पेगासस ( pegasus spyware ) सॉफ्टवेयर क्या है | pegasus meanning in hindi

आज कि इस  टेक्नोलॉजी की दुनिया में हर एक देश अपनी हथियारों को कम बल्कि टेक्निकल सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान दे रही है | हर एक देश अपने देश की सुरक्षा को लेकर कोई ना कोई सॉफ्टवेयर का निर्माण कर रही है ताकि उसके देश के नागरिक एवं देश सुरक्षित रहे | इसी सॉफ्टवेयर में से एक है पेगासस स्पाइवेयर ( pegasus spyware ) सॉफ्टवेयर तो आज हम पेगासस के बारे में पूरी विस्तार से जानेंगे की पेगासस ( pegasus ) क्या है . इससे खतरा क्या क्या है | pegasus meanning in hindi और भारत में गुप्त निगरानी के प्रावधान क्या है |

पेगासस क्या है ?( what is pegasus )

यह एक सर्विलांस सॉफ्टवेयर है. जिसे इजराइल की सुरक्षा कंपनी ( NSO ) एनएसओ ग्रुप ने बनाया है| इस सॉफ्टवेयर के जरिए किसी व्यक्ति का फोन हैक करके उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है |

साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक आमतौर पर टारगेट को करप्ट मैसेज या फाइल भेज कर डिवाइस को हैक किया जाता है|  फिर यह टारगेट के फोन को कंट्रोल कर लेता है और उससे जुड़े डाटा का एक्सेस एजेंसी को दे देता है जहां अन्य जासूसी सॉफ्टवेयर केवल बातचीत के कुछ हिस्सों की निगरानी करते हैं |

वही पेगासस टारगेट में मौजूद सभी तरह की सूचनाओं को जुट आता है या कांटेक्ट कॉल हिस्ट्री s.m.s. रिकॉर्ड ई-मेल और ब्राउजिंग हिस्ट्री को कमांड एंड कंट्रोल सर्वर को भेजता है |

पेगासस रियल टाइम में पूरा डाटा जुटाता है और मॉनिटर करता है इसके अलावा भी इसके कई फीचर यूनिक है इसका एक्टिव कलेक्शन फीचर टारगेट डिवाइस से मन मुताबिक सूचनाएं जुटाने की सहूलियत देता है |

पेगासस ( pegasus ) की खास बाते.

इसके तहत यह सॉफ्टवेयर इंफॉर्मेशन के आने का इंतजार नहीं करता है . बल्कि टारगेट के डिवाइस से वह सारी सूचनाएं हासिल करने की सुविधाएं देता है जो अटैकर को चाहिए |

इसके जरिए फोन कॉल्स सुने जा सकते हैं फोन के कैमरा और माइक्रोफोन के इस्तेमाल भी किया जा सकता है एक खास बात यह भी है कि पेगासस सेल्फ डिस्ट्रक्ट मोड खुद को तबाह कर लेने वाली फीचर से लैस है | अगर इसे लगता है कि अब हम पकड़े गए तो यह खुद को डिलीट कर लेता है  |

पेगासस सॉफ्टवेयर डेवलप करने वाली कंपनी एनएसओ के मुताबिक इसे आतंकवादियों पर नजर रखने और आतंकवादी घटनाओं को रोकने के मकसद से विकसित किया गया है|

एनएसओ ग्रुप का कहना है कि यह सॉफ्टवेयर सिर्फ सरकारी एजेंसियों को ही दिया जाएगा सर्वजनिक जानकारी के मुताबिक पनामा और मेक्सिको की सरकार इसका इस्तेमाल करती है ।

pegasus meanning in hindi

पेगासस को मुख्यतः तीन तरह के अर्थ होते है 

  1. PEGASUS : उत्कृष्ट कवि
  2. PEGASUS : कवि की उमंग 
  3. PEGASUS :  सपक्ष घोड़ा

पेगासस (ग्रीक पौराणिक कथाओं) अमर पंखों वाला घोड़ा जो मारे गए जो मेडुसा के खून से निकला था; एथेना द्वारा दिए गए एक लगाम की मदद से बेलेरोफ़ोन द्वारा वश में किया गया था जो मूसा के उड़ते हुए घोड़े के रूप में यह ऊंची उड़ान वाली कल्पना का प्रतीक है

