ब्लैक होल क्या है|ब्लैक होल की खोज कब हुई थी

क्या आप जानते है की ब्लैक होल क्या है|black hole kaisa hota hai और इसकी उत्पति कैसे हुई तथा इससे जूरी बातो के बारे में अगर नहीं तो आज के यह आर्टिकल आपके लिए है इस आर्टिकल को पूरा पढ़े :

ब्लैक होल क्या है और इसकी उत्पति कैसे हुई |

चांद, तारों और अंतरिक्ष के रहस्यमई दुनिया हमेशा से इंसानों को लुभाती रही है जब से मानव धरती पर आया तभी से वह चांद और तारों के उस पार जाने की कोशिश में जुट गया|इस प्रयास में कई अनसुलझे रहस्य से पर्दा भी हटा और हमें अंतरिक्ष की दुनिया कि कई अनोखी जानकारी भी हासिल हुई|आकाशगंगा में पाए जाने वाला ब्लैक होल भी सदियों से इंसानों के लिए जिज्ञासा का केंद्र रहा है ।

धरती से करोड़ों किलोमीटर दूर और सूर्य से कई गुना बड़े ब्लैक होल के बारे में पता लगाने के लिए अनेक खगोल विद और भौतीकशास्त्र सैकड़ों सालों से लगातार प्रयास में जुटे रहे। और इसका नतीजा हुआ कि पहली बार black hole की तस्वीर को कैमरे में कैद किया गया ‘

दुनिया भर के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं और लोगो के लिए ब्लैक होल हमेशा से कौतूहल का विषय रहा है । इस लिहाज से खगोल भौतिकी के क्षेत्र में 10 अप्रैल का दिन ऐतिहासिक रहा ‘ दुनिया ने पहली बार एक ब्लैक होल की तस्वीर देखी।

वैज्ञानिकों ने  शंघाई ,टोकियो, सेंटियाको, वाशिंगटन और ताइपे में एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर black hole  की पहली तस्वीर जारी की यह उपलब्धि 2012 में शुरू हुए इवेंट होराइजन टेलीविजन स्कोप शोध का नतीजा है ।

200 से ज्यादा वैज्ञानिक इस प्रोजेक्ट में लगे हुए थे अंतर्राष्ट्रीय गठजोड़ के रूप में शुरू किए गए इस शोध का मकसद अलग-अलग ब्लैक होल्स की नजदीक से जानकारी जुटाना है इवेंट होराइजन टेलीविजन स्कोप के डायरेक्टर और हावर्ड यूनिवर्सिटी सीनियर फेलो रिसर्चर सैफर डोलेरोन ने इस मौके पर कहा कि ब्लैक होल्स ब्रह्मांड की रहस्यमई चीजों में शामिल है । हमने उसे देखा है जो अब तक अदृश्य माना जाता था हमने ब्लैक होल की तस्वीर देखी है ।

तस्वीर टेलीविजन स्कोप के एक ग्लोब की मदद से खींची गई है यह धरती से 4.5 करोड़ों  प्रकाश वर्ष किलोमीटर दूर है ये ब्लैक होल M807  गैलेक्सी में शामिल है इसका द्रव्यमान सूरज से 6.5 और अब गुना बड़ा है इसके ने वैज्ञानिकों ने हमारी आकाशगंगा के मध्य में स्थित एक ब्लैक होल सैरी टेडीयस का डाटा भी जुटाया है ‘

किसी भी  black hole का तस्वीर लेना असंभव है ब्लैक होल ऐसी संरचना है जिससे प्रकाश भी वापस नहीं आता इसकी  एक सीमा होती है जिसमें पहुंचते हैं कोई भी पिंड घूमते घूमते धीरे धीरे उसके पिंड में समा जाता है ।

ब्लैक होल में अनगिनत पिंड समा रहे हैं इस प्रक्रिया में उसके चारों ओर प्रकाश और तरंगों का एक चक्र बन जाता है जिससे छल्ले जैसी आकृति बन जाती है वैज्ञानिकों ने ऐसे ही छल्ले की तस्वीर खींची है उन तरंगों के बीच दिख रहा काला हिस्सा हीब्लैक होल है ।

इवेंट होराइजन टेलीस्कोप प्रोजेक्ट के तहत कई रेडियो एंटीना को इस तरह जोड़ा गया कि वह एक टेलीस्कोप की तरह काम करें ‘ अप्रैल 2017 में हवाई एरीजोना स्पेन मैक्सिको चिल्ली और अंटार्कटिका में स्थापित टेलीस्कोप की मदद से पहला डाटा मिला था कई रेडियो टेलीस्कोप से ली गई तस्वीरों को इस तरह जोड़ा गया जैसे कि कोई बड़े शीशे का टुकड़ा हो ।

