SPG(एसपीजी )कमांडो गठन कब हुआ | SPG का प्रशिक्षण और चुनाव कैसे की जाती है 

काली गाड़ी, काला चश्मा काला सूट और फौलाद सा शरीर चील पैनी नजर जी हां हम बात कर रहे हैं भारत के सर्वोच्च सुरक्षा श्रेणी के( SPG ) एसपीजी कमांडो की इसका सुरक्षा घेरा एक जाल है एक ऐसा जाल जिसमें परिंदा भी पैर नहीं मार सकता |

 

आजादी के बाद ऐसे वाक्या  हुए जहां प्रधानमंत्री की सुरक्षा में सेंधमारी की गई हद तो तब हो गई जब पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई| जिसके बाद देश को एक विशेष सुरक्षा एजेंसी की जरूरत महसूस हुई उसके बाद एसपीजी ( SPG ) स्पेशल प्रोटक्शन ग्रुप गठन किया गया |

एसपीजी ( SPG ) के अलावा भी कई प्रकार के एजेंसी या होती है इसके अलावा Z+,जेड प्लस, Z जेड और Y,वॉइ सिक्योरिटी का नाम जरूर सुना होगा |

देश के VVIP (वीआईपी) और VVI (वी वी आई) व्यक्तियों को सुरक्षा प्रदान करके इन एजेंसी ने तमाम तरह के खतरों से निपट कर अपनी विशेष ख्याति अर्जित की है|

ताजा मामला गांधी परिवार का है पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बाद अब सोनिया गांधी ,राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से 28 साल बाद ( SPG )एसपीजी सुरक्षा वापस ले ली गई है | हालांकि सुरक्षा का जिम्मा अब सीआरपीएफ (CRPF)के हाथों में है जो उन्हें(Z+) जेड प्लस सुरक्षा प्रदान करेगा काफी मंथन के बाद सुरक्षा के तमाम आयामों को देखते हुए इस नतीजे पर पहुंचा गया है |

 

एसपीजी( SPG ) फिर से एक बार सुर्खियों में है कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी उनके बेटे राहुल गांधी और बेटी प्रियंका गांधी को दी गई स्पेशल प्रोटक्शन ग्रुप ( SPG )एसपीजी की सुरक्षा वापस ले ली गई है हालांकि उन्हें Z+जेड प्लस की सुरक्षा मिलती रहेगी | सभी सुरक्षा एजेंसियों की नियमित मूल्यांकन के बाद यह फैसला लिया गया है ( SPG ) एसपीजी सुरक्षा देश में दिया जाने वाला सर्वोच्च सुरक्षा कवच है |

जब भी हम देश के प्रधानमंत्री या भारत दौरे पर आए किसी विशिष्ट अतिथि के सुरक्षा में लगे जवानों को देखते हैं तो उनकी कार्यप्रणाली और पहनावे पर हमेशा हमारा ध्यान आकर्षित जरूर होता है  | दरअसल यह सुरक्षा जवान देश के सबसे जबाज आज पेशेवर और अधिकतम सुरक्षा बलों में से एक है|

कौन होते हैं एसपीजी के कमांडो

देश के सबसे पेशेवर और अत्याधुनिक सुरक्षा बलों में से एक स्पेशल प्रोटक्शन ग्रुप यानी विशेष सुरक्षा दल संघ के एक सशस्त्र सेना है | जो देश के प्रधानमंत्री और पूर्व प्रधान मंत्रियों समेत उनके परिवार के निकटतम सदस्य को भी सुरक्षा प्रदान करते हैं |

देश के सबसे जांबाज सिपाही कहे जाने वाले( SPG ) एसपीजी के अधिकारी अपने उच्च नेतृत्व के गुण और प्रोफेशनल अप्रोच के साथी खतरों को पहले ही भाप लेने और उनसे निपटने में माहिर होते हैं |

1985 में अपनी स्थापना के बाद से ( SPG )एसपीजी अपने संरक्षित लोगों को उनके कार्य कार्यालय निवास स्थान और स्थानीय कार्यक्रमों के साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के दौरान सुरक्षा प्रदान करती है |

 SPG कमांडो गठन कब हुआ 

साल 1981 के पहले तक भारत के प्रधानमंत्री और उनके आवास की सुरक्षा की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस के उपायुक्त नेतृत्व वाली स्पेशल सिक्योरिटी के हाथों में होती थी , अक्टूबर 1981 में इंटेलिजेंस ब्यूरो ( IB ) के कहने पर एक स्पेशल टास्क फोर्स यानी एसटीएफ(STF )का गठन किया गया जो दिल्ली के अंदर या बाहर पीएम को सुरक्षा मुहैया कराते थे |

