एनपीआर का फुल फॉर्म क्या है | NPR full form in Hindi

क्या आप जानते हैं कि एनपीआर क्या है, NPR full form in hindi क्या है अगर इसके बारे में नहीं जानते हैं तो आज के इस आर्टिकल में पूरी विस्तार से जानेंगे कि NPR kya hai और NPR ka full form क्या है तथा इससे जुड़े सभी सवाल जो कि आपके मन में हैं उन सभी सवालों के बारे में इस आर्टिकल के माध्यम से बताएंगे तो आप इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें|

एनपीआर का फुल फॉर्म क्या होता है ?

NPR का फुल फॉर्म: National Population Register होता है जिसे हिंदी में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर कहा जाता है| हाल फिलहाल में नेशनल रजिस्टर पापुलेशन (NPR) काफी सुर्खियों में है| दरअसल यह देश के स्वाभाविक निवासियों की समग्र पहचान का एक डेटाबेस है| यानी एनपीआर देश के सभी स्थानीय निवासियों का बेवड़ा है |

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का मकसद देश की स्वाभाविक निवासियों की समग्र पहचान का डेटाबेस तैयार करना है इसमें भौगोलिक और बायोमेट्रिक जानकारी दोनों हो सकती है |

एनपीआर क्या है | NPR kya hai?

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर यानी एनपीआर सामान्य रूप से भारत में रहने वालों का एक रजिस्टर बेवड़ा है| यानी भारत में रहने वाले स्वाभाविक निवासियों का एक रजिस्टर, इसे ग्राम पंचायत, तहसील, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है|

अगर कोई बाहरी व्यक्ति देश के किसी  देश में 6 महीने से ज्यादा समय से रह रहा है तो उसका बेवड़ा भी एनपीआर में दर्ज होगा| भारत में रहने वालों के लिए एनपीआर के तहत रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है|

नागरिकता कानून 1955 और सिटीजनशिप रुलस नागरिकता पंजीयन और राष्ट्रीय पहचान पत्र आवंटन नियम 2003 के प्रावधानों के तहत राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर तैयार होता है |

नागरिकता कानून 1955 को 2004 में संशोधित किया गया था | जिसके तहत एनपीआर के प्रावधान जोड़े गए थे सिटीजनशिप एक्ट 1955 के 14A  में यह प्रावधान तय किए गए कि केंद्र सरकार देश के हर नागरिक का अनिवार्य पंजीकरण कर राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी कर सकती है |

केंद्र सरकार देश में हर नागरिक का रजिस्टर तैयार कर सकती है इसके लिए नेशनल रजिस्टर अथॉरिटी भी गठित की जा सकती है| नागरिकता कानून 1955 और नागरिकता नियम 2003 के तहत राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर पहली बार 2010 में तैयार किया गया था तब 2011 में जनगणना के पहले इस पर काम शुरू हुआ था आधार से जोड़े जाने के बाद 2015 में इसे अपडेट किया गया था|

एनपीआर तैयार करने में पूछे जायेगे ये सवाल

  • माता पिता का नाम
  • लिंग
  • वैवाहिक स्थिति
  • पति पत्नी का नाम
  • घर के मुखिया से संबंध
  • जन्म स्थान
  • राष्ट्रीयता वर्तमान पता
  • निवासी की अवधि
  • शैक्षणिक योग्यता
  • और व्यवसाय की जानकारी मांगी जाती है |

 सरकार के मुताबिक इस बार एनपीआर करने का काम अप्रैल और सितंबर 2020 के बीच असम को छोड़कर अन्य सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किया जाएगा. राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर जनगणना कार्य के साथ अपडेट किया जाएगा |

एनपीआर के मुताबिक स्थानीय निवासी कौन है

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर में शामिल करने के लिए स्थानीय निवासी का अर्थ किसी स्थान पर 6 महीनों या उससे ज्यादा समय से रहा व्यक्ति है |

उस स्थान पर अगले छह महीनों या उससे ज्यादा वक्त तक उसी स्थान पर रहने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को भी स्थानीय निवासी माना जाएगा इसमें लोगों द्वारा दी गई सूचना को ही दर्ज किया जाएगा |

NPR लाने का उद्देश्य क्या है?