वैज्ञानिकों को इस अध्ययन से जो जानकारी मिली है उसे अल्बर्ट आइंस्टाइन ने 1915 में सापेक्षता का जो सिद्धांत दिया था वह और पुस्ट हुआ है ।

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ये वह उपलब्धि है जिसे कुछ पीढि पहले तक असंभव माना जाता था , लोगों ने इस तस्वीर के बाद महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंस को भी याद किया । हॉकिंस ने black hole पर व्यापक अध्ययन किया था . कई सालों से ब्लैक होल दुनिया भर के वैज्ञानिकों के लिए रहस्यमय बना हुआ है ‘

ब्लैक होल क्या है|black hole kaisa hota hai

ब्लैक होल ब्रह्मांड के सबसे रहस्यमई और ताकत शक्तियों में से एक माना जाता है ‘ एक ऐसा सतह जहां गुरुत्वाकर्षण इतना मजबूत होता है की वहां से किसी भी चीज का यहां तक कि प्रकाश को भी बाहर निकालना नामुमकिन हो जाता है उसे आमतौर पर ब्लैक होल के नाम से जाना जाता है |

दरअसल  black hole अत्यधिक घनत्व और द्रव्यमान वाले पिंड होते हैं, जिसका सतह इतना सघन और घना होता है की उसमें कोई भी चीज जैसे कोई तारा या ग्रह जाकर गुम हो जाते हैं क्योंकि यह प्रकाश के किरने को अवशोषित कर लेता है इसीलिए यह दृश्य बना रहता है|

ब्लैक होल कैसे बनता है ?

ब्लैक होल का निर्माण किस तरह से होता है इसके जानने के लिए तारे का विकास क्रम को समझना जरूरी है. दरअसल तारों का विकास आकाशगंगा में मौजूद धूल और मेघ से शुरू होता है जिसे निहारिका यानी नेबुला कहते हैं

,निहारिका के अंदर हाइड्रोजन की मात्रा सबसे अधिक होती है उसके बाद हिलियम 23 से 28 फ़ीसदी और थोड़ी मात्रा में कुछ भारी तत्व होते हैं जब गैसो और धूले से भरे हुए मेघ के घनत्व में बढ़ोतरी होती है तब मेघ अपने गुरुत्व के चलते सिकुड़ने लगता है मेघ में संकुचन के साथ हि उसके केंद्र में ताप और दाब काफी बढ़ जाता है

इसकी वजह से हाइड्रोजन के नाभिक आपस में टकराने लगते हैं और हीलियम के नाभिक का निर्माण करने लगते हैं ऐसे में तारों के अंदर थर्मो न्यूक्लियर फ्यूजन शुरू हो जाते हैं जिसमें असीमित ऊर्जा निकलती है|

black hole kaisa hota hai

जब इस प्रकार से किसी बड़े तारे की ऊर्जा खत्म हो जाती है तब उसमें एक जबरदस्त विस्फोट होता है जिसे सुपरनोवा कहते हैं इस विस्फोट के बाद जो पदार्थ बनता है वह धीरे-धीरे सिमटने लगता है और बहुत ही घने पिंड का रूप ले लेता है जिससे न्यूट्रॉन स्टार्स कहते हैं|

न्यूट्रॉन स्टार जितना विशाल होता है गुरुत्वाकर्षण का दबाव उतना ही ज्यादा होता है जिसके चलते तारे ही अपने ही बोझ से सिमटने लगते हैं और धीरे-धीरे ब्लैक होल का रूप ले लेते हैं|

ब्लैक होल की खोज किसने की

  • ब्लैक होल के संबंध में सबसे पहले साल 1783 में कैंब्रिज विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जॉन मिशेल ने अपने विचार रखें |
  • इसके बाद 1796 में फ्रांसीसी वैज्ञानिक  पियरे साइमन लाप्लास ने अपने पुस्तक द सिस्टम ऑफ द वर्ल्ड मैं ब्लैक होल के बारे में विस्तार से चर्चा की |
  • अमेरिकी भौतिक विधि जॉन व्हीलर ने वर्ष 1967 में पहली बार इन पिंडों के लिए ब्लैक होल शब्द का प्रयोग किया