अक्टूबर 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सुरक्षा को लेकर रिव्यू किया गया | सचिवों की समिति ने प्रधानमंत्री की सुरक्षा का समीक्षा किया ,जिसके बाद में निर्णय  लिया गया कि प्रधानमंत्री के सुरक्षा एक स्पेशल ग्रुप को दी जाए और इसके तहत ही साल 1985 में ( SPG )एसपीजी का गठन किया गया साल 1985 से 1988 तक के कार्यकारी आदेश की शक्तियों के साथ काम किया |

साल 1988 में भारत के संसद ने एक अधिनियम द्वारा इसे अधिनियमित किया गया |

एसपीजी ( SPG ) का प्रशिक्षण और चुनाव कैसे की जाती है

स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप यानी ( SPG ) के कमांडो प्रशिक्षण और चुनाव की बात करें ‘ तो उन्हें बेहद खास तरह की ट्रेनिंग दी जाती है | यह ट्रेनिंग उसी की तरह होती है जैसे अमेरिका के सीक्रेट सर्विस एजेंट को दी जाती है।

( SPG ) एसपीजी में शामिल करने से पहले इसकी कमांडो के बारे में सभी जानकारी हासिल की जाती है जैसे वे कहां जाते हैं किन से मिलते हैं वगैरह,

SPG का प्रशिक्षण और चुनाव कैसे की जाती है
                                SPG का प्रशिक्षण और चुनाव कैसे की जाती है

एसपीजी कमांडो एफएनएफ 2000 असोल्ट राइफल से लैस होते हैं जो एक फुली ऑटोमेटिक गन है. इसके साथ ही इसके कमांडो के साथ  ही ग्लोब 17 अत्याधुनिक पिस्टल होती है . सुरक्षा के लिए एक लाइटवेट बुलेट प्रूफ जैकेट जैकेट पहनते हैं और साथी कमांडो से बात करने के लिए ईयर प्लग या वॉकी टॉकी का इस्तेमाल करते हैं |

( SPG ) सुरक्षा के लिए एल्बो और निगार्ड पहनते हैं इसकी जूते इस तरह के बने होते हैं किसी भी जमीन पर फिसलते नहीं है यह कमांडो काला चश्मा लगाते हैं ताकि दुश्मनों को पता ना चले कि वह किधर देख रहे हैं ।

प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात ( SPG )एसपीजी कमांडो की खासियत यह होती है ड्राइवर से लेकर निजी बॉडीगार्ड तक सभी एसपीजी कमांडोज होते हैं।

एसपीजी( SPG ) के कमांडो भारतीय सेना और पैरा मिलिट्री फोर्स से चुने जाते हैं।

 

एसपीजी( SPG ) अधिनियम में संशोधन

साल 1981 में राजीव गांधी की हत्या के बाद 1991 में एसपीजी अधिनियम में संशोधन कर के पूर्व प्रधानमंत्री और उनके परिवार को 10 साल की अवधि तक सुरक्षा प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया।

इसके बाद साल 2002 में एसपीजी कमांडो अधिनियम में एक और संशोधन किया गया इसके तहत पूर्व प्रधानमंत्री को प्रदान की गई सुरक्षा की अवधि को कम करके 1 वर्ष कर दिया गया। हालांकि इसमें यह प्रावधान है कि खतरे को देखते हुए इस अवधि को बढ़ाया जा सकता है।

अपनी स्थापना के बाद से ही एसपीजी कमांडो एक बहादुरी की नया मिसाल पेश की है अपनी प्रतिबद्धता और खतरों से निपटने में अपनी कुशलता से एसपीजी ने विशेष ख्याति अर्जित की है ।

भविष्य में आने वाले खतरों और चुनौतियों का सामना करने के लिए देश का यह प्रतिष्ठित सुरक्षा बल लगातार तत्पर है।

वीवीआइपी( VVIP )’ बीआईपी( VIP )को सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें अलग-अलग श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराई जाती है ।

देश के नेताओं को ( Y ) श्रेणी ‘ ( Z )श्रेणी और ( Z+ ) जेड प्लस श्रेणी में से किस श्रेणी की सुरक्षा दी जाएगी ‘ इसका निर्धारण केंद्र सरकार और राज्य सरकार मिलकर करती है ।

 

कितनी तरह के हैं सुरक्षा व्यवस्था

देश के वीआईपी ( VVP ) और वीवीआईपी(  VVIP )  व्यक्ति समाज के लिए महत्वपूर्ण होते हैं  | इसीलिए उनकी सुरक्षा भी देश के लिए उतना ही जरूरी हो जाती है | उस विशिष्ट व्यक्ति को किसी तरह का कोई खतरा ना हो और कितनी सुरक्षा उसे देने की जरूरत है |