पेगासस एक पौराणिक पंखों वाला दिव्य घोड़ा है, और ग्रीक पौराणिक कथाओं में सबसे अधिक मान्यता प्राप्त प्राणियों में से एक है। आमतौर पर शुद्ध सफेद के रूप में चित्रित, पेगासस ओलंपियन भगवान पोसीडॉन की संतान है। उसकी मृत्यु पर गोरगन मेडुसा ने उसे धोखा दिया था, जब नायक पर्सियस ने उसे सिर से मार डाला था। पेगासस क्रिससॉर का भाई और गेरोन का चाचा है।

भारत में गुप्त निगरानी के प्रावधान क्या है ?

भारत सरकार फोन, मोबाइल, इंटरनेट के जरिए जासूसी या निगरानी के लिए भारतीय टेलीग्राम अधिनियम 1885 और आईटी एक्ट 2000 के कानूनी प्रावधानों का सहारा लेती है |

दरअसल भारत में निगरानी की शुरुआत अंग्रेजों के जमाने से ही की गई थी | पहले टेलीफोन का प्रचलन हुआ इसीलिए पहले उनके लिए नियम कायदे बने जिसके जरिए यह सुनिश्चित किया गया कि कोई किसी की निजी बातचीत ना सुने और निजता का अधिकार भंग ना हो |

अलग देश विरोधी ताकतों और दुश्मन देश हो देशों से बचाव के लिए कुछ मामलों में निगरानी के लिए इजाजत भी दी गई है |

जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी बढ़ी और फोन के साथ साथ मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल भी बातचीत और संपर्क के लिए होने लगा तो इसे निगरानी के दायरे में लाने के लिए आईटी एक्ट 2000 लाया गया |

इंडियन टेलीग्राफ एक्ट 1885 क्या है ?

यह कानून 1 अक्टूबर 1885 को लागू किया गया था. हालांकि इसमें समय-समय पर संशोधन होते रहे हैं|  टेलीग्राफ एक्ट के तहत केंद्र सरकार या राज्य सरकार को पब्लिक इमरजेंसी होने पर या लोक सुरक्षा के हित में फोन कॉल पर पाबंदी लगाने और उसे टाइप करने एवं उसके निगरानी का अधिकार हासिल है |

पेगासस ( pegasus spyware ) सॉफ्टवेयर क्या है |
                                                इंडियन टेलीग्राफ एक्ट 1885

इस एक्ट की धारा 5 ( 2 ) में  वे परिस्थितियां बताई गई है जिसमें निगरानी की जा सकती है 

  • देश की अखंडता और संप्रभुता बनाए रखने के लिए
  • राज्य की सुरक्षा के लिए
  • विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने के लिए
  • सार्वजनिक व्यवस्था या इनमें से किसी भी संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए ‘

केवल सरकारी एजेंसियों को ही गृह मंत्रालय से पूर्व इजाजत लेकर फोन टेप करने का अधिकार हासिल है | फोन टाइपिंग की इजाजत 60 दिनों के लिए दी जाती है | जिसे विशेष परिस्थितियों में 180 दिनों के लिए बढ़ाया जा सकता है |

इंडियन टेलीग्राफ रूल्स के नियम 419 एवं 419( a )  में टेलीफोन संदेशों की निगरानी एवं पाबंदी लगाने की प्रक्रिया का जिक्र किया गया है |

इस तरह की फोन टाइपिंग का इजाजत केंद्र में होम सेक्रेट्री देता है जिसका अप्रूवल कैबिनेट सेक्रेटरी के अध्यक्षता में बनी एक कमेटी देती है | वही राज्यों में गृह गृह विभाग का इंचार्ज सेक्रेटरी मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी कमेटी के अप्रूवल से देता है |

2007 में टेलीग्राम एक्ट में कुछ संशोधन किए गए हैं | इनके मुताबिक अगर कोई क्षेत्र ऐसा है जहां की विशेष भौगोलिक परिस्थितियां के कारण फोन टैपिंग की इजाजत नहीं दी जा सकती तो वहां पुलिस रैंक के वरिष्ठ अधिकारी इसका फैसला ले सकता है |