ब्लैक होल की खोज

भार और आकार के हिसाब से ब्लैक होल 3 तरह के होते हैं |

  1. इनमें सुपरमैसिव ब्लैक होल सबसे विशाल होते हैं यह कई मिलियन सूर्य की शक्ति के बराबर होते हैं यह आकाशगंगा के बीच में मौजूद होते हैं जहां बहुत सारे तारों का झुंड और गैस के बादल होते हैं इसके वजह से सुपरमैसिव ब्लैक होल हमेशा बढ़ते रहते हैं |
  2. स्टेलर ब्लैक होल सामान्य रूप से पाए जाते हैं इनका भाड़ सूर्य से लगभग 20 गुना ज्यादा होता है यह तब बनते हैं जब कोई बहुत पर तारा टूट जाता है इसके बनने को प्रक्रिया को सुपरनोवा कहते हैं |
  3. तीसरे प्रकार के ब्लैक होल को मिनिएचर black hole कहा जाता है मिनिएचर ब्लैक होल की अभी तक खोज नहीं हुई है |

दरअसल किसी ब्लैक होल का पूरा द्रव्यमान एक बिंदु में केंद्रित होता है जिसे केंद्रीय विलक्षणता बिंदु कहते हैं | इस विलक्षणता बिंदु के आसपास एक गोलाकार सीमा की कल्पना की गई है|

जिसे आमतौर पर घटनाक्षैतिज कहा जाता है घटना 6:30 के सीमा के अंदर आते आते किसी भी पदार्थ का ब्लैक होल का शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण बल अपनी और खींच लेता है और उसका बाहर आना संभव हो जाता है  |

ब्लैक होल से जूरी जानकारिया

हमारी पृथ्वी से सबसे नजदीकी ब्लैक होल 1600 प्रकाश वर्ष की दूरी पर है लेकिन इस ब्लैक होल का हमारे पृथ्वी के सौरमंडल पर कोई प्रभाव नहीं होता है क्योंकि इसका गुरुत्वीय प्रभाव यहां तक नहीं पहुंचता |

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अंतरिक्ष में black hole जैसा एक क्षेत्र है जो अपने अंदर सब कुछ समाहित करने की क्षमता रखता है |यह बात सबसे पहले 1783 में अस्तित्व में आई लेकिन 19वीं सदी तक इसका विरोध करने वाले भी कई वैज्ञानिक हुए ब्लैक होल को लेकर सहमति 1915 में मशहूर वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टाइन के सिद्धांत के बाद ही बन पाई जब आइंस्टाइन ने सामान सापेक्षता के सिद्धांत को विकसित किया |

वह पहले ही यह सिद्ध कर चुके थे की गुरुत्वाकर्षण प्रकाश की गति में वास्तव हि प्रभाव डालता है इसके बाद 1930 में खगोल विद चंद्रशेखर सुब्रमण्यम ने सामान सापेक्षता का उपयोग करते हुए यह कहा की  डी जनरेट पदार्थ वाले एक गैर चकरी शरीर का शव द्रव्यमान यदि 1.44 चंद्रशेखर सीमा से अधिक हुआ तो उसका पतन हो जाएगा

उनके तर्क का कई वैज्ञानिकों ने विरोध किया लेकिन 1939 में रॉबोट ओपन हैनर और उनके सहयोगियों ने भविष्यवाणी की चंद्रशेखर द्वारा दिए गए कारणों की वजह से लगभग 3 से अधिक 100 द्रव्यमान वाले सितारे का पतन हो जाएगा |

सामान्य सापेक्षता का सिद्धांत

इस थ्योरी में अल्बर्ट आइंस्टाइन ने गुरुत्वाकर्षण की नई परिभाषा दी थी, आइंस्टाइन ने करीब 10 साल की मेहनत के बाद 1916 में सामान्य सापेक्षता का सिद्धांत दिया, जिसके अनुसार गुरुत्वाकर्षण और त्वरण एक ही है गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत न्यूटन ने दिया था, अल्बर्ट आइंस्टाइन ने गुरुत्वाकर्षण के संबंध में नई थ्योरी दी थी और उन्होंने गुरुत्वाकर्षण और त्वरण को एक ही बताया था | black hole kaisa hota hai

space-time थ्योरी में आइंस्टाइन ने बताया कि गुरुत्वाकर्षण कोई बल नहीं है यह एक त्वरण का प्रभाव है इसी प्रभाव के कारण स्पेस और टाइम विकृत हो जाता है|

सूर्य का द्रव्यमान अंतरिक्ष में कर्व बनाता है जिससे ग्रह उसके चारों ओर चक्कर लगाते हैं इसका अर्थ है कि गुरुत्वाकर्षण स्पेसटाइम में बना कर्व होता है जिस स्थान पर गुरुत्वाकर्षण बल ज्यादा होता है वहां समय उतना ही घिमा होता है।

ब्लैक होल के गुरुत्वाकर्षण बल इतना ज्यादा होता है कि वहां समय और अंतरिक्ष का प्रभाव समाप्त हो जाता है इस सिद्धांत ने ब्लैक होल के अस्तित्व को मानने में मदद की |