एसपीजी कमांडो लिए पूरी समीक्षा सरकार द्वारा की जाती है खतरे के आधार पर वीआईपी सुरक्षा पाने वालों में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ,मुख्यमंत्री, सांसद, केंद्रीय मंत्री ,विधायक पार्षद, जज ,पूर्व जज, बिजनेसमैन, क्रिकेटर, फिल्मी कलाकार, साधु संत यही आम नागरिक कोई भी हो सकता है

केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों हैं लोगों को विशिष्ट सुरक्षा प्रदान करती है वीआईपी सुरक्षा देने का फैसला खतरे के आकलन होने के बाद होता है खुफिया विभाग द्वारा खतरे के आकलन के बाद यह तय किया जाता है कि किस व्यक्ति को किस प्रकार की सुरक्षा प्रदान की जाएगी |

भारत के सुरक्षा व्यवस्था को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है

जैसे जेड प्लस (Z+) जेड (Z ),वाई ( Y ) और एक्स जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा देश के स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप के बाद दूसरे नंबर की सबसे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था है |

1, इस सुरक्षा व्यवस्था में 55 सुरक्षाकर्मी सुरक्षा के लिए मौजूद होते हैं 55 लोगों में 10 से ज्यादा ( SPG )एनएसजी कमांडो होते हैं और पुलिस ऑफिसर भी होते हैं सुरक्षा में पहले घेरे की जिम्मेदारी होती है एनएसजी कमांडो की होती है जबकि दूसरी प्राप्त एसपीजी कमांडो की होती है इसके अलावा आइटीबीपी और सीआरपीएफ के जवान भी जेड प्लस के सुरक्षा श्रेणी में शामिल रहते हैं साथ ही जेड प्लस सुरक्षा में एस्कॉर्ट्स और पायलट वाहन की सुविधा दे जाते हैं |

2. जेड (Z )श्रेणी  जो कि दूसरे श्रेणी की सुरक्षा व्यवस्था है जेड (Z ) श्रेणी २२ जवानों का एक सुरक्षा कवच है इनमें एनएसजी कमांडो और पुलिस अधिकारी शामिल होते हैं |

3.    वाई Y श्रेणी कहलाती है जिसमें 11 जवानों का एक सुरक्षा कवच होता है इनमें एक या दो कमांडो और पुलिस अधिकारी शामिल होते हैं |

4.   एक्स श्रेणी कहलाती है जिसमें 5 या 2 जवान का एक सुरक्षा कवच है और इसमें केवल सशस्त्र पुलिस अधिकारी शामिल होते हैं |

 

( SPG )एसपीजी कमांडो की सुबिधा कैसे मिलती है 

सुरक्षा श्रेणी के मुताबिक सुरक्षा हासिल करने के लिए मांग करने वाले को संभावित खतरा बताकर सरकार से आवेदन करना होता है | यह आवेदन उसके निवास स्थान के नजदीक करना पड़ता है फिर आज सरकार उस व्यक्ति का बताए हुए खतरे का पता लगाने के लिए खुफिया एजेंसियों को केस सॉपति है और रिपोर्ट मांगती है |

इसे भी पढ़े :  सैमसंग किस देश की कंपनी है

जब खतरे की पुष्टि हो जाती है तो राज्य में गृह सचिव और महानिदेशक और मुख्य सचिव की एक समिति तय करती है कि उस व्यक्ति को किस श्रेणी की सुरक्षा दी जाए इसके बाद औपचारिक मंजूरी के लिए इस व्यक्ति का बेवरा केंद्रीय गृह मंत्रालय को दिया जाता है गृह सचिव की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति की खुफिया रिपोर्ट यह तय करती है कि किस व्यक्ति को कितना खतरा है और उसे किस श्रेणी की सुरक्षा दी जाए |

गृह मंत्रालय के समीक्षा के रिपोर्ट के आधार पर अलग-अलग एजेंसियों को सुरक्षा की जिम्मेदारी दी जाती है जेड एक्स और वाई से भी ज्यादा सुरक्षा देने का इंतजाम किया जाता है  |

सबसे उच्चतम स्तर की श्रेणी जेड प्लस है जिसका जिम्मा एसपीजी( SPG ), ( ITBP )  और ( CRPF ) जैसी एजेंसी ऊपर होता है | अति विशिष्ट व्यक्तियों नेताओं और फैमिली सितारों को जेड प्लस की सुरक्षा मुहैया कराई जाती है |

देश में फिलहाल 38 लोगों को जेड सिक्योरिटी दी जा रही है एनएसजी बड़े पैमाने पर जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा वीआईपी और वीवीआईपी को देती है | पिछले कई वर्षों से जेड प्लस श्रेणी की सुविधा लेने वालों को की संख्या में जिस तरह से बढ़ोतरी हुई है उसे देखते हुए एनएसजी के बोझ को कम करने के लिए याजिमा सीआईएसएफ को भी सौंपा गया है |