देश के हर स्थानीय निवासी का पहचान का संपूर्ण डेटाबेस तैयार करना है | सरल शब्दों में कहे तो  देश हर नागरिक के जनकारी को एक जगह इकट्ठा करने का काम है |

सरकार अपनी योजनाओं को तैयार करने धोखाधड़ी को रोकने और हर परिवार तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए एनपीआर का इस्तेमाल कर सकती हैं | यानी एनपीआर से मिली जानकारी का इस्तेमाल सरकार सरकारी योजनाओं के लाभ देने में किया जा सकता है |

जिससे यह व्यवस्था पारदर्शी बनी रहे और सही लाभार्थी तक योजनाओं का लाभ पहुंच सके इन सेवाओं में बैंकिंग और बीमा से जुड़ी सेवाएं है|

nrc क्या है इन हिंदी
          resourse. organiser.org

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) से लोगो को क्या फायदा होगा

  • खेती से जुड़ी योजनाओं में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है
  • बीज उर्वरक कीटनाशक और खेती के लिए ऋण से जुड़ी योजनाओं में भी काम आ सकता है
  • जमीन संपत्ति और शेयर के रजिस्ट्रेशन में इसका इस्तेमाल हो सकता है
  • एनपीआर का इस्तेमाल स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवाओं में भी किया जा सकता है
  • रोजगार के लिए भी इसका इस्तेमाल संभव है
  • वही आपदा प्रबंधन के नजरिए से भी एनपीआर बहुत कारगर है
  • दिव्यांगता वृद्धावस्था पेंशन और फ्रीडम फाइटर से जुड़े मसलों में भी इसका इस्तेमाल बहुत ही महत्वपूर्ण है

 आयुष्मान भारत, जन धन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना ,उज्जवला योजना और सौभाग्य जैसी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए एनपीआर की सूचनाओं का उपयोग किया गया था | राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर यानी एन पी आर में लोगों की ओर से दी गई सूचना को ही सही माना जाता है यह नागरिकता का प्रमाण नहीं होता

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नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत की जनगणना 2021 की प्रक्रिया शुरू करने के साथ ही राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर यानी एनपीआर को भी शुरू करने की मंजूरी दे दी है |

क्या NPR से आम लोगो को खतरा है?

कैबिनेट के निर्णय की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि एनपीआर के लिए किसी तरह की कागजात यह सबूत की जरूरत नहीं होगी उन्होंने कहा कि कोई दस्तावेज नहीं मांगे जा रहे हैं बायोमेट्रिक भी नहीं मांगा जा रहा है |

वही अमित शाह ने स्थिति स्पष्ट की उन्होंने कहा कि एनपीआर में आम आदमी जो सूचना देंगे उसके आधार पर जानकारियां एकत्रित की जाएगी इसके लिए किसी से कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा उन्होंने कहा इन डेटाबेस के जरिए ही जनता के हित से योजनाएं बनती है NPR से सरकार आगे की योजना तैयार करती है |

अमित शाह ने कहा कि पिछली सरकार में भी ऐसी ही व्यवस्था की गई थी एनपीआर किसी व्यक्ति को नागरिकता का कोई खतरा नहीं है इसके नाम पर लोगों को भड़काया जा रहा है |

जनगणना की प्रक्रिया के दायरे में देश की पूरी आबादी आएगी, जबकि एनपीआर को बनाने के लिए असम को छोड़कर देश की बाकी आबादी को शामिल किया जाएगा |