अगर किसी व्यक्ति को यह लगता है कि अनाधिकृत तरीके से उसका फोन टेप किया गया है तो वह भारतीय टेलीग्राफ एक्ट की धारा 26b की तहत कोर्ट जा सकता है आरोप साबित होने पर दोषी को 3 साल तक की सजा या जुर्माना या फिर दोनों भुगतना पड़ सकता है

आईटी एक्ट 2000 के बारे में

इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2000 की धारा 69 केंद्रीय या राज्य सरकार को यह अधिकार देती है कि देश की संप्रभुता या अखंडता के हित में वह किसी कंप्यूटर के जरिए जनरेट या ट्रांसफर होने वाले डाटा या उसमें पहले से स्टोर डाटा पर नजर रख सकती है उसे हटवा सकती है या डिकोड करवा सकती है |

इस एक्ट में सक्षम अधिकारी की इजाजत लेकर दो से 6 महीने तक निगरानी की जा सकती है | फिलहाल देश में 10 एजेंसी ऐसी है जिन्हें कानूनी तौर पर लोगों के फोन टैप करने का अधिकार है

  • इंटेलिजेंस ब्यूरो ( आईबी )
  • रिसर्च एंड एनालिसिस विंग
  • प्रवर्तन निदेशालय ( ED )
  • केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
  • राजस्व आसूचना निदेशालय
  • केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ( सीबीआई )
  • नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ( एनआईए )
  • रिसर्च एंड एनालिसिस विंग यानी ( RAW )
  • सिग्नल इंटेलिजेंस निदेशालय

हालांकि कोई भी प्रवधान सरकार को किसी व्यक्ति को फोन को हैक करने की इजाजत नहीं देता है | क्योंकि मोबाइल फोन और ऐप सहित कंप्यूटर रिसोर्सेज को हैक करना | आईटी एक्ट के तहत एक अपराधिक कार्य माना जाता है |

पेगासस ( pegasus )  के जरिए निगरानी पर सवाल क्यों

पेगासस सॉफ्टवेयर ( pegasus software ) के जरिए जासूसी किए जाने वाले नामों के लिस्ट में कई स्वतंत्र पत्रकार के नाम शामिल है | यह भी बताया जा रहा है कि यह पत्रकार सरकार की नीतियों और नियत की आलोचना करते रहे हैं | इसलिए ऐसे पत्रकारों की जासूसी कराए जाने को प्रेस की स्वतंत्रता के लिए खतरा माना जा रहा है |  क्योंकि निगरानी प्रेस की स्वतंत्रता को प्रभावित करती है |

आगे की राह क्या हो

भारत में निगरानी ढांचे में व्यापक सुधार की जरूरत लंबे समय से की जा रही है जिसमे मौजूदा हालातों को देखते हुए निगरानी से जुड़े सिस्टम में pegasus को लेकर सुधार की सख्त जरूरत है |

क्योंकि निगरानी के संबंध में ना केवल मौजूदा सुरक्षा ढांचा कमजोर है . बल्कि भारतीय नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा संरक्षण से संबंधित प्रस्तावित कानून भी निगरानी के मुद्दे पर विचार करने में विफल रहा है | जबकि इसने सरकारी अधिकारियों के लिए व्यापक छूट का प्रावधान कर रखा है |

इस संदर्भ में व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक 2019 के अधिनियमित होने से पहले एक समग्र बहस की जरूरत है . ताकि मौलिक अधिकारों के आधारशिला के खिलाफ कानून का परीक्षण किया जा सके |

निगरानी प्रणाली में पारदर्शिता की जरूरत है क्योंकि मौजूदा व्यवस्था में सरकारी एजेंसियां सरकार के अलावा किसी और के प्रति कोई जवाबदेही नहीं रखती |

रोबोट क्या है | सोफिया रोबोट क्या है और भारत में रोबोट

VPN kya hai ? VPN कितने प्रकार के होते हैं, VPN से होने वाले फायदे और नुकसान

⇒ Linux kya hai, लिनक्स( Linux ) को किसने और कब बनाया

उम्मीद करता हूं कि आप इस आर्टिकल में पूरी विस्तार से समझे होंगे कि पेगासस ( pegasus ) क्या है तो अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो आप हमें कमेंट बॉक्स में अपना प्यार जरूर शेयर करें  :  धन्यवाद

comment here