अगर किसी व्यक्ति को जेड प्लस की सुविधा दी जाती है तो उसे पूरे देश में यह सुविधा मिलेगी जब जब व्यक्ति राज्य से बाहर जाता है तो कुछ ही जवान उनके साथ रहते हैं बाकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उस राज्य की होती है |

जहां वह व्यक्ति जा रहा होता है इसके लिए वीआईपी( VIP )  को अपने दौड़े के पूर्व सूचना उस राज्य को देनी होती है सुरक्षा इंतजाम के इस प्रक्रिया को कभी सार्वजनिक नहीं किया जाता है |

 

एसपीजी ( SPG ) का प्रशिक्षण और चुनाव कैसे की जाती है

( NSG )  कमांडो की स्थापना कब हुई 
                                                     ( NSG )  कमांडो की स्थापना कब हुई

इन सुरक्षा एजेंसियों के अलावा सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड  ( NSG ) की स्थापना भी की है जिसका मकसद देश के आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियों से निपटना है केंद्र सरकार ने 1984 में इसके गठन का फैसला किया सितंबर 1986 में इससे जुड़ा विधेयक को संसद से मंजूरी मिली |

 

अपने काली यूनिफार्म नकाब या हेलमेट की वजह से एनएसजी ( NSG ) कमांडो ब्लैक कैट के नाम से मशहूर है  वे आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन खासकर हाउस इंटरवेंशन और एंटी हाईजैकिंग अभियानों में विशेषज्ञ माना जाता है |

यह भारत की एक विशेष प्रतिक्रिया यूनिट है जो केंद्रीय अर्धसैनिक बल के ढांचे के भीतर काम करती है इसके गठन भारतीय संसद का राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड अधिनियम के तहत 1986 में किया गया एनएसजी ( ( NSG )केंद्रीय गृह मंत्रालय का अधीन काम करती है | इसका नेतृत्व भारतीय पुलिस सेवा का महान निर्देशक स्तर का अधिकारी करता है |

एनएसजी( NSG ) में सीधी भर्ती का प्रावधान नहीं है इसके कर्मियों की भर्ती केंद्रीय अर्धसैनिक बलों भारतीय सशस्त्र बलों में से की जाती है  |( NSG )एनएससी के गठन जर्मनी की जी एस जी 9 समूह पर आधारित है  |  इसका काम आतंकवाद और देश विरोधी तोड़फोड़ के रोकथाम करने के अलावा विमान अपहरण विफल करना अपहरण मामले में बंदूकों का बचाव और विशिष्ट व्यक्तियों की रक्षा भी है |

एनएसजी( NSG ) का मुख्यालय दिल्ली में है इस के जवानों को हरियाणा के मानेसर में 14 महीने की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है |

इसके अलावा 90 दिन का बेसिक ट्रेनिंग का भी प्रावधान है एनएसजी का ऑपरेशन और ट्रेनिंग सेना के प्रतिनियुक्ति पर आए सेना के अफसरों के जी में है फिलहाल एनएसजी ( NSG ) के पास 15000 कर्मी है |

स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी एनर्जी राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड का मुख्य आक्रामक बल है इसके सदस्य भारतीय सेना से आते हैं  | इसमें है हेड क्वार्टर के अलावा ट्रेनिंग और सहयोगी यूनिट शामिल है इसके दो भाग हैं 51 एनएसजी की जिम्मेदारी आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन है जबकि 52 अन्य का जिम्मेदारी अपराहन से मामलों को निपटने के लिए है इनमें सबसे छोटी यूनिट हिट टीम होती है हर  हिट टीम में कुल 5 सदस्य होते हैं |

इसे भी पढ़े : भारत की जनसंख्या कितनी है

जबकि एक टीम में 50 से 90 सदस्य होते हैं इसके अलावा विशेष रेंजर समूह यानी एसआरजी इसका प्रमुख हिस्सा है एसआरजी सहयोगी इकाइयों प्रशिक्षण विभाग और मुख्यालय में तैनात है  |

इसके सदस्य भारतीय सशस्त्र बलों से प्रतिनियुक्ति पर है राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड्स में करीब 9 साल के सदस्य ता वाले करीब 3 एसआरजी है एनएसजी ने 5 क्षेत्रीय केंद्र बनाए हैं जिन्हें स्पेशल कम कमपोजिट ग्रुप यानी एससीजी कहा जाता है इसके सशस्त्र सेना और केंद्रीय सशस्त्र बलों से हैं

हर ग्रुप का नेतृत्व कर्नल रैंक का अधिकारी करता है यह पांच ग्रुप गांधीनगर, मुंबई ,चेन्नई ,हैदराबाद  और कोलकाता में तैनात हैं |

 

comment here