भारत की जनसंख्या की गणना प्रक्रिया

भारत की जनसंख्या गणना प्रक्रिया दुनिया की सबसे बड़ी जनसंख्या गणना प्रक्रिया है देश में जनसंख्या का काम हर 10 साल बाद होता है ऐसे में अगली जनसंख्या गणना 2021 में होगी |जनसंख्या गणना का यह काम दो चरणों में किया जाएगा |

  1. पहले चरण में अप्रैल 2020 तक प्रत्येक घर और उसमें रहने वाले व्यक्ति की सूची बनाई जाएगी
  2.  दूसरे चरण में 9 फरवरी से 28 फरवरी 2021 तक पूरी जनसंख्या गणना का काम होगा राष्ट्रीय महत्व के इस काम को एनपीआर को पूरा करने के लिए 3000000 कर्मियों को देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा जाएगा |

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एनपीआर यानि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर देश के स्वाभाविक जनसंख्या का एक रजिस्टर है| एनपीआर का मकसद देश के निवासियों की समग्र पहचान का डेटाबेस तैयार करना है |

एनपीआर समय-समय पर अपडेट होता रहता है | 2021 में होने वाले जनगणना से पहले एनपीआर का काम 2020 तक पूरा किया जाएगा जैसे NPR का काम 2011 की जनगणना से पहले 2010 में पूरा कर लिया गया था | 2015 में भी एनपीआर को अपडेट किया था जबकि जनगणना हर 10 साल में एक ही बार होती है |

इसकी शुरुआत 1872 में हुई जब भारत के अलग-अलग हिस्सों में पहली जनगणना की गई थी  |

इसके बाद साल 1949 में सरकार ने जनसंख्या के बढ़ने और घटने के आधार पर इकट्ठा किए गए आंकड़ों पर एक व्यवस्थित जनगणना करने का फैसला किया जनसंख्या से जुड़े आंकड़ों को गांव जैसी प्रशासनिक स्तर की इकाइयों के साथ साझा किया जाता है |

NPR और NRC में अंतर

एनपीआर को जहां नेशनल पापुलेशन रजिस्टर कहा जाता है वही एनआरसी नेशनल रजिस्टर आफ सिटीजंस कहलाता है | दोनों में एक दूसरे से कोई संबंध नहीं है, फिलहाल पूरे देश में एनआरसी जैसी कोई व्यवस्था नहीं है | यह केवल सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर असम के लिए किया गया था |

वही एनपीआर पूरे देश में लागू होता है एनआरसी का संबंध नागरिकता से है और एनपीआर का संबंध देश में रहने वाले लोगों की पहचान से है एनपीआर में किसी दस्तावेज की जरूरत नहीं होती जबकि एनआरसी में दस्तावेजों का परीक्षण किया जाता है |

एनआरसी में वेद नागरिकों की एक सूची जारी की जाती है सूची में शामिल लोगों को ही देश का नागरिक माना जाता है NPR और NRC एक दूसरे से कोई लेना देना नहीं है इसके बारे में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी बताया लोगों में भ्रांतियां इस बात को लेकर भी है कि NPR के जरिए नागरिकता संशोधन कानून को लागू किया जाएगा और एनपीआर में दस्तावेज की मांग की जाएगी |

नागरिकता संशोधन कानून पाकिस्तान ,बांग्लादेश, अफगानिस्तान से आए धार्मिक प्रताड़ना के कारण आए हिंदू ,ईसाई पारसी ,जैन और बौद्ध धर्म के लोगों को नागरिकता देने वाला कानून है  | जबकि एनपीआर नागरिकता देने वाला कानून नहीं यह नागरिकों के पहचान का डेटाबेस तैयार करने वाली एक व्यवस्था है |

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इस आर्टिकल के माध्यम से हमने NPR क्या है, npr full form in hindi क्या है और इससे जुड़ी सभी सवालों के जवाब देने की कोशिश की है अगर आपके मन में किसी अन्य प्रकार के प्रश्न आ रहे हैं तो आप हमें कॉमेंट जरूर करें हम उत्तर देने का प्रयास जरूर करेंगे|

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