटर पर काम किया जाता है . एक नैनोमीटर  दस के पवार -9  मीटर के बराबर होता है |यानी एक नैनोमीटर मीटर के 1 बिलियन वे हिस्से के बराबर होता है |इस तकनीक के जरिए बनाए गए उत्पाद आकार में छोटे और हल्के होते हैं.

नैनो टेक्नोलॉजी के प्रकार 

माध्यम के आधार पर  नैनो तकनीक को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है

  1.   ड्राई नैनो टेक्नोलॉजी इसके तहत कोयला सिलिकॉन अकार्बनिक पदार्थ धातु अर्धचालको आदि मैं नैनो संरचना का निर्माण किया जाता है
  2.   वेट टेक्नोलॉजी जोकि जेनेटिक मैटेरियल मेंब्रेन एंजाइम्स और कोशिकीय घटकों से संबंधित है

नैनो टेक्नोलॉजी में उत्पादों के निर्माण के लिए दो अप्रोच अपनाई जाती है

  • टॉप डाउन अप्रोच
  • बॉटम अप अप्रोच

इन दोनों अप्रोच में गुणवत्ता गति और लागत का फर्क है |

  • टॉप डाउन अप्रोच  :  टॉप डाउन अप्रोच में एक भारी पदार्थ को तोड़कर नैनो आकार के कणो में तब्दील किया जाता है | इस प्रक्रिया में प्रीसीजन इंजीनियरिंग और लिथोग्राफी जैसे तकनीकों का प्रयोग किया जाता है |
  • बॉटम अप अप्रोच  :  बॉटम अप अप्रोच में नैनो संरचना का विकास भौतिक और रासायनिक तरीकों से नैनोस्केल में एक से 100 नैनोमीटर के रेंज पर किया जाता है |

इन दोनों अप्रोचेज को आसान शब्दों में समझे तो टॉप डाउन में बड़े आकार वाले पदार्थ को नैनो आकार में लाकर निर्माण किया जाता है |

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जबकि बॉटम अप अप्रोच में परमाणु या अनु के स्तर पर निर्माण किया जाता है  | बॉटम अप प्रक्रिया के चलते इसमें कचरा कम उत्पन्न होता है इन अप्रोचेज से विभिन्न तरह के नैनो उत्पादों का निर्माण किया जाता है |

नैनो टेक्नोलॉजी का अनुप्रयोग

Information of technology in Hindi
                                               source: pixabay

Information of technology in Hindi का अनुप्रयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि ,स्वास्थ्य और ऊर्जा के हर क्षेत्र  देखने को मिलते हैं | कृषि क्षेत्र में नैनो तकनीक के अनुप्रयोग की बात करें तो नैनो फर्टिलाइजर, क्वांटम डॉट और नैनो पेस्टिसाइड्स आदि प्रमुख है | नैनोफर्टिलाइजर्स की NUE यानी पोषक तत्व क्षमता उपयोग परंपरिक उर्वरकों की तुलना में अधिक है . यह पोषक तत्व  को फसल में धीरे-धीरे रिलीज करते हैं इससे भोम जल में उर्वरकों की लीचिंग यानी निक्षालन में भी कमी आती है |

  • क्वांटम डॉट्स के जरिए पौधों की क्रिया विज्ञान संबंधी जानकारी प्राप्त होती है |
  • नैनो मैग्नेट का प्रयोग मिट्टी में शामिल प्रदूषक पदार्थों की पहचान के लिए किया जाता है |
  • इंटीग्रेटेड सर्किट में लगाने वाले ट्रांजिस्टर का आकार को कम करने से छोटे इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का निर्माण संभव हुआ है ।
  • इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में डिस्प्ले बेहतर होने से स्क्रीन से होने वाली ऊर्जा का खपत इसके वजन और मोटाई में कमी आई है |
  • नैनो तकनीक का उत्पाद सीएनटी यानी कार्बन नैनो ट्यूब्स क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण साबित हुआ है |
  • सीएनटी ( CNT ) मानव की जानकारी में सबसे अधिक कठोर पदार्थों में से एक है इनके संरचनागत और वैद्युत गुण इन्हें बहुत सारे एप्लीकेशन के लिए उपयोगी बनाते हैं |

यह सिलेंडर के आकार के होते हैं जोकि कार्बन एटम के हेक्सागोनल अरेंजमेंट से बने होते हैं. इन्हें ग्राफीन के घुमावदार सीट्स के जरिए बनाया जा सकता है . एक सीट को रोल करके बनाए जाने पर सिंगल वर्ल्ड कार्बन नैनोट्यूब और एक से अधिक सीट को रोल करके  बनाए जाने पर मल्टी वर्ल्ड कार्बन नैनोट्यूब कहा जाता है | सीएनटी ( CNT ) को लेकर लगातार नए शोध हो रहे हैं. वैज्ञानिकों की खोज के आधार पर कार्बन नैनोट्यूब्स का उपयोग ड्रग डिलीवरी कैरियर ,बायोकेमिकल्स सेंसस के तौर पर किया जा सकता है |

वैज्ञानिकों के शोध से पता चला है की सीएनटी ( CNT ) बायोडिग्रेडेबल होता है | इसके अलावा क्वांटम डॉट्स नैनोवायर्स और नैनोडॉट्स का प्रयोग भी इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में किया जाता है |

2005 में जापानी कंपनी तोशिबा ने एक चार्जेबल लिथियम आयन बैटरी में नैनो पार्टिकल्स का प्रयोग किया था | उच्च मेमोरी को स्टोर करने के लिए N रैम यानी नैनो रैम भी नैनो टेक्नोलॉजी के प्रमुख एप्लीकेशंस में से एक है |

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नैनो तकनीक ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है | नैनो तकनीक के स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनुप्रयोग की बात करें कार्डियो वैस्कुलर डिजीज में  डॉक्टर्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती इनका पता लगा पाना है |

नैनो तकनीक के जरिए इसका समाधान हार्ड अटैक डिटेक्ट,र नैनोसेंसर्स के विकसित करके किया गया है  |यह है ब्लड प्लाज्मा में बढ़े हुए मायोग्लोबिन की पहचान कर लेता है | इसके अलावा नैनोकेरियर्स ने ड्रग डिलीवरी सिस्टम में खूब प्रगति की है | कोलाइडर ड्रग्स कैरियर सिस्टम में 500 नैनोमीटर से छोटे आकार के कणो का प्रयोग किया जाता है |

भारत में  नैनो टेक्नोलॉजी

भारत ने नैनो साइंस में लगभग 23 हजार से अधिक पेपर पब्लिश किए हैं | साल 2013 में नैनो साइंस में पेपर पब्लिश करने के मामले में भारत, चीन और यूएसए के बाद तीसरे स्थान पर था |

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भारत के पास कुछ ऐसी चुनौतियां भी मौजूद है जिन्हें नैनो तकनीक के जरिए सुलझाया जा सकता है   भारत के लगभग 60 फ़ीसदी से अधिक आबादी कृषि क्षेत्र में काम करती है | इस लिहाज से जीडीपी ( GDP )में इस क्षेत्र का योगदान तुलनात्मक रूप से कम है |

नैनो तकनीक से किसानों को कम कीमत पर सरल तरीके से प्रयोग किए जाने वाले उपकरण मसलन स्वाएल हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम उपलब्ध कराए जा सकते हैं | कृषि में नैनो तकनीक के उपयोग से ना केवल क्षेत्र के उत्पादकता बढ़ेगी बल्कि किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी |

भारत के लिए दूसरी चुनौती स्वास्थ्य के क्षेत्र में है

2012 में इन्नोवेशन काउंसिल आन नैनो  इलेक्ट्रॉनिक्स द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक भारत में सालाना 22 मिलियन लोग स्वास्थ्य संबंधित खर्चो के वजह से गरीबी रेखा के नीचे चले जाते हैं | साथ ही भारत टीवी ,मलेरिया और एड्स जैसे बीमारियों से जूझ रहा है | इन चुनौतियों से कम कीमत पर डायग्नोस्टिक तकनीक मेडिकल इक्विपमेंट जैसी सुविधाएं मुहैया कराकर निपटाया जा सकता है |

नैनो तकनीक इनमें भी मददगार साबित हो सकती है

इसके अलावा भारत में जनसंख्या की लाभांश के चलते कार्यबल में भी लोगों की संख्या अच्छी खासी है जो कि नैनो तकनीक के विकास में मददगार साबित हो सकता है | इसी के मद्दजर साल 2001 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी इनीशिएटिव लांच किया था इसका मतलब  संरचना विकास आधारभूत शोध और नैनोमेट्रिक्स में अनुप्रयोग आधारित कार्यक्रम से संबंधित मुद्दों पर ध्यान देना था |

साल 2007 में भारत सरकार ने मिशन ऑन नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी लांच किया था |12वी पंच वर्षीय योजना के दौरान इसके फेस टू को अप्रूव किया गया था | इस नैनोमिशन को लागू करने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी को नोडल एजेंसी बनाया गया था | इसका मुख्य मकसद आधारभूत शोध को बढ़ावा देना शोध के लिए अवसंरचना विकास नैनो तकनीक और उसके अनुप्रयोगों का विकास, मानव संसाधनों का विकास ,इंटरनेशनल कोलैबोरेशन आदि पर फोकस करना था |

नैनो टेक्नोलॉजी
                   नैनो टेक्नोलॉजी

इस क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के मकसद से  ( department of electronics and information technology  ) ने नैनो इलेक्ट्रॉनिक्स इनोवेशन काउंसिल का गठन किया गया था |

इस तकनीक में विनिर्माण को बढ़ावा देने के मकसद से सेंट्रल मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट बेंगलुरु में नैनो  टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग सेंटर स्थापित किया गया है |

नैनो तकनीक से जुड़ी चुनौतियां|Information of technology in Hindi

  • शोध क्षेत्र में खर्च की कमी भारत आज भी जापान यूएसए प्राइस और चीन जैसे देशों के मुकाबले कम खर्च करता है
  • निजी क्षेत्र द्वारा इस तरफ कम निवेश किया जाना
  • क्षेत्र में कम निवेश और फंडिंग के चलते रोजगार का सृजन भी कम है
  • नैनो पोलूशन वैसे वेस्टमैट्रियल जो नैनोडिवाइसेज या मैट्रियल के निर्माण के दौरान उत्पन्न होते हैं |

उदाहरण के लिए क्लोरीन का प्रयोग इंडस्ट्रियल लुब्रिकेंट्स और स्पोर्ट्स इक्विपमेंट के लिए किया जाता है फुलरीन की मात्रा कुछ वेस्ट के तौर पर लैंडफिल तक पहुंचती है जो की हवा मिट्टी और पानी में पहुंचकर इन्हें प्रदूषित करती है |

  • इसके अलावा विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी क्षेत्र में लोग कारों के धुए और कंस्ट्रक्शन साइट से निकलने वाले मैग्नीज ऑक्साइड से प्रभावित होते हैं |
  • नैनो पार्टिकल्स आकार में बेहद छोटे होते हैं कि यह लिविंग सेल्स में आसानी से प्रवेश कर जाते हैं जो कि मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने में सक्षम है |
  • राष्ट्रीय स्तर पर एक नियामकिए फ्रेमवर्क होनी चाहिए जो कि नैनो तकनीक से जुड़े सुरक्षा संबंधी आयामों और इससे जुड़ी जोखिमों से निपटा जा सके |

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FAQ

1. नैनो टेक्नोलॉजी का अर्थ क्या है?

नैनो टेक्नोलॉजी एक ऐसी तकनीक है, जिसमें पदार्थों में अनु और परमाणु के अस्तर पर बदलाव किया जाता है

2. नैनोटेक्नोलॉजी के जनक कौन है?

नैनोटेक्नोलॉजी की अवधारना सबसे पहले रिचर्ड फेनमैन ने दी थी

3. नैनो पार्टिकल्स का आकार कितना होता है?

एक नैनोमीटर  दस के पवार -9  मीटर के बराबर होता है

4.टेक्नोलॉजी कितने प्रकार के होते हैं?

(कृषि प्रौधौगिकी)
(चिकित्सा प्रौधौगिकी)
(संचार प्रौधौगिकी)
(मनोरंजन प्रौधौगिकी)
(शिक्षा प्रौधौगिकी)
(निर्माण प्रौधौगिकी)

निष्कर्ष

हम कह सकते हैं कि भारत में Information of technology in Hindi के विकास की न्यू इस आधार पर रखी गई है कि यह भारत की सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों से लड़ने में मदद कर सकता है | भारत ने इस दिशा में योजनाओं के जरिए कई महत्वपूर्ण प्रयास भी किए हैं |

भारत को भी अपने लोगों और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए रणनीतिक फ्रेमवर्क लाने की जरूरत है इस क्षेत्र में हो रहे रिसर्च में निवेश करके ही भारत इस असीमित क्षमता वाले तकनीक का लाभ ले सकेगा |

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