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आइंस्टाइन के बाद स्टीफन हॉकिंग ने ब्रह्मांड को समझने में अपनी भूमिका निभाई थी|  

बिग बैंग थ्योरी ब्रह्मांड की रचना की एक वैज्ञानिक थ्योरी है यह थ्योरी में यह बताने की कोशिश की गई है कि यह निर्माण कब और कैसे बना  |

स्टीफन हॉकिंग ने इस थ्योरी  को समझाया जिसके अनुसार करीब 15 अरब साल पहले पूरे भौतिक तत्व एक बिंदु में सिमटे हुए थे| फिर इस बिंदु ने फैलना शुरू किया बिग बैंग बम जैसा भी बीसपोर्ट नहीं था बल्कि इसमें प्रारंभिक ब्रह्मांड के कण समूचे ब्रह्मांड में फैल गया और एक दूसरे से दूर भागने लगे

हॉकिंस ब्रह्मांड की घटना को एक स्वता गतिशील घटना मानते थे, हालांकि प्रसिद्ध वैज्ञानिक आइज़क न्यूटन मानते थे कि इस सृष्टि का अवश्य कोई रचयिता होगा वरना इतनी जटिल रचना पैदा नहीं होती|

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दुनिया के महान वैज्ञानिकों के सिद्धांत पर चलकर आज भी खगोल भी धोने ब्लैक होल की तस्वीर पाने में सफलता पाली इसके लिए लगतार ब्लैक होल की खोज जारी रही|

कैंब्रिज विश्वविद्यालय के खोजकर्ता ने नए ब्लैक होल खोज निकाला था | भारतीय मूल के वैज्ञानिक ने लगातार बढ़ रहे ब्लैक होल को ढूंढ निकाला इससे पहले ब्लैक होल की खोज में दिक्कत होती थी,

क्योंकि यह धूल के गुबार में छिपे रहते थे लेकिन इसकी की ताजा तस्वीर ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में भूगोल विद आकाशगंगा में मौजूद कई ब्लैक होल को ढूंढ निकालेंगे |

आकाशगंगा क्या है ?

चांद तारे और सूर्य आकाश को लेकर हमारी आम समझ इतनी ही सी है.लेकिन यह सब एक अकाश गंगा की हिस्सा है इस अकाश गंगा के पार हम जैसे और कई आकाशगंगा है

इनके अपने-अपने सूरज और चांद है वहां पृथ्वी जैसी कई ग्रह है और हो सकता है इनमें कई ग्रह पर जीवन भी हो लेकिन वैज्ञानिक मानते हैं कि हमारे ब्रह्मांड से परे बहुत से ब्रह्मांड है|

आकाश अनंत है इसका कोई और छोड़ नहीं है इसे ना हमने पूरा देखा और ना ही समझ पाए हैं हमारे ब्रह्मांड के बाहर भी कोई दूसरा ब्रह्मांड है यह विचार काफी पुराना है

सोलवीं सदी में कॉपरनिकस ने कहा था कि पृथ्वी ब्रह्मांड के केंद्र में है 1609 में गैलीलियो ने अपना पहला टेलिस्कोप बनाया और पाया कि आकाश में सितारे से आगे भी सितारे हैं इसके बाद इटली के मनोवैज्ञानिक ने दावा किया कि आकाश अनंत है|

19 वी सदी आते-आते खगोल विद वैज्ञानिक कई सितारों का माप और वजन और दूरी जान चुके थे बीसवीं सदी के अंत में आयरलैंड के एडमिन फेयरवेल ने कहा कि आकाशगंगा में बहुत से ब्रह्मांड बसते हैं

हालांकि हमारा ब्रह्मांड करीब 138 करोड़ साल पुराना है लेकिन बाकी के उम्र के बारे में सही-सही दावे नहीं किए जा सकते हैं|

हमारे सौरमंडल और ब्रह्मांड के जन्म को लेकर तमाम तरह के दावे है कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि यह ब्रहमांड बिगबैंग से पैदा हुए और कुछ वैज्ञानिक ब्लैक होल की ठीक उल्टी प्रक्रिया को वजह मानते हैं लेकिन इन सब थोड़ी को परखा जाना बाकी है |

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दोस्तों हमें उम्मीद है की इस आर्टिकल के माध्यम से आप बिस्तार से जाने होंगे की ब्लैक होल क्या है,black hole kaisa hota hai और इसकी उत्पति कैसे हुई और आकाशगंगा क्या है | अगर यह आर्टिकल पसंद आये तो कमेंट जरुर करे